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The Bonus Market Update: बढ़त के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार; सेंसेक्स 790 अंक चढ़ा, निफ्टी 23200 के पार


भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 790.56 अंक या 1.07% बढ़कर 74,997.80 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 250.80 अंक या 1.09% बढ़कर 23,252.95 अंक पर आ गया।

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Biz Updates: भारत-नॉर्वे ने मजबूत किए रिश्ते; कतर पर मिसाइल हमले से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया, जानें अपडेट


उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत नॉर्वे के साथ अपनी साझेदारी को अहम मानता है और दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, बदलते भू-राजनीतिक हालात का सामना करने और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सार्थक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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गोयल ने गुरुवार को नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे के साथ वर्चुअल बातचीत की। बातचीत के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह चर्चा रचनात्मक रही और वह WTO की आगामी मंत्रीस्तरीय बैठक को सफल बनाने के लिए साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं।

उन्होंने लिखा कि भारत नॉर्वे के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देता है। हम द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य से निपटने और WTO में सार्थक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे ने भी बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि WTO सुधारों के लिए बतौर फसिलिटेटर वह प्रमुख सदस्य देशों से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह कैमरून में होने वाले 14वें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन से पहले यह संवाद अहम है।



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धोनी की कप्तानी में पर्पल कैप जीतने वाले 3 धुरंधर, 6 साल से विकेटों के लिए तरस रहे CSK के गेंदबाज


Cricket

oi-Naveen Sharma

IPL 2026: आईपीएल की चकाचौंध में ऑरेंज कैप (सर्वाधिक रन) का शोर अक्सर ज्यादा होता है, लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने हमेशा यह साबित किया है कि मैच बल्लेबाज जिताते हैं, पर टूर्नामेंट गेंदबाज। सीएसके के शानदार इतिहास में अब तक केवल तीन ऐसे जांबाज गेंदबाज हुए हैं, जिन्होंने अपनी उंगलियों के जादू से ‘पर्पल कैप’ पर कब्जा जमाया।

दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों ही गेंदबाजों की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। आइए जानते हैं धोनी के उन तीन हथियारों के बारे में जिन्होंने आईपीएल के अलग-अलग सीजनों में विकेटों का अंबार लगा दिया था।

csk

ड्वेन ब्रावो

जब भी आईपीएल में डेथ ओवर्स की गेंदबाजी और चतुर स्लोअर बॉल्स की बात होगी, ड्वेन ब्रावो का नाम सबसे ऊपर आएगा। ब्रावो न सिर्फ सीएसके के, बल्कि आईपीएल के सबसे बड़े एंटरटेनर रहे हैं। उन्होंने साल 2013 में पहली बार पर्पल कैप जीतकर दुनिया को चौंका दिया था। उस सीजन में ब्रावो ने 32 विकेट झटके थे, जो कई सालों तक एक अटूट रिकॉर्ड बना रहा। ब्रावो की भूख यहीं नहीं रुकी। दो साल बाद, 2015 में उन्होंने एक बार फिर 27 विकेट लेकर दूसरी बार पर्पल कैप अपने नाम की। वह आईपीएल के इतिहास में दो बार यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले गेंदबाज बने थे।

मोहित शर्मा

साल 2014 एक ऐसे गेंदबाज के नाम रहा जिसने अपनी सादगी और सटीक लाइन-लेंथ से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। हरियाणा के मोहित शर्मा को धोनी ने पहचाना और उन पर भरोसा जताया। मोहित ने उस भरोसे को सही साबित करते हुए 16 मैचों में 23 विकेट चटकाए।

इमरान ताहिर

क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि 40 की उम्र के बाद शरीर साथ छोड़ देता है, लेकिन इमरान ताहिर ने इस बात को मजाक साबित कर दिया। साल 2019 में सीएसके की पीली जर्सी पहनकर ताहिर ने जो करिश्मा किया, उसे भूलना नामुमकिन है। उन्होंने उस सीजन में 26 विकेट झटके और 40 साल की उम्र में पर्पल कैप जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बने।



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Rupee Fall: रुपया डॉलर के मुकाबले 93.53 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, एक ही दिन में 64 पैसे टूटा


शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 64 पैसे टूटकर 93.53 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। विदेशी कोषों की लगातार निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव देखा गया। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिससे रुपये में यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.92 पर खुला और जल्द ही पहली बार 93 के स्तर को पार कर गया। पूरे सत्र के दौरान इसमें गिरावट जारी रही और अंततः यह पिछले बंद भाव से 64 पैसे गिरकर 93.53 पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया 49 पैसे गिरकर 92.89 के अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। गुरुवार को गुड़ी पड़वा के कारण विदेशी मुद्रा बाजार बंद थे। विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति निवेशकों की धारणा को कमजोर कर रही है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि विदेशी कोषों की लगातार निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के “दोहरे झटके” से भारतीय रुपये में गिरावट आई है। परमार ने यह भी बताया कि भू-राजनीतिक अस्थिरता अल्पकालिक धारणा के लिए एक प्रमुख कारक बनी हुई है। इस बीच, छह मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.37 फीसदी बढ़कर 99.60 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.03 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 108.62 डॉलर प्रति बैरल पर था। इन सभी कारकों ने रुपये पर भारी दबाव डाला।

रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण क्या हैं?

विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने बताया कि ईरान संघर्ष के तीसरे सप्ताह ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान और ओमान के बीच स्थित ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के बड़े पैमाने पर बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि देखी जा रही है। इससे व्यापक मुद्रास्फीति का डर पैदा हो रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के जोखिम ऊर्जा लागत को बढ़ा रहे हैं, जिससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। इन वैश्विक कारकों का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है।

घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को क्या हुआ?

घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर, सेंसेक्स गुरुवार की गिरावट से उबरकर 325.72 अंक या 0.44 फीसदी बढ़कर 74,532.96 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 112.35 अंक या 0.49 फीसदी बढ़कर 23,114.50 अंक पर पहुंच गया। हालांकि, एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध आधार पर 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी कोषों की यह लगातार निकासी रुपये पर दबाव का एक प्रमुख कारण बनी हुई है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि 13 मार्च को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब डॉलर घटकर 709.759 अरब डॉलर रह गया। इससे पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह में कुल भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर हो गया था। हालांकि, 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान यह कोष 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। भंडार में यह गिरावट भी रुपये पर अप्रत्यक्ष दबाव डालती है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी से बाजार में रुपये की आपूर्ति पर असर पड़ता है।





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Gold-Silver Price: चांदी की कीमतों में करीब 7000 रुपये का उछाल; सोना ₹1.48 लाख पर पहुंचा, जानें ताजा अपडेट


Sone Chandi ka Aaj ka Rate:  सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने फिर से बुलियन में खरीदारी बढ़ाई। चांदी की कीमत 6920 रुपये बढ़कर 2.38 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 2860 रुपये बढ़कर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि कई दिनों की गिरावट के बाद यह उछाल देखने को मिल रहा है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, अप्रैल डिलीवरी के लिए पीले धातु की कीमत में 1,914 रुपये या 1.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 10 ग्राम के लिए 1,46,868 रुपये पर पहुंच गई।

IBJA डेटा क्या संकेत देता है?

इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 27 फरवरी 2026 को सोना ₹1,59,097 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,67,900 प्रति किलो के स्तर पर थी। इसके अगले ही दिन युद्ध की शुरुआत हुई और तब से बाजार में गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। यह दर्शाता है कि इस बार युद्ध के बावजूद बाजार की पारंपरिक दिशा बदल गई है।

क्यों टूटी सोने की चमक?

आम तौर पर वैश्विक तनाव के दौरान सोने को सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। इसके पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं-


  • मार्जिन बढ़ने से ट्रेडिंग महंगी हो गई, जिससे सट्टेबाजी में कमी आई।

  • शेयर बाजार में नुकसान की भरपाई के लिए निवेशक सोना बेच रहे हैं।

  • रिकॉर्ड तेजी के बाद नई खरीद में कमी, जिससे बाजार में ठंडापन आया।

  • मजबूत डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय मांग घटी।

  • निवेशकों की मनोवृत्ति में बदलाव, कैश निकालने के लिए बिकवाली बढ़ी।



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LPG Crisis: आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 लागू, तेल और गैस कंपनियों को डेटा साझा करने का आदेश


पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेल और गैस के वैश्विक संकट के चलते सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 को लागू कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस के उत्पादन, प्रसंस्करण, शोधन, भंडारण, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और उपभोग से जुड़ी सभी कंपनियों को सरकार के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) में ताजा डेटा साझा करना अनिवार्य हो गया है। 

तेल और गैस कंपनियों को अपना डेटा सरकार के साथ करना होगा साझा

पीपीएसी तेल मंत्रालय का डेटा इकट्ठा करने वाला विभाग है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार, पीपीएसी को सूचनाओं को इकट्ठा करने, संकलन करने, रखरखाव करने और विश्लेषण करने वाली एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इससे तेल मंत्रालय को आपात स्थिति में योजना बनाने में मदद मिलेगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाता है और इसके उल्लंघन पर जेल की सजा भी हो सकती है। 

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम? 

आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह शक्ति देता है कि वे नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम तौर पर चीजों की कमी पैदा होने से रोके। एक तरह से यह कानून, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मददगार है। 

इस कानून की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार जरूरी चीजों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। सरकार स्टॉक सीमा लगा सकती है और व्यापार को भी विनयमित कर सकती है। कीमतें तय कर सकती है और जमाखोरी पर रोक लगा सकती है। इस कानून की धारा 5 के तहत केंद्र सरकार धारा 3 के तहत मिलने वाली शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप सकती है, ताकि जमीनी स्तर पर इस कानून को लागू किया जा सके। 

ये भी पढ़ें- ईरान युद्ध का असर: बोतलबंद पानी पीना महंगा, 11 फीसदी तक बढ़ी कीमत; प्लास्टिक लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव

भारत विभिन्न स्त्रोतों से कर रहा तेल-गैस का आयात

भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति की कमी को काफी हद तक पश्चिम एशिया से विविध स्रोतों के माध्यम से पूरा कर रहा है। यह वेनेजुएला, रूस और अमेरिका सहित लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा, यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है।



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धामी मंत्रिमंडल का विस्तार: 10 बजे लोकभवन में होगा शपथ ग्रहण, जानिए किन विधायकों को आया अब तक फोन


Uttarakhand

oi-Pavan Nautiyal

Dhami Cabinet Expansion उत्तराखंड में आज धामी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। जिसकी आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी गई है। सूचना विभाग से मिली जानकारी के अनुसार लोकभवन में आज सुबह 10 बजे उत्तराखंड सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का शपथ ग्रहण है।

सूचना विभाग ने बताया कि ख़राब मौसम को देखते हुए कार्यक्रम को सीमित किया गया है। जिन विधायकों को अब तक लोकभवन से बुलाया आया है। उनमें अब तक मिली जानकारी के अनुसार देहरादून के राजपुर से विधायक खजानदास को सुबह साढ़े 9 बजे लोकभवन बुलाया गया है।

Dhami Cabinet Expansion Swearing-in ceremony 10 am Lok Bhavan which MLA have received calls list

खजानदास दलित चेहरा

खजानदास दलित चेहरा हैं और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। धामी सरकार में दलित चेहरे चंदन राम दास को मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उनके निधन के बाद ये सीट खाली चल रही है। ऐसे में खजानदास को जगह दी जा रही है। बागेश्वर जिले की खाली सीट को भी भरने के लिए बागेश्वर जिले के कपटकोट से विधायक सुरेश गड़िया को भी शपथ ग्रहण का बुलावा आ गया है।

रूद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी

रूद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी को भी फोन आने की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा हरिद्वार, नैनीताल जिले को भी प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। जिसमें हरिद्वार से मदन कौशिक और दीवान सिंह बिष्ट नैनीताल का नाम बताया जा रहा है। जिनके नाम की पुष्टि अभी आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है।

सभी समीकरणों को साधने की कोशिश

बता दें कि सीएम धामी चुनावी साल में विधायकों के जरिए ये संदेश देने जा रही है कि सरकार ने सभी समीकरणों को साधने की कोशिश की है। अब तक चंपावत, पौड़ी, देहरादून, अल्मोड़ा, टिहरी और उधमसिंह नगर जिले को ही प्रतिनिधित्व मिला है। जिन जिलों को अब तक प्रतिनिधित्व सरकार में नहीं मिला है, उनमें चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी शामिल है।

