Exclusive: ‘मानहानि के नोटिस से डरकर नहीं हटूंगी पीछे,’ चहल को तानिया चटर्जी का बेबाक जवाब
सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज: सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे
नई दिल्ली4 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की।
सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल कर चुके हैं और अब अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में आने पर भी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि भविष्य में उनकी कोई PIL मंजूर न की जाए।

याचिकाकर्ता की मांगें
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र के रूप में मान्यता दी जाए।
- भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए।
- नेताजी की जयंती 23 जनवरी 1897 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए। उनके जन्मस्थान (कटक, ओडिशा) को राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाए।
- आजादी का श्रेय उन क्रांतिकारियों को दिया जाए जिन्होंने अहिंसा का पालन नहीं किया, और साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली INA को भी।
- 1947 में भारत की आजादी से जुड़ी असल सच्चाई वाली रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, कि ब्रिटिश लोग भारत छोड़कर क्यों और किन कारणों से गए।
- 1946-1947 के दौरान भारतीय सैनिकों (नौसेना, वायुसेना, थलसेना) और आम नागरिकों के विद्रोह की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।
- नीरा आर्य (INA की पहली महिला जासूस) को ‘राष्ट्र-पुत्री’ घोषित किया जाए।
2 साल पहले भी खारिज हो चुकी याचिका
मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उस मामले में, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाया था। साथ ही चुनावों के संदर्भ में याचिका दायर करने के समय पर सवाल पूछा था। सोमवार को कोर्ट ने ऐसे मुद्दों में पड़ने से साफ इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता के बार-बार ऐसी याचिकाएं दायर करने की आलोचना करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर गृह मंत्रालय के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक प्लेस और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जारी यह निर्देश अनिवार्य नहीं है। सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका समय से पहले दायर की गई है। पढ़ें पूरी खबर…
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निहंग सिंहों का अनूठा संकल्प: युद्ध कला में निपुण जत्थेदार बिना कीटनाशक खेती कर रहे, ताकि लंगर पवित्र हो
युद्ध कला के माहिर निहंग सिंह गेहूं को जहरीला होने से बचाने की जंग लड़ रहे हैं। यह संघर्ष इसलिए ताकि गुरुद्वारा साहिबान के छकाए जाने वाले लंगर के प्रसादों की पवित्रता बनी रहे। वे लंगर के लिए 3000 एकड़ में ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। पेस्टिसाइड की जगह स्वाह, खाद की जगह गोबर डालते हैं। शिरोमणि पंथ अकाली श्री मिसल शहीदां तरनादल बाबा बकाला साहिब के मुखी जत्थेदार बाबा जोगा सिंह व संत बाबा गुरदेव सिंह जी शहीदी बाग श्री आनंदपुद साहिब के निर्देश पर दल के भुजंगी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
ढैंचा जैसी फसल लगाने से पहले ही मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी पूरी करते हैं, फिर सड़े गोबर को मिट्टी में मिला देते हैं जत्थेदार बाबा जोगा सिंह और बाबा नोध सिंह समाध का प्रबंधन देख रहे बाबा परमिंदरबीर सिंह ने बताया कि जत्थेदार भगवान सिंह गेहूं की क्वालिटी को बरकरार रखने की सेवा विशेष तौर पर निभा रहे हैं। वही दल के खेती जत्थेदार हैं। गेहूं की बुवाई से पहले खेत में ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उन्हें जोत दिया जाता है। इससे मिट्टी को भरपूर नाइट्रोजन मिलता है। फिर सड़े हुए गोबर को मिट्टी में मिलाया जाता है। उस पर गेहूं की बिजाई की जाती है। बुवाई के 25-30 दिन बाद हाथों से या छोटे यंत्रों से निराई-गुड़ाई करते हैं। जैसे ही पौधे निकलते हैं तो उनकी जरूरत के मुताबिक स्वाह या नीम के घोल का छिड़काव किया जाता है। ताकि कीड़े न लगें। अगर फसल में काड्डे और कीड़े-मकोड़े दिखे तो ही स्वाह डाली जाती है। कीड़े ज्यादा हों तो 10 तरह की कड़वी पत्तियों से बना अर्क छिड़का जाता है। बारिश न हो तो 4-5 बार पानी दिया जाता है। सिंह परमिंदरबीर ने बताया कि गेहूं के अलावा हर वो खाद्य पदार्थ खुद उगाया जाता है जो लंगर में लगता है। गन्ना, मूंगी, गोभी, आलू, प्याज, सरसों, मक्का, जौ, तेल और तिल तक। निहंग सिंहों की उगाई एक-एक चीज लंगर में ही इस्तेमाल होती है। जितनी भी पैदावार हो उसे लंगर में ही छका दिया जाता है। बाहर बेचा नहीं जाता। पेस्टिसाइड के बिना गेहूं की पैदावार बहुत कम होती है। कीटनाशकों के बिना फसल को बचाना चुनौतीपूर्ण है और निहंग सिंहों को चुनौतियां पसंद हैं। उन्हें कई बार स्वाह को ढोकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना पड़ता है, क्योंकि कहीं स्वाह की जरूरत पड़ती है तो कहीं नहीं। इसलिए रसोई से जो स्वाह निकलती है, उसे कभी फेंका नहीं जाता। बड़ी संख्या में गोशालाएं चलती हैं। गोबर वहां से लिया जाता है।
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जज को केस से हटाने वाली केजरीवाल की याचिका खारिज: जस्टिस स्वर्णकांता बोलीं- मैं हटी तो संदेश जाएगा दबाव डालकर जज हटा सकते हैं
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति केस से जुड़े पूर्व CM अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें जज के केस से हटने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता ने कहा- मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। मैं सुनवाई करूंगी। मैं हट गई तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से जज हटा सकते हैं। दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता पर पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जज RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में कई बार गई हैं। उनके बच्चे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता ने केजरीवाल के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा- अगर कोई जज पद की शपथ लेता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका परिवार भी इस पेशे में न आने की शपथ ले। जज के बच्चे या परिवार अपनी जिंदगी कैसे जिएंगे, यह कोई भी तय नहीं कर सकता। केजरीवाल के आरोपों पर जस्टिस स्वर्ण कांता के जवाब- केजरीवाल बोले- जज के बच्चे SG मेहता के साथ काम करते हैं केजरीवाल ने 15 अप्रैल को कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इसके अनुसार, जस्टिस कांता के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं। मेहता उनके बच्चों को केस सौंपते हैं। इससे पहले 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। केजरीवाल ने कहा- 9 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहली नजर में गलत बता दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर फैसला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने 5 मिनट की सुनवाई में उसे गलत बता दिया। तब मुझे लगा कि मामला पक्षपात की तरफ जा रहा है। मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद मैंने यह आवेदन दिया। जज को हटाने की अर्जी क्यों, 5 पॉइंट्स में समझिए जस्टिस कांता ने पूर्व AAP विधायक की याचिका से खुद को अलग किया केजरीवाल की याचिका पर फैसले से पहले जस्टिस स्वर्ण कांता ने पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस ने मामले से खुद को अलग करते समय कोई कारण नहीं बताया। यह मामला MCOCA से जुड़ा है। नरेश बाल्यान ने इस केस में जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब कोई जज किसी मामले की सुनवाई से खुद को अलग करता है, तो केस को दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो आगे सुनवाई करती है। 27 फरवरी: ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल को बरी किया था ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस:CBI अफसर के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुनवाई नहीं करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च को दिल्ली शराब नीति केस में पूर्व CM अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की CBI अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…
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राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग: कई घंटे बाद काबू पाया गया; कल प्रधानमंत्री उद्घाटन करने वाले थे, घटना के बाद कार्यक्रम स्थगित – Balotra News
राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में सोमवार दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई। जानकारी के मुताबिक आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी।
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यूनिट से धुआं उठने पर कर्मचारियों ने फायर सेफ्टी सिस्टम चालू किया। इसके बाद मौके पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने 2 से 3 घंटे में आग पर काबू पाया। इस दौरान यूनिट से लपटें उठती रहीं।
करीब 79 हजार 459 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस रिफाइनरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को उद्घाटन करने वाले थे। इस घटना के बाद उनका दौरा स्थगित हो गया है।
आग लगते ही पूरे इलाके को खाली करा लिया गया था और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि नुकसान और आग लगने के कारणों का आकलन बाकी है। सीएम भजनलाल शर्मा ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
HPCL ने घटना को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा- शुरुआती जानकारी के अनुसार, हीट एक्सचेंजर सर्किट में किसी वाल्व या फ्लैंज से हाइड्रोकार्बन के रिसाव के कारण CDU सेक्शन में आग लग गई।
रिफाइनरी में भड़की आग की 6 PHOTOS
रिफाइनरी की क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट से उठती आग की लपटें।

