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VVIP ट्रेवल वाले एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स के लिए नई गाइडलाइन: DGCA ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का कड़ाई से पालन;मौसम की सही जानकारी लेने को कहा


मुंबई/नई दिल्ली1 घंटे पहले

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महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित बारामती एयरपोर्ट के पास 28 जनवरी 2026 को हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था।

विमानन नियामक DGCA ने शुक्रवार को मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्यपालों सहित VVIP की यात्रा करने वाले एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स के लिए नई गाइडलाइन जारी की।

ये गाइनलाइन उन नॉन-शेड्यूल्ड विमान और हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों पर लागू होंगे, जो VVIP को ले जाते हैं। ये नियम जनवरी में हुए उस घातक विमान हादसे के बाद आए हैं, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी। महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित बारामती एयरपोर्ट के पास 28 जनवरी 2026 को हादसा हुआ था।

DGCA ने कहा कि पहले हुए हादसों और घटनाओं के विश्लेषण से पता चला है कि हवाई पट्टियों/अस्थायी हेलिपैड्स पर संचालन के दौरान और चुनाव के समय VVIP उड़ानों में कई बार नियमों का उल्लंघन हुआ, जिससे सुरक्षा खतरे में पड़ी।

DGCA के अनुसार, ऐसी उड़ानों में सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है।

महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी 2026 को अजित पवार को ले जा रहा प्लेन क्रैश होता दिख रहा है।

महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी 2026 को अजित पवार को ले जा रहा प्लेन क्रैश होता दिख रहा है।

गाइडलाइन में SOP का कड़ाई से पालन करने को कहा

  • सभी ऑपरेटरों को DGCA के नियमों और SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का कड़ाई से पालन करना होगा।
  • किसी भी तरह की लापरवाही या नियम उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • उड़ान से पहले मौसम की सही जानकारी लेना अनिवार्य होगा।
  • खराब मौसम में उड़ान भरने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

हेलिपैड और एयरस्ट्रिप की जांच जरूरी

  • अस्थायी हेलिपैड या छोटे एयरस्ट्रिप का उपयोग करने से पहले उनकी पूरी जांच जरूरी होगी।
  • लैंडिंग/टेकऑफ के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना होगा।

पायलट की जिम्मेदारी बढ़ाई गई

पायलट को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार और जिम्मेदारी दी गई है। किसी दबाव में आकर उड़ान नहीं भरने के निर्देश। चुनावी दौर में होने वाली लगातार उड़ानों के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

थकान (fatigue) और जोखिम को कम करने पर जोर। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC), सुरक्षा एजेंसियों और ऑपरेटरों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी। हर उड़ान की उचित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

———————– ये खबर भी पढ़ें:

अजित पवार प्लेन क्रैश मामले में बेंगलुरु में FIR:भतीजे रोहित ने 5 आरोप लगाए, कहा- महाराष्ट्र में शिकायत दर्ज नहीं की गई

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महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत के मामले में बेंगलुरु में जीरो FIR दर्ज की गई है। FIR उनके भतीजे और एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की शिकायत पर दर्ज हुई है। उन्होंने हादसे को आपराधिक साजिश बताया है। उन्होंने FIR में 5 मुख्य आरोप लगाए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



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VVIP ट्रेवल वाले एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स के लिए नई गाइडलाइन: DGCA ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का कड़ाई से पालन;मौसम की सही जानकारी लेने को कहा


मुंबई/नई दिल्ली2 मिनट पहले

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महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित बारामती एयरपोर्ट के पास 28 जनवरी 2026 को हादसे में अजित पवार का निधन हो गया था।

विमानन नियामक DGCA ने शुक्रवार को मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्यपालों सहित VVIP की यात्रा करने वाले एयरक्राफ्ट ऑपरेटर्स के लिए नई गाइडलाइन जारी की।

ये दिशा-निर्देश उन गैर-निर्धारित (नॉन-शेड्यूल्ड) विमान और हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों पर लागू होंगे, जो VVIP को ले जाते हैं। ये नियम जनवरी में हुए उस घातक विमान हादसे के बाद आए हैं, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी। महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित बारामती एयरपोर्ट के पास 28 जनवरी 2026 को हादसा हुआ था।

