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Maharashtra
oi-Bhavna Pandey
Astrologer Ashok Kharat Arrest: महाराष्ट्र के नासिक से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया ‘कैप्टन’ नाम से मशहूर स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषी अशोक खरात को 35 वर्षीय महिला से बलात्कार के आरोप में पुलिस ने अरेस्ट किया है। इस सनसनीखेज गिरफ्तारी ने आस्था और समाज के भरोसे को तार-तार कर दिया है।
नासिक पुलिस की एफआईआर के अनुसार अशोक खरात पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी बताया जाता है। ये स्वयं को “दैवीय शक्तियों” का जानकार और एक प्रतिष्ठित ज्योतिषी के रूप में स्थापित किया और लोगों का विश्वास जीता।

महिला को नशीला पदार्थ पिलाकर किया यौन शोषण
पीड़िता ने आरोप लगाया कि 67 वर्षीय ज्योतिषी ने पूजा-पाठ के बहाने उसे नशीला पदार्थ खिलाकर सम्मोहित किया, विश्वास का गलत फायदा उठाया और यौन शोषण किया। आरोपी नासिक के पॉश इलाके कनाडा कॉर्नर में दफ्तर व सिन्नर के मिरगांव में मंदिर और आलीशान फार्महाउस संचालित करता था।
वहीं पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपी खरात के पास से एक पेन ड्राइव बरामद की है, जिसमें 58 आपत्तिजनक वीडियो होने का दावा किया गया है। जांच में सामने आया कि वह अपने केबिन में महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हरकतें कर उन्हें गुप्त कैमरों में रिकॉर्ड करता था।
पुलिस का मानना है कि बरामद 58 वीडियो केवल एक छोटा हिस्सा भर हैं और वास्तविक पीड़ितों की संख्या कहीं ज़्यादा हो सकती है। पुलिस ने संभावित पीड़ितों से निडर होकर आगे आने की अपील की है, जहाँ उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी और हर संभव कानूनी सहायता मिलेगी।
कैप्टन नाम का ये जालसाज ज्योतिषी ‘ग्रह शांति’, ‘वैवाहिक समस्या समाधान’ या ‘आर्थिक संकट दूर करने’ जैसे बहानों से महिलाओं को फंसाता था और आरोप है कि प्रसाद या पेय पदार्थों में नशीला पदार्थ देकर सम्मोहित करता और फिर दुष्कर्म को अंजाम देता था। इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी ने अपने ऑफिस और फार्महाउस में गुप्त कैमरे लगा रखे थे। एक वीडियो में नजर आया कि महिला के सिर पर कलश रखवाता है और उसके बाद उसके साथ ये यौन संबंध बनाता है।
सिन्नर के श्री ईशान्येश्वर मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन के रूप में उसने राजनेताओं, हस्तियों और कारोबारियों के आध्यात्मिक गुरु की पहचान बनाई थी।इस बाबा ने धार्मिक व ज्योतिषीय गतिविधियों के नाम पर एक ट्रस्ट भी बनाया और अंकशास्त्र तथा ‘जादू-टोना’ जैसे अंधविश्वासों से लोगों को प्रभावित किया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट और अंधश्रद्धा विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया है। अभी केवल यौन शोषण का मामला दर्ज हुआ है,साथ ही इस पर ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप के संभावित पहलुओं की भी जांच चल रही है। आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कई प्रभावशाली लोगों के साथ उसकी तस्वीरें मिली हैं, जिससे यह संभावना है कि इन वीडियो का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया हो।
मीरगांव में उसका ‘ईशान्येश्वर मंदिर’ और आलीशान आश्रम था, जहाँ अक्सर प्रभावशाली राजनेता, हस्तियां और बड़े कारोबारी दर्शन करने आते थे। कई राजनेता, सेलिब्रिटी और कारोबारी अशोक खरात के मंदिर व फार्महाउस पर आते-जाते थे। इन्हीं संपर्कों के कारण यह मामला अब एक राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इस प्रकरण ने एक राजनीतिक तूफान खड़ा किया है, क्योंकि कई नामी हस्तियां पहले भी इस कथित ज्योतिषी से मुलाकात कर चुकी थीं।

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India
oi-Kumari Sunidhi Raj
