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Sikkim Avalanche Warning: सिक्किम-उत्तराखंड में कुदरत का कहर, अगले 24 घंटे भारी, घर से निकलने से पहले ये पढ़ें


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oi-Sumit Jha

Sikkim Avalanche Warning: भारत के पहाड़ी राज्यों, सिक्किम और उत्तराखंड में मौसम विभाग ने बर्फीले तूफान यानी एवलांच (Avalanche) की चेतावनी जारी की है। सिक्किम के गंगटोक और पाक्योंग में 3,500 मीटर से ऊपर के इलाकों में खतरा बताया गया है, वहीं उत्तराखंड के पांच जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है।

यह चेतावनी चंडीगढ़ स्थित ‘डिफेंस जियो-इंफॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट’ (DGRE) की रिपोर्ट के आधार पर दी गई है। हाल ही में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि की वजह से सिक्किम में बिजली की लाइनें भी टूट गई हैं, जिससे कई इलाकों में अंधेरा छा गया है।

Sikkim Avalanche Warning

सिक्किम में बर्फबारी और खतरे का अलर्ट

मौसम विभाग ने सिक्किम के गंगटोक और पाक्योंग जिलों के लिए ‘मीडियम’ यानी मध्यम स्तर के खतरे की चेतावनी दी है। प्रशासन ने साफ कहा है कि जो लोग 3,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर रह रहे हैं या वहां घूमने गए हैं, वे अगले 24 घंटों तक सावधान रहें। ट्रैकर्स और पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे ऊंचे इलाकों में न जाएं और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। किसी भी समय बर्फ खिसकने से बड़ा हादसा हो सकता है।

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बिजली व्यवस्था पर मौसम की मार

पिछले कुछ दिनों में सिक्किम के कई हिस्सों में तेज तूफान और ओले गिरे हैं, जिसका सीधा असर वहां की बिजली सप्लाई पर पड़ा है। पाक्योंग में 66 केवी की एक बड़ी बिजली लाइन का तार टूट गया, जिससे रोंगली और रेनॉक जैसे इलाकों की बत्ती गुल हो गई। गंगटोक के नामली इलाके में भी बिजली की लाइन में धमाके और चिंगारी की खबरें आईं। खराब मौसम की वजह से टूटी हुई लाइनों को ठीक करने और दोबारा चालू करने में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं।

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उत्तराखंड के पांच जिलों में चेतावनी

सिक्किम के साथ-साथ उत्तराखंड में भी बर्फीले तूफान का खतरा मंडरा रहा है। देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन केंद्र ने उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के जिलाधिकारियों को खास सावधानी बरतने को कहा है। उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ को ‘डेंजर लेवल-3’ में रखा गया है, जिसका मतलब है कि यहां खतरा ज्यादा है। वहीं रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में लेवल-1 का अलर्ट है। प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए सलाह

पहाड़ी इलाकों में अचानक होने वाली बर्फबारी और एवलांच को देखते हुए सरकार ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है। ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ की परतें कमजोर हो सकती हैं, जो भारी बर्फबारी के बाद अचानक नीचे गिर सकती हैं। स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और आपदा कंट्रोल रूम के संपर्क में रहने को कहा गया है। पर्यटकों को खासतौर पर उन रास्तों पर न जाने की हिदायत दी गई है जहां बर्फ गिरने का ज्यादा डर है।



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Kal Ka Mausam: 22 मार्च को Delhi-UP समेत किन राज्यों में बारिश का IMD अलर्ट? ओलावृष्टि-वज्रपात संकट कहां?


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oi-Divyansh Rastogi

Kal Ka Mausam, 22 March 2026: मार्च का महीना खत्म होने की कगार पर पहुंचने लगा है। इस बीच, मौसम ने अचानक करवट ली है। 20 मार्च को हुई बारिश-ओलावृष्टि ने ठंड का एहसास फिर से करा दिया है। लोगों के घरों में पंखे, एसी सुबह-रात को बंद होने लगे। अब सभी की निगाहें वीकेंड यानी रविवार (22 मार्च) के मौसम के पूर्वानुमान पर हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और मध्य भारत तक बारिश, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। अगले 24-48 घंटों में 20 से अधिक राज्यों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन फसलों और यात्रा पर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं राज्यवार कहां बारिश कहां ओले?

Kal Ka Mausam

Delhi-NCR Weather Update: दिल्ली-NCR में क्या होगा?