DGCA ने कहा कि पहले हुए हादसों और घटनाओं के विश्लेषण से पता चला है कि हवाई पट्टियों/अस्थायी हेलिपैड्स पर संचालन के दौरान और चुनाव के समय वीवीआईपी उड़ानों में कई बार नियमों का उल्लंघन हुआ, जिससे सुरक्षा खतरे में पड़ी।

DGCA के अनुसार, ऐसी उड़ानों में सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है।

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गाइडलाइन में SOP का कड़ाई से पालन करने को कहा

  • सभी ऑपरेटरों को DGCA के नियमों और SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का कड़ाई से पालन करना होगा।
  • किसी भी तरह की लापरवाही या नियम उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • उड़ान से पहले मौसम की सही जानकारी लेना अनिवार्य होगा।
  • खराब मौसम में उड़ान भरने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

हेलिपैड और एयरस्ट्रिप की जांच जरूरी

  • अस्थायी हेलिपैड या छोटे एयरस्ट्रिप का उपयोग करने से पहले उनकी पूरी जांच जरूरी होगी।
  • लैंडिंग/टेकऑफ के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना होगा।

पायलट की जिम्मेदारी बढ़ाई गई

पायलट को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार और जिम्मेदारी दी गई है। किसी दबाव में आकर उड़ान नहीं भरने के निर्देश। चुनावी दौर में होने वाली लगातार उड़ानों के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

थकान (fatigue) और जोखिम को कम करने पर जोर। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC), सुरक्षा एजेंसियों और ऑपरेटरों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी। हर उड़ान की उचित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

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अजित पवार प्लेन क्रैश मामले में बेंगलुरु में FIR:भतीजे रोहित ने 5 आरोप लगाए, कहा- महाराष्ट्र में शिकायत दर्ज नहीं की गई

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महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत के मामले में बेंगलुरु में जीरो FIR दर्ज की गई है। FIR उनके भतीजे और एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की शिकायत पर दर्ज हुई है। उन्होंने हादसे को आपराधिक साजिश बताया है। उन्होंने FIR में 5 मुख्य आरोप लगाए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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IPL 2026: मिचेल स्टार्क को लेकर पत्नी ने बताया हैरान करने वाला सच! जानकर दिल्ली कैपिटल्स की बढ़ेगी परेशानी?


Cricket

oi-Amit Kumar

IPL 2026 Mitchell Starc: आईपीएल 2026 (IPL 2026) के आगाज से ठीक पहले दिल्ली कैपिटल्स (DC) की टीम के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। टीम के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क की फिटनेस को लेकर उनकी पत्नी और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम की कप्तान एलिसा हीली ने एक बड़ा खुलासा किया है। हीली ने स्पष्ट किया है कि स्टार्क फिलहाल चोट से जूझ रहे हैं और इसी वजह से वे अब तक भारत नहीं पहुंचे हैं।

एलिसा हीली ने स्टार्क को लेकर खोला राज (IPL 2026 Mitchell Starc)

सोशल मीडिया पर एक फैन के सवाल का जवाब देते हुए एलिसा हीली ने स्टार्क की स्थिति साफ की। उन्होंने लिखा कि शायद इसलिए क्योंकि वे चोटिल हैं… अगर वे गेंदबाजी ही नहीं कर सकते, तो उनसे खेलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? हीली के इस बेबाक बयान ने दिल्ली के फैंस की चिंता बढ़ा दी है। स्टार्क फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में हैं और उन्हें भारत आने के लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलना बाकी है।

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11.75 करोड़ का दांव पड़ सकता है भारी

दिल्ली कैपिटल्स ने स्टार्क को 11.75 करोड़ की भारी-भरकम राशि पर रिटेन किया था। स्टार्क के लिए पिछला साल काफी व्यस्त रहा है, जहां उन्होंने एशेज सीरीज के सभी 5 टेस्ट खेले और प्लेयर ऑफ द सीरीज बने। हालांकि, उन्होंने टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले लिया है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट की थकान का असर अब उनकी फिटनेस पर साफ दिख रहा है।

