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भीड़ कम होने पर शंकराचार्य बोले-यह शराब की दुकान नहीं: मुझे सपा समर्थक कहते हैं, मेरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा भाजपाई हैं – Lucknow News




शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद किया। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करना शुरू किया। शंकराचार्य ने कहा- यह शराब की दुकान नहीं, ये सभा शुद्ध गाय की दुकान है। यहां ज्यादा भीड़ हो जाती तो इसका मतलब होता यह शराब की दुकान है। यहां कम भीड़ है, इसी से पता चल रहा है कि यह शुद्ध गाय के दूध की दुकान है। उन्होंने कहा- भाजपा अब भागपा हो गई है। अगर आप लोग पक्के गो-भक्त नहीं होते, तो इतनी रुकावट के बावजूद यहां आकर बैठे न होते। आप जितने भी लोग आए हैं, कार्यक्रम खत्म होने के बाद नाम नोट करके जाइएगा। क्योंकि, आप लोग इस कार्यक्रम के फाउंडर मेंबर होंगे। इसी बीच उनसे मिलने पहुंची एक महिला को पुलिस ने रोका, तो वह भड़क गई। उसने महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की। शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर से कहा- 26 शर्तों के साथ कार्यक्रम की अनुमति मिली है। इसमें कहा गया है कि किसी का नाम नहीं लेना है। इससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। आखिर किसका नाम पुलिस छिपाना चाहती है? उसने ऐसा क्या किया है? दरअसल, लखनऊ प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ कार्यक्रम की अनुमति दी है। इसके मुताबिक, सभा में धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के खिलाफ भड़काने वाली कोई बात नहीं होगी। शंकराचार्य ने 30 जनवरी को योगी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने तब कहा था- गाय को राष्ट्रमाता घोषित करें, वरना आंदोलन करेंगे। शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से यात्रा शुरू की थी। जौनपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर होते हुए 4 दिन में लखनऊ पहुंचे। वह आज रात लखनऊ में ही रुकेंगे। गुरुवार सुबह की फ्लाइट से अहमदाबाद रवाना होंगे। 4 तस्वीरें देखिए… शंकराचार्य के धर्मयुद्ध सभा से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…



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Explained: Petrol-Diesel ही नहीं, Israel-Iran युद्ध से कपड़े, जूते और चूड़ी समेत महंगे होंगे ये सारे सामान


International

oi-Siddharth Purohit

Explained: अमेरिका, इजरायल और ईरान में जंग रही है। जिसकी वजह से कई देशों में महंगाई बढ़ गई है तो कई जगहों पर संसाधन कम होते जा रहे हैं। इसका असर अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में कपड़ा, खनन और लोहे जैसे कई महत्वपूर्ण उद्योगों तक पहुंच गया है। ईंधन की बढ़ती कीमत, पेट्रोकेमिकल उत्पादों की महंगाई, कच्चे माल की लागत और Strait of Hormuz से गुजरने वाले शिपों पर हमले की वजह से इनका असर अब लेवल-2 और लेवल-3 तक की चीजों पर पड़ना शुरू हो चुका है।

पूरी दुनिया के मार्केट में हाहाकार

पश्चिम एशिया में संघर्ष ने ग्लोबल कैमिकल मार्केट में एक तरह का बदलाव शुरू कर दिया है। जिसमें, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में पैदा की गई अड़चन की वजह से नेफ्था फीडस्टॉक (नेफ्था फीडस्टॉक का इस्तेमाल एथलीन, प्रॉपलीन सिंथेटिक फाइबर और रबर बनाने में होता है) की कमी हो रही है, जिस पर एशिया के स्टीम क्रैकर्स अपनी 60-80% आपूर्ति के लिए निर्भर रहते हैं।