दिल्ली में 22 मार्च को आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, जो शाम तक घने हो सकते हैं। हल्की बारिश या गरज के साथ बूंदाबांदी की संभावना है। अधिकतम तापमान 29-31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 15-17 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। हवाएं 10-15 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी। पिछले दिनों की बारिश से एयर क्वालिटी में सुधार हुआ है, लेकिन बादलों के कारण सुबह हल्का कोहरा या धुंध छा सकती है। IMD ने गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, खासकर आउटर दिल्ली और आसपास के इलाकों में।

Uttar Pradesh Weather Update: उत्तर प्रदेश में अलर्ट

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 22 मार्च को आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का खतरा है। पूर्वी यूपी (गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया, देवरिया, मऊ, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर आदि) में भारी बारिश और तेज हवाओं (50-60 किमी/घंटा) का ऑरेंज/रेड अलर्ट है। पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में बादल छाए रहेंगे, हल्की बारिश संभव। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर आदि जिलों में गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि और 40-60 किमी/घंटा की हवाएं चल सकती हैं। तापमान में 3-6 डिग्री की गिरावट से ठंडक का एहसास होगा, लेकिन फसलों (खासकर गेहूं) को नुकसान का जोखिम है।

अन्य प्रमुख राज्यों में स्थिति

  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान: उत्तर-पश्चिमी मैदानों में गरज-चमक के साथ हल्की-मध्यम बारिश और ओलावृष्टि संभव। हवाएं तेज (40-50 किमी/घंटा)। तापमान में गिरावट जारी।
  • हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: पश्चिमी हिमालय में भारी बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी। चंबा, कुल्लू, मंडी, लाहौल-स्पीति, चमोली, पिथौरागढ़ आदि में तूफानी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट। तेज हवाएं (50 किमी/घंटा)।
  • पूर्वोत्तर भारत और बंगाल: सिक्किम, सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी तक संभव)। गरज-चमक, 50-70 किमी/घंटा की हवाएं और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट। ओडिशा, झारखंड में भी भारी बारिश और ओले गिरने की आशंका।
  • मध्य और दक्षिण भारत: बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं। महाराष्ट्र, गोवा, केरल, तटीय कर्नाटक में उष्ण-आर्द्र स्थिति और हल्की बारिश। आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु में गर्मी बढ़ सकती है (38-40 डिग्री), हीटवेव का अलर्ट कुछ इलाकों में।

कारण और सिस्टम

एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत पर प्रभावी है, जबकि पूर्वी और मध्य भारत में चक्रवाती सर्कुलेशन और निम्न दबाव की रेखा सक्रिय है। इससे 22-24 मार्च तक पूर्वी भारत में भारी गतिविधियां रहेंगी। स्काईमेट और IMD दोनों ने ओलावृष्टि और वज्रपात का जिक्र किया है, खासकर ओडिशा, बंगाल, बिहार और यूपी में।

सावधानियां

  • IMD ने खुले में न रहने, पेड़ों के नीचे न खड़े होने और फसलों की सुरक्षा की सलाह दी है।
  • यात्रा के दौरान सतर्क रहें, क्योंकि तेज हवाएं और कम विजिबिलिटी हो सकती है।
  • गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन दक्षिण भारत में डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

मौसम की ताजा अपडेट के लिए IMD की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप चेक करें। यह पूर्वानुमान बदल सकता है। सुरक्षित रहें!



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नरवणे बोले- अब केवल फिक्शन लिखूंगा: उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी’ में NDA से निकले युवा अफसरों की कहानी; विवादित मेमोयर पर टिप्पणी नहीं की


पुणे1 घंटे पहले

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पुणे में नरवणे ने उपन्यास ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’ के साइन किए।

पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि वह अब सिर्फ फिक्शन लिखने पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा- मैं पहले भी आर्मी रिपोर्ट्स और अकादमिक जर्नल्स के लिए लिखता रहा हूं, अब मैं सिर्फ फिक्शन लिख रहा हूं।

पुणे में अपने उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ के बुक-साइनिंग इवेंट के दौरान शुक्रवार को नरवणे ने ANI से बात की थी। उन्होंने कहा कि मेरी एक शॉर्ट स्टोरी मैगजीन फेमिना में भी छप चुकी है।

उन्होंने कहा कि मेरा पहला उपन्यास पेंग्विन हाउस इंडिया ने पब्लिश किया है। इसकी कहानी एनडीए से निकले दो युवा अफसरों के इर्द-गिर्द घूमती है। नरवणे ने अपने अनपब्लिशड मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।

