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Dry Days पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु: चुनाव से पहले शराब पर पूरी तरह बैन, कब-कब बंद रहेंगी दुकानें, क्या है नियम?
हिमालय की गोद में छिपा रोमांच का नया ठिकाना! जहां बर्फीले पहाड़ों के बीच बहता है गर्म पानी
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How to Reach Hiramani Glacier: अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं और पहाड़ों की अनजानी राहों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो बागेश्वर का हीरामणि ग्लेशियर आपके लिए किसी छिपे हुए खजाने से कम नहीं है. समुद्र तल से करीब 3,620 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह ग्लेशियर न सिर्फ अपनी बर्फ की चादर के लिए मशहूर है, बल्कि यहां मिलने वाले गर्म पानी के स्रोत इसे दुनिया के दूसरे ग्लेशियरों से बिल्कुल अलग बनाते हैं. नंदा देवी और नंदा कोट की चोटियों के साये में बसा यह स्थान शांति और रोमांच का एक ऐसा संगम है, जहां पहुंचने के बाद आपकी सारी थकान दूर हो जाएगी.
बागेश्वर: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित रामगंगा घाटी अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती है, लेकिन इसी घाटी में एक ऐसी जगह है जो इन दिनों ट्रेकर्स के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है. हम बात कर रहे हैं ‘हीरामणि ग्लेशियर’ (Heeramani Glaciar) की. समुद्र तल से लगभग 3,620 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह ग्लेशियर अपनी शांति और कुदरती सुंदरता के लिए फेमस है. वरिष्ठ पर्वतारोही भुवन चौबे बताते हैं कि मुनस्यारी के पास और नामिक ग्लेशियर के करीब बसा यह इलाका जब कुमाऊं हिमालय का एक बेहद खूबसूरत हिस्सा है. यहां से नंदा देवी और नंदा कोट जैसी बड़ी चोटियों का नजारा इतना साफ दिखता है कि देखने वाला दंग रह जाए.
रोमांच से भरा है यहां तक पहुंचने का रास्ता
इस ग्लेशियर तक पहुंचना आसान नहीं है, इसके लिए आपको पहाड़ों की कठिन पगडंडियों पर ट्रेकिंग करनी होती है. इस एडवेंचर की शुरुआत गोगिना या नामिक गांव से की जा सकती है. हालांकि रास्ता चुनौतीपूर्ण है, लेकिन रास्ते में मिलने वाले घने जंगल, शोर मचाते झरने और बर्फ की चोटियां इस सफर को यादगार बना देती हैं. सुरक्षा के लिहाज से इस ट्रेक पर स्थानीय गाइड को साथ रखना सबसे अच्छा रहता है.
यात्रा का सही समय और कैसे पहुंचें
अगर आप हीरामणि ग्लेशियर जाने का मन बना रहे हैं, तो बागेश्वर से सड़क मार्ग के जरिए पहले मुनस्यारी पहुंचना होगा. मुनस्यारी खुद अपनी सुंदरता के लिए मशहूर है, जहां से आगे का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है. यहां घूमने के लिए अप्रैल से जून और फिर सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है. इस दौरान मौसम साफ रहता है, जिससे न सिर्फ रास्ते सुरक्षित होते हैं बल्कि हिमालय का नजारा भी साफ दिखाई देता है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
अलवर में अवैध खनन माफिया का आतंक, वन विभाग टीम पर किया जानलेवा हमला, लूटपाट कर हो गए फरार!
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Illegal Mining In Alwar: अलवर के सहाड़ी गांव में अवैध खनन पर कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर माफियाओं ने पथराव कर हमला किया. इतना ही नहीं उन्होंने वन रक्षक से लूटपाट भी की. भयंकर तांडव मचाने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए. यह मामला धोलागढ़ थाने में दर्ज कराया जा चुका है. पुलिस उन्हें ढूंढ रही है. माना जा रहा है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.
