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गुजरात में भी लागू होगा पंजाब मॉडल, मुफ्त बिजली और सरकारी सुविधाओं का बड़ा वादा, AAP ने किया बदलाव का शंखनाद!


Punjab

oi-Kumari Sunidhi Raj

AAP Election Bugle in Dahod: गुजरात विधानसभा चुनाव की आहट के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने दाहोद में ‘विजय विश्वास सभा’ के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए।

केजरीवाल ने दावा किया कि गुजरात की जनता अब दशकों पुराने राजनीतिक समीकरणों से ऊब चुकी है और ‘आप’ को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रही है। उन्होंने भाजपा पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दमन की यह राजनीति जनता के आक्रोश को और बढ़ाएगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मुख्य मुद्दा बताते हुए दोनों नेताओं ने पंजाब मॉडल की तर्ज पर गुजरात के कायाकल्प का भरोसा दिलाया।

AAP Election Bugle in Dahod

भाजपा-कांग्रेस पर मिलीभगत का आरोप और गिरफ्तारी का दावा

अरविंद केजरीवाल ने जनसभा में कहा कि गुजरात में ‘आप’ की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा बौखला गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाकर गिरफ्तार किया जा रहा है ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके। केजरीवाल ने भाजपा और कांग्रेस के बीच “गुप्त समझौते” का दावा करते हुए कहा कि दोनों दल मिलकर ‘आप’ को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब जनता बदलाव का मन बना चुकी है।

आदिवासी समाज और मनरेगा में भ्रष्टाचार के मुद्दे

आदिवासी बहुल क्षेत्र दाहोद में केजरीवाल ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि दशकों से आदिवासी समाज का सबसे अधिक शोषण हुआ है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि आदिवासियों के विकास के लिए आने वाला फंड बीच में ही हड़प लिया गया।

शिक्षा और रोजगार: बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए।

मनरेगा घोटाला: केजरीवाल ने दावा किया कि मनरेगा में मजदूरों के नाम पर फर्जी तरीके से पैसे निकाले गए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन नेताओं ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

पंजाब मॉडल और ‘मुफ्त’ सुविधाओं का वादा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हमने चार साल के भीतर वादों को हकीकत में बदला है। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों को निर्बाध बिजली और फसलों का समय पर भुगतान मिल रहा है। इसी तर्ज पर गुजरात के लिए निम्नलिखित घोषणाएं की गईं:

बिजली: किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली।

आर्थिक मदद: महिलाओं को प्रति माह सम्मान राशि।

स्वास्थ्य: मुफ्त स्वास्थ्य बीमा और मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर सुविधाएं।

शिक्षा: सरकारी स्कूलों का कायाकल्प और बेहतर भविष्य की गारंटी।

आम आदमी को चुनावी रण में उतारने की तैयारी

नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले चुनाव में पार्टी किसी “खास” घराने के बजाय साधारण परिवारों से आने वाले आम लोगों को उम्मीदवार बनाएगी। उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन और पारदर्शी व्यवस्था का संकल्प दोहराते हुए जनता से अपील की कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए इस बार झाड़ू (AAP) का बटन दबाकर एक नए विकल्प को मौका दें।

ये भी पढ़ें: पंजाब विपक्ष ने पीसीएस अधिकारी के उत्पीड़न का आरोप लगाया



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Bengaluru STRR Project: शहर के बाहर बनेगा हाई-स्पीड रिंग रोड नेटवर्क, घंटों लंबे ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


India

oi-Smita Mugdha

Bengaluru STRR Project: बेंगलुरु का ट्रैफिक लंबे समय से शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रहा है। अब सैटेलाइट टाउन रिंग रोड (STRR) इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रहा है। नेशनल हाईवे 948A के रूप में विकसित हो रही यह रिंग रोड बेंगलुरु के चारों ओर एक विशाल नेटवर्क तैयार कर रही है। इससे शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।

यह परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के कुल 12 प्रमुख कस्बों और शहरों को जोड़ती है। कर्नाटक में डोड्डाबल्लापुर, देवनहल्ली, होसकोट, सर्जापुर, अट्टीबेले, कनकपुरा, रामनगर, मागड़ी और डोबसपेट जैसे इलाके इससे जुड़ेंगे। तमिलनाडु के होसुर का एक हिस्सा भी इस नेटवर्क में शामिल है। इससे इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी।

Bengaluru STRR Project

Bengaluru STRR Project: 80 किमी लंबा हिस्सा हो गया शुरू

– मार्च 2026 तक की ताजा स्थिति के अनुसार, डोबसपेट से होसकोट तक लगभग 80 किलोमीटर लंबा हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है।

– इस सेक्शन के खुलने से तुमकुरु रोड और ओल्ड मद्रास रोड के बीच सफर काफी आसान और तेज हो गया है। वहीं, होसकोट से तमिलनाडु सीमा तक 21 किलोमीटर का हिस्सा निर्माण के अंतिम चरण में है।

– इस प्रोजेक्ट की एक खास बात यह है कि इसका एक हिस्सा बनेरघट्टा नेशनल पार्क के पास से गुजरता है। इस इलाके में कंस्ट्रक्शन का काम बहुत एहतियात से हो रहा है।

STRR Project: एलिवेटेड कॉरिडोर का भी निर्माण

यहां पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए वन्यजीवों के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर (ऊंचे रास्ते) बनाए जा रहे हैं, ताकि जानवरों की आवाजाही प्रभावित न हो। STRR का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी ट्रक और कमर्शियल वाहन अब शहर के भीतर प्रवेश किए बिना सीधे रिंग रोड के जरिए गुजर सकेंगे। इससे सिल्क बोर्ड और आउटर रिंग रोड जैसे व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

Bengaluru STRR: कुछ हिस्सों में टोल प्लाजा शुरू

साथ ही, इस रूट के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और इंडस्ट्रियल पार्क तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे देवनहल्ली और डोड्डाबल्लापुर जैसे क्षेत्रों में रियल एस्टेट को भी बढ़ावा मिल रहा है। करीब ₹17,000 करोड़ की लागत से बन रही यह 4 से 6 लेन की एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे परियोजना वाहनों को 100 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चलने की सुविधा देगी। इसके कुछ हिस्सों पर टोल प्लाजा भी शुरू हो चुके हैं।