Explained

एक हफ्ते में 73 चीजों के दाम बढ़े

स्ट्रेट ऑफ होर्मूज में कार्गो शिप रुकने के कारण महज एक सप्ताह में रोजमर्रा की 73 अलग-अलग चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। जिनमें से कुछ की कीमतें 60% से भी ज्यादा बढ़ गईं। वहीं, भारत उन देशों में शामिल है जिस पर महंगाई का सीधा असर पड़ सकता है। भारत कच्चे तेल के लिए 50% से ज्यादा, LNG के लिए 50-55%, और एथिलीन ग्लाइकॉल, पॉलिमर, मेथनॉल और खेतों में इस्तेमाल होने वाली खाद के लिए भी काफी हद तक पश्चिम एशिया से इम्पोर्ट पर निर्भर है।

कमजोर रुपया भी बढ़ा रहा बोझ

इस इम्पोर्ट डिपेंडेंसी की वजह से भारत को बढ़ती लागत का बोझ झेलना पड़ रहा है। स्थिति इसलिए और मुश्किल हो रही है क्योंकि भारतीय रुपया पहले से ही 92 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के आसपास कमजोर चल रहा है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मूज का ठप पड़ना भारत के लिए बहुत मुश्किल साबित हो सकता है।

इंडस्ट्रीज पर क्या-क्या होगा असर?

सभी उद्योगों को एक औसत मानकर चलें तो इन पर अमूमन तीन तरह के बड़े असर पड़ सकते हैं-

1. कच्चे माल की आपूर्ति में कमी
2. इम्पोर्ट किए कच्चे माल और शिपिंग कंटेनरों की लागत में बढ़ोतरी
3. बाजार में डिमांड और सप्लाई चैन पर गंभीर असर

क्या भारत खो देगा अपनी प्राथमिकता?

पहले कई उद्योग European Union द्वारा लागू किए गए CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) जैसे नियमों के कारण पश्चिम एशिया को एक वैकल्पिक बाजार के रूप में देख रहे थे। साथ ही भारत भी इसमें एक बड़ा खरीददार और विक्रेता दोनों की भूमिका में है। लेकिन अब वहां भी जंग के कारण व्यापारिक परिस्थितियां बदल रही हैं। क्योंकि जहां माल नहीं पहुंचेगा वहां दूसरे ऑप्शन तलाशे जाएंगे। ऐसे में अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो यही ऑप्शन परमानेंट भी हो सकते हैं। इसके अलावा ईंधन और फीडस्टॉक (कच्चे माल का स्टोर) की आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है, जो नैचुरल गैस और एलपीजी से सीधा जुड़ा है।

मैलिक एनहाइड्राइड की कीमत 61% बढ़ी

संघर्ष शुरू होने के बाद से मैलिक एनहाइड्राइड की कीमत में लगभग 61% बढ़ गई है। इस कैमिकल का उपयोग ऑटोमोबाइल और पुर्जों के निर्माण में और फाइबरग्लास प्लास्टिक बनाने के लिए किया जाता है। इसके जरिए अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन (UPR) तैयार होता है, जो स्विच बोर्ड से लेकर कई उद्योगों में इस्तेमाल होता है।

जूते-बेल्ट होंगे महंगे?

एथिलीन, जिसका उपयोग पॉलीइथिलीन (PE), पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) और पॉलीस्टाइनिन जैसे प्लास्टिक में होता है, उसकी कीमत 35% से अधिक बढ़ गई है। इसी तरह एक्रिलिक एसिड, जो चिपकने वाले पदार्थ, पेंट, कोटिंग्स, डायपर, सैनिटरी पैड, कपड़ा, वॉटर ट्रीटमेंट कैमिकल और चमड़ा उद्योग में उपयोग होता है, उसकी कीमत भी 30% से अधिक बढ़ चुकी है। जिसका असर आपके जूतों, बेल्ट और दूसरे लैदर आइटम पर पड़ेगा।

कपड़ा उद्योग में आएगी महंगाई?

कपड़ा उद्योग भी इस संकट के कारण अपनी सप्लाई चेन में कई लेवल पर लागत में हुई बढ़ोतरी को कम करना चाहता है। लेकिन पहले अमेरिकी टैरिफ ने इसकी कमर तोड़ दी और अब कैमिकल महंगे होने से संकट में है। इसमें रंगाई, ब्लीचिंग और फिनिशिंग जैसे काम होते हैं, इसलिए ईंधन और बिजली महंगी होने से लागत और कीमत दोनों बढ़ सकती हैं।

कपड़े भी होंगे महंगे?