अलवर में खनन माफिया ने वन विभाग की टीम पर किया हमला
अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में खनन माफियाओं के हौसले ने हद पार कर दी है. ये इस कदर बेलगाम हो चुके हैं कि अब वे सीधे सरकारी टीमों पर हमला करने लगे हैं. ये किसी से भी नहीं डर रहे. मामला अलवर के कठूमर उपखंड क्षेत्र में सहाड़ी गांव का है. यहां अवैध खनन हो रहा था. इसी के खिलाफ वन विभाग की टीम यहां कार्रवाई करने पहुंची थी. टीम जैसे ही घटनास्थल पर पहुंची कि माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया. इन आरोपियों ने न केवल राजकार्य में बाधा डाली, बल्कि वन रक्षक से मारपीट कर उसका मोबाइल फोन, सरकारी आई-कार्ड और नकदी लूट ली.
अवैध पत्थर से लदी ट्राली रोकने की कोशिश में किया हमला
क्षेत्रीय वन अधिकारी रवि सिंह भाटी के अनुसार, उन्हें इस मामले की गुप्त सूचना मिली. पता चला कि अवैध खनन का काम धड़ल्ले से हो रहा है. इसपर टीम वहीं पहु्ंच गई. टीम ने अवैध पत्थर से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की. लेकिन शायद इस बात की भनक माफियाओं को लग चुकी थी. टीम रोकने की कोशिश कर ही रही थी कि चालक श्याम गुर्जर ट्रैक्टर को और भी तेज रफ्तार में भगाने लगा. लेकिन टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया।
4-5 लोगों ने टीम पर बोल दिया हमला
टीम ने ड्राइवर से पूछताछ करने की कोशिश की. इसी दौरान आरोपी ने अपने साथियों को बुला लिया. कुछ ही देर में सतवीर गुर्जर समेत 4-5 लोग मौके पर पहुंचे. इससे पहले कि टीम उन लोगों से बात कर पाती वे हमलावर हो गए. वन विभाग की टीम के लोगों को सोचने तक का मौका नहीं मिला कि इतने में आरोपियों ने ईंट-पत्थरों की बरसात कर दी. मानों संग्राम छिड़ गया हो.
पत्थर से हमला कर छीन लिया मोबाइल और आई-कार्ड
हमले के दौरान आरोपियों ने वन रक्षक रामवीर सिंह के साथ धक्का-मुक्की की. इसी दौरान आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन, आई-कार्ड और नकदी छीन लिए. वे उन्हें पकड़ने की कोशिश कर ही रहे थे कि इतने में ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित सभ फरार हो गए. मामला इतना गंभीर था कि घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल हो गया.
गिरोह के लोगों के पास है सूचना तंत्र, टीम को घेरकर करते हैं पथराव
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सहाड़ी गांव अवैध खनन के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. यहां सक्रिय गिरोह आपसी सूचना तंत्र के जरिए टीमों को घेर लेते हैं. आरोप है कि इन सभी के पास अवैध हथियार भी हैं. साथ ही में इन्हें किसी-न-किसी का कथित राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है. इन्ही सब के चलते वे बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.
धोलागढ़ थाने में मामला दर्ज
इधर, धोलागढ़ थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी कर्मचारी पर हमला, लूटपाट और राजस्थान वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है. थाना प्रभारी रामजीलाल के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है, लेकिन फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
तमिलनाडु फैक्ट्री ब्लास्ट- मरने वालों की संख्या 25 हुई: इनमें 20 एक ही गांव के; शेड में 4 की जगह 40 मजदूर काम कर रहे थे
तमिलनाडु के विरुधुनगर में रविवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 25 हो गई है। इनमें 20 लोग एक ही गांव के थे। मरने वालों में 22 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। पुलिस के मुताबिक, कई शव इतने बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। गहनों से पहचानने की कोशिश की जा रही है। ब्लास्ट केमिकल मिक्स करने वाले शेड में हुआ, जहां करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे। नियमों के मुताबिक एक शेड में अधिकतम 4 लोगों को ही काम कर सकते है। हादसे में मृत लोगों के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और विरुधुनगर में सड़क जाम कर विरोध शुरू कर दिया। वे हर पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। हादसा मुथुमणिक्कम गांव की वनजा फायरवर्क्स यूनिट में हुआ है। फैक्ट्री मालिक