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Tunguska: भूल जाइये S-400! भारत ला रहा है वो हथियार जो चलते-चलते उड़ा देता है फाइटर जेट, रूस से हुआ समझौता


International

oi-Sumit Jha

Russia India 445 crore defense deal: भारत ने रूस के साथ 445 करोड़ रुपये का एक बड़ा रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत भारतीय थलसेना को ‘तुंगुस्का’ (Tunguska) एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम से लैस किया जाएगा। यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के युद्धक्षेत्रों में ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा तेजी से बढ़ा है। तुंगुस्का कोई साधारण हथियार नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता ‘एयर डिफेंस हब’ है, जिसे विशेष रूप से युद्ध के मैदान में आगे बढ़ते हुए टैंकों और सैन्य काफिलों को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है।

रक्षा मंत्रालय का यह कदम भारतीय सेना की मारक क्षमता और बचाव प्रणाली को एक नई मजबूती प्रदान करेगा, जिससे ऊबड़-खाबड़ रास्तों और मुश्किल हालातों में भी हमारे सैनिकों को आसमान से होने वाले हमलों का डर नहीं रहेगा।

india Russia Tunguska missile deal

Tunguska air defense system India: गन और मिसाइल का बेजोड़ तालमेल

तुंगुस्का की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘हाइब्रिड’ होना है। इसमें दो शक्तिशाली 30mm की ऑटोमैटिक गन और 8 घातक मिसाइलें एक साथ लगी होती हैं। यह सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को दूर से ही मिसाइल के जरिए भांप लेता है और उन्हें निशाना बनाता है। अगर कोई खतरा बहुत करीब आ जाए, तो इसकी तेज रफ्तार गन गोलियों की बौछार कर उसे हवा में ही ढेर कर देती हैं। यह दोहरी सुरक्षा इसे बेहद खास बनाती है।

⚡️BREAKING: 🇮🇳🇷🇺 India and Russia sign M deal for Tunguska air defence missile system

These advanced missiles will strengthen India’s multilayered air defence capabilities, protecting against aerial threats including aircraft, drones, and cruise missiles.

With Tunguska,… pic.twitter.com/ZJsBAha8hS

— Sputnik India (@Sputnik_India) March 27, 2026 “>

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India Russia strategic Partnership: ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल

आधुनिक युद्धों में छोटे ड्रोन और जमीन के करीब उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं। तुंगुस्का को इसी तरह के ‘लो-फ्लाइंग’ खतरों को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके रडार इतने सटीक हैं कि वे छोटे से छोटे ड्रोन को भी पहचान लेते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में इसकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यह आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ एक अभेद्य दीवार की तरह काम करता है, जो भारत के लिए जरूरी था।

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टैंकों के साथ चलने वाला सुरक्षा कवच

आम तौर पर एयर डिफेंस सिस्टम एक जगह स्थिर होते हैं, लेकिन तुंगुस्का एक ‘चेन’ (Tracked Vehicle) पर सवार होता है। इसका मतलब है कि यह कीचड़, रेत या उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी टैंकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकता है। इसे हमला करने के लिए रुकने की जरूरत नहीं पड़ती; यह चलते-चलते भी दुश्मन पर अचूक निशाना साध सकता है। यह खूबी इसे भारतीय मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री और टैंक रेजिमेंट के लिए सबसे भरोसेमंद साथी बनाती है।

S-400 के साथ ‘मल्टी-लेयर’ सुरक्षा

भारत के पास पहले से ही S-400 जैसा सिस्टम है जो बहुत लंबी दूरी तक सुरक्षा देता है। लेकिन युद्ध के मैदान में कम दूरी की सुरक्षा के लिए तुंगुस्का जैसा सिस्टम अनिवार्य है। जब ये दोनों प्रणालियाँ एक साथ काम करेंगी, तो भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगी। यदि कोई दुश्मन विमान S-400 के घेरे को पार कर करीब आता है, तो तुंगुस्का उसे मार गिराएगा। यह रणनीतिक तालमेल भारत की रक्षा प्रणाली को किसी भी घुसपैठ के खिलाफ तैयार रखेगा





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दैनिक भास्कर के 2 जर्नलिस्ट को ‘गोयनका अवॉर्ड’: बांग्लादेशी अंग तस्करों के रैकेट, शिशु तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया था


नई दिल्ली1 घंटे पहले

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दैनिक भास्कर के दो जर्नलिस्ट अवधेश आकोदिया और विजयपाल डूडी को पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित ‘रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड्स-2026’ से सम्मानित किया गया। दिल्ली में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने यह सम्मान दिया। दोनों दैनिक भास्कर राजस्थान के रिपोर्टर हैं।

यह पुरस्कार इंडियन एक्सप्रेस समूह के संस्थापक स्वर्गीय रामनाथ गोयनका की स्मृति में हर साल उन पत्रकारों को दिया जाता है, जिन्होंने अपनी खबरों से समाज में गहरा प्रभाव डाला हो।

दैनिक भास्कर के साथियों को मिला सम्मान न केवल निर्भीक जमीनी पत्रकारिता की जीत है, बल्कि यह जनहित और सामाजिक सरोकारों के प्रति संस्थान की अटूट संपादकीय प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

अवधेश को ‘हिंदी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग’ का पुरस्कार

अवधेश को ‘हिंदी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग’ का पुरस्कार मिला है। अवधेश ने बांग्लादेश से भारत में हो रही किडनी तस्करी के बड़े रैकेट का खुलासा किया। उनकी रिपोर्ट ने अंग प्रत्यारोपण कानून की खामियों को उजागर किया। इसमें दिखाया गया कि दलाल गरीब डोनर और अमीर मरीजों को भारत लाकर अवैध ऑपरेशन करवाते थे।

गुरुग्राम के एक गेस्ट हाउस से तीन बांग्लादेशी नागरिकों की साधारण सी गिरफ्तारी भास्कर की फॉलो-अप जांच में बदल गई। इसने भारत में ट्रांसप्लांट कानून के कमजोर क्रियान्वयन का फायदा उठाने वाले बांग्लादेशी अंग तस्करों के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। बांग्लादेश के डोनर को फर्जी कागजात के आधार पर भारत लाया जाता था और पैसे का लालच देकर किडनी डोनेट करवाई जाती थी।