इंडस्ट्रियल एक्सपर्ट का कहना है कि कपड़ा क्षेत्र पर सबसे बड़ा असर पेट्रोकेमिकल के जरिए पड़ रहा है। अधिकतर कपड़ा कैमिकल और रंग पेट्रोकेमिकल कच्चे माल से बनते हैं और उनकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। गुजरात में एक बड़े कपड़ा कारखाने के मालिक ने बताया कि हाल के हफ्तों में ऐसे कई सामानों की कीमतों में करीब 50% तक बढ़ोतरी हुई जिनके बिना कपड़ा उद्योग चल ही नहीं सकता। कपड़ा उद्योग में पॉलिएस्टर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है और उसकी कीमत ही 15% बढ़ गई हैं।

कपड़ा उद्योग के लिए पैकेजिंग भी अब एक बड़ा खर्च बनकर उभर रही है। कपड़ा पैकेजिंग का बड़ा हिस्सा प्लास्टिक के मटेरियल पर निर्भर करता है और अब इनकी कीमतें कम समय में दोगुनी हो चुकी हैं। वहीं सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव के कारण सप्लायर अब नकद पेमेंट की मांग कर रहे हैं।

खनन भी होगा कम?

खनन उद्योग में भी ईंधन की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ने लगी है। खनन गतिविधियां काफी हद तक ईंधन से चलने वाली मशीनों पर निर्भर होती हैं। इसमें पोकलेन मशीनें, ड्रिलिंग मशीनें और खनिज को ले जाने वाले ट्रक शामिल हैं। ईंधन महंगा होने से खनन करना और उसकी ढुलाई दोनों की लागत बढ़ रही है। जिससे अब घर बनाना या दूसरे खनन से जुड़े काम भी महंगे हो सकते हैं।

इस्पात उद्योग पर भी युद्ध का असर

ईरान से जुड़े संघर्ष का असर भारत के इस्पात उद्योग पर भी पड़ा है। स्टील कंपनियों को ब्लास्ट फर्नेस उत्पादन में उपयोग होने वाले कोकिंग कोल की सप्लाई में बड़ी रुकावट आई है। जिससे अनिश्चितता के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है और कोकिंग कोल की कीमतें बढ़ रही हैं।

भारत की कोकिंग कोल आयात पर निर्भरता

भारत में कोकिंग कोल का आयात लगातार बढ़ रहा है। यह 2020-21 में 51.20 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 57.58 मिलियन टन हो गया है। इस्पात उद्योग की करीब 95% कोकिंग कोल आवश्यकता आयात से पूरी होती है। कोकिंग कोल की शिपमेंट में देरी की वजह से कीमतों में 10% तक उछाल आया है। लिहाजा अब यह सेक्टर भी परेशान है।

ग्लास उद्योग पर भी मंडरा रहा खतरा

भारत के ग्लास मैन्युफेक्चरिंग उद्योग पर भी संकट का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि सरकार इस क्षेत्र के लिए नैचुरले गैस की सप्लाई में कटौती पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो जो इंडस्ट्री 24 घंटे और सातों दिन चलता है। इसमें भट्ठी को बंद करना इसकी कमर पर गहरी चोट के जैसा होगा। इसका असर सिर्फ कांच की शीट तक नहीं बल्कि हाथों की चूड़ियों पर भी पड़ सकता है। फिरोजपुर में रहने रहने वाले मोहम्मद आरिफ जो चूड़ी बनाने का काम करते हैं और भट्टी का संचालन करते हैं, उन्होंने वनइंडिया को बताया कि आने वाले दिनों में शायद चूड़ियों की कीमत भी बढ़ सकती है।

इस एक्सप्लेनर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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Iran War Impact: ईरान जंग से भारत को डबल झटका! 5 तरीकों से हिल रही इकोनॉमी, 15 तरह के बिजनेस पर सीधा असर