PM Kisan Application: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) के तहत करोड़ों किसानों के खातों में सालाना 6,000 रुपये भेजे जाते हैं। लेकिन डेटा में मामूली सुधार न होने के कारण लाखों आवेदन रिजेक्ट (अस्वीकार) कर दिए गए हैं। अगर आपकी भी किस्तें रुक गई हैं या स्टेटस में ‘Rejected’ दिखा रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
सरकार ने 2026 में पोर्टल पर ‘Updation of Self Registered Farmers’ की सुविधा को और भी आसान बना दिया है। अब किसान बिना किसी कार्यालय के चक्कर काटे अपने मोबाइल से ही आधार कार्ड, बैंक खाता और जमीन के दस्तावेजों (Land Records) की गलतियों को ठीक कर सकते हैं। समय रहते सुधार करने पर रुकी हुई किस्तों का पैसा भी अगली किस्त के साथ आपके खाते में क्रेडिट कर दिया जाएगा।

पीएम किसान पोर्टल पर आवेदन रद्द होने के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आए हैं। सबसे पहला है ‘Aadhaar Authentication Failure’, जिसमें किसान के आधार कार्ड का नाम और आवेदन में भरा गया नाम मेल नहीं खाता। दूसरा बड़ा कारण ‘Land Records Missing’ है, यानी आपकी खेती की जमीन का डेटा डिजिटल पोर्टल पर अपडेट नहीं है।
तीसरा कारण बैंक खाते का NPCI/DBT से लिंक न होना है। 2026 के नियमों के मुताबिक, अब पैसा केवल उसी खाते में जाता है जो आधार से सीडेड (Seeded) होता है। अगर आपका आवेदन इनमें से किसी भी वजह से रुका है, तो तुरंत सुधार करना अनिवार्य है।
ये भी पढ़ें: PM Kisan Yojana 22वीं किस्त के बाद अब अगली किस्त की तैयारी, रजिस्ट्रेशन के लिए चाहिए कौन से डाक्यूमेंट्स?
अगर आपका फॉर्म रिजेक्ट हो गया है, तो आपको नया रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं है, बल्कि पुराने फॉर्म को ही ‘एडिट’ करना होगा:
आवेदन सुधारने के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम e-KYC पूरा करना है। अब किसान पीएम किसान मोबाइल ऐप के जरिए ‘Face Authentication’ का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें किसी भी ओटीपी (OTP) की जरूरत नहीं पड़ती। बस अपना चेहरा स्कैन करें और आपकी केवाईसी पूरी हो जाएगी। इसके साथ ही अपने बैंक जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका खाता Aadhaar Seeding और NPCI Mapper पर एक्टिव है, ताकि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पैसा सीधे आपके खाते में आ सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल वही किसान पात्र हैं जिनके नाम पर खेती योग्य जमीन है। यदि परिवार में पति और पत्नी दोनों आवेदन करते हैं, तो एक का आवेदन रद्द कर दिया जाएगा और पूर्व में ली गई राशि की वसूली भी की जा सकती है। इसके अलावा, यदि कोई किसान इनकम टैक्स भरता है या सरकारी पेंशनभोगी है (10,000 रुपये से अधिक), तो वह इस योजना का लाभ नहीं ले पाएगा। सुधार के बाद अपने आवेदन का स्टेटस नियमित रूप से चेक करते रहें ताकि वेरिफिकेशन की स्थिति का पता चल सके।
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बनभूलपुरा में ईद से पहले छत छिनने का डर दिखा।
रमजान के आखिरी दिनों में जहां आमतौर पर खुशियों की तैयारी होती है, वहीं बनभूलपुरा के लोग कह रहे हैं, इस बार हमारी ईद फीकी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे भूमि खाली कराने की कार्रवाई की तैयारी ने करीब 27 हजार लोगों के सिर से छत छिनने का
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दैनिक भास्कर की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर हालात जानने की कोशिश की तो बनभूलपुरा की तंग गलियों में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखीं। एक ओर रमजान की तैयारियां चल रही हैं, घर-घर सेवइयां बन रही हैं, बाजारों में खरीदारी हो रही है और बच्चे ईद को लेकर उत्साहित हैं। वहीं, दूसरी ओर, इन्हीं गलियों में डर, अनिश्चितता, बेचैनी और सन्नाटे का माहौल भी साफ महसूस हो रहा है।
जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण 20 मार्च से इलाके में कैंप लगाकर कार्रवाई शुरू करने की तैयारी में हैं। प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन की बात कही जा रही है, लेकिन लोगों को इस पर भरोसे से ज्यादा डर महसूस हो रहा है।
ईद से पहले बनभूलपुरा की गलियों में सन्नाटा दिखा।
‘ईद के बाद घर रहेगा या नहीं, पता नहीं’
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार की तैयारी तो हर साल की तरह हो रही है, लेकिन मन में डर बैठा हुआ है। एक निवासी ने कहा- ईद की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दिल में डर है कि उसके बाद घर रहेगा भी या नहीं।
कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरा जीवन इसी इलाके से जुड़ा है। ऐसे में सिर्फ मकान नहीं, पूरी जिंदगी उजड़ने का खतरा है।

इस बार क्यों अलग है ईद का माहौल
इस साल ईद-उल-फितर 30 या 31 मार्च को चांद दिखने के अनुसार मनाई जाएगी। आमतौर पर यह खुशी और मेल-मिलाप का त्योहार होता है, लेकिन बनभूलपुरा में इस बार लोग ‘खुशी से ज्यादा चिंता’ के साथ ईद की तैयारी कर रहे हैं।

लोगों के चेहरे पर घर छिनने की चिंता साफ दिखी।
कागजों में योजना, जमीन पर सवाल
प्रशासन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास की बात कर रहा है, लेकिन लोगों के मन में कई सवाल बने हुए हैं। नया घर कब मिलेगा, कहां मिलेगा और तब तक लोग कहां रहेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है। वहीं, छोटे दुकानदारों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोज़गार खत्म होने का भी डर सता रहा है, जिससे चिंता और अनिश्चितता का माहौल और बढ़ गया है।

नींद उड़ी, भविष्य धुंधला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। रातों की नींद गायब हो गई है, दिनभर चिंता बनी रहती है और बच्चों के भविष्य को लेकर डर सता रहा है। एक बुजुर्ग ने कहा, ईद तो हर साल आती है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब खुश होने की हिम्मत नहीं हो रही।

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बनभूलपुरा जमीन विवाद-SC के आदेश की कॉपी जारी: 50 हजार लोगों के पुनर्वास पर अदालत सख्त, 28 अप्रैल को अगली सुनवाई

हल्द्वानी के बनभूलपुरा अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुनवाई के 4 दिन बाद की कॉपी जारी कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाए और इसके लिए पुनर्वास शिविर आयोजित किए जाएं। (पढ़ें पूरी खबर)
‘मैं अपने बच्चों को उनके पिता की वीरता की कहानी सुनाना चाहती हूं… डर की नहीं।’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मिसाइलों के खतरे के बीच फंसे कैप्टन आशीष शर्मा की पत्नी सरुणिका शर्मा की यह बात हालात की गंभीरता और गर्व दोनों को एक साथ बयां करती है। उनका कहना है कि आशीष न सिर्फ जहाज की कमान संभाले हुए हैं, बल्कि 24 भारतीय क्रू मेंबर्स को अपने बच्चों की तरह संभाल रहे हैं और इस पर पूरे परिवार को गर्व है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा इस समय दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर की कमान संभाले हुए हैं। जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद हैं और हर दिन मिसाइलों के खतरे के बीच गुजर रहा है। इन हालात के बीच भी वे परिवार को सिर्फ एक मैसेज भेज पा रहे हैं- “All OK, All is Well”। हर रात मिसाइलें गुजरती हैं, मलबा गिरता है… कैप्टन की पत्नी सरुणिका शर्मा बताती हैं कि पिछले 20-22 दिनों से जहाज होर्मुज के पास ही फंसा हुआ है। वे कहती हैं, मिसाइलें जहाजों के ऊपर से गुजरती हैं। जो इंटरसेप्ट होती हैं, उनका मलबा नीचे गिरता है। और जहाज क्रूड ऑयल से भरे हैं… जरा सी चूक बड़ी तबाही बन सकती है। खतरनाक स्थिति में भी हौसला बिल्कुल नहीं टूटा कैप्टन आशीष के साथ 24 भारतीय क्रू मेंबर हैं, जिनकी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।