विजय पाल को ‘अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल’ श्रेणी में पुरस्कार

विजयपाल को ‘अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल’ श्रेणी में सम्मान मिला है। विजयपाल ने उदयपुर क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चों की खरीद-फरोख्त के गिरोह का खुलासा किया था। यह गिरोह आदिवासी परिवारों से बच्चों को लेकर देशभर के निःसंतान दंपतियों को बेच रहा था।

गिरोह गरीब माता-पिता को एक बच्चे के बदले 20 हजार रुपए तक देता था। इसके बाद दत्तक लेने वाले दंपतियों से आठ लाख रुपए तक वसूलता था। भास्कर की इस खबर के बाद राजस्थान विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। न्यायिक दखल और पुलिस कार्रवाई से इस रैकेट को ध्वस्त किया गया।



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दैनिक भास्कर के 2 जर्नलिस्ट को ‘गोयनका अवॉर्ड’: बांग्लादेशी अंग तस्करों के रैकेट, शिशु तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया था


नई दिल्ली27 मिनट पहले

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दैनिक भास्कर के दो जर्नलिस्ट अवधेश आकोदिया और विजयपाल डूडी को पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित ‘रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड्स-2026’ से सम्मानित किया गया। दिल्ली में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने यह सम्मान दिया। दोनों दैनिक भास्कर राजस्थान के रिपोर्टर हैं।

यह पुरस्कार इंडियन एक्सप्रेस समूह के संस्थापक स्वर्गीय रामनाथ गोयनका की स्मृति में हर साल उन पत्रकारों को दिया जाता है, जिन्होंने अपनी खबरों से समाज में गहरा प्रभाव डाला हो।

दैनिक भास्कर के साथियों को मिला सम्मान न केवल निर्भीक जमीनी पत्रकारिता की जीत है, बल्कि यह जनहित और सामाजिक सरोकारों के प्रति संस्थान की अटूट संपादकीय प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

अवधेश को ‘हिंदी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग’ का पुरस्कार

अवधेश को ‘हिंदी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग’ का पुरस्कार मिला है। अवधेश ने बांग्लादेश से भारत में हो रही किडनी तस्करी के बड़े रैकेट का खुलासा किया। उनकी रिपोर्ट ने अंग प्रत्यारोपण कानून की खामियों को उजागर किया। इसमें दिखाया गया कि दलाल गरीब डोनर और अमीर मरीजों को भारत लाकर अवैध ऑपरेशन करवाते थे।

गुरुग्राम के एक गेस्ट हाउस से तीन बांग्लादेशी नागरिकों की साधारण सी गिरफ्तारी भास्कर की फॉलो-अप जांच में बदल गई। इसने भारत में ट्रांसप्लांट कानून के कमजोर क्रियान्वयन का फायदा उठाने वाले बांग्लादेशी अंग तस्करों के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। बांग्लादेश के डोनर को फर्जी कागजात के आधार पर भारत लाया जाता था और पैसे का लालच देकर किडनी डोनेट करवाई जाती थी।

विजय पाल को ‘अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल’ श्रेणी में पुरस्कार

विजयपाल को ‘अनकवरिंग इंडिया इनविजिबल’ श्रेणी में सम्मान मिला है। विजयपाल ने उदयपुर क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चों की खरीद-फरोख्त के गिरोह का खुलासा किया था। यह गिरोह आदिवासी परिवारों से बच्चों को लेकर देशभर के निःसंतान दंपतियों को बेच रहा था।

गिरोह गरीब माता-पिता को एक बच्चे के बदले 20 हजार रुपए तक देता था। इसके बाद दत्तक लेने वाले दंपतियों से आठ लाख रुपए तक वसूलता था। भास्कर की इस खबर के बाद राजस्थान विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। न्यायिक दखल और पुलिस कार्रवाई से इस रैकेट को ध्वस्त किया गया।



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गुजरात में लिव-इन पार्टनर की बेटियों से दुष्कर्म: दोनों नाबालिग बच्चियों का गर्भपात होगा; 25 हफ्ते से कम की गर्भावस्था में कोर्ट परमिशन की जरूरत नहीं


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  • Both Daughters Will Have Abortions Who Became Pregnant By Their Stepfather

नवसारी4 घंटे पहले

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पुलिस हिरासत में आरोपी अनिल राठोड़।

गुजरात के नवसारी जिले के चिखली तालुका में एक महिला के लिव इन पार्टनर पर उसकी दो नाबालिग बच्चियों से कई बार दुष्कर्म का आरोप है। दोनों किशोरियां गर्भवती हैं और नवसारी सिविल अस्पताल में भर्ती हैं।

नवसारी के जिला स्वास्थ्य अधिकारी भावेश पटेल ने बताया कि दोनों नाबालिगों का गर्भपात मां की सहमति से कराया जाएगा। मेडिकल टीम तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्भावस्था 25 सप्ताह से कम होने पर गर्भपात के लिए कोर्ट अनुमति जरूरी नहीं है।

मामला तब सामने आया जब मजदूर परिवार की छोटी बेटी के पेट में तेज दर्द हुआ। परिजन उसे कुकरी पीएचसी ले गए, जहां डॉक्टरों को गर्भावस्था का संदेह हुआ। बाद में खारेल अस्पताल में सोनोग्राफी से पुष्टि हुई कि वह करीब पांच महीने की प्रेग्नेंट है।

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मां का लिव-इन पार्टनर है आरोपी

छोटी बहन की स्थिति जानने के बाद बड़ी बेटी ने मां को बताया कि आरोपी उसके साथ भी दुष्कर्म करता था। जांच में वह करीब दो महीने की गर्भवती पाई गई। इसके बाद मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस के मुताबिक पीड़ित बेटियों की मां की पहले एक अन्य युवक से शादी हुई थी, जिससे उसके चार बच्चे हैं। कुछ सालों पहले पति-पत्नी का तलाक हो गया था। बच्चियों की मां पहले पति से अलग होने के बाद आरोपी अनिल राठोड़ के साथ लिव-इन में रह रही थी। इसी दौरान उसने दोनों नाबालिगों से दुष्कर्म किया।