Business

oi-Pallavi Kumari

Iran War Impact on Indian Economy: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, खासकर इजरायल-अमेरिका और ईरान में जारी जंग सिर्फ एक भू-राजनीतिक खबर नहीं है, इसका असर धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। फाइनेंस और इकोनॉमिक्स एक्सपर्ट सरथक आहूजा (Sarthak Ahuja) का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर पांच बड़े तरीकों से असर पड़ रहा है।

पहला, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में फ्रेट और इंश्योरेंस महंगे होने से कंपनियों का मुनाफा घट सकता है। तीसरा, महंगे आयात की वजह से रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ सकता है। चौथा, फ्लाइट रद्द होने से बिजनेस ट्रैवल और पर्यटन प्रभावित हो सकता है। पांचवां, एनआरआई से पैसा आ सकता है लेकिन घरेलू खपत घट सकती है।

Iran War Impact: ईरान जंग से भारत को डबल झटका! 5 तरीकों से हिल रही इकोनॉमी, 15 तरह के बिजनेस पर सीधा असर

इसका असर करीब 15 कारोबारों पर पड़ सकता है, जिनमें तेल, एविएशन, बासमती चावल निर्यात, चाय, जेम्स-ज्वेलरी, हीरा उद्योग, टेक्सटाइल-गारमेंट, पॉलिएस्टर यार्न, पेंट, टायर, केमिकल, उर्वरक, कृषि, ट्रैवल एजेंसी और पर्यटन उद्योग शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का प्रभाव पांच बड़े आर्थिक रास्तों से भारत तक पहुंचेगा, और आने वाले दिनों में कई रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बदल सकती हैं।

कच्चे तेल की कीमतों से महंगाई का खतरा

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर करता है। मिडिल ईस्ट इस सप्लाई का सबसे बड़ा केंद्र है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति बाधित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।

तेल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से लगभग हर सेक्टर में महंगाई का दबाव बन जाता है। इसका मतलब है कि आम उपभोक्ता को रोजमर्रा की चीजों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सोना, हीरे और ज्वेलरी कारोबार पर दबाव

भारत में इस्तेमाल होने वाला सोना और कच्चे हीरों का बड़ा हिस्सा दुबई जैसे व्यापारिक केंद्रों से आता है। अगर वहां से सप्लाई बाधित होती है तो बाजार में सोने की उपलब्धता कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में ज्वेलरी की कीमतें और बढ़ सकती हैं। गुजरात के सूरत जैसे शहर, जो हीरा प्रोसेसिंग के बड़े केंद्र हैं, वहां के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि कच्चे हीरों की सप्लाई कम हो सकती है।

सरथक आहूजा के मुताबिक,

”भारत में जो सोना आता है, उसका बड़ा हिस्सा दुबई के व्यापारियों से आयात किया जाता है। यही सोना बाद में प्रोसेस होकर ज्वेलरी में बदलता है। इसी तरह कच्चे हीरे भी बड़ी मात्रा में बाहर से आते हैं। अभी हालात ऐसे हैं कि कई जगह शिपमेंट रुक गए हैं या धीमे पड़ गए हैं। इसका मतलब यह है कि बाजार में सोने की सप्लाई कम हो सकती है। जब सप्लाई कम होती है तो ज्वेलरी महंगी हो जाती है। यानी अगर आप आने वाले समय में सोने के गहने खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।”

फ्लाइट कैंसिलेशन और ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर पर असर

मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बेहद अहम है। अगर वहां सुरक्षा जोखिम बढ़ता है तो कई उड़ानें रद्द हो सकती हैं या लंबा रास्ता लेना पड़ सकता है।
इसका असर एयरलाइन कंपनियों के साथ-साथ पर्यटन उद्योग और बिजनेस ट्रैवल पर भी पड़ेगा। जब यात्रा कम होती है तो होटल, ट्रैवल एजेंसी और पर्यटन से जुड़े कई व्यवसायों की आय प्रभावित होती है।

