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अलवर में अवैध खनन माफिया का आतंक, वन विभाग टीम पर किया जानलेवा हमला, लूटपाट कर हो गए फरार!


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Illegal Mining In Alwar: अलवर के सहाड़ी गांव में अवैध खनन पर कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर माफियाओं ने पथराव कर हमला किया. इतना ही नहीं उन्होंने वन रक्षक से लूटपाट भी की. भयंकर तांडव मचाने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए. यह मामला धोलागढ़ थाने में दर्ज कराया जा चुका है. पुलिस उन्हें ढूंढ रही है. माना जा रहा है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.

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अलवर में खनन माफिया ने वन विभाग की टीम पर किया हमला

अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में खनन माफियाओं के हौसले ने हद पार कर दी है. ये इस कदर बेलगाम हो चुके हैं कि अब वे सीधे सरकारी टीमों पर हमला करने लगे हैं. ये किसी से भी नहीं डर रहे. मामला अलवर के कठूमर उपखंड क्षेत्र में सहाड़ी गांव का है. यहां अवैध खनन हो रहा था. इसी के खिलाफ वन विभाग की टीम यहां कार्रवाई करने पहुंची थी. टीम जैसे ही घटनास्थल पर पहुंची कि माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया. इन आरोपियों ने न केवल राजकार्य में बाधा डाली, बल्कि वन रक्षक से मारपीट कर उसका मोबाइल फोन, सरकारी आई-कार्ड और नकदी लूट ली.

अवैध पत्थर से लदी ट्राली रोकने की कोशिश में किया हमला
क्षेत्रीय वन अधिकारी रवि सिंह भाटी के अनुसार, उन्हें इस मामले की गुप्त सूचना मिली. पता चला कि अवैध खनन का काम धड़ल्ले से हो रहा है. इसपर टीम वहीं पहु्ंच गई. टीम ने अवैध पत्थर से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की. लेकिन शायद इस बात की भनक माफियाओं को लग चुकी थी. टीम रोकने की कोशिश कर ही रही थी कि चालक श्याम गुर्जर ट्रैक्टर को और भी तेज रफ्तार में भगाने लगा. लेकिन टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया।

4-5 लोगों ने टीम पर बोल दिया हमला
टीम ने ड्राइवर से पूछताछ करने की कोशिश की. इसी दौरान आरोपी ने अपने साथियों को बुला लिया. कुछ ही देर में सतवीर गुर्जर समेत 4-5 लोग मौके पर पहुंचे. इससे पहले कि टीम उन लोगों से बात कर पाती वे हमलावर हो गए. वन विभाग की टीम के लोगों को सोचने तक का मौका नहीं मिला कि इतने में आरोपियों ने ईंट-पत्थरों की बरसात कर दी. मानों संग्राम छिड़ गया हो.

पत्थर से हमला कर छीन लिया मोबाइल और आई-कार्ड
हमले के दौरान आरोपियों ने वन रक्षक रामवीर सिंह के साथ धक्का-मुक्की की. इसी दौरान आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन, आई-कार्ड और नकदी छीन लिए. वे उन्हें पकड़ने की कोशिश कर ही रहे थे कि इतने में ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित सभ फरार हो गए. मामला इतना गंभीर था कि घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल हो गया.

गिरोह के लोगों के पास है सूचना तंत्र, टीम को घेरकर करते हैं पथराव
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सहाड़ी गांव अवैध खनन के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. यहां सक्रिय गिरोह आपसी सूचना तंत्र के जरिए टीमों को घेर लेते हैं. आरोप है कि इन सभी के पास अवैध हथियार भी हैं. साथ ही में इन्हें किसी-न-किसी का कथित राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है. इन्ही सब के चलते वे बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.

धोलागढ़ थाने में मामला दर्ज
इधर, धोलागढ़ थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी कर्मचारी पर हमला, लूटपाट और राजस्थान वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है. थाना प्रभारी रामजीलाल के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है, लेकिन फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं.