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जंगल ले जाकर करता था अपराध

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी दोनों बच्चियों को लकड़ी लाने के बहाने जंगल ले जाकर सुनसान जगह पर वारदात करता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई जारी है।

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नाबालिग बेटी से सौतेले पिता ने किया था रेप, आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा

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ग्वालियर में बेटी से दुष्कर्म के आरोपी सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा हुई है। 27-28 अप्रैल 2025 की दरम्यानी रात जब नाबालिग छोटी बहन के साथ सो रही थी, तब आरोपी पिता ने बेटी को गोद में उठाया और नीचे कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया। पूरी खबर पढ़ें…

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सरकार ने 2.38 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्ताव मंजूर किए: एयरफोर्स को S-400 मिसाइल डिफेंस और आर्मी को धनुष गन सिस्टम मिलेंगे


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  • Defence Council Approves ₹2.38 Lakh Crore For S 400, Dhanush; Air Force Army

नई दिल्ली8 घंटे पहले

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में करीब 2.38 लाख करोड़ रुपए के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव में आर्मी, एयरफोर्स और कोस्ट गार्ड के लिए कई अहम सिस्टम और प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, आर्मर पियर्सिंग टैंक गोला-बारूद, हाई कैपेसिटी रेडियो रिले, धनुष गन सिस्टम और रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम को मंजूरी मिली।

वित्त वर्ष 2025-26 में DAC अब तक 55 प्रस्ताव मंजूर कर चुका है, जिनकी कुल लागत 6.73 लाख करोड़ रुपए है। इसी दौरान 503 डिफेंस डील साइन हुईं, जिनकी कीमत 2.28 लाख करोड़ रुपए है।

सरकार के मुताबिक यह किसी एक वित्त वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा रक्षा खरीद और मंजूरी का आंकड़ा है।

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एयरफोर्स को ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट मिलेंगे

भारतीय वायुसेना के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, S-400 मिसाइल सिस्टम, रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट और Su-30 इंजन ओवरहाल को मंजूरी मिली।

  • नए ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट AN-32 और IL-76 की जगह लेंगे।
  • S-400 सिस्टम लंबी दूरी के हवाई खतरों से सुरक्षा देगा।
  • ड्रोन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट से ऑपरेशनल और सर्विलांस क्षमता बढ़ेगी।
  • Su-30 इंजन अपग्रेड से विमानों की लाइफ बढ़ेगी।

इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए होवरक्राफ्ट की मंजूरी

इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए हेवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स (होवरक्राफ्ट) को मंजूरी मिली। इनका उपयोग तटीय गश्त, सर्च एंड रेस्क्यू और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट में होगा।

होवरक्राफ्ट ऐसा वाहन है जो जमीन, पानी, कीचड़ और बर्फ हर सतह पर चल सकता है। यह नीचे हवा का दबाव (एयर कुशन) बनाकर सतह से थोड़ा ऊपर उठता है, इसलिए घर्षण कम होता है।

इसमें लगे शक्तिशाली फैन नीचे हवा भरकर कुशन बनाते हैं, जिससे वाहन सतह से ऊपर उठता है। इसके बाद प्रोपेलर या इंजन इसे आगे बढ़ाते हैं।

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S-400 ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी मिसाइलों को खत्म किया

S-400 वही डिफेंस सिस्टम है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को हवा में ही मारकर नाकाम किया था। S-400 ट्रायम्फ रूस का सबसे एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था।

ये सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। ये हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है।

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S-400 सिस्टम की खासियत…

  • S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है।
  • इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है।
  • ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है।
  • S-400 की एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं।
  • S-400 में 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है।

कहां तैनात हैं एस-400?

एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है।

पहली स्क्वाड्रन – पंजाब में तैनात की गई है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। यह पाकिस्तान और चीन दोनों की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के लिए है।

दूसरी स्क्वाड्रन – सिक्किम (चीन सीमा) में तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी। यहां से चिकन नेक पर भी निगरानी रखी जाती है।

तीसरी स्क्वाड्रन- राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली। इस स्क्वाड्रन से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा मजबूत होती है।

रूस 2026 तक बाकी 2 S-400की डिलीवरी कर सकता है। यूक्रेन जंग की वजह से इसकी डिलीवरी में देरी हुई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी खेप साल 2025 के अंत तक मिल सकती है।

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सेना 800km रेंज वाली ब्रह्मोस क्रूज-मिसाइल खरीदेगी, अभी 450km रेंज की मिसाइल मौजूद

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भारतीय सेना 800 किमी से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। फिलहाल सेना के पास 450 किमी तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल मौजूद है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रक्षा अधिकारियों ने बताया कि सेना इस नए वर्जन का बड़ा ऑर्डर देने की योजना बना रही है। पूरी खबर पढ़ें…

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Bengal Election 2026: ममता की कुर्सी या BJP का राज? SIR, RG Kar-मतुआ समेत ये 5 फैक्टर्स पलटेंगे बंगाल की बाजी


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oi-Divyansh Rastogi

West Bengal Election 2026: ममता की कुर्सी या बीजेपी का राज? पश्चिम बंगाल के चुनाव में तीन हफ्ते का समय रह गया और सूबे की सियासी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस (TMC) जहां चौथी बार सत्ता बरकरार रखने की जद्दोजहद में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार ‘दीदी’ के किले में सेंध लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

बंगाल पर दुनिया भर की नजर टिकी है ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि राज्य में चुनावी परिणाम की पटकथा कौन से मुद्दे लिख रहे हैं। SIR (वोटर लिस्ट विवाद), RG Kar मामला और मतुआ वोट बैंक जैसे 5 बड़े फैक्टर्स बंगाल की बाजी पलटने का दम रखते हैं।