सरुणिका कहती हैं, वो एक जांबाज की तरह अपने पूरे क्रू को संभाल रहे हैं… जैसे बच्चे हों। इतनी खतरनाक स्थिति में भी उनका हौसला बिल्कुल नहीं टूटा है। उनके मुताबिक अब मर्चेंट नेवी के जहाज भी निशाने पर हैं, टैंकरों को टारगेट किया जा रहा है, ये बहुत गलत है। ये सिर्फ जहाज नहीं, पूरी दुनिया की सप्लाई लाइन हैं। सरकार से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की अपील की सरुणिका ने भारत सरकार से अपील करते हुए कहा, भारत की स्थिति अभी मजबूत है। सरकार अच्छा काम कर रही है, लेकिन इस बड़े संकट में भी बातचीत होनी चाहिए। तेल, एलपीजी जैसी जरूरी चीजें इन्हीं जहाजों से जाती हैं… ये रुक गईं तो पूरी दुनिया प्रभावित होगी। ‘हम सिर्फ पेशा नहीं, समंदर जैसा दिल चुनते हैं’ भावुक होते हुए सरुणिका कहती हैं, जब हम नेवी या ऐसी जॉब चुनते हैं, तो हम सिर्फ पेशा नहीं चुनते… हम समंदर जैसा दिल भी चुनते हैं। हर दिन खतरा, हर दिन हौसला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समय युद्ध जैसे हालात में है। सैकड़ों जहाज इस इलाके में फंसे हैं और हर पल अनहोनी का खतरा बना हुआ है। इन सबके बीच रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा 24 जिंदगियों की जिम्मेदारी निभाते हुए हर दिन अपने परिवार को एक ही भरोसा दे रहे हैं, सब ठीक है। ———————– ये खबर भी पढ़ें : ईरान-इजराइल जंग- उत्तराखंड के लोग मिडिल ईस्ट में फंसे: देहरादून का युवक बोला- अब्बा, हमला हो गया; मौलाना और छात्र कमरे में कैद मिडिल ईस्ट (ईरान-इजराइल) में गहराते युद्ध के बाद उत्तराखंड के कई लोग मिडिल ईस्ट में फंस गए है। देहरादून, विकासनगर और हरिद्वार के कई युवा और मौलाना इस वक्त ईरान के कुम और तेहरान जैसे शहरों में फंसे हुए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
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उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोकगीतों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाला पांडवाज बैंड अब अपने ही पहाड़ में आयोजन के लिए संघर्ष कर रहा है। रुद्रप्रयाग के सारी गांव में 20 से 22 मार्च 2026 तक होने वाले काफल फेस्टिवल के लिए टीम को अब तक कोई स्पॉन्सर नहीं मिला है, जबकि कई महीनों से सरकारी विभागों और निजी संस्थानों से संपर्क किया गया। पांडवाज ने इसे लेकर एक ओपन लेटर भी जारी किया है, जिसमें आर्थिक सहयोग न मिलने की बात कही गई है। टीम का कहना है कि कई जगहों से फेस्टिवल की तारीफ तो मिली, लेकिन किसी ने साथ नहीं दिया। कुछ लोगों ने इसे देहरादून जैसे शहर में करने की सलाह दी, जिस पर टीम ने सवाल उठाया कि अगर आयोजन शहरों में ही होंगे तो पहाड़ और गांवों को इसका क्या फायदा मिलेगा। इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर ने पांडवाज टीम के सदस्य कुणाल डोभाल से खास बातचीत की। उन्होंने फेस्टिवल के उद्देश्य, फंडिंग की दिक्कत, जीरो प्लास्टिक मॉडल और पहाड़ में संस्कृति बचाने की चुनौतियों पर खुलकर बात की। सवाल-जवाब में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल- आपने लेटर जारी करके बताया कि स्पॉन्सर नहीं है?
जवाब- यह काफल फेस्टिवल का हमारा दूसरा साल है। हमने लद्दाख और अरुणाचल जैसे इलाकों के फेस्टिवल देखे, जहां लोग अपनी संस्कृति, पर्यावरण और भाषा को लेकर बहुत सजग हैं। वहीं से हमें लगा कि उत्तराखंड में भी ऐसा होना चाहिए। 2025 में हमने पहला काफल फेस्टिवल किया, जो सफल रहा। उस समय स्पॉन्सर कम थे, लेकिन मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सहयोग किया था। उन्होंने इसलिए मदद की क्योंकि फेस्टिवल ज़ीरो प्लास्टिक सोच पर आधारित था। इस बार हमने सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और कंपनियों से बात की। सबने कहा कि आइडिया अच्छा है, लेकिन किसी ने पैसा नहीं दिया। कुछ ने कहा कि इसे देहरादून में कर लो, लेकिन हम मानते हैं कि इससे गांव को कोई फायदा नहीं होगा। सवाल- आयोजन में कितना खर्च आता है और इस बार पैसा कहां से आ रहा है?