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Anand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें



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तमिलनाडु फैक्ट्री ब्लास्ट- मरने वालों की संख्या 25 हुई: इनमें 20 एक ही गांव के; शेड में 4 की जगह 40 मजदूर काम कर रहे थे




तमिलनाडु के विरुधुनगर में रविवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 25 हो गई है। इनमें 20 लोग एक ही गांव के थे। मरने वालों में 22 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। पुलिस के मुताबिक, कई शव इतने बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। गहनों से पहचानने की कोशिश की जा रही है। ब्लास्ट केमिकल मिक्स करने वाले शेड में हुआ, जहां करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे। नियमों के मुताबिक एक शेड में अधिकतम 4 लोगों को ही काम कर सकते है। हादसे में मृत लोगों के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और विरुधुनगर में सड़क जाम कर विरोध शुरू कर दिया। वे हर पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। हादसा मुथुमणिक्कम गांव की वनजा फायरवर्क्स यूनिट में हुआ है। फैक्ट्री मालिक फरार है। जिला कलेक्टर वीपी जयसीलन ने बताया कि फैक्ट्री रविवार को बंद रहने के बावजूद बिना अनुमति के चल रही थी। लड़की बोलीं- मेरी मां ही घर चलाती थीं हादसे में 25 साल से इस फैक्ट्री में काम कर रही 46 साल की इंद्राणी की भी मौत हो गई। उनकी बेटी मधुबाला ने कहा कि मेरी मां ही घर चलाती थीं। पिता दिव्यांग हैं। मैं पेट्रोल पंप पर काम करती हूं, अब भाई की फीस कौन भरेगा? हमें सरकारी नौकरी दी जाए। एक महिला ने बताया कि मेरे पिता और मां दोनों की मौत हो गई। अब हमारे पास इस दुख को झेलने के अलावा कुछ नहीं है। फैक्ट्री के पास के सीरवैक्कारमपट्टी गांव के रंगनाथन ने बताया कि धमाके के साथ काला धुआं आसमान में फैल गया। कुछ भी पहचान में नहीं आ रहा था। हमने शवों को चार-चार करके गाड़ियों में ले जाते देखा। नियमों के खिलाफ हो रहा था काम पटाखा और माचिस निर्माता संघ के जिला अध्यक्ष पीएन देवा ने बताया कि फैक्ट्री को 25 मजदूर रखने की अनुमति थी, लेकिन मौके पर इससे ज्यादा लोग काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक केमिकल मिक्सिंग सुबह 8 से 10 बजे के बीच ही होनी चाहिए, जबकि विस्फोट दोपहर करीब 3 बजे हुआ। इससे साफ है कि मिक्सिंग तय समय से बाहर भी जारी थी। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो नुकसान कम हो सकता था। मौके पर मौजूद विस्फोटक सामान के बार-बार फटने से रेस्क्यू में कई घंटे लग गए। मलबा हटाने के दौरान शाम 7:20 बजे दूसरा धमाका हुआ, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। इनमें 8 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। परिजनों का प्रदर्शन, मालिक की गिरफ्तारी की मांग पीड़ित परिवारों ने सोमवार को सड़कों पर आकर प्रदर्शन किया। सड़क पर बैठकर थोड़ी देर के लिए रोड बंद कर दिया। एसपी एन. श्रीनाथा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया है। फैक्ट्री मालिक और उसके सहयोगियों की तलाश के लिए चार विशेष टीमें गठित की गई हैं। सीएम एमके स्टालिन ने हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं। मंत्रियों को राहत काम की निगरानी के निर्देश दिए हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 23 की मौत:इनमें 16 महिलाएं; रेस्क्यू के दौरान दूसरा ब्लास्ट, बचाव में जुटे 13 लोग घायल तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। पुलिस के मुताबिक, हादसे में 23 लोगों की मौत हुई है। 6 घायलों को ICU में भर्ती कराया गया है। अब तक 19 शवों की पहचान हो चुकी है। इनमें 16 महिलाएं और तीन पुरुष हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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तमिलनाडु फैक्ट्री ब्लास्ट-25 की मौत, 20 एक ही गांव के: मां की मौत के बाद बेटी बोलीं- पिता दिव्यांग, भाई की फीस कौन भरेगा