फायर ब्रिगेड की टीम आग को बुझाने में जुटी रही।

आग लगने के तुरंत बाद फायर सेफ्टी सिस्टम चालू कर दिया गया था।

रिफाइनरी में आग से आसमान में धुएं का गुबार छा गया था।

फायर सेफ्टी सिस्टम से पानी छिड़ककर आग बुझाने के प्रयास किए गए थे।

पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग के बाद काफी देर तक धुआं उठता रहा था।
नए बने जिले बालोतरा में HPCL की रिफाइनरी
सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड यानी HPCL की यह रिफाइनरी राजस्थान में नए बने जिले बालोतरा के पचपदरा में मौजूद है। करीब 79 हजार 459 करोड़ रुपए की लागत से करीब 4500 एकड़ (7200 बीघा) में बनी रिफाइनरी में विदेशों से मंगाए जाने वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने और उससे अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार करने के लिए पूरा कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। यहां सालाना 9 मिलियन टन कच्चा तेल साफ किया जा सकता है।

कच्चा तेल फिल्टर करने वाली दो यूनिटों में लगी आग
HPCL रिफाइनरी के दो हिस्सों में आग लगी। इनके नाम क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) और वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट (VDU) हैं। पाइप लाइन के जरिए आने वाला कच्चा तेल इन्हीं यूनिट में आता है। फिर उसे फिल्टर करके अलग-अलग यूनिट में भेजा जाता है।

पचपदरा रिफाइनरी में गुजरात से आना है कच्चा तेल
राजस्थान की इस रिफाइनरी में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से पाइप लाइन के जरिए कच्चा तेल लाया जाएगा। मुंद्रा से इसकी दूरी करीब 487 किलोमीटर है।

HPCL और राजस्थान सरकार की भागीदारी से बनी रिफाइनरी
पचपदरा रिफाइनरी में HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है। इस रिफाइनरी का काम अप्रैल 2026 में पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि पूरी तरह पेट्रोलियम उत्पादन का टारगेट जुलाई 2026 रखा गया है।

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