दूसरी तरफ आईपीएल 2026 के आगाज से पहले मिचेल स्टार्क की चोट को लेकर मचे घमासान के बीच दिल्ली कैपिटल्स के मैनेजमेंट ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। टीम के मुख्य कोच हेमांग बदानी और क्रिकेट डायरेक्टर वेणुगोपाल राव ने स्पष्ट किया है कि स्टार्क की वापसी केवल ‘कागजी कार्रवाई’ और फिटनेस क्लीयरेंस पर टिकी है। मुख्य कोच बदानी ने फैंस को राहत देते हुए बताया कि मिचेल स्टार्क ने हाल ही में गेंदबाजी अभ्यास शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) के संपर्क में हैं। स्टार्क नेट पर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन जब तक सीए उन्हें ‘पूरी तरह फिट’ घोषित नहीं करता, तब तक फ्रेंचाइजी के हाथ बंधे हुए हैं।



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बंगाल के मुर्शिदाबाद में रामनवमी पर हिंसा: पत्थरबाजी में कई घायल, दुकानों में आगजनी; भाजपा का आरोप- भगवा झंडा फेंककर सनातन धर्म का अपमान किया


कोलकाता2 घंटे पहले

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पुलिस ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षाबल तैनात हैं।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में रामनवमी जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच तीन अलग-अलग जगहों पर हिंसा हुई। इस दौरान दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इस दौरान कई लोग घायल भी हुए।

विवाद की शुरुआत रघुनाथगंज-फुलतला ट्रैफिक मोड़ पर हुई। यहां कुछ लोगों ने सड़क किनारे लगे एक होर्डिंग पर चढ़कर उसपर लगा केसरिया झंडा हटा दिया। इससे जुलूस में शामिल लोग भड़क गए और हालात बेकाबू हो गए।

भाजपा ने आरोप लगाया कि भीड़ ने भगवा ध्वज को अपमानजनक ढंग से नीचे उतारा और फेंक दिया। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसकी वीडियो शेयर कर लिखा- यह भगवा ध्वज और सनातन धर्म का अपमान है।

बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण, 23 अप्रैल को मुर्शिदाबाद सहित 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग है। मुर्शिदाबाद बंगाल के सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल है। यहां जनवरी 2026 में हिंसा में एक प्रवासी मजदूर की मौत हुई थी। अप्रैल 2025 में हिंसा में 3 लोगों की जान गई थी।

हिंसा से जुड़ी तस्वीरें…

पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। इलाके में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। इलाके में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि होर्डिंग से भगवा झंडा हटाए जाने के बाद दो पक्षों में कहासुनी धीरे-धीरे हिंसा में बदल गई।

बताया जा रहा है कि होर्डिंग से भगवा झंडा हटाए जाने के बाद दो पक्षों में कहासुनी धीरे-धीरे हिंसा में बदल गई।

बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

रघुनाथगंज में धारा 144 लागू, सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ी

हिंसा की एक और घटना शिशातला गांव में हुई, जहां तेज डीजे की आवाज के साथ जुलूस निकालने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। आरोप है कि इसके बाद गांववालों और जुलूस में शामिल लोगों के बीच हाथापाई हुई। लोगों ने एकदूसरे पर पथराव भी किया।

स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस और केंद्रीय बल मौके पर पहुंचे। फिलहाल प्रशासन ने पूरे रघुनाथगंज में धारा 144 लागू कर दी है। इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग

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चुनाव से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

बंगाल- चुनाव ड्यूटी ट्रेनिंग में CM ममता का विज्ञापन दिखाया:विरोध करने पर पोलिंग अधिकारी से मारपीट; असम में 700 उम्मीदवारों में से 58 महिलाएं

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पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में चुनाव ड्यूटी ट्रेनिंग में प्रोजेक्टर पर सीएम ममता बनर्जी से जुड़ा सरकारी विज्ञापन दिखाया गया। रानाघाट में ट्रेनिंग सेशन में कुछ पोलिंग अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताई। चुनाव ड्यूटी में लगे सैकत चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और धमकी दी गई। इधर, असम विधानसभा चुनाव के लिए 722 प्रत्याशी मैदान में है। इनमें 8% यानी केवल 58 महिला उम्मीदवार हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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Bihar News: प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव और झील-झरनों की ओर बढ़ रहा पर्यटकों का रुझान, बिहार बन रहा इको टूरिज्म हब