सरथक आहूजा ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में कहा,

”अभी मिडिल ईस्ट के कई इलाकों में उड़ानें प्रभावित हो रही हैं और कुछ रूट्स पर फ्लाइट्स बंद भी हो सकती हैं। ऐसे में लोग यूरोप या मिडिल ईस्ट की छुट्टियों की बुकिंग करने से भी बच सकते हैं। अगर आप विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं तो फिलहाल दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका या भारत के अंदर के लक्जरी डेस्टिनेशन ज्यादा सुरक्षित विकल्प माने जा रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के लिए भी यही सलाह है कि वे अभी इन जगहों के पैकेज ज्यादा प्रमोट करें क्योंकि मांग वहीं बढ़ सकती है।”

अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा, कंपनियों के मुनाफे पर दबाव

युद्ध के माहौल में समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ जाता है। इसका सीधा असर फ्रेट और इंश्योरेंस लागत पर पड़ता है। जब जहाजों के लिए बीमा महंगा हो जाता है और शिपिंग खर्च बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत भी बढ़ जाती है।

इस स्थिति में कई कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें ज्यादा लागत के साथ व्यापार करना पड़ता है। खासकर वे कंपनियां जो आयात-निर्यात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है।

रुपया कमजोर पड़ने की आशंका

अगर तेल और अन्य जरूरी आयात महंगे हो जाते हैं तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है। सरथक आहूजा मानते हैं कि ऐसी स्थिति में रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो सकता है। इससे आयात और महंगा हो जाएगा और विदेशी यात्रा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक कई चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

कपड़ा और गारमेंट उद्योग की लागत बढ़ सकती है

कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाला पॉलिएस्टर यार्न कच्चे तेल से जुड़ा हुआ है। तेल महंगा होने का मतलब है कि कपड़ा उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। सूरत और अन्य टेक्सटाइल हब में कपड़ा और गारमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए यह बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर लागत बढ़ी तो निर्यात और घरेलू बिक्री दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

भारत में आने वाले दिनों में कपड़ा और गारमेंट इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है। कपड़ा बनाने में इस्तेमाल होने वाला पॉलिएस्टर यार्न काफी हद तक कच्चे तेल से जुड़ा होता है। जब तेल महंगा होता है तो इस कच्चे माल की कीमत भी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर कपड़ा बनाने की लागत पर पड़ता है। इसलिए आने वाले समय में कपड़े महंगे हो सकते हैं और जो लोग कपड़े के कारोबार या एक्सपोर्ट में हैं, उन्हें अपनी लागत और मुनाफे को लेकर सावधान रहना पड़ेगा।

एनआरआई से आने वाला पैसा बढ़ सकता है, लेकिन खर्च घटेगा

मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। तनाव के समय वे अपने परिवारों को ज्यादा पैसे भेज सकते हैं ताकि घर की आर्थिक सुरक्षा बनी रहे। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में परिवार अक्सर खर्च कम कर देते हैं और बचत बढ़ा देते हैं। इसका असर घरेलू खपत पर पड़ सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की एक बड़ी ताकत मानी जाती है।

चावल कारोबार पर असर, बासमती की खेप फंसी

भारत के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों में जाता है। ईरान और इराक इस चावल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। मौजूदा हालात में खबर है कि करीब दो लाख टन से ज्यादा बासमती चावल जहाजों में फंसा हुआ है और आगे नहीं बढ़ पा रहा।

अगर यह स्थिति लंबी चली तो निर्यात में बाधा आएगी और घरेलू बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ सकती है। अगर यह चावल निर्यात नहीं हो पाया तो इसे भारतीय बाजार में ही बेचना पड़ेगा। ऐसे में बाजार में चावल की सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतें थोड़ी कम भी हो सकती हैं। इसी तरह चाय के निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है।

खेती और किसानों पर पड़ने वाले असर

भारत जिन उर्वरकों का इस्तेमाल खेती में करता है, उनका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। खासकर सल्फर आधारित उर्वरक का आयात काफी हद तक इसी क्षेत्र से होता है। अगर वहां से सप्लाई कम हो जाती है या रुक जाती है तो किसानों के लिए उर्वरक महंगे हो सकते हैं। जब खेती की लागत बढ़ती है तो उसका असर बाद में अनाज और सब्जियों की कीमतों पर भी पड़ता है। इसलिए आने वाले छह महीनों में कृषि उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