जवाब- पिछले साल करीब 15 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस बार तीन दिन का फेस्टिवल है, तो लगभग 35 लाख रुपए का खर्च है। अभी हम ज्यादातर अपनी जेब से ही खर्च कर रहे हैं। कुछ दोस्त मदद करते हैं, लेकिन कोई बड़ा स्पॉन्सर नहीं है। हम रुकने वाले नहीं हैं, लेकिन हमें इसे आगे चलाने के लिए टिकाऊ मॉडल बनाना होगा। सवाल- जीरो प्लास्टिक को लेकर आपने क्या किया?
जवाब- हमने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पूरी तरह बंद किया। पानी बोतलों में नहीं दिया, बल्कि मटकों में रखा। हर प्रतिभागी को एक ऐसा गिलास दिया जिसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सके। हमारा मानना है कि 20 रुपए की बोतल में हम पानी नहीं, प्लास्टिक खरीदते हैं। पहाड़ों में पानी तो मुफ्त है, तो उसे प्लास्टिक में क्यों बेचें। सवाल- इस फेस्टिवल के लिए सारी गांव को ही क्यों चुना?
जवाब- सारी गांव रुद्रप्रयाग में है और यहीं से देवरिया ताल ट्रेक शुरू होता है। यह बहुत संवेदनशील इलाका है और आने वाले समय में यहां कचरे की समस्या बढ़ सकती है। हमने सोचा कि काम वहीं किया जाए, जहां जरूरत ज्यादा है। यह हमारा होम डिस्ट्रिक्ट भी है, इसलिए लोगों को समझाना आसान रहा। सवाल- पिछले साल आयोजन कैसा रहा और इस बार क्या नया है?
जवाब- पिछले साल हमने बिना मंच के आयोजन किया। प्राकृतिक चट्टान को ही स्टेज बनाया। कोई टेंट या ढांचा नहीं लगाया। यह पूरी तरह प्रकृति के साथ किया गया आयोजन था। हमने फोटोग्राफी वर्कशॉप भी कराई, जिसमें निकॉन ने उपकरण दिए। स्थानीय युवाओं को पक्षियों और वन्यजीवों की फोटोग्राफी सिखाई गई। सवाल- स्थानीय कलाकारों के लिए आपका क्या संदेश है?
जवाब- अकेले काम मत कीजिए, टीम बनाइए। शुरुआत में पैसे नहीं मिलते, लेकिन अगर काम सच्चा है तो लोग जुड़ते हैं। हमारे फेस्टिवल में आज भी कई लोग बिना पैसे के काम कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह अच्छा काम है। ———————— ये खबर भी पढ़ें : उत्तराखंड के 8 डिजिटल ‘ब्रांड एंबेसडर्स’: पांडवास-हल्द्वानी की आंटी को पसंद कर रहे लोग, विदेशों में भी अपने कल्चर को प्रमोट कर हे पवन पहाड़ी उत्तराखंड के पहाड़ों में युवाओं के सामने रोजगार और अवसरों की कमी बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। कई युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस स्थिति में नई उम्मीद पैदा की है। व्लॉग्स और यूट्यूब चैनल्स के जरिए युवा न सिर्फ अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखा रहे हैं, बल्कि पहाड़ों में बने रहने और अपनी संस्कृति को जीवित रखने का रास्ता भी तलाश रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
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देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हाथरस, संभल और नोएडा में देर रात आंधी के साथ बारिश हुई। मथुरा में तेज आंधी से सड़क पर लगे होर्डिंग गिर गए। कई जगह पेड़ और बिजली के पोल भी उखड़ गए। मौसम विभाग ने आज यानी प्रदेश के 23 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। 6 जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई है। राजस्थान के सीकर में लगातार दूसरे दिन तेज बरसात के साथ ओले गिरे हैं। आंधी-बारिश के कारण हुए हादसे में जैसलमेर में दो भाइयों की मौत हो गई। उत्तराखंड के ज्यादातर हिस्सों में बारिश जारी है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं चारों धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में गुरुवार सुबह बर्फबारी हुई, जिससे धामों के आसपास के क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर में ढक गए। हिमाचल प्रदेश में अटल टनल रोहतांग समेत ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और राज्य के मैदानी और निचले इलाकों में गुरुवार दोपहर एक बजे के बाद से बारिश हो रही है। ताजा बर्फबारी के बाद अटल टनल के लिए केवल फोर बाय फोर व्हीकल ही भेजे जा रहे हैं। मनाली में बीते 24 घंटे के दौरान सबसे ज्यादा 53.0 मिलीमीटर और चंबा के तीसा में 33.0 मिलीमीटर तक बादल बरस चुके हैं। देशभर से मौसम की तस्वीरें… अगले दो दिन मौसम का हाल