Bengal Election 2026

2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वामपंथी दलों (CPIM) का सूपड़ा साफ होने के बाद, इस बार चुनावी रणभूमि में नए समीकरण उभर रहे हैं। एक तरफ एआईएमआईएम (AIMIM) और हुमायूं कबीर की एजूपी (AJP) का गठबंधन मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ फुरफुरा शरीफ से जुड़ा इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) अपना प्रभाव बढ़ाने को तैयार है। उत्तर बंगाल के राजबोंग्शी समुदाय से लेकर जंगलमहल के कुर्मी आंदोलन तक, बंगाल चुनाव 2026 की यह लड़ाई केवल नारों की नहीं, बल्कि उन क्षेत्रीय समीकरणों की है जो तय करेंगे कि कोलकाता के ‘राइटर्स बिल्डिंग’ पर इस बार किसका कब्जा होगा।

कागज पर तीन बार की विजेता टीएमसी बेशक आगे नजर आती है, लेकिन बीजेपी जिस तरह चुनाव लड़ती है उसमें चौंकाने वाले फैसले की उम्मीद बेमानी नहीं है। पश्चिम बंगाल के चुनावी गणित को हम मुद्दे और इलाकाई समीकरण में बांट कर समझने का प्रयास करते हैं। 2021 के चुनावों में टीएमसी को 213 सीटें मिलीं, भाजपा को 77, जबकि बाकी दलों का खाता तक नहीं खुला। 2024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी ने 29 सीटें जीतीं, भाजपा को 12। लेकिन विधानसभा स्तर पर नॉर्थ बंगाल, जंगलमहल, मतुआ बहुल इलाके, मुस्लिम बहुल जिले और टीएमसी के शहरी गढ़वा क्षेत्र निर्णायक होंगे। आंकड़ों के आईने में देखें तो चुनाव का रंग साफ दिखता है।

नॉर्थ बंगाल: भाजपा का मजबूत, टीएमसी की चुनौती (North Bengal BJP Stronghold, TMC Challenge)

नॉर्थ बंगाल यानी कि दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर वाला इलाका। 294-सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए यह इलाका दोनों ही पार्टियों के लिए महत्त्वपूर्ण है। बल्कि इसे ऐसे समझ सकते हैं कि यहाँ से जो पार्टी आगे रहेगी उसके सरकार बनाने की संभावना अधिक होगी। 2021 में भाजपा ने यहां मजबूत पकड़ दिखाई। पार्टी ने अलीपुरदुआर की 5 में से 5, कूच बिहार की 9 में 7 और जलपाईगुड़ी में भी अच्छा प्रदर्शन किया था। दार्जिलिंग पहाड़ियों में भाजपा ने सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग शहर समेत कई सीटें झटक ली थी, जबकि कालिमपोंग सीट पर स्वतंत्र उम्मीदवार विजयी हुए। इस इलाके की कुल 64 विधानसभा सीटों में भाजपा को करीब आधी सीटों पर जीत मिली थी।

टीएमसी ने मुस्लिम बहुल मालदा (12 सीटें) और उत्तर दिनाजपुर (6 सीटें) में अपनी पकड़ कायम रखी। दक्षिण दिनाजपुर का मुकाबला दोनों दलों के बीच बराबरी पर रहा था। यहाँ से टीएमसी ने 4 जबकि भाजपा ने 3 सीटों पर कब्ज़ा जमाया था। इस चुनाव में टीएमसी ने दार्जिलिंग पहाड़ियों के तीन सीटों – दार्जिलिंग, कालिमपोंग और खुर्सियॉन्ग को अनित थापा की भारतीय गोर्खा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ दिया है। यहाँ से राजबोंगशी समुदाय जो कि इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अनुसूचित जाति वोट बैंक है, उनकी भूमिका निर्णायक होगी। चाय बागान बेल्ट में भाजपा की पुरानी मजबूती को टीएमसी चुनौती दे रही है। 2021 में राजबोंगशी वोटों ने भाजपा को 40% से ज्यादा समर्थन दिया, लेकिन टीएमसी की कल्याण योजनाओं के कारण यह वोट बैंक भी धीरे-धीरे भाजपा से खिसकने लगा है। अगर राजबोंगशी एकजुट हुए तो भाजपा को फायदा, वरना टीएमसी हावी।

जंगलमहल: कुर्मी-आदिवासी वोट बैंक और 46 सीटों का सियासी ‘रण’

जंगलमहल (Jangalmahal) की 46 विधानसभा सीटें इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव का सबसे अनिश्चित क्षेत्र बनी हुई हैं। वहां का पूरा गणित 50 लाख की आबादी वाले कुर्मी समुदाय के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जो लंबे समय से एसटी (ST) दर्जे की मांग को लेकर आंदोलनरत है। 2019 के लोकसभा चुनावों में कुर्मी समुदाय के 35% से अधिक एकतरफा समर्थन ने भाजपा को यहाँ बड़ी जीत दिलाई थी, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी विकास योजनाओं और रणनीतिक घेराबंदी से वापसी करने में कामयाब रही। आंकड़ों के आईने में देखें तो:

West Bengal Election 2026

  • पुरुलिया (9 सीटें): भाजपा का दबदबा रहा (7 सीटें), टीएमसी केवल 2 पर सिमटी।
  • बांकुरा (12 सीटें): भाजपा ने 8 सीटें जीतकर अपनी पकड़ दिखाई, टीएमसी को 4 मिलीं।
  • झारग्राम (8 सीटें): टीएमसी ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी 8 सीटें जीतीं।
  • पश्चिम मेदिनीपुर (17 सीटें): टीएमसी 11 और भाजपा 6 सीटों पर रही।

2026 का नया समीकरण (Election Equation): कुर्मी समुदाय की ‘घाघरा घेरा’ रणनीति और हालिया रेल रोको आंदोलनों ने दोनों मुख्य दलों की नींद उड़ा दी है। अगर कुर्मी वोट बैंक केंद्र सरकार की ‘खामोशी’ से नाराज होकर भाजपा से छिटकती है, तो पुरुलिया और बांकुरा में भाजपा को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं, टीएमसी आदिवासी (संथाल) और कुर्मी वोटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 18-20 सीटों पर कुर्मी मतदाता सीधे तौर पर हार-जीत तय करते हैं, जिससे यह क्षेत्र ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हो सकता है।