बिहार वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और राजगीर नेचर सफारी जैसे प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्यों, झीलों और पार्कों का विकास करके तेजी से इको-टूरिज्म का विस्तार कर रहा है। बेहतर बुनियादी ढांचा और सुविधाएं घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों को आकर्षित कर रही हैं, जिससे पर्यटन वृद्धि और स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं, साथ ही प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।

India

-Oneindia Staff

बिहार में इको टूरिज्म का तेजी से विस्तार हो रहा है और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर स्थल अब पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। वन्यजीव अभ्यारण्य, झील, जलप्रपात, पहाड़ और बांध जैसे प्राकृतिक स्थल न सिर्फ देश बल्कि विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं।

Bihar Eco-Tourism Expands

राज्य सरकार इन स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। बेहतर सड़क, आवास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से इन पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में बिहार देश के प्रमुख इको टूरिज्म गंतव्यों में शामिल हो सकता है।

पश्चिम चंपारण स्थित Valmiki Tiger Reserve राज्य का प्रमुख इको टूरिज्म स्थल बनकर उभरा है। लगभग 901 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में बंगाल टाइगर, तेंदुआ, भालू, हिरण और नीलगाय सहित 250 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा अमवा मन झील और उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य भी प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रहे हैं।

भागलपुर स्थित Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है, जहां पर्यटक डॉल्फिन को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। वहीं मुंगेर का भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य घने जंगलों और पहाड़ियों के लिए जाना जाता है।

नालंदा जिले का Rajgir Nature Safari और जू सफारी, साथ ही घोड़ा कटोरा झील पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। राजगीर का ग्लास स्काई वॉक भी एक खास आकर्षण बन चुका है। नवादा का ककोलत जलप्रपात, रोहतास के तुतला भवानी, मांझर कुंड और धुआं कुंड जैसे स्थल भी प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं।

जमुई का नागी-नकटी पक्षी अभ्यारण्य, बांका का ओढ़नी बांध, कैमूर का कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य और करकटगढ़ जलप्रपात जैसे स्थल भी तेजी से इको टूरिज्म के रूप में विकसित हो रहे हैं। बेगूसराय की Kanwar Lake और दरभंगा का कुशेश्वर स्थान पक्षी अभ्यारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां सर्दियों में हजारों पक्षी दूर देशों से पहुंचते हैं।

इसके अलावा गया का गौतम बुद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य और पटना स्थित Sanjay Gandhi Biological Park भी इको टूरिज्म के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के विकास के साथ बिहार इको टूरिज्म के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बना रहा है, जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।



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Kaushambi Highway Accident Reason: प्रयागराज से आ रहे 8 लोगों की दर्दनाक मौत, रोड पर लाशों का ढेर! वजह क्या?


Uttar Pradesh

oi-Divyansh Rastogi

Kaushambi Highway Accident News Hindi: प्रयागराज से लौट रहे एक परिवार की खुशियां कौशांबी के हाईवे पर हमेशा के लिए खत्म हो गईं। मुंडन संस्कार के बाद घर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी पिकअप एक खड़े कंटेनर से टकरा गई और पल भर में सब कुछ बदल गया। इस दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 5 महिलाएं और 3 मासूम बच्चे शामिल हैं।

यह हादसा इतना भयानक था कि जिसने भी मंजर देखा, उसकी रूह कांप उठी। सड़क पर बिखरे लोग, चीख-पुकार और टूटी गाड़ी… सब कुछ किसी डरावने दृश्य जैसा था।

Kaushambi Highway Accident

Kaushambi Highway Accident Reason: कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?

यह घटना शुक्रवार (27 मार्च) शाम करीब 4 बजे कौशांबी के सैनी इलाके में डोरमा गांव के पास नेशनल हाईवे पर हुई। पिकअप में सवार सभी लोग प्रयागराज से मुंडन कराकर अपने घर फतेहपुर लौट रहे थे। रास्ते में तेज रफ्तार पिकअप अचानक सड़क किनारे खड़े कंटेनर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और कई लोग उछलकर सड़क पर जा गिरे। हादसे के बाद कई लोग मौके पर ही दम तोड़ बैठे, जबकि बाकी गंभीर रूप से घायल हो गए।

Kaushambi Highway Accident Reason: हादसे की वजह क्या सामने आई?