दरअसल, बजट सत्र पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मेमोयर के आर्टिकल को कोट किया था। जिसके बाद जमकर हंगामा हुआ था।

पुणे में बुक स्टॉल पर रखीं उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ की कॉपियां।

पुणे में बुक स्टॉल पर रखीं उपन्यास ‘द कंटेनमेंट कॉन्सपिरेसी:ए मिलिट्री थ्रिलर’ की कॉपियां।

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नवरणे बोले- मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था

नरवणे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका मेमोयर लिखने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने बताया कि बिपिन रावत पर एक किताब के लॉन्च में पब्लिशर से मजाक में बात हुई, जिसके बाद उन्हें किताब लिखने का ऑफर मिला और यहीं से यह सफर शुरू हुआ।

नरवणे के मेमोयर ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर सियासी घमासान

लोकसभा में 2-3 फरवरी को राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे आर्टिकल को पढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें नरवणे की बुक के अंश हैं। स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी।

इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया था, जिससे कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था।

राहुल का दावा था कि आर्टिकल नरवणे के मेमोयर फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny) का है। इसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद में सरकार की नीति पर सवाल उठाए गए हैं।

राहुल ने आरोप लगाया था कि सरकार की प्रतिक्रिया में देरी हुई और बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने फैसले का जिम्मा नरवणे पर छोड़ दिया था। हालांकि ये मेमोयर अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है और 2023 से सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है।

रक्षा मंत्री ने कहा था अनपब्लिश्ड किताब कोट नहीं हो सकती

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल के बयान पर आपत्ति जताई थी। कहा था कि जो किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसे सदन में कोट नहीं किया जा सकता क्योंकि वह ‘ऑथेंटिकेटेड’ नहीं है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान यह मुद्दा गरमाया था। स्पीकर द्वारा राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के विरोध में विपक्ष स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था, लेकिन यह ध्वनिमत से गिर गया था।

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कांग्रेस ने किताब के पन्ने शेयर किए, चीनी टैंक घुसपैठ के वक्त का घटनाक्रम

कांग्रेस ने एक मैगजीन में पब्लिश आर्टिकल के पेज सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किए थे। इसमें पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश बुक Four Stars of Destiny के अंश हैं। इसमें 31 अगस्त 2020 को लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के बीच बने हालात का जिक्र है। बताया जब चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में बढ़ रहे थे तब क्या हुआ?

तारीख: 31 अगस्त, 2020

रात 8.15 बजे: भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को फोन पर जानकारी मिली कि चीन की पैदल सेना के समर्थन के साथ चार चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर जाती एक खड़ी पहाड़ी पगडंडी पर आगे बढ़ रहे हैं।

रात 8.15–8.30 बजे के बीच: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को जानकारी दी। चीनी टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय ठिकानों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे। इसके बाद भारतीय सैनिकों ने चेतावनी के तौर पर एक रोशनी वाला गोला दागा, लेकिन इसका चीनी टैंकों पर कोई असर नहीं हुआ और वे आगे बढ़ते रहे।

रात 8.30 बजे के बाद: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क कर स्पष्ट निर्देश मांगे।

रात 9.10 बजे: लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी ने फिर फोन किया। बताया गया कि चीनी टैंक अब दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रह गए हैं।

रात 9.25 बजे: सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दोबारा फोन कर “स्पष्ट निर्देश” मांगे, लेकिन कोई फैसला नहीं मिला। इसी दौरान PLA कमांडर मेजर जनरल ल्यू लिन का संदेश आया, जिसमें तनाव कम करने का प्रस्ताव दिया गया—दोनों पक्ष आगे की गतिविधियां रोकें और अगले दिन सुबह 9.30 बजे स्थानीय कमांडरों की बैठक हो।

रात 10.00 बजे: नरवणे ने चीनी कमांडर का प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजित डोभाल तक पहुंचाया।

रात 10.10 बजे: नॉर्दर्न कमांड से फिर सूचना मिली कि चीनी टैंक नहीं रुके हैं और अब चोटी से सिर्फ 500 मीटर दूर हैं। जोशी ने बताया कि उन्हें रोकने का एकमात्र तरीका मीडियम आर्टिलरी से फायर खोलना है।

रात 10.10 बजे –10.30 बजे के बीच: सेना मुख्यालय में विकल्पों पर चर्चा होती रही। पूरा नॉर्दर्न फ्रंट हाई अलर्ट पर रखा गया।