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देश के ऊर्जा क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव हुआ है। जनवरी, 2026 तक भारत की स्थापित विद्युत क्षमता 520.51 गीगावाट तक पहुंच गई है। साथ ही, बिजली की कमी वित्त वर्ष 2014 के 4.2 फीसदी से घटकर दिसंबर, 2025 तक मात्र 0.03 फीसदी रह गई, जो आपूर्ति की पर्याप्तता में एक महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है। 1.85 लाख करोड़ के निवेश से 18,374 गांवों का विद्युतीकरण और 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन देना संभव हुआ। स्मार्ट मीटर लगाने से कार्यक्षमता और पारदर्शिता बढ़ी है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा खासकर सौर ऊर्जा में तेजी से हुई बढ़ोतरी ने नवीकरणीय स्रोतों को बिजली मांग का रिकॉर्ड हिस्सा पूरा करने में सक्षम बनाया है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए विश्वसनीय, किफायती और सार्वभौमिक बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करना एक तकनीकी चुनौती एवं गवर्नेंस की उपलब्धि, दोनों है। आपूर्ति की औसत लागत (एसीएस) व प्राप्त औसत राजस्व (एआरआर) के बीच का अंतर वित्त वर्ष 2025 में 0.78 रुपये प्रति यूनिट से तेजी से घटकर 0.06 रुपये प्रति यूनिट रह गया है।
उत्पादन क्षमता में वृद्धि
2025-26 के दौरान (31 जनवरी, 2026 तक) सभी स्रोतों से रिकॉर्ड 52,537 मेगावाट की उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इसमें से 39,657 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त हुई, जिसमें 34,955 मेगावाट सौर ऊर्जा और 4,613 मेगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। यह एक ही वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि है। इसने 2024-25 में हासिल किए गए 34,054 मेगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह वृद्धि देश की कुल स्थापित क्षमता में 11 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी को दर्शाती है।
पारंपरिक ईंधन पर घटी निर्भरता
एक दशक पहले, बिजली की कमी आर्थिक गतिविधियों और दैनिक जीवन के लिए बाधा बनी हुई थी, लेकिन 2025-26 में भारत ने सफलतापूर्वक 242.49 गीगावाट बिजली की पीक मांग को पूरा किया। डीजल जनरेटर और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता घटी है, जिससे लागत में कमी आई है।
सार्वभौमिक पहुंच
ग्रामीण भारत में औसत दैनिक आपूर्ति वित्त वर्ष 2014 के 12.5 घंटे से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 22.6 घंटे हो गई। शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति 22.1 घंटे से बढ़कर 23.4 घंटे हो गई। भारत में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत भी 2024-25 में बढ़कर 1,460 किलोवाट-घंटा हो गई, जो 2013-14 के 957 किलोवाट-घंटा की तुलना में 503 किलोवाट-घंटा अधिक है।
प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत ऊर्जा यात्रा के अहम मोड़ पर: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक निवेशकों को बिजली क्षेत्र में निवेश करने के लिए बृहस्पतिवार को आमंत्रित किया और उनसे भारत में निर्माण, निवेश, नवाचार एवं विस्तार करने का आग्रह किया। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट-2026 में केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने मोदी का लिखित संदेश पढ़ा, जिसमें पीएम ने कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अपनी ऊर्जा यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।
पीएम मोदी ने कहा, मुझे विश्वास है कि यह शिखर सम्मेलन सार्थक संवाद एवं स्थायी साझेदारियों को बढ़ावा देगा, जो भारत की वृद्धि को ऊर्जा प्रदान करेंगी। इस सम्मेलन का उद्देश्य पूरे बिजली और ऊर्जा तंत्र को एक मंच पर लाना है, ताकि विकास और जीवन स्तर सुधार के लिए साझा मार्ग तैयार किया जा सके। यह विकास को ऊर्जा प्रदान करने एवं स्थिरता लाने, वैश्विक स्तर पर जुड़ने व 2047 तक विकसित भारत बनाने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के हमारे साझा संकल्प को दर्शाता है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर खुले
शांति अधिनियम-2025 परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर खोलता है, जबकि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना विकेंद्रीकृत उत्पादन एवं टिकाऊ खपत को बढ़ावा दे रही है। वितरण सुधार एवं दक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जिससे वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद मिली है। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य
पीएम ने कहा कि 50 फीसदी से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता पहले ही हासिल की जा चुकी है और 2030 तक 500 गीगावाट का स्पष्ट लक्ष्य है। वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड जैसी पहल वैश्विक सहयोग के हमारे दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