तमिलनाडु के विरुधुनगर में रविवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 25 हो गई है। इनमें 20 लोग एक ही गांव के थे। मरने वालों में 22 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। पुलिस के मुताबिक, कई शव इतने बुरी तरह जल गए हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। गहनों के आधार पर उन्हें पहचानने की कोशिश की जा रही है। हादसा मुथुमणिक्कम गांव की वनजा फायरवर्क्स यूनिट में हुआ है। फैक्ट्री मालिक फरार है। जिला कलेक्टर वीपी जयसीलन ने बताया कि फैक्ट्री रविवार को बंद रहने के बावजूद बिना अनुमति के चल रही थी। मौके पर मौजूद विस्फोटक सामान के बार-बार फटने से रेस्क्यू में कई घंटे लग गए। मलबा हटाने के दौरान शाम 7:20 बजे दूसरा धमाका हुआ, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। इनमें 8 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। लड़की बोलीं- मेरी मां ही घर चलाती थीं हादसे में 25 साल से इस फैक्ट्री में काम कर रही 46 साल की इंद्राणी की भी मौत हो गई। उनकी बेटी मधुबाला ने कहा कि मेरी मां ही घर चलाती थीं। पिता दिव्यांग हैं। मैं पेट्रोल पंप पर काम करती हूं, अब भाई की फीस कौन भरेगा? हमें सरकारी नौकरी दी जाए। एक महिला ने बताया कि मेरे पिता और मां दोनों की मौत हो गई। अब हमारे पास इस दुख को झेलने के अलावा कुछ नहीं है। फैक्ट्री के पास के सीरवैक्कारमपट्टी गांव के रंगनाथन ने बताया कि धमाके के साथ काला धुआं आसमान में फैल गया। कुछ भी पहचान में नहीं आ रहा था। हमने शवों को चार-चार करके गाड़ियों में ले जाते देखा। एक शेड में 40 मजदूर काम कर रहे थे पटाखा और माचिस निर्माता संघ के जिला अध्यक्ष पीएन देवा ने बताया कि फैक्ट्री को 25 मजदूर रखने की अनुमति थी, लेकिन मौके पर इससे ज्यादा लोग काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक केमिकल मिक्सिंग सुबह 8 से 10 बजे के बीच ही होनी चाहिए, जबकि विस्फोट दोपहर करीब 3 बजे हुआ। इससे साफ है कि मिक्सिंग तय समय से बाहर भी जारी थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि विस्फोट केमिकल मिक्सिंग शेड में हुआ, जहां करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे। नियमों के मुताबिक एक शेड में अधिकतम 4 लोगों को ही काम कर सकते है। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता, तो नुकसान कम हो सकता था। परिजनों का प्रदर्शन, मालिक की गिरफ्तारी की मांग पीड़ित परिवारों ने सोमवार को सड़कों पर आकर प्रदर्शन किया। सड़क पर बैठकर थोड़ी देर के लिए रोड बंद कर दिया। एसपी एन. श्रीनाथा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया है। फैक्ट्री मालिक और उसके सहयोगियों की तलाश के लिए चार विशेष टीमें गठित की गई हैं। सीएम एमके स्टालिन ने हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं। मंत्रियों को राहत काम की निगरानी के निर्देश दिए हैं। ————— ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 23 की मौत:इनमें 16 महिलाएं; रेस्क्यू के दौरान दूसरा ब्लास्ट, बचाव में जुटे 13 लोग घायल तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में रविवार को एक पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। पुलिस के मुताबिक, हादसे में 23 लोगों की मौत हुई है। 6 घायलों को ICU में भर्ती कराया गया है। अब तक 19 शवों की पहचान हो चुकी है। इनमें 16 महिलाएं और तीन पुरुष हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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Exclusive: ‘मानहानि के नोटिस से डरकर नहीं हटूंगी पीछे,’ चहल को तानिया चटर्जी का बेबाक जवाब


Exclusive: ‘मानहानि के नोटिस से डरकर नहीं हटूंगी पीछे,’ चहल को तानिया चटर्जी का बेबाक जवाब | Exclusive: ‘Won’t Back Down Due to Defamation Notice’ Taniya Chatterjee on yuzvendra chahal message issue – Hindi Oneindia



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सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज: सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे


नई दिल्ली4 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की।

सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई PIL मंजूर न की जाए।

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याचिकाकर्ता की मांगें

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र के रूप में मान्यता दी जाए।
  • भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए।
  • नेताजी की जयंती 23 जनवरी 1897 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए। उनके जन्मस्थान (कटक, ओडिशा) को राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाए।
  • आजादी का श्रेय उन क्रांतिकारियों को दिया जाए जिन्होंने अहिंसा का पालन नहीं किया, और साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली INA को भी।
  • 1947 में भारत की आजादी से जुड़ी असल सच्चाई वाली रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, कि ब्रिटिश लोग भारत छोड़कर क्यों और किन कारणों से गए।
  • 1946-1947 के दौरान भारतीय सैनिकों (नौसेना, वायुसेना, थलसेना) और आम नागरिकों के विद्रोह की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।
  • नीरा आर्य (INA की पहली महिला जासूस) को ‘राष्ट्र-पुत्री’ घोषित किया जाए।

2 साल पहले भी खारिज हो चुकी याचिका

मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था। साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था। सोमवार को कोर्ट ने ऐसे मुद्दों में पड़ने से साफ इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता के बार-बार ऐसी याचिकाएं दायर करने की आलोचना करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिक इवेंट्स में वंदेमातरम अनिवार्य नहीं:कहा- जब इसके लिए सजा होने लगेगी, तब विचार करेंगे; याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर गृह मंत्रालय के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक प्लेस और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जारी यह निर्देश अनिवार्य नहीं है। सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका समय से पहले दायर की गई है। पढ़ें पूरी खबर…