मतुआ फैक्टर (Matua Community Factor): नादिया-नॉर्थ 24 परगना में ‘SIR’ ने बिगाड़ा खेल?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतुआ समुदाय (Matua Community) का प्रभाव करीब 30 से 40 विधानसभा सीटों पर सीधा है। 2021 के आंकड़ों के अनुसार, नदिया (17 सीटें) और उत्तर 24 परगना (33 सीटें) की मतुआ बहुल बेल्ट में भाजपा ने 18 से ज्यादा सीटें जीतकर टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि, 2026 के चुनाव से पहले समीकरण बदल गए हैं।

मार्च 2026 के ताजा SIR (वोटर लिस्ट रिवीजन) डेटा के मुताबिक, इस बेल्ट के करीब 12 लाख मतदाताओं के नाम ‘होल्ड’ पर रखे गए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मतुआ समुदाय की है। 2021 में भाजपा ने रानाघाट उत्तर (शांतनु ठाकुर), रानाघाट दक्षिण, चाकदह समेत 7-8 सीटें जीतीं। 2019 लोकसभा में कुर्मी वोटों ने भाजपा को यहां 35% वोट शेयर दिलाया, लेकिन 2021 में टीएमसी ने विकास योजनाओं से उन्हें अपनी ओर लुभाने कामयाब रही थी। पुरुलिया (9 सीटें) में भाजपा ने 7 जीतीं, बांकुरा (12) में 8, लेकिन झारग्राम (8) की सारी सीटें टीएमसी के पास गईं। पश्चिम मेदिनीपुर (17) में टीएमसी 11, भाजपा 6। कुल 46 सीटों में टीएमसी को 26 मिलीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में मतुआ समुदाय का रुझान फिर से भाजपा की तरफ दिखा था लेकिन वोट एकमुश्त नहीं गिरे।

हालिया उपचुनावों में टीएमसी ने बागदह और रानाघाट दक्षिण जैसी सीटें भाजपा से छीनकर खतरे की घंटी बजा दी है। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर और उनके भाई सुब्रत ठाकुर के बीच की राजनीतिक रार ने भाजपा के पारंपरिक ‘मतुआ वोट बैंक’ में दरार पैदा की है। अगर SIR विवाद के कारण ये मतदाता ‘वोटिंग राइट्स’ को लेकर नाराज हुए, तो नादिया और उत्तर 24 परगना की कम से कम 10-12 सीटों पर टीएमसी को बड़ा फायदा मिल सकता है।

दूसरी तरफ, हाल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लाखों नाम कटे, खासकर मतुआ मतदाताओं के। टीएमसी ने चुनाव आयोग और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। हाल के उपचुनावों में टीएमसी ने बागदह और रानाघाट दक्षिण जीतीं। मतुआ नेतृत्व में शांतनु ठाकुर (केंद्रीय मंत्री) और सुभ्रता ठाकुर (विधायक) के बीच फूट ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया। अगर SIR विवाद से मतुआ नाराज हुए तो टीएमसी फायदे में रह सकती है। 2021 का चुनावी डेटा यह दिखाता है कि राज्य में मतुआ वोट करीब 17-18% हैं, और ये राज्य के 35-40 सीटों पर बाजी पलट सकते हैं। मतुआ समुदाय के लगभग 1 लाख लोग सीएए में अभी तक नागरिकता नहीं मिलने के कारण भाजपा से नाराज़ बताए जा रहे हैं। टीएमसी अगर इस वोटबैंक को लपक लेती है तो बंगाल में दीदी की वापसी तय मानी जा सकती है।

नादिया से नॉर्थ 24 परगना तक – औद्योगिक आबादी

पश्चिम बंगाल का यह क्षेत्र, जो कल्याणी (नादिया) से शुरू होकर बैरकपुर और नैहाटी (उत्तर 24 परगना) तक फैला है, राज्य का सबसे घना औद्योगिक कॉरिडोर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल उत्तर 24 परगना में ही 6,800 से अधिक पंजीकृत औद्योगिक इकाइयाँ हैं, जिनमें लगभग 4.16 लाख श्रमिक सीधे तौर पर बड़े और मध्यम उद्योगों से जुड़े हैं। नादिया का कल्याणी और हरिनघाटा क्षेत्र अब नए ‘इंडस्ट्रियल हब’ के रूप में उभर रहा है।

इस औद्योगिक आबादी का राजनीतिक महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि यहाँ की 27 से अधिक विधानसभा सीटें सीधे तौर पर श्रमिक यूनियनों और औद्योगिक नीतियों से प्रभावित होती हैं। 2026 के चुनावों में ‘श्रमिक वोट बैंक’ के बीच दो बड़े मुद्दे हावी हैं:

  • रोजगार और पलायन: एक तरफ नई औद्योगिक पार्कों (जैसे हरिनघाटा) में निवेश का दावा है, तो दूसरी तरफ जूट मिलों की बदहाली और श्रमिकों का दक्षिण भारत की ओर पलायन (लगभग 15-20% श्रमिक परिवार प्रभावित)।
  • SIR और नागरिकता का डर: औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी प्रवासी और अल्पसंख्यक आबादी के बीच Special Intensive Revision (SIR) को लेकर गहरी चिंता है। नदिया में रिकॉर्ड 9,228 ‘अवैध’ मतदाताओं की पहचान और मतदाता सूची से नाम कटने के डर ने औद्योगिक श्रमिकों को गोलबंद कर दिया है।

अतीत में यह क्षेत्र ट्रेड यूनियन के कारण वामपंथ का गढ़ था, लेकिन वर्तमान में यहाँ की औद्योगिक बेल्ट की 60% आबादी कल्याणकारी योजनाओं और ‘सिंडिकेट राज’ के मुद्दों के बीच बंटी हुई है। हालांकि लोकसभा चुनाव में इनका आंशिक रुझान बीजेपी की तरफ रहा है लेकिन इस बार, यह ‘साइलेंट वोटर’ तय करेगा कि विकास का दावा जीतेगा या पहचान की राजनीति।

अल्पसंख्यक बहुल जिले और SIR का साया: 2026 में बदलेंगे समीकरण?