पुलिस की शुरुआती जांच में जो कारण सामने आया है, वह बेहद चिंताजनक है। बताया जा रहा है कि गाड़ी चला रहे ड्राइवर को अचानक झपकी आ गई थी। बस इसी एक पल की लापरवाही ने पूरी गाड़ी का संतुलन बिगाड़ दिया और पिकअप सीधे कंटेनर में घुस गई। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि लंबी ड्राइव के दौरान ड्राइवर की थकान कितनी खतरनाक हो सकती है।

कौशांबी से बड़ी खबर
सड़क हादसे में 5 लोगों की दर्दनाक मौत
श्रद्धालुओं की पिकअप और कंटेनर की भिड़ंत
3 बच्चों और 2 महिलाओं की मौत
हादसे में 12 से ज्यादा श्रद्धालु घायल
बिंदकी के रहने वाले हैं सभी श्रद्धालु
कड़ा धाम में दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु।#Kaushambi #Accidentpic.twitter.com/Lwd8jh28i4

— Roshan Kumar Journalist (@cameraman_r) March 27, 2026 “>

Kaushambi Highway Accident Death List: घायलों की हालत कैसी है?

इस हादसे में कुल 29 लोग घायल हुए हैं। कई लोग टक्कर के बाद सड़क पर गिरकर तड़पते रहे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने संभाला और पुलिस को सूचना दी। घायलों को तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। 27 लोगों का इलाज जिला अस्पताल और CHC में चल रहा है, जबकि दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्रयागराज रेफर किया गया है।

मौके पर क्या था मंजर?

हादसे के बाद का दृश्य बेहद दिल दहला देने वाला था। पिकअप पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। स्थानीय लोग सबसे पहले मौके पर पहुंचे और उन्होंने ही राहत कार्य शुरू किया। कई लोगों को अपनी गाड़ियों से अस्पताल तक पहुंचाया गया। इस बीच, पुलिस और प्रशासन की टीम भी पहुंची और बचाव कार्य तेज किया गया।

जैसे ही इस हादसे की खबर फतेहपुर जिले के जहानाबाद और बिंदकी इलाके में पहुंची, वहां कोहराम मच गया। जो परिवार कुछ देर पहले खुशी-खुशी घर लौट रहा था, अब उसी घर में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में सन्नाटा छाया हुआ है।

सरकार ने क्या किया ऐलान?

हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के लिए भी आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है और उनके इलाज के लिए प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए राहत कार्य तेज करने को कहा है।

क्या सीख देता है यह हादसा?

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा सबक भी है। खासकर हाईवे पर ड्राइविंग करते समय थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है, यह इससे साफ समझ आता है। थकान में गाड़ी चलाना, तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े भारी वाहन – ये सभी मिलकर हादसों का बड़ा कारण बनते हैं। जरूरी है कि ड्राइवर समय-समय पर आराम करें और सतर्क होकर वाहन चलाएं, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।





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Kerala Election 2026: कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में राहुल गांधी से लेकर कन्हैया तक, शशि थरूर का क्या हुआ?


India

oi-Smita Mugdha

Kerala Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य में चुनावी अभियान को धार देने के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी के शीर्ष नेताओं को शामिल किया गया है, जो राज्यभर में चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे। सबसे ज्यादा चर्चा इस चुनाव में शशि थरूर की हो रही है, क्योंकि वह तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं। पिछले काफी वक्त से पार्टी में साइडलाइन भी किए जा रहे हैं।

स्टार प्रचारकों की सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सीपीपी चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी जैसे नाम हैं। पार्टी से लंबे समय से नाराज बताए जा रहे शशि थरूर का नाम भी स्टार प्रचारकों की लिस्ट में रखा गया है।

Kerala Election 2026

Kerala Election 2026: युवा नेताओं को भी दिया गया मौका

कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया जैसे अनुभवी नामों को स्टार प्रचारकों की लिस्ट में रखा गया है। इसके अलावा, युवा नेताओं को भी जिम्मेदारी दी गई है। इसमें जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार शामिल हैं। इसके अलावा, सचिन पायलट, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी केरल में चुनाव प्रचार करते नजर आएंगे। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि युवा और महिला वोटर्स को आकर्षित करने के लिए खास रणनीति तैयार की जा रही है।