फरार है। जिला कलेक्टर वीपी जयसीलन ने बताया कि फैक्ट्री रविवार को बंद रहने के बावजूद बिना अनुमति के चल रही थी। लड़की बोलीं- मेरी मां ही घर चलाती थीं हादसे में 25 साल से इस फैक्ट्री में काम कर रही 46 साल की इंद्राणी की भी मौत हो गई। उनकी बेटी मधुबाला ने कहा कि मेरी मां ही घर चलाती थीं। पिता दिव्यांग हैं। मैं पेट्रोल पंप पर काम करती हूं, अब भाई की फीस कौन भरेगा? हमें सरकारी नौकरी दी जाए। एक महिला ने बताया कि मेरे पिता और मां दोनों की मौत हो गई। अब हमारे पास इस दुख को झेलने के अलावा कुछ नहीं है। फैक्ट्री के पास के सीरवैक्कारमपट्टी गांव के रंगनाथन ने बताया कि धमाके के साथ काला धुआं आसमान में फैल गया। कुछ भी पहचान में नहीं आ रहा था। हमने शवों को चार-चार करके गाड़ियों में ले जाते देखा। नियमों के खिलाफ हो रहा था काम पटाखा और माचिस निर्माता संघ के जिला अध्यक्ष पीएन देवा ने बताया कि फैक्ट्री को 25 मजदूर रखने की अनुमति थी, लेकिन मौके पर इससे ज्यादा लोग काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक केमिकल मिक्सिंग सुबह 8 से 10 बजे के बीच ही होनी चाहिए, जबकि विस्फोट दोपहर करीब 3 बजे हुआ। इससे साफ है कि मिक्सिंग तय समय से बाहर भी जारी थी। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो नुकसान कम हो सकता था। मौके पर मौजूद विस्फोटक सामान के बार-बार फटने से रेस्क्यू में कई घंटे लग गए। मलबा हटाने के दौरान शाम 7:20 बजे दूसरा धमाका हुआ, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। इनमें 8 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। परिजनों का प्रदर्शन, मालिक की गिरफ्तारी की मांग पीड़ित परिवारों ने सोमवार को सड़कों पर आकर प्रदर्शन किया। सड़क पर बैठकर थोड़ी देर के लिए रोड बंद कर दिया। एसपी एन. श्रीनाथा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया है। फैक्ट्री मालिक और उसके सहयोगियों की तलाश के लिए चार विशेष टीमें गठित की गई हैं। सीएम एमके स्टालिन ने हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं। मंत्रियों को राहत काम की निगरानी के निर्देश दिए हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 23 की मौत:इनमें 16 महिलाएं; रेस्क्यू के दौरान दूसरा ब्लास्ट, बचाव में जुटे 13 लोग घायल तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। पुलिस के मुताबिक, हादसे में 23 लोगों की मौत हुई है। 6 घायलों को ICU में भर्ती कराया गया है। अब तक 19 शवों की पहचान हो चुकी है। इनमें 16 महिलाएं और तीन पुरुष हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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तमिलनाडु फैक्ट्री ब्लास्ट-25 की मौत, 20 एक ही गांव के: मां की मौत के बाद बेटी बोलीं- पिता दिव्यांग, भाई की फीस कौन भरेगा
तमिलनाडु के विरुधुनगर में रविवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 25 हो गई है। इनमें 20 लोग एक ही गांव के थे। मरने वालों में 22 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। पुलिस के मुताबिक, कई शव इतने बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। गहनों के आधार पर उन्हें पहचानने की कोशिश की जा रही है। हादसा मुथुमणिक्कम गांव की वनजा फायरवर्क्स यूनिट में हुआ है। फैक्ट्री मालिक फरार है। जिला कलेक्टर वीपी जयसीलन ने बताया कि फैक्ट्री रविवार को बंद रहने के बावजूद बिना अनुमति के चल रही थी। मौके पर मौजूद विस्फोटक सामान के बार-बार फटने से रेस्क्यू में कई घंटे लग गए। मलबा हटाने के दौरान शाम 7:20 बजे दूसरा धमाका हुआ, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। इनमें 8 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। लड़की बोलीं- मेरी मां ही घर चलाती थीं हादसे में 25 साल से इस फैक्ट्री में काम कर रही 46 साल की इंद्राणी की भी मौत हो गई। उनकी बेटी मधुबाला ने कहा कि मेरी मां ही घर चलाती थीं। पिता दिव्यांग हैं। मैं पेट्रोल पंप पर काम करती हूं, अब भाई की फीस कौन भरेगा? हमें सरकारी नौकरी दी जाए। एक महिला ने बताया कि मेरे पिता और मां दोनों की मौत हो गई। अब हमारे पास इस दुख को झेलने के अलावा कुछ नहीं है। फैक्ट्री के पास के सीरवैक्कारमपट्टी गांव के रंगनाथन ने