पश्चिम बंगाल की 30% मुस्लिम आबादी राज्य की 294 में से लगभग 80-90 सीटों पर सीधा प्रभाव डालती है। ऐसा समझा जाता है कि Special Intensive Revision (SIR) के आंकड़ों ने इस बार इन क्षेत्रों में हलचल तेज कर दी है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ‘होल्ड’ पर रखे गए 60 लाख (Under Adjudication) नामों में से एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम बहुल जिलों से है। अकेले मुर्शिदाबाद से 11 लाख और मालदा से 8 लाख से ज्यादा नाम सत्यापन के घेरे में हैं। सत्ताधारी तृणमूल का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर राज्य से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटा रही है जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक रूटीन प्रक्रिया है। मतदाता-सूची में नाम राज्य के पात्र मतदाताओं के ही होंगे। ज़ाहिर है कि अगर इन इलाकों में मतदाता कम होंगे तो इसका प्रभाव तृणमूल की चुनावी सेहत पर जरूर पड़ेगा।

बाबरी और ओवैसी फैक्टर – बंटोगे तो घटोगे

2021 के चुनाव में टीएमसी ने मुर्शिदाबाद की 26 में से 25 सीटें जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था, लेकिन 2026 की राह अलग है। इस बार SIR के साथ-साथ टीएमसी को वोटों के बंटवारे का जोखिम भी उठाना पड़ सकता है। राज्य में अल्पसंख्यक वोट बैंक के दूसरे दावेदार भी उभर रहे हैं। ओवैसी की AIMIM और हुमायूं कबीर की AJUP का नया गठबंधन मालदा और मुर्शिदाबाद की 50 से अधिक सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि बंगाल की सीमा से सटी बिहार के सीमांचल इलाके में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने न केवल 5 सीटें जीती थी बल्कि 12 अन्य सीटों पर भाजपा विरोधी इंडिया अलायंस को हराने में भी सहयोग किया था।

ISF का प्रभाव:

फुरफुरा शरीफ के नौशाद सिद्दीकी (ISF) ने 2021 में एकमात्र मुस्लिम बहुल सीट (भंगड़) जीती थी। इस बार लेफ्ट-आईएसएफ की जोड़ी दक्षिण 24 परगना और हावड़ा में टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यह भी तय है कि फुरफुरा शरीफ सूबे में अभी वह ताकत नहीं है कि अपने उम्मीदवार जिता सके लेकिन किसी को हराने के लिए महज कुछ फीसदी वोटों की ही जरूरत होती है।

SIR बनाम एकजुट:

ममता बनर्जी द्वारा SIR को ‘अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने’ की कोशिश बताने से एक तरफ वोटों का ध्रुवीकरण हो सकता है, वहीं दूसरी ओर एआईएमआईएम-एजूपी की सक्रियता अगर 5-10% वोट भी काटती है, तो त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा को सीधा फायदा मिल सकता है।

टीएमसी के अभेद्य किले में भाजपा की ‘शहरी’ सेंधमारी?

पश्चिम बंगाल का दिल – कोलकाता, हावड़ा, डायमंड-हार्बर और दक्षिण-उत्तर 24 परगना का शहरी बेल्ट तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत किला रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े गवाह हैं कि इस क्षेत्र की 140 सीटों में से टीएमसी ने 100 से अधिक पर जीत दर्ज की थी, और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इन 20 संसदीय क्षेत्रों में ममता बनर्जी की पार्टी ने ‘क्लीन स्वीप’ किया। लेकिन मार्च 2026 की राजनीतिक तस्वीर बदलती दिख रही है।

भाजपा ने इस बार आरजी कर (RG Kar) जैसे संवेदनशील मुद्दों को सीधे कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जोड़कर टीएमसी के शहरी वोट बैंक, विशेषकर मध्यम वर्ग में गहरी पैठ बनाने की रणनीति अपनाई है। भगवा पार्टी ने इस चुनाव में इलाके की पानीहाटी सीट से आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ को मैदान में उतारा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में शहरी सीटों पर टीएमसी का वोट शेयर लगभग 45% था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा गैर-बंगाली मतदाताओं, कानून-व्यवस्था और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हालिया हमलों के नैरेटिव के जरिए 10-15% वोटों की ‘कटौती’ करने में सफल रहती है, तो इस बेल्ट की 20-25 सीटें सीधे तौर पर पलट सकती हैं।

इसके अलावा, राढ़ (Rarh) क्षेत्र (बीरभूम और हुगली) में अल्पसंख्यक वोटों के संभावित बिखराव और भ्रष्टाचार के आरोपों ने भाजपा के लिए ‘डबल इंजन’ दबाव बनाने का मौका दिया है। जहां टीएमसी अपनी ‘कल्याणकारी योजनाओं’ के भरोसे है, वहीं भाजपा शहरी असंतोष को चुनावी नतीजों में बदलने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की यह जंग किसी एक ‘लहर’ के बजाय SIR विवाद, RG Kar मामला और कुर्मी-मतुआ जैसे क्षेत्रीय समीकरणों की जटिल बिसात पर टिकी है। जहाँ 213 सीटों के भारी बहुमत वाली TMC अपने गढ़ बचाने के लिए कोई कसर बाकीनहीं रख रही है, वहीं BJP इन स्थानीय मुद्दों के सहारे सत्ता पलटने को बेताब है। अंततः 294 सीटों की यह सियासी जंग भारत की सबसे जटिल चुनावी लड़ाई बनेगी।



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MP Ladli Behna Yojana के 35वीं किस्त का पैसा आपके खाते में कब आएगा? क्या इस बार बढ़ेगी राशि?


Bhopal

oi-Puja Yadav

Ladli Behna Yojana 35th Installment: मध्य प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के लिए खुशखबरी है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 35वीं किस्त को लेकर लाभार्थी महिलाओं का इंतजार अब खत्म होने वाला है। प्रदेश की करीब 1.29 करोड़ लाड़ली बहनें बेसब्री से अपनी अगली किस्त का इंतजार कर रही हैं।

हर महीने की तरह इस बार भी लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर होने की संभावना जताई जा रही है हालांकि आधिकारिक तारीख का ऐलान अभी बाकी है। ताजा अपडेट्स के अनुसार, सरकार जल्द ही उनके बैंक खातों में राशि ट्रांसफर करने की तैयारी में है।

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MP Ladli Behna Yojana की 35वीं किस्त कब आएगी?