Kerala Election: कांग्रेस की नजर सत्ता वापसी पर

चुनाव आयोग के अनुसार, केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है। चुनाव प्रक्रिया के तहत 16 मार्च को अधिसूचना जारी की गई थी, 23 मार्च तक नामांकन दाखिल हुए, 24 मार्च को उनकी जांच हुई और 26 मार्च तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। कांग्रेस की कोशिश एक दशक के बाद प्रदेश की सत्ता में वापसी की है।

Congress के सामने इस बार कठिन चुनौती

इस बार केरल में मुकाबला दिलचस्प और कड़ा होने की संभावना है। जहां एक ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटा है, वहीं वाम मोर्चा (LDF) अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी (BJP) भी राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिससे चुनाव त्रिकोणीय होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार केरल में कांग्रेस, लेफ्ट और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने से जीत के समीकरणों पर फर्क पड़ सकता है।



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OI Exclusive: कश्मीर में ईरान के लिए जुटाए पैसों का भारत के खिलाफ होगा इस्तेमाल? आतंकी लगा रहे सेंध!


International

oi-Siddharth Purohit

OI Exclusive: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में कश्मीर के लोगों ने ईरान के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए खुलकर दान दिया है। लेकिन अब ऐसी खबर सामने आ रही है कि कुछ अलगाववादी तत्व इस मदद के नाम पर चंदा इकठ्ठा कर भारत विरोधी गतिविधियों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे हुई मदद की शुरुआत?

ईरान के लिए यह समर्थन 14 मार्च को शुरू हुआ, जब नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने X पर मानवीय सहायता की अपील की। इसके साथ ही दान के लिए बैंक अकाउंट की जानकारी भी साझा की गई। इसके बाद कश्मीर से नकद, सोना, तांबा और यहां तक कि पशु भी दान में दिए जाने लगे। लोगों ने सामूहिक जगहों पर भी चंदा जुटाया और डोर-टू-डोर कैंपेन चलाकर भी लोगों से मदद की मांग की। कुछ लोगों ने ये दान डिजिटल पेमेंट के जरिए दिया तो कुछ ने बर्तन, गहने, बाइक या फिर कैश के रूप में भी दिया। यहां तक कि लोगों ने अपनी घर के बहन-बेटियों की शादी के लिए इकठ्ठा किया सोना भी दान कर दिया।

Oi Exclusive kashmir iran funding

कितना पैसा और सामान हुआ इकट्ठा?

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, करीब 17.91 करोड़ रुपये के साथ भारी मात्रा में सोना और अन्य कीमती सामान जमा हुआ है। यह रकम सीधे ईरानी दूतावास के खाते में जमा पैसे से अलग है।

कहां से आया सबसे ज्यादा चंदा?

सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, अकेले बडगाम से 9.4 करोड़ रुपये, बारामूला से 4.5 करोड़ रुपये और श्रीनगर से करीब 2 करोड़ रुपये का दान आया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि लोगों ने बड़े स्तर पर चंदा जुटाया है। इस दान में धार्मिक भावनाएं भी शामिल थीं। कई लोगों ने ज़कात और सदक़ा अल-फ़ित्र के तहत इसे अपना कर्तव्य समझकर दान दिया, ताकि ईरान में युद्ध से पीड़ित लोगों की मदद की जा सके। इसमें अमीर से लेकर गरीब तक सभी लोगों ने दान दिया।

दान के बीच कैसे एक्टिव हुए मिलिटेंट?

भारतीय जांच एजेंसियां इस बड़े पैमाने पर हुए दान को लेकर सतर्क हैं। स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) को शक है कि कुछ बिचौलिए और संदिग्ध संगठन लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर पैसे का गबन कर रहे हैं।

शिया समुदाय को बनाया गया निशाना?