भारत सरकार ईरान युद्ध के कारण चुनौतियां झेल रहे निर्यातकों को 497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज देगी। इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय ने रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना शुरू की। इसका लाभ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत, ओमान, ईरान, इस्राइल, यमन, सऊदी अरब, बहरीन व ईराक सामान भेज रहे निर्यातकों या वहां से होकर गुजरने वाली खेप पर मिलेगा।
निर्यातकों को नई खेप भेजने के लिए 95 फीसदी बीमा कवरेज मिलेगा। इसके अलावा भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) के दायरे से बाहर वाले निर्यातकों को अतिरिक्त माल भाड़े व बीमा लागत का 50 फीसदी तक प्रतिपूर्ति होगी। सरकार ने ईसीजीसी निगम को सत्यापन, दावा प्रसंस्करण, वितरण और निगरानी व निर्यात ऋण जोखिम कवर प्रदान करने का जिम्मा सौंपा है।
17-18 क्षेत्रों के निर्यातकों को मिलेगी मदद
सरकार ने ईरान युद्ध के कारण चुनौतियां झेल रहे देश के निर्यातकों को राहत देने के लिए बृहस्पतिवार को 497 करोड़ रुपये के खर्च वाली रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना शुरू की। वाणिज्य मंत्रालय में सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत यह नई योजना विशेष रूप से उन 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों के निर्यातकों पर केंद्रित है, जो संघर्ष से प्रभावित हुए हैं।
इसका मकसद उनकी चुनौतियों को कम करना है। सचिव ने बताया, भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नियुक्त करते हुए राहत योजना के तहत पैकेज में निर्यात दायित्वों का स्वचालित विस्तार, लॉजिस्टिक संबंधी सहायता और खेप में देरी को प्रबंधित करने के लिए संभावित वित्तीय उपाय शामिल किए गए हैं।
इन निर्यातकों को मिलेगी राहत
यह योजना मुख्य रूप से उन खेप पर लागू होगी, जिनकी आपूर्ति संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इस्राइल और यमन जैसे देशों से होती है या जो वहां से होकर गुजरते हैं। सचिव ने बताया, विभिन्न सरकारी विभागों को मिलाकर एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया गया है। यह माल ढुलाई की स्थिति के आधार पर बदलते हालात के आकलन के लिए प्रतिदिन बैठक करेगा।
निर्यातकों को तीन तरह से मिलेगी मदद
इस योजना के तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहले हिस्से के तहत निर्यात दायित्व विस्तार शामिल है। अग्रिम अनुमति और ईपीसीजी अनुमति (जो एक मार्च से 31 मई, 2026 के बीच देय हैं) का स्वतः विस्तार 31 अगस्त तक बिना किसी जुर्माने के किया जाएगा। यह 14 फरवरी से 15 मार्च तक की तत्काल एक माह की अवधि में ईसीजीसी के जरिये पहले से बीमित खेपों की सुरक्षा करता है। दूसरे हिस्से का उद्देश्य 16 मार्च से 15 जून तक तीन माह की अवधि में आगामी निर्यात खेपों के लिए ईसीजीसी कवरेज को प्रोत्साहित करना और सुगम बनाना है।
तीसरा हिस्सा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को अधिभार के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह 14 फरवरी से 14 मार्च तक एक महीने की अवधि में असाधारण ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति करता है। यह उन एमएसएमई निर्यातकों पर लागू होता है, जिन्होंने ईसीजीसी कवरेज नहीं लिया है।
ऊर्जा से जुड़ीं जानकारियां गोपनीयता के दायरे से बाहर
दूसरी ओर पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी जानकारियों को गोपनीयता के दायरे से बाहर कर दिया है। ऊर्जा डाटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के रूप में वर्गीकृत करने से अब तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी सभी इकाइयों को उत्पादन से लेकर आयात तक की विस्तृत परिचालन जानकारी देना जरूरी होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की रिफाइनरियों, एलएनजी आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरकों और पेट्रो रसायन कंपनियों पर लागू होगा।
सरकार ने यह कदम गैस और एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ने के बीच उठाया है। आदेश का मकसद आपूर्ति संबंधी बाधाओं पर त्वरित कदम उठाने, बिजली, उर्वरक और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है। ब्यूरो