रात 10.30 बजे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वापस फोन किया और बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। प्रधानमंत्री का निर्देश सिर्फ एक वाक्य में था- जो उचित समझो, वो करो।नरवणे ने कहा, ‘यह पूरी तरह से एक सैन्य फैसला होने वाला था। मोदी से सलाह ली गई थी। उन्हें ब्रीफ किया गया था, लेकिन उन्होंने फैसला लेने से मना कर दिया था। अब पूरी जिम्मेदारी मुझ पर थी।’

नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे

नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे हैं। उन्होंने पिछले साल कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह लिस्टरेचर फेस्टिवल में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंगुइन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है।

अब यह पब्लिशर्स और सरकार के बीच का मामला है। किताब रक्षा मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजी गई है। एक साल से ज्यादा हो चुका है, लेकिन इसे पब्लिश करने की मंजूरी नहीं मिली है।

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दावा-अफसर रिटायर होकर 20 साल बुक पब्लिश नहीं करा सकेंगे: सरकार आदेश जारी कर सकती है; पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब पर विवाद

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सरकार रिटायरमेंट के बाद सीनियर पोस्ट पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रही है। इस दौरान अफसर अपनी सर्विस से जुड़ी किताब प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। हाल ही में पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब विवादों में है। पूरी खबर पढ़ें

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IPL 2026: क्या वर्ल्ड कप 2027 के लिए फिट हैं रोहित-विराट, IPL में होगी असली अग्निपरीक्षा, बचा पाएंगे अपनी जगह?


Cricket

oi-Amit Kumar

IPL 2026 Rohit Sharma And Virat Kohli: लंबे समय बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा एक बार फिर मैदान पर नजर आने वाले हैं। आईपीएल 2026 में इन दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सबकी नजरें रहने वाली है। इनका फॉर्म ही यह तय करेगा कि वे साल 2027 के वनडे वर्ल्ड कप में नजर आएंगे या नहीं? टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास लेने के बाद अब ये दोनों दिग्गज केवल वनडे खिलाड़ी रह गए हैं।

क्या वर्ल्ड कप 2027 का हिस्सा होंगे रोहित-विराट (IPL 2026 Rohit Sharma And Virat Kohli)

ऐसे में आईपीएल 2026 रोहित-विराट के लिए महज एक लीग नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं के सामने अपनी काबिलियत साबित करने का सबसे बड़ा ऑडिशन है। साल 2007 में टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत के बाद से आज तक कोई भी ऐसा खिलाड़ी किसी भी वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा नहीं रहा है जो केवल वनडे क्रिकेट खेलता हो। 2027 में दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे की धरती पर होने वाले वर्ल्ड कप में रोहित (39 वर्ष) और विराट (37 वर्ष) इस मिथक को तोड़ना चाहेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या बढ़ती उम्र और कम होते ‘मैच टाइम’ के बीच वे अपनी धार बरकरार रख पाएंगे?

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रोहित शर्मा को लगाना होगा रनों का अंबार

रोहित शर्मा के लिए यह आईपीएल सबसे कड़ी परीक्षा है। पिछले कुछ समय से उनकी फिटनेस और बड़ी पारी खेलने की क्षमता पर सवाल उठते रहे हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि रोहित ने 2013 के बाद से किसी भी आईपीएल सीजन में 500 रनों का आंकड़ा पार नहीं किया है। वनडे की पिछली तीन पारियों में उनके स्कोर 3, 11 और 24 रहे हैं। चयनकर्ता और कोच गौतम गंभीर यह देखेंगे कि क्या रोहित लंबी पारी खेल पा रहे हैं और क्या फील्डिंग में उनकी फुर्ती बरकरार है?

कोहली पर भी रहेगी फैंस की नजर

विराट कोहली का मामला थोड़ा अलग है। वे आज भी भारतीय खेल जगत के सबसे फिट एथलीटों में शुमार हैं। पिछले तीन आईपीएल सीजन में उनका स्ट्राइक रेट 140 के पार रहा है, जो उनकी आधुनिक क्रिकेट के साथ तालमेल बिठाने की क्षमता को दर्शाता है। विराट के लिए चुनौती रनों की नहीं, बल्कि इस उम्र में भी उसी ‘भूख’ और ‘ऊर्जा’ को दिखाने की है जिसकी मांग 2027 का वर्ल्ड कप करेगा।



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Bengaluru Water Crisis 2026: 65 वॉर्डों में होगी पानी की भारी किल्लत, कावेरी स्टेज-5 पर राहत के लिए टिकी नजर!