वनइंडिया के सूत्र के मुताबिक, इन बिचौलियों पर खासकर शिया समुदाय के लोगों से करोड़ों रुपये और कीमती सामान लेने का आरोप है। आशंका है कि इस पैसे का इस्तेमाल निजी फायदे या अलगाववादी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

बिचौलियों के जरिए पैसा देना हो सकता है खतरनाक

कश्मीर के ही एक अधिकारी से हुई बात के आधार पर सूत्र ने ये भी बताया कि ज्यादातर लोग ईमानदारी से दान कर रहे हैं। लेकिन जो लोग बिचौलियों के जरिए पैसा दे रहे हैं, उनका पैसा दूतावास तक पहुंचेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। पैसे जुटाने के नाम पर कुछ ऐसे तत्व भी इस अभियान में शामिल हो गए हैं, जिससे पैसा गलत हाथों में जा सकता है। इससे आतंकवादी या अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का खतरा है। जिससे इस पैसे का भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने का खतरा बना हुआ है।

मिलिटेंट उठा सकते हैं फंड का फायदा

सूत्र का कहना है कि कुछ लोग ईरान की मदद के नाम पर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन उसे निजी फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। मिलिटेंसी से जुड़े कुछ लोगों की भी इसमें भागीदारी की आशंका है। जिसपर, केंद्र और जम्मू-कश्मीर की एजेंसियां इस पूरे मामले पर नजर रख रही हैं। अगर कोई व्यक्ति बिना जांच के दान करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

IRGC और अलगाववादियों के लिंक का शक

सूत्र ने बताया कि एक बिचौलियों का एक नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) और कश्मीर के अलगाववादी तत्वों से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं। जिसमें श्रीनगर के बागवानपुरा के रहने वाले हकीम सज्जाद को इस नेटवर्क का मैन सोर्स बताया गया। वहीं, सैयद रूहुल्लाह रिजवी का नाम भी सामने आया है, जो ईरान में रहते हैं और इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने के शक के घेरे में हैं।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

मार्च 2023 में SIA ने एक केस में पाया कि मौलवी सरजन बरकती ने 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी, जिसे बाद में भारत-विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया। बरकती 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद भड़काऊ भाषणों के कारण चर्चा में आए थे। एजेंसियों का कहना है कि उन्होंने Unknown Sources से पैसा जुटाया और उसे संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल किया। अब ऐसे शख्स

आधे पैसे के गलत इस्तेमाल होने का खतरा

एजेंसियों का मानना है कि इकट्ठा किए गए पैसे का करीब आधा हिस्सा कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पेमेंट नेटवर्क भी बनाया जा रहा है। जांच एजेंसियों ने साफ कहा है कि लोगों को सावधान रहना चाहिए कि उनका पैसा गलत हाथों में न जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।

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Bihar News: नया ट्रेंड: मिट्टी की जांच के बाद ही उर्वरकों का उपयोग कर रहे किसान, बढ़ रही पैदावार और आय


व्यापक मिट्टी परीक्षण, नई प्रयोगशालाओं और डिजिटल मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से खेती के आधुनिकीकरण के लिए एक राज्यव्यापी पहल। यह कार्यक्रम 106 फसलों के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से उर्वरक मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे उपज और किसानों की आय में सुधार होता है और कृषि में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।

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-Oneindia Staff

राज्य में कृषि के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अब किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए अपने खेतों की मिट्टी की जांच करवा रहे हैं और उसी के आधार पर रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इस नई पहल से फसलों की उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी इजाफा हो रहा है।

Soil Health Card Drive Expands Lab Network

राज्य सरकार द्वारा कृषि के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के तहत सभी 38 जिलों में मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान अब यह जान पा रहे हैं कि उनकी जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किनकी कमी है। इसके आधार पर वे संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे अनावश्यक खर्च कम हो रहा है और उत्पादन बेहतर हो रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में करीब 3 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है। इन नमूनों के विश्लेषण के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें मिट्टी की गुणवत्ता और विभिन्न फसलों—जैसे धान, गेहूं और आलू—के लिए आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा की जानकारी दी जाती है। किसानों को हर तीन वर्ष के अंतराल पर यह कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।

अब तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऑनलाइन उपलब्ध इस कार्ड में लगभग 106 फसलों के लिए उर्वरक संबंधी सिफारिशें दर्ज रहती हैं, जिससे किसानों को तुरंत जानकारी मिल जाती है।