लाड़ली बहना योजना के पिछले रिकॉर्ड और नियमों को देखें, तो राज्य सरकार आमतौर पर हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच सहायता राशि जारी करती है। 35वीं किस्त की राशि 1 अप्रैल से 10 अप्रैल, 2026 के बीच कभी भी लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा सकती है।

हालांकि, अभी तक इसकी संभावित तारिख नहीं की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि सरकार 10 तारीख का लक्ष्य रखती है लेकिन किसी तकनीकी समस्या या सार्वजनिक अवकाश के कारण इसमें एक या दो दिन का बदलाव भी संभव है। लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने मोबाइल पर आने वाले आधिकारिक SMS का इंतजार करें।

लाड़ली बहना योजना की क्या इस बार बढ़ेगी किस्त की राशि?

वर्तमान में लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जा रही है। सोशल मीडिया और कई खबरों में यह चर्चा तेज है कि सरकार इस राशि को बढ़ाकर ₹1,750 या ₹2,000 कर सकती है।

फिलहाल सरकार की ओर से राशि बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अप्रैल महीने में भी ₹1,500 की किस्त ही जारी होने की पूरी उम्मीद है। मुख्यमंत्री पूर्व में कई बार कह चुके हैं कि धीरे-धीरे इस राशि को ₹3,000 तक ले जाया जाएगा, लेकिन यह चरणबद्ध तरीके से होगा।

लाड़ली बहना योजना की पेमेंट न आने पर क्या करें?

यदि 10 अप्रैल तक आपके खाते में राशि नहीं पहुंचती है, तो निम्नलिखित चीजों की जांच जरूर करें:

e-KYC: सुनिश्चित करें कि आपका समग्र पोर्टल पर ई-केवाईसी पूरा है।

आधार लिंकिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है।

DBT सक्रियता: बैंक खाते में Direct Benefit Transfer (DBT) विकल्प चालू होना चाहिए वरना राशि अटक सकती है।

अगर आप भी इस योजना की लाभार्थी हैं, तो संभावना है कि आपके खाते में अप्रैल की 35वीं किस्त 1 से 10 अप्रैल के बीच ट्रांसफर हो जाए। हालांकि, सटीक तारीख के लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा पर नजर बनाए रखना जरूरी है।



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LPG Crisis Update: कच्चा तेल महंगा, फिर भी ‘नो प्रॉब्लम’? सरकार बेफिक्र क्यों?


Business

oi-Ankur Sharma

LPG Crisis Update:ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया है तो वहीं भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 140 डॉलर के पार पहुंच गई है जिसके बाद आम जनता को पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर चिंता हो गई है लेकिन शुक्रवार को सरकार ने साफ किया है कि ‘परेशान होने वाली कोई बात नहीं है। भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है।’

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और तेल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने अपनी पीसी में कहा कि ‘मिडिल ईस्ट में संघर्ष ने भारत की क्रूड ऑयल, LPG और LNG की सप्लाई पर असर डाला है लेकिन भारत सरकार ने हालात को अच्छे से संभालने के लिए अलग-अलग लेवल पर कई ज़रूरी फ़ैसले लिए हैं। हमारे पास काफ़ी क्रूड स्टॉक है, और अगले दो महीनों के लिए सप्लाई तैयार है।’

LPG Crisis Update

घरेलू LPG प्रोडक्शन लगभग 40% बढ़ गया

सुजाता शर्मा ने कहा कि ‘LPG और PNG के मामले में भी हालात ठीक हैं, हमारी रिफ़ाइनरियां पूरी या उससे भी ज़्यादा कैपेसिटी पर काम कर रही हैं, और घरेलू LPG प्रोडक्शन लगभग 40% बढ़ गया है क्योंकि भारत की इम्पोर्ट पर निर्भरता बहुत ज़्यादा है,लगभग 90% LPG इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट से होता है इसलिए सरकार ने कमर्शियल सप्लाई के बजाय घरेलू कंज्यूमर्स को प्रायोरिटी देने का फैसला किया।’

कमर्शियल LPG सप्लाई को क्यों रोका गया? सरकार ने दिया जवाब

सुजाता शर्मा ने कहा कि ‘शुरू में, कमर्शियल सप्लाई रोक दी गई फिर धीरे-धीरे बहाल की गई, पहले 20%, फिर PNG एक्सपेंशन के लिए ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस के आधार पर एक्स्ट्रा 10%, बाद में इसे बढ़ाकर 50% और अब 70% कर दिया गया है। नतीजतन, 14 मार्च से अब तक लगभग 30,000 टन कमर्शियल LPG सप्लाई की जा चुकी है,ये फैसले लेते समय, सरकार ने रेस्टोरेंट, सड़क किनारे खाने की जगहों, होटलों, इंडस्ट्रियल कैंटीन और माइग्रेंट लेबर को प्रायोरिटी दी। ऑर्डर में यह भी बताया गया ऑर्डर में स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल और प्लास्टिक को भी प्राथमिकता दी गई।

30,000 छोटे 5 kg के LPG सिलेंडर बांटे गए

‘प्रवासी मज़दूरों को लगभग 30,000 छोटे 5 kg के सिलेंडर बांटे गए, इसे बताने का मकसद यह साफ़ करना है कि भारत के पास काफ़ी क्रूड ऑयल, पेट्रोल और डीज़ल मौजूद है। LPG, LNG और PNG की सप्लाई सुरक्षित है। कुछ जगहों पर अफ़वाहों के बावजूद, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग गईं, कोई कमी नहीं है। भले ही भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग $70 प्रति बैरल से बढ़कर $100 से ज़्यादा हो गई, कई पड़ोसी देशों के उलट, जहां फ्यूल की कीमतें बढ़ी हैं, भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं।’

#WATCH | Delhi: Sujata Sharma, Joint Secretary (Marketing & Oil Refinery), Ministry of Petroleum & Natural Gas, says, “… The conflict in the Middle East has affected India’s supplies of crude oil, LPG, and LNG. Crude prices, along with other petroleum products, have risen in… pic.twitter.com/EcnE9UlA0K

— ANI (@ANI) March 27, 2026 “>





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