दायित्वधारियों के कई पद खाली

हालांकि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट चमोली जिले से आते हैं। जिन जिलों में समीकरण साधने की कोशिश रह जाएगी वहां दायित्वधारियों को भी एडजस्ट करने की कोशिश कर संतुलित करने की बात की जा रही है। निगमों, बोर्ड व आयोगों में अभी दायित्वधारियों के कई पद खाली हैं। सूत्रों के अनुसार अब जल्द ही दो दर्जन और पदों पर दायित्वधारी बनाए जाएंगे।



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Crude Oil Price: कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल, आपके शहर में आज क्या है LPG, Petrol -Diesel के दाम?


Business

oi-Ankur Sharma

Crude Oil Price Today 20 march: अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच कच्चे तेल के दाम में आग लग गई है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें $108 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं; हालांकि, मार्च की शुरुआत से अब तक पेट्रोल और डीज़ल की घरेलू खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

7 मार्च को घरेलू LPG सिलेंडरों की कीमतों में हुई ₹60 की बढ़ोतरी के साथ घरेलू बजट अभी भी तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल 7 मार्च के बाद से सिलेंडर के दाम स्थिर हैं।

Crude Oil Price Today

Fuel Prices Delhi: दिल्ली में आज ईंधन की कीमतें (20 मार्च, 2026)

  • पेट्रोल प्रति लीटर ₹94.77
  • डीज़ल प्रति लीटर ₹87.67
  • CNG (IGL) प्रति किलोग्राम ₹77.09
  • घरेलू LPG (14.2 किलोग्राम) प्रति सिलेंडर ₹913.00
  • व्यावसायिक LPG (19 किलोग्राम) प्रति सिलेंडर ₹1,884.50

City-wise Fuel Price: आपके शहर में क्या है पेट्रोल-डीजल के दाम

बड़े शहरों के बीच खुदरा कीमतों में अंतर का मुख्य कारण राज्य-स्तरीय वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) हैं।

मुंबई में आज ईंधन की कीमतें (20 मार्च, 2026)

  • पेट्रोल प्रति लीटर ₹103.54
  • डीज़ल प्रति लीटर ₹90.03
  • CNG (IGL) प्रति किलोग्राम ₹77.00
  • घरेलू LPG (14.2 किलोग्राम) प्रति सिलेंडर ₹912.00

कोलकाता में आज ईंधन की कीमतें (20 मार्च, 2026)

  • पेट्रोल प्रति लीटर ₹105.41
  • डीज़ल प्रति लीटर₹92.02
  • CNG (IGL) प्रति किलोग्राम ₹93.50
  • घरेलू LPG (14.2 किलोग्राम) प्रति सिलेंडर ₹939.00

चेन्नई में आज ईंधन की कीमतें (20 मार्च, 2026)

  • पेट्रोल प्रति लीटर ₹101.06
  • डीज़ल प्रति लीटर₹92.48
  • CNG (IGL) प्रति किलोग्राम ₹91.50
  • घरेलू LPG (14.2 किलोग्राम) प्रति सिलेंडर ₹928.50

क्या ईंधन की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं?

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर संकट लंबा चला तो $150-$180 तक भी जा सकता है,भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतें सीधे असर डालती हैं। खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियाँ (OMCs) वैश्विक उतार-चढ़ाव का बोझ खुद उठा रही हैं। सरकार महंगाई के दबाव को रोकना चाहती है, खासकर मौजूदा वैश्विक अशांति को देखते हुए।

Fuel Price update:क्या बढ़ेंगे ईधन के दाम?

अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत लंबे समय तक $110-$115 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो OMCs को लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है। पिछली बार कीमतों में बड़ा बदलाव तब हुआ था, जब क्रूड की कीमत लगातार $100 के पार चली गई थी।



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ईरान युद्ध वैश्विक बाजार पर भारी: वॉल स्ट्रीट धड़ाम, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदें टूटने से नरमी


अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान के युद्ध के कारण इस साल फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। इससे अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया के इस भू-राजनीतिक संकट ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है और निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

शेयर बाजार का हाल और प्रमुख आंकड़े

वॉल स्ट्रीट पर शुक्रवार को भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। प्रमुख सूचकांक एसएंडपी 500  0.9 प्रतिशत गिर गया, जो इसकी लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट है और पिछले एक साल में सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला है। इसके साथ ही, डाऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 285 अंक (0.6 प्रतिशत) टूट गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 1.2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई। 

बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्याज दरों पर असर

शेयर बाजारों में इस गिरावट का एक बड़ा कारण बॉन्ड मार्केट में यील्ड का तेजी से बढ़ना है। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड युद्ध से पहले के 3.97 प्रतिशत से उछलकर 4.37 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं, फेडरल रिजर्व के अनुमानों को ट्रैक करने वाली दो-वर्षीय यील्ड 3.79 प्रतिशत से बढ़कर 3.92 प्रतिशत हो गई है। यील्ड में इस उछाल से अमेरिकी परिवारों और कंपनियों के लिए कर्ज (जैसे मॉर्गेज) लेना महंगा हो जाएगा, जो अंततः अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहे थे और युद्ध शुरू होने से पहले व्यापारियों को भी इस साल कम से कम दो रेट कट की उम्मीद थी। लेकिन तेल और गैस की कीमतों में लंबे समय तक उछाल और महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण, व्यापारियों ने दर कटौती का दांव वापस ले लिया है। स्थिति यह है कि कुछ विशेषज्ञ 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जता रहे हैं। फेडरल रिजर्व के अलावा यूरोप, जापान और यूके के केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखा है।

कच्चे तेल का संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान ने अपने दुश्मनों के लिए ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। यह एक बेहद अहम जलमार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। हालांकि शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की स्थिरता आई, लेकिन ब्रेंट क्रूड 0.3 प्रतिशत बढ़कर 109.02 डॉलर और अमेरिकी क्रूड 95.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गौरतलब है कि युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर था। 

कॉरपोरेट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रदर्शन


  • सुपर माइक्रो कंप्यूटर: इस अमेरिकी कंपनी के शेयरों में 28 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। अमेरिकी सरकार ने कंपनी के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष और दो अन्य पर उन्नत एनवीडिया चिप्स वाले सर्वर चीन में तस्करी करने का आरोप लगाया है। कंपनी ने आरोपियों को छुट्टी पर भेज दिया है और जांच में सहयोग कर रही है।

  • फेडेक्स: उम्मीद से बेहतर तिमाही मुनाफे के कारण लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडेक्स के शेयर 2.2 प्रतिशत चढ़ गए। 

  • वैश्विक सूचकांक: वॉल स्ट्रीट के बाहर, गुरुवार की भारी गिरावट के बाद यूरोप के बाजारों में और गिरावट आई। चीन के बाजार भी लुढ़क गए, हालांकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.3 प्रतिशत बढ़ने में सफल रहा।

कुल मिलाकर, अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर एक नया संकट खड़ा कर दिया है। केंद्रीय बैंकों के पास अब अर्थव्यवस्थाओं को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करने का विकल्प बेहद सीमित है, जिससे आने वाले समय में वित्तीय बाजारों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।



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प्यार में ये कैसा पागलपन? महेश भट्ट के लिए सड़क पर बिना कपड़ों के दौड़ीं ये फेमस एक्ट्रेस, फिर हुआ दर्दनाक अंत


Entertainment

oi-Purnima Acharya

Parveen Babi: सिनेमा की दुनिया में कई स्टार्स की लव स्टोरी काफी चर्चित रही हैं। इन प्रेम कहानियों का अक्सर जिक्र होता रहता है। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ी एक एक्ट्रेसेस और एक डायरेक्टर के बीच ऐसा प्रेम पनपा कि सारी हदें पार हो गईं। भले ही इस प्रेम कहानी का दुखद अंत हुआ लेकिन इससे जुड़ा एक किस्सा काफी मशहूर हुआ है।