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oi-Smita Mugdha

Bengaluru Water Crisis 2026: बेंगलुरु में इस साल गर्मियों के दौरान पानी की किल्लत एक बार फिर गंभीर रूप ले सकती है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर के करीब 65 वार्डों में 2026 की गर्मियों में भूजल संकट गहराने का खतरा है। रिपोर्ट में खासतौर पर शहर के बाहरी इलाकों में स्थिति को चिंताजनक बताया गया है।

व्हाइटफील्ड और जक्कुर जैसे इलाकों में भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे शहरीकरण और पानी के अत्यधिक दोहन को इस गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

Bengaluru Water Crisis 2026

Bengaluru Water Crisis 2026: कावेरी स्टेज-5 से मिलेगी राहत

– हालांकि, राहत की बात यह है कि कावेरी स्टेज-5 (Cauvery Stage V) परियोजना का काम 50 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है।

– अधिकारियों को उम्मीद है कि इस परियोजना के पूरा होने से शहर को अतिरिक्त जल आपूर्ति मिलेगी और 2024 की तुलना में इस साल स्थिति कुछ हद तक बेहतर रह सकती है।

Bengaluru Water Crisis: कुछ हिस्सों में 24 घंटे की पानी कटौती

इसके बावजूद, शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन मरम्मत और रखरखाव कार्य के कारण समय-समय पर 24 घंटे तक पानी की कटौती की जा रही है। इससे स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही जल संकट बना हुआ है। सिटी प्लानर्स और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहा है कि बेंगलुरु को दीर्घकालिक समाधान के लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और पानी को रीसाइकल (Water Recycling) जैसे उपायों को तेजी से अपनाना होगा। साथ ही, भूजल के अंधाधुंध दोहन पर नियंत्रण भी जरूरी है।

बेंगलुरु में इस बार गर्मियों में जल संकट की आशंका बरकरार है। हालांकि कावेरी स्टेज V जैसी परियोजनाओं से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन तत्काल समाधान के लिए जल प्रबंधन और संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करना होगा।



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अमेरिकी रिपोर्ट में RSS पर बैन की सिफारिश: 275 पूर्व जज-अधिकारियों ने आलोचना की; बोले- रिपोर्ट से दोनों देशों के रिश्ते खराब करने की कोशिश


नई दिल्ली3 घंटे पहले

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अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है।

शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।

बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं।

पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं।

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USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप

पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है।

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है।

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बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल

इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं।

इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया।

2025 में खुफिया एजेंसी RAW पर बैन की मांग की

USCIRF ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में कहा था कि भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति बिगड़ती जा रहा है और सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिश में कथित रूप से शामिल होने की वजह से सीक्रेट एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर बैन लगा दिया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने USCIRF की रिपोर्ट खारिज करते हुए इसे पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रिपोर्ट तथ्यों को गलत ढंग से पेश करती है। इस आयोग को खुद को “चिंता का विषय संस्था” घोषित कर देना चाहिए।

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अमेरिकी रिपोर्ट- ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत को हराया, पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला नहीं माना

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एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 4 दिन की लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में पाकिस्तान को बड़ी सैन्य कामयाबी मिली थी। इस रिपोर्ट में पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला न मानकर ‘विद्रोही हमला’ माना गया है। 800 पन्नों की इस रिपोर्ट को यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें…

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मध्यप्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं: प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह


मुख्य सचिव मध्य प्रदेश को औद्योगिक विकास के लिए एक केंद्रीय केंद्र के रूप में उजागर करते हैं, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में मजबूत अवसर हैं। राज्य निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा देने के लिए 40% पूंजी सब्सिडी, नई औद्योगिक नीतियां, नए क्षेत्रों के लिए 1 लाख एकड़ और सुव्यवस्थित सिंगल विंडो प्रक्रियाएं प्रदान करता है।

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-Oneindia Staff

‘इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के हृदय में स्थित राज्य है, जहां हर सेक्टर में औद्योगिक प्रगति और निवेश की अनंत संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने और निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

Madhya Pradesh Investment Opportunities Grow

प्रमुख सचिव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में 8 एयरपोर्ट मौजूद हैं और नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 1 लाख एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि उद्योग स्थापना को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर विशेष ध्यान देते हुए नई औद्योगिक नीतियां लागू की हैं, जिनके तहत निवेशकों को 40 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है।