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निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प: युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो




युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह गेहूं को जहरीला होने से बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह संघर्ष इसलिए ताकि गुरुद्वारा साहिबान के छकाए जाने वाले लंगर के प्रसादों की पवित्रता बनी रहे। वे लंगर के लिए 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पेस्टिसाइड की जगह स्वाह, खाद की जगह गोबर डालते हैं। शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुद साहिब के निर्देश पर दल के भुजंगी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।

ढैंचा जैसी फसल लगाने से पहले ही मिट्‌टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करते हैं, फिर सड़े गोबर को मिट्टी में मिला देते हैं जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध का प्रबंधन देख रहे बाबा परमिंदरबीर सिंह ने बताया कि जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को बरकरार रखने की सेवा विशेष तौर पर निभा रहे हैं। वही दल के खेती जत्थेदार हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत में ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उन्हें जोत दिया जाता है। इससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन मिलता है। फिर सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाया जाता है। उस पर गेहूं की बिजाई की जाती है। बुवाई के 25-30 दिन बाद हाथों से या छोटे यंत्रों से निराई-गुड़ाई करते हैं। जैसे ही पौधे निकलते हैं तो उनकी जरूरत के मुताबिक स्वाह या नीम के घोल का छिड़काव किया जाता है। ताकि कीड़े न लगें। अगर फसल में काड्डे और कीड़े-मकोड़े दिखे तो ही स्वाह डाली जाती है। कीड़े ज्यादा हों तो 10 तरह की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है। बारिश न हो तो 4-5 बार पानी दिया जाता है। सिंह परमिंदरबीर ने बताया कि गेहूं के अलावा हर वो खाद्य पदार्थ खुद उगाया जाता है जो लंगर में लगता है। गन्ना, मूंगी, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल तक। निहंग सिंहों की उगाई एक-एक चीज लंगर में ही इस्तेमाल होती है। जितनी भी पैदावार हो उसे लंगर में ही छका दिया जाता है। बाहर बेचा नहीं जाता। पेस्टिसाइड के बिना गेहूं की पैदावार बहुत कम होती है। कीटनाशकों के बिना फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण है और निहंग सिंहों को चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें कई बार स्वाह को ढोकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, क्योंकि कहीं स्वाह की जरूरत पड़ती है तो कहीं नहीं। इसलिए रसोई से जो स्वाह निकलती है, उसे कभी फेंका नहीं जाता। बड़ी संख्या में गोशालाएं चलती हैं। गोबर वहां से लिया जाता है।



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जज को केस से हटाने वाली केजरीवाल की याचिका खारिज: जस्टिस स्वर्णकांता बोलीं- मैं हटी तो संदेश जाएगा दबाव डालकर जज हटा सकते हैं




दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति केस से जुड़े पूर्व CM अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें जज के केस से हटने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता ने कहा- मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। मैं सुनवाई करूंगी। मैं हट गई तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से जज हटा सकते हैं। दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता पर पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जज RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में कई बार गई हैं। उनके बच्चे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता ने केजरीवाल के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा- अगर कोई जज पद की शपथ लेता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका परिवार भी इस पेशे में न आने की शपथ ले। जज के बच्चे या परिवार अपनी जिंदगी कैसे जिएंगे, यह कोई भी तय नहीं कर सकता। केजरीवाल के आरोपों पर जस्टिस स्वर्ण कांता के जवाब- केजरीवाल बोले- जज के बच्चे SG मेहता के साथ काम करते हैं केजरीवाल ने 15 अप्रैल को कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इसके अनुसार, जस्टिस कांता के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। केजरीवाल ने कहा- 9 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। तब मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। जज को हटाने की अर्जी क्यों, 5 पॉइंट्स में समझिए जस्टिस कांता ने पूर्व AAP विधायक की याचिका से खुद को अलग किया केजरीवाल की याचिका पर फैसले से पहले जस्टिस स्वर्ण कांता ने पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस ने मामले से खुद को अलग करते समय कोई कारण नहीं बताया। यह मामला MCOCA से जुड़ा है। नरेश बाल्यान ने इस केस में जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब कोई जज किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है, तो केस को दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो आगे सुनवाई करती है। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बरी किया था ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस:CBI अफसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई नहीं करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…



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