खूबसूरती और स्टारडम की मिसाल थीं परवीन बॉबी
दरअसल हिंदी सिनेमा की लिजेंड्री एक्ट्रेस रह चुकीं परवीन बॉबी अपने प्रेमी डायरेक्टर के लिए सड़क पर बिना कपड़ों के दौड़ गई थीं। हिंदी सिनेमा की लिजेंड्री एक्ट्रेस परवीन बॉबी सिर्फ अपनी शानदार एक्टिंग ही नहीं बल्कि अपनी अद्भुत खूबसूरती के लिए भी जानी जाती थीं।

Parveen Babi

परवीन बॉबी के दीवाने थे बड़े-बड़े स्टार्स

70 और 80 के दशक में परवीन बॉबी का जलवा ऐसा था कि बड़े-बड़े स्टार्स भी उनके दीवाने थे। परवीन बॉबी की पर्सनल लाइफ भी उतनी ही चर्चा में रही थी, खासकर फिल्ममेकर महेश भट्ट के साथ उनके रिश्ते ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

एक्ट्रेस ने हिंदी सिनेमा में निभाए ग्लैमरस और बोल्ड किरदार

-गुजरात के जूनागढ़ में एक मुस्लिम परिवार में जन्मीं परवीन बॉबी का पूरा नाम परवीन सुल्ताना वाली मोहम्मद खांजी बाबी था। उन्होंने साल 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘चरित्र’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। पहली ही फिल्म में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का दिल जीत लिया था।

-इसके बाद परवीन बॉबी ने कई हिट और ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया और देखते ही देखते वह इंडस्ट्री की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल हो गई थीं। परवीन बॉबी ने हिंदी सिनेमा में ग्लैमरस और बोल्ड महिला किरदारों को एक नया आयाम दिया था।

महेश भट्ट और परवीन बॉबी का अफेयर

-महेश भट्ट और परवीन बॉबी का रिलेशनशिप बॉलीवुड के सबसे चर्चित अफेयर्स में गिना जाता है। बताया जाता है कि महेश भट्ट एक्ट्रेस सोनी राजदान से शादी करने से पहले कई सालों तक परवीन बॉबी के साथ सीरियस रिलेशनशिप में रहे थे। दोनों का रिश्ता इतना गहरा था कि वह लिव-इन में भी रहने लगे थे।

-एक इंटरव्यू में महेश भट्ट ने खुलासा किया था कि एक समय ऐसा आया जब डॉक्टर ने उन्हें परवीन बॉबी को छोड़ देने की सलाह दी थी। डॉक्टर का कहना था कि अगर वह सच में परवीन से प्यार करते हैं तो उन्हें उनकी जिंदगी से दूर हो जाना चाहिए। ये सलाह सुनना उनके लिए आसान नहीं था लेकिन हालात ऐसे बन गए थे कि उन्हें ये कठिन फैसला लेना पड़ा था।

खराब मेंटल हेल्थ से जूझ रही थीं परवीन बॉबी

-महेश भट्ट ने बताया कि परवीन बॉबी उस समय खराब मेंटल हेल्थ से जूझ रही थीं और उनका ब्रेकडाउन हो चुका था। डॉक्टर ने महेश भट्ट को बताया था कि परवीन बॉबी स्किजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित हैं।

-महेश भट्ट ने कहा था- उस दौर में मानसिक बीमारी को समझना आसान नहीं था और इसे लेकर जागरूकता भी कम थी। डॉक्टर्स ने मझे बताया था कि परवीन को ठीक होने में काफी समय लगेगा और उनका इलाज भी चुनौतीपूर्ण था।

इलाज के लिए मुंबई से दूर ले गए थे महेश भट्ट

परवीन बॉबी को इंडस्ट्री और तनाव से दूर रखने के लिए महेश भट्ट उन्हें मुंबई से बाहर ले गए थे। महेश भट्ट ने बताया था कि वह परवीन को अच्छे ट्रीटमेंट के लिए बेंगलुरु लेकर गए थे। कोशिश थी कि माहौल बदलने से उनकी हालत में सुधार हो सके लेकिन एक्ट्रेस पर इसका ज्यादा असर नहीं हो पाया था। आखिरकार उन्हें एहसास हुआ कि ये समस्या बार-बार लौटने वाली है।