कृषि और फूड प्रोसेसिंग में अवसर

उन्होंने कहा कि कृषि, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है, जिससे एग्री-बेस्ड उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ है।

औद्योगिक परियोजनाओं को मिल रही गति

राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि धार में टेक्सटाइल सेक्टर के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन किया जा चुका है, जहां निवेशकों को 1150 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। वहीं नर्मदापुरम जिले के बाबई-मोहासा औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से कार्य चल रहा है और यहां 29 इकाइयों के लिए करीब ₹52 हजार करोड़ का निवेश प्राप्त हुआ है।

इसके अलावा सागर में 1500 एकड़ क्षेत्र में विशेष औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जबकि रतलाम में 1000 एकड़ का मेगा इंडस्ट्रियल पार्क तैयार किया जा रहा है। विक्रम उद्योगपुरी और धार इंडस्ट्रियल एरिया में भी निवेशकों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

निवेशकों के लिए आसान प्रक्रियाएं

उन्होंने बताया कि राज्य में जन विश्वास अधिनियम लागू किया गया है और निवेशकों की सुविधा के लिए इन्वेस्टमेंट पोर्टल तथा सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई प्रतिष्ठित कंपनियां वर्षों से सफलतापूर्वक कारोबार कर रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

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Jharkhand American bomb: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच झारखंड में मिला 500 पाउंड का अमेरिकी बम, इलाके में अलर्ट


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oi-Sumit Jha

Jharkhand American Bomb: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में सुवर्णरेखा नदी के किनारे मिले 227 किलो के अमेरिकी बम ने सनसनी फैला दी है। ‘AN-M64’ मॉडल का यह शक्तिशाली विस्फोटक दूसरे विश्व युद्ध के दौर का बताया जा रहा है, जिस पर ‘मेड इन अमेरिका’ साफ लिखा है। स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने इसकी संहारक क्षमता को देखते हुए इसे छूने से मना कर दिया है और अब सेना की मदद ली जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया जब ईरान-इजराइल के बीच आधुनिक मिसाइल युद्ध देख रही है, तब जमीन के नीचे से निकले इस पुराने बम ने अतीत की भयावहता को फिर से जिंदा कर दिया है।

Jharkhand American bomb

500 pound bomb Baharagora: आधुनिक युद्ध के बीच अतीत की आहट

आज दुनिया का ध्यान ईरान और इजराइल के बीच चल रहे आधुनिक मिसाइल और ड्रोन युद्ध पर टिका है, जहां पलक झपकते ही विनाश की खबरें आती हैं। ऐसे माहौल में झारखंड की सुवर्णरेखा नदी से दूसरे विश्व युद्ध का बम निकलना एक चौंकाने वाली घटना है। यह याद दिलाता है कि युद्ध चाहे आज का हो या 80 साल पुराना, उसके पीछे छूटे हथियार दशकों बाद भी मौत का सामान बनकर जमीन में दफन रहते हैं और कभी भी तबाही मचा सकते हैं।

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Iran War Update: क्या था AN-M64 बम का मकसद?

ईरान-इजराइल युद्ध में आज जिस तरह ‘सटीक हमलों’ (Precision Strikes) की बात होती है, दूसरे विश्व युद्ध में यह 500 पाउंड का ‘AN-M64’ बम भारी तबाही के लिए इस्तेमाल होता था। इसे अमेरिकी सेना पुलों, कारखानों और सैन्य ठिकानों को जमींदोज करने के लिए विमानों से गिराती थी। सुवर्णरेखा के पास मिला यह बम शायद उस वक्त किसी तकनीकी खराबी या नरम मिट्टी के कारण नहीं फट पाया, लेकिन इसकी मारक क्षमता आज भी किसी आधुनिक मिसाइल के वारहेड से कम नहीं है।

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इतिहास और वर्तमान का खतरनाक मेल

माना जा रहा है कि यह बम दशकों पहले महुलडांगरी के पास क्रैश हुए एक लड़ाकू विमान का हिस्सा है। एक तरफ दुनिया परमाणु युद्ध और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत के एक शांत इलाके में खुदाई के दौरान निकला यह बम बताता है कि इतिहास के घाव कितनी गहराई तक दबे हो सकते हैं। यह खोज वैज्ञानिकों और सेना के लिए एक पहेली बन गई है कि इतने सालों बाद भी यह विस्फोटक कितना सक्रिय है।

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इजराइल-ईरान संघर्ष और बम का खौफ