बताया कि धमाके के साथ काला धुआं आसमान में फैल गया। कुछ भी पहचान में नहीं आ रहा था। हमने शवों को चार-चार करके गाड़ियों में ले जाते देखा। एक शेड में 40 मजदूर काम कर रहे थे पटाखा और माचिस निर्माता संघ के जिला अध्यक्ष पीएन देवा ने बताया कि फैक्ट्री को 25 मजदूर रखने की अनुमति थी, लेकिन मौके पर इससे ज्यादा लोग काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक केमिकल मिक्सिंग सुबह 8 से 10 बजे के बीच ही होनी चाहिए, जबकि विस्फोट दोपहर करीब 3 बजे हुआ। इससे साफ है कि मिक्सिंग तय समय से बाहर भी जारी थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि विस्फोट केमिकल मिक्सिंग शेड में हुआ, जहां करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे। नियमों के मुताबिक एक शेड में अधिकतम 4 लोगों को ही काम कर सकते है। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो नुकसान कम हो सकता था। परिजनों का प्रदर्शन, मालिक की गिरफ्तारी की मांग पीड़ित परिवारों ने सोमवार को सड़कों पर आकर प्रदर्शन किया। सड़क पर बैठकर थोड़ी देर के लिए रोड बंद कर दिया। एसपी एन. श्रीनाथा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया है। फैक्ट्री मालिक और उसके सहयोगियों की तलाश के लिए चार विशेष टीमें गठित की गई हैं। सीएम एमके स्टालिन ने हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं। मंत्रियों को राहत काम की निगरानी के निर्देश दिए हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 23 की मौत:इनमें 16 महिलाएं; रेस्क्यू के दौरान दूसरा ब्लास्ट, बचाव में जुटे 13 लोग घायल तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। पुलिस के मुताबिक, हादसे में 23 लोगों की मौत हुई है। 6 घायलों को ICU में भर्ती कराया गया है। अब तक 19 शवों की पहचान हो चुकी है। इनमें 16 महिलाएं और तीन पुरुष हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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Exclusive: ‘मानहानि के नोटिस से डरकर नहीं हटूंगी पीछे,’ चहल को तानिया चटर्जी का बेबाक जवाब
सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज: सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे
नई दिल्ली4 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की।
सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई PIL मंजूर न की जाए।

याचिकाकर्ता की मांगें
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र के रूप में मान्यता दी जाए।
- भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए।
- नेताजी की जयंती 23 जनवरी 1897 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए। उनके जन्मस्थान (कटक, ओडिशा) को राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाए।
- आजादी का श्रेय उन क्रांतिकारियों को दिया जाए जिन्होंने अहिंसा का पालन नहीं किया, और साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली INA को भी।
- 1947 में भारत की आजादी से जुड़ी असल सच्चाई वाली रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, कि ब्रिटिश लोग भारत छोड़कर क्यों और किन कारणों से गए।
- 1946-1947 के दौरान भारतीय सैनिकों (नौसेना, वायुसेना, थलसेना) और आम नागरिकों के विद्रोह की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।
- नीरा आर्य (INA की पहली महिला जासूस) को ‘राष्ट्र-पुत्री’ घोषित किया जाए।
2 साल पहले भी खारिज हो चुकी याचिका
मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था। साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था। सोमवार को कोर्ट ने ऐसे मुद्दों में पड़ने से साफ इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता के बार-बार ऐसी याचिकाएं दायर करने की आलोचना करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर गृह मंत्रालय के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक प्लेस और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जारी यह निर्देश अनिवार्य नहीं है। सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका समय से पहले दायर की गई है। पढ़ें पूरी खबर…
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