इलेक्ट्रिक शॉक ट्रीटमेंट की सलाह से परेशान थे महेश भट्ट

-महेश भट्ट ने बताया कि डॉक्टर्स ने परवीन बॉबी को इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ECT) यानी शॉक ट्रीटमेंट देने की सलाह दी थी। हालांकि वह इस इलाज के खिलाफ थे और उन्होंने इसे अपनाने से मना कर दिया था। इस दौरान उन्हें ये भी कहा गया था कि उनकी मौजूदगी ही परवीन बॉबी की हालत के लिए एक वजह बन रही है।

-दरअसल परवीन बॉबी को इस बीमारी के कारण लगता था कि उनको कोई मारने आ रहा है और सभी लोग उनके दुश्मन हैं। महेश भट्ट ने बताया कि वह लगातार परवीन बॉबी का इलाज करवाते रहे लेकिन फायदा होने की बजाय एक्ट्रेस उन पर ही हमला कर देती थीं।

बिना कपड़ों के सड़क पर दौड़ रही थीं परवीन बॉबी

-महेश भट्ट ने बताया कि एक बार वह काम से घर लौटे तो देखा कि परवीन बॉबी चाकू लेकर बैठी हैं। मेश भट्ट ने कहा- मैंने ये सीन देखकर तुरंत परवीन बॉबी को समझाया। इस पर वह मुझे ही गलत समझ बैठीं। इसके बाद वह बाथरूम में चली गईं तो मैं गुस्सा होकर घर से निकल गया।

-महेश भट्ट ने आगे बताया- मैं जब घर से गुस्सा होकर निकला तो परवीन बॉबी मुझे रोकने के लिए सड़क पर दौड़ पड़ी थीं। उन्हें होश नहीं था कि वह बिना कपड़ों के हैं। मैंने जब परवीन को इस हाल में देखा तो घर के अंदर लेकर गया और उसे बैठर समझाया लेकिन हालत सुधरने की बजाय बिगड़ने लगे।

‘परवीन बॉबी की मेंटल हेल्थ खराब होने लगी थी’

-महेश भट्ट ने बताया कि इस घटना के बाद परवीन बॉबी का इलाज कर रहे डॉक्टर ने साफ कहा था कि असली समस्या वह खुद हैं और अगर वह परवीन बॉबी से प्यार करते हैं तो उन्हें उनकी जिंदगी से बाहर निकल जाना चाहिए। आखिरकार उन्होंने भारी दिल से ये फैसला लिया और परवीन बाबी से दूरी बना ली थी।

-परवीन बॉबी की हालत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी थी। उनकी मेंटल हेल्थ बहुत ज्यादा खराब होने लगी थी। उन्होंने खुद को लोगों से काट लिया था। इंडस्ट्री ने भी उनसे दूरी बना ली थी। वह अपने फ्लैट में अकेले रहने लगी थीं और बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया था। एक समय जो एक्ट्रेस हर पार्टी और अवॉर्ड फंक्शन की जान होती थीं, वो अपने घर की चारदीवारी में सिमट गई थीं।

‘अंतिम समय में कोई नहीं था परवीन बॉबी के साथ’

-साल 2005 में जब परवीन बॉबी के फ्लैट के बाहर अखबार और दूध के पैकेट कई दिनों तक पड़े रहे, तब लोगों को शक हुआ। दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर उनका शव मिला था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डायबिटीज के कारण उनके पैर में गैंगरीन हो गया था जो कि सड़ने लगा था। बिस्तर के पास ही एक वीलचेयर पड़ी थी। घर की हालत बिखरी हुई थी।

-पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि परवीन बॉबी ने मौत से पहले 2-3 दिन तक कुछ नहीं खाया था। ऐसे में उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। सबसे दुखद बात ये रही कि अंतिम समय में उनका कोई अपना उनके साथ नहीं था।

-बताया जाता है कि अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के दौरान या उसके बाद परवीन बॉबी के परिवार का कोई सदस्य सामने नहीं आया। आखिरकार महेश भट्ट ने ही एक्ट्रेस के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई थी।

-महेश भट्ट और परवीन बॉबी की ये कहानी सिर्फ एक रिलेशनशिप नहीं बल्कि प्यार, संघर्ष और त्याग की दास्तान है। जहां एक तरफ गहरा प्यार था, वहीं दूसरी ओर हालात ऐसे बने कि दोनों को अलग होना पड़ा था।



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