सोशल मीडिया पर लोग इस बम की तुलना वर्तमान के वैश्विक तनाव से कर रहे हैं। जिस तरह इजराइल और ईरान के बीच हथियारों की होड़ मची है, झारखंड में मिला यह बम यह सबक देता है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी उसका खतरा खत्म नहीं होता। प्रशासन ने इलाके को सील कर दिया है क्योंकि 227 किलो का यह ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ फटने पर कई सौ मीटर तक सब कुछ राख करने की ताकत रखता है, ठीक वैसे ही जैसे आज के आधुनिक बम।

सेना का ऑपरेशन और सुरक्षा की चुनौती

इस ‘अमेरिकी टाइम बम’ को निष्क्रिय करना बेहद जोखिम भरा है। स्थानीय प्रशासन ने कलाईकुंडा एयरबेस और सेना के विशेषज्ञों को पत्र लिखा है। जब दुनिया के एक कोने में नई मिसाइलें चल रही हैं, यहां हमारी सेना एक पुराने लेकिन जानलेवा दुश्मन (बम) को खत्म करने की तैयारी कर रही है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे इस ‘सोते हुए राक्षस’ से दूर रहें, क्योंकि इसमें भरी बारूद आज भी उतनी ही घातक हो सकती है जितनी 1940 के दशक में थी।



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IPL 2026: प्रैक्टिस के बीच रिंकू को आया प्रिया सरोज का वीडियो कॉल! फिर मैदान छोड़ भागे रिंकू? VIDEO


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oi-Amit Kumar

IPL 2026 KKR Rinku Singh: त्योहार लोगों को करीब लाने और खुशियां बांटने का मौका देते हैं। ईद के खास मौके पर ऐसा ही एक प्यारा पल देखने को मिला। यूपी के मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज ने ईद के जश्न के दौरान अपने मंगेतर और केकेआर के स्टार खिलाड़ी रिंकू को सरप्राइज वीडियो कॉल के जरिए लोगों से मिलवाया। इस दौरान मौजूद लोग भी काफी खुश नजर आए।

प्रिया सरोज ने रिंकू किया वीडियो कॉल (IPL 2026 KKR Rinku Singh)

प्रिया सरोज ने मुस्कुराते हुए रिंकू सिंह से बात की और वहां मौजूद लोगों ने भी उन्हें ईद की बधाई दी। यह पल बेहद खास और यादगार बन गया। इस छोटे से सरप्राइज ने ईद की खुशी को और भी बढ़ा दिया। प्रिया सरोज इन दिनों अपने निर्वाचन क्षेत्र में ईद मिलन कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। इस दौरान वह एक मुस्लिम परिवार के घर पहुंची थीं। वहां उन्होंने मोबाइल निकाला और सीधे रिंकू सिंह को वीडियो कॉल लगा दिया।

IPL 2026 1

प्रैक्टिस कैंप के बीच रिंकू सिंह ने उठाया कॉल

आईपीएल 2026 के व्यस्त शेड्यूल और केकेआर के प्रैक्टिस कैंप के बीच रिंकू सिंह ने जैसे ही कॉल उठाया, उनके चेहरे पर वही सादगी भरी मुस्कान तैर गई जिसके लिए वे दुनिया भर में जाने जाते हैं। वह प्रैक्टिस छोड़ मैदान से किसी दूसरे स्थान पर चले गए। प्रिया सरोज ने वहां मौजूद परिवार के सदस्यों से रिंकू की बात कराई। परिवार ने उत्साह के साथ ईद मुबारक कहा, तो मैदान पर बड़े-बड़े छक्के जड़ने वाले रिंकू ने बेहद विनम्रता से हाथ जोड़कर और मुस्कुराकर सभी की शुभकामनाओं को स्वीकार किया।

एक सांसद के तौर पर प्रिया सरोज अक्सर जनता के बीच रहती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपने पब्लिक रोल में अपनी ‘प्राइवेट लाइफ’ का तड़का लगाकर सबका दिल जीत लिया। अपने मंगेतर को इस तरह आम लोगों के बीच वर्चुअली शामिल करना यह दिखाता है कि दोनों सितारे अपनी जड़ों से कितने गहराई से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस सरलता की तारीफ कर रहे हैं कि कैसे एक छोटा सा जेस्चर त्यौहार की खुशियों को दोगुना कर सकता है।

ईद के त्यौहार पर एक घर पहुंची थी सांसद प्रिया सरोज जी तभी वहां पर मौजूद लोग कहने लगे रिंकू सिंह से मिलना चाहते हैं, सांसद प्रिया सरोज जी ने फ़ोन करके विडियो काल पर बात करवाई..!! pic.twitter.com/ioJgxjGgen