आदेश में यह: पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से 18 मार्च को आदेश के अनुसार, सार्वजनिक से लेकर निजी क्षेत्रों की तेल व गैस कंपनियों को उत्पादन, आयात, भंडार स्तर और खपत से संबंधित आंकड़े और जानकारियां देना अनिवार्य होगा। इससे भारत की आपूर्ति शृंखला की निगरानी करने, बचे भंडार का प्रबंधन करने और वैश्विक झटकों का जोखिम को कम करने की क्षमता मजबूत होगी।
नई दिल्ली/गांधीनगर8 मिनट पहले
सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ दायर एक फाउंडेशन की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वनतारा में किसी भी तरह के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
वनतारा के खिलाफ ये याचिका करणार्थम विरम नाम की एक फाउंडेशन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और अन्य को निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें वनतारा पर जानवरों से संबंधित कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने पिछले साल इसी तरह की एक PIL खारिज कर दी थी। अदालत ने न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली अपनी विशेष जांच टीम (SIT) की वनतारा को दी गई क्लीन चिट को स्वीकार कर लिया था। फाउंडेशन की याचिका पर न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने SIT की रिपोर्ट को सही ठहराया।

कोर्ट ने ये भी कहा…
करणार्थम विरम फाउंडेशन की याचिका में 4 मांगे थीं…
SIT ने 12 सितंबर 2025 को रिपोर्ट सौंपी थी
4 सदस्यीय SIT का नेतृत्व पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने किया था और टीम में जस्टिस राघवेंद्र चौहान (पूर्व चीफ जस्टिस, उत्तराखंड व तेलंगाना HC), पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल थे।
SIT ने 12 सितंबर को रिपोर्ट सौंप दी थी। कोर्ट ने SIT की सराहना की और कहा कि समिति को मानदेय भी दिया जाए।
SIT ने 5 पॉइंट्स पर जांच की
हथिनी माधुरी की शिफ्टिंग के बाद विवाद

हथिनी माधुरी 1992 से स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में रह रही थी।
16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हथिनी माधुरी को वनतारा में शिफ्ट किया जाए। यह आदेश PETA इंडिया की ओर से हथिनी की सेहत, गठिया और मानसिक तनाव को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद दिया गया था।
इससे पहले दिसंबर 2024 में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हथिनी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उसे गुजरात के वनतारा पशु अभयारण्य में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। फिर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। यह मामला 2023 से चल रहा है।
माधुरी को वनतारा शिफ्ट किए जाने पर कोल्हापुर में जुलाई के आखिरी हफ्ते में विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने उसको वापस लाने के लिए हस्ताक्षर किए। धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
14 अगस्त: कोर्ट ने याचिका में वनतारा को पक्षकार बनाने को कहा
माधुरी को वापस लाने वाली याचिका पर पहली सुनवाई 14 अगस्त को हुई थी। इस दौरान जस्टिस पंकज मित्तल और पीबी वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सीआर जया सुकीन से कहा था कि वह वनतारा पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि उसे याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल ही नहीं किया गया है।
अदालत ने उन्हें वनतारा को पक्षकार बनाने और फिर मामले में लौटने को कहा, साथ ही मामले की सुनवाई की तारीख 25 अगस्त तय की। इससे पहले CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ 11 अगस्त को हथिनी को वनतारा भेजने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई को सहमत हुई थी।

नांदणी जैन मठ में पूजा कर माधुरी को विदाई दी गई थी।
जैन मठ में 32 साल से रह रही थी
कोल्हापुर के नांदणी गांव के जैन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में माधुरी नाम की हथिनी को 1992 में लाया गया था। इस जैन मठ में 700 सालों से ये परंपरा है कि यहां हाथी पाला जाता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां माधुरी हथिनी को तब लाया गया था, जब वह सिर्फ 4 साल की थी। वह यहां 32 सालों से रह रही थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी के वनतारा को क्लीनचिट दी:कहा- जानवरों की खरीद-बिक्री कानूनी; जैन मठ से हथिनी की शिफ्टिंग पर विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को कहा, ‘जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है।’ इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। पूरी खबर पढ़ें…