मिट्टी जांच की सुविधा को और सुलभ बनाने के लिए अनुमंडल स्तर पर 32 नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। वर्तमान में राज्य में 38 जिला स्तरीय, 14 अनुमंडल स्तरीय और 9 मोबाइल मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 3 रेफरल प्रयोगशालाएं भी संचालित की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल कृषि क्षेत्र में एक “मौन क्रांति” साबित हो रही है, जो न केवल उत्पादन बढ़ा रही है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत भी बना रही है।

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साथ की पढ़ाई, साथ बने SDM अब नहीं मिट पा रही 15 किलोमीटर की दूरी! शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि बिखर गया रिश्ता?


Uttar Pradesh

oi-Kumari Sunidhi Raj

UP PCS Officers Dispute: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में इन दिनों दो चर्चित पीसीएस (PCS) अधिकारियों की निजी जिंदगी सुर्खियों में है। कभी एक साथ पढ़ाई करने, एक ही साल अफसर बनने और फिर प्रेम विवाह के बंधन में बंधने वाले अनुपम मिश्रा और दिव्या ओझा (Anupam Mishra and Divya Ojha) के रिश्ते में अब ऐसी दरार आ चुकी है कि मामला थाने की चौखट तक जा पहुंचा है।

साल 2017 की यूपीपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में अनुपम ने दूसरी और दिव्या ने नौवीं रैंक हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया था। प्रयागराज में ट्रेनिंग के दौरान शुरू हुई यह दोस्ती 2020 में शादी में बदली, लेकिन अब वही सात फेरे कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गए हैं। चंदौली में तैनात इन दोनों अफसरों के बीच महज 15 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन बातचीत पूरी तरह बंद है।

UP PCS Officers Anupam Mishra Divya Ojha

सफलता के साथ शुरू हुआ था सफर

साल 2019 में जब पीसीएस 2017 का परिणाम आया, तो अनुपम मिश्रा और दिव्या ओझा की कामयाबी की मिसाल दी गई थी। दोनों की पहली पोस्टिंग प्रयागराज में हुई, जहां उनकी नजदीकियां बढ़ीं। परिवार की रजामंदी से 19 अक्टूबर 2020 को सगाई और 1 दिसंबर 2020 को दोनों ने धूमधाम से शादी की। हालांकि, शादी के कुछ समय बाद ही इनके बीच अनबन की खबरें आने लगीं।

17 मार्च को दर्ज हुई FIR, लगे गंभीर आरोप

विवाद ने तब तूल पकड़ा जब 17 मार्च 2026 को दिव्या ओझा के पिता ने थाने में तहरीर दी। उन्होंने अनुपम मिश्रा और उनके परिजनों पर संगीन आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपों की लिस्ट काफी लंबी है:

  • दहेज की मांग: शिकायत के अनुसार, शादी से पहले ही नकद राशि और महंगी गाड़ी की मांग की गई थी।
  • मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न: शादी के बाद लगातार मारपीट और प्रताड़ना का दावा किया गया है।
  • ब्लैकमेलिंग के आरोप: आरोप है कि निजी तस्वीरों के जरिए दिव्या को ब्लैकमेल किया गया और तलाक मांगने पर करियर बर्बाद करने की धमकी दी गई।

पास रहकर भी कोसों दूर

वर्तमान में दोनों अधिकारी चंदौली जिले में ही तैनात हैं। अनुपम मिश्रा एक तहसील में SDM हैं, तो दिव्या दूसरी तहसील में कमान संभाल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि दोनों के आवासों के बीच महज 15 किलोमीटर का फासला है, फिर भी वे महीनों से न तो मिले हैं और न ही उनके बीच कोई बातचीत है।

ससुराल पक्ष और परिवार का रुख

इस हाई-प्रोफाइल विवाद के बीच अनुपम मिश्रा की मां भी थाने पहुंची थीं। चर्चा थी कि वह बहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएंगी, लेकिन बाद में वह बिना केस दर्ज कराए वापस लौट आईं। वहीं, दिव्या के रिश्तेदार और पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा ने इस मामले पर संभलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे पूरी तरह से “निजी पारिवारिक मामला” बताते हुए सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। फिलहाल पुलिस साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।

With AI Inputs

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