— Shyam Yadav SP (@shyamyadavsp95) March 21, 2026 “>





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Jharkhand American bomb: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच झारखंड में मिला 500 पाउंड का अमेरिकी बम, सेना के हवाले…


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Jharkhand American Bomb: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में सुवर्णरेखा नदी के किनारे मिले 227 किलो के अमेरिकी बम ने सनसनी फैला दी है। ‘AN-M64’ मॉडल का यह शक्तिशाली विस्फोटक दूसरे विश्व युद्ध के दौर का बताया जा रहा है, जिस पर ‘मेड इन अमेरिका’ साफ लिखा है। स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने इसकी संहारक क्षमता को देखते हुए इसे छूने से मना कर दिया है और अब सेना की मदद ली जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया जब ईरान-इजराइल के बीच आधुनिक मिसाइल युद्ध देख रही है, तब जमीन के नीचे से निकले इस पुराने बम ने अतीत की भयावहता को फिर से जिंदा कर दिया है।

Jharkhand American bomb

500 pound bomb Baharagora: आधुनिक युद्ध के बीच अतीत की आहट

आज दुनिया का ध्यान ईरान और इजराइल के बीच चल रहे आधुनिक मिसाइल और ड्रोन युद्ध पर टिका है, जहां पलक झपकते ही विनाश की खबरें आती हैं। ऐसे माहौल में झारखंड की सुवर्णरेखा नदी से दूसरे विश्व युद्ध का बम निकलना एक चौंकाने वाली घटना है। यह याद दिलाता है कि युद्ध चाहे आज का हो या 80 साल पुराना, उसके पीछे छूटे हथियार दशकों बाद भी मौत का सामान बनकर जमीन में दफन रहते हैं और कभी भी तबाही मचा सकते हैं।

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Iran War Update: क्या था AN-M64 बम का मकसद?

ईरान-इजराइल युद्ध में आज जिस तरह ‘सटीक हमलों’ (Precision Strikes) की बात होती है, दूसरे विश्व युद्ध में यह 500 पाउंड का ‘AN-M64’ बम भारी तबाही के लिए इस्तेमाल होता था। इसे अमेरिकी सेना पुलों, कारखानों और सैन्य ठिकानों को जमींदोज करने के लिए विमानों से गिराती थी। सुवर्णरेखा के पास मिला यह बम शायद उस वक्त किसी तकनीकी खराबी या नरम मिट्टी के कारण नहीं फट पाया, लेकिन इसकी मारक क्षमता आज भी किसी आधुनिक मिसाइल के वारहेड से कम नहीं है।

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माना जा रहा है कि यह बम दशकों पहले महुलडांगरी के पास क्रैश हुए एक लड़ाकू विमान का हिस्सा है। एक तरफ दुनिया परमाणु युद्ध और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत के एक शांत इलाके में खुदाई के दौरान निकला यह बम बताता है कि इतिहास के घाव कितनी गहराई तक दबे हो सकते हैं। यह खोज वैज्ञानिकों और सेना के लिए एक पहेली बन गई है कि इतने सालों बाद भी यह विस्फोटक कितना सक्रिय है।

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सोशल मीडिया पर लोग इस बम की तुलना वर्तमान के वैश्विक तनाव से कर रहे हैं। जिस तरह इजराइल और ईरान के बीच हथियारों की होड़ मची है, झारखंड में मिला यह बम यह सबक देता है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी उसका खतरा खत्म नहीं होता। प्रशासन ने इलाके को सील कर दिया है क्योंकि 227 किलो का यह ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ फटने पर कई सौ मीटर तक सब कुछ राख करने की ताकत रखता है, ठीक वैसे ही जैसे आज के आधुनिक बम।

सेना का ऑपरेशन और सुरक्षा की चुनौती

इस ‘अमेरिकी टाइम बम’ को निष्क्रिय करना बेहद जोखिम भरा है। स्थानीय प्रशासन ने कलाईकुंडा एयरबेस और सेना के विशेषज्ञों को पत्र लिखा है। जब दुनिया के एक कोने में नई मिसाइलें चल रही हैं, यहां हमारी सेना एक पुराने लेकिन जानलेवा दुश्मन (बम) को खत्म करने की तैयारी कर रही है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे इस ‘सोते हुए राक्षस’ से दूर रहें, क्योंकि इसमें भरी बारूद आज भी उतनी ही घातक हो सकती है जितनी 1940 के दशक में थी।



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