पेंट, टायर और केमिकल सेक्टर पर असर

कई औद्योगिक उत्पादों में कच्चे तेल से बनने वाले रॉ मैटेरियल का इस्तेमाल होता है। पेंट, टायर और केमिकल उद्योग ऐसे ही सेक्टर हैं। जब कच्चा माल महंगा होता है तो कंपनियों को या तो कीमत बढ़ानी पड़ती है या अपने मुनाफे में कटौती करनी पड़ती है। इसका असर आखिरकर बाजार और उपभोक्ता दोनों पर पड़ता है।

कुल मिलाकर भारत के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट का यह संकट केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं है। इसके असर की लहरें धीरे-धीरे वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंचती हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।

तेल से लेकर कृषि, ज्वेलरी, टेक्सटाइल और पर्यटन तक कई सेक्टरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडिल ईस्ट का यह संकट कितना लंबा चलता है और वैश्विक व्यापार पर इसका कितना असर पड़ता है।



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Aaj Ka Mausam: पश्चिम बंगाल-ओडिशा-असम समेत 14 राज्यों में आंधी-तूफान की आशंका, दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम?


India

oi-Ankur Sharma

Aaj Ka Mausam, 11 March 2026 Wednesday: उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान बढ़ जाने से लोग काफी परेशान हैं, उन्हे ये समझ नहीं आ रहा है कि अगर मार्च इस तरह से आग उगल रहा है तो फिर मई -जून में क्या होगा? भारतीय मौसम विभाग के ताजा अपडेट में कहा गया है कि आज से लेकर अगले दो दिनों के अंदर गुजरात, राजस्थान, यूपी, बिहार, एमपी महाराष्ट्र में तापमान बढ़ेगा जिससे गर्मी बढ़ेगी।

तो वहीं दूसरी ओर एक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत 14 राज्यों में रेन अलर्ट घोषित किया गया है।

Aaj Ka Mausam

Delhi ka Mausam: दिल्ली में क्या बरसेंगे बादल?

राजधानी दिल्ली में आज आंशिक बादल छाए रहेंगे और हो सकता है कि शाम तक हल्की बरसात भी हो जाए , बुधवार को यहां पर अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस तक और न्यूनतम तापमान 17-19 डिग्री सेल्सियस जा सकता है। तो वहीं यहां के आबोहवा में मामूली सुधार दिख रहा है।

दिल्ली के प्रमुख स्टेशनों में आज AQI निम्नलिखित है।(सुबह 6 बजे की स्थिति)

  • पूसा, दिल्ली – 299 AQI
  • शादीपुर, दिल्ली -295 AQI
  • पंजाबी बाग, शिवाजी पार्क -287 AQI
  • नॉर्थ कैंपस, दिल्ली मिल्क स्कीम कॉलोनी 288 AQI
  • एफ मुंडका, दिल्ली -269 AQI

Rain Alert in Himachal Pradesh-Uttarakhand: हिमाचल-उत्तराखंड में रेन अलर्ट

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश और बर्फबारी के साथ बिजली गिरने की संभावना है। वहीं, उत्तराखंड में भी अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और छिटपुट बारिश का अनुमान जताया गया है।

भारी बारिश का अलर्ट जारी

कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू ,मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन, बिलासपुर, चंबा में पश्चिमी विक्षोभी की वजह से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। तो वहीं उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, और देहरादून में भी येलो अलर्ट जारी है।

Uttar Pradesh Ka Mausam: यूपी का बढ़ेगा पारा

आगरा, मथुरा, बरेली, बलरामपुर, कानपुर, लखनऊ, गोंडा, बहराइच, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, बस्ती, बनारस, रायबरेली, प्रतापगढ़ में गर्मी बढ़ेगी इसके लिए भी अलर्ट जारी है।

Jharkhand -West Bengal : गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है

मैदानी और पूर्वी राज्यों की बात करें तो बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय, नगालैंड और मणिपुर में 11 मार्च से बारिश का सिलसिला तेज होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

Rajasthan weather update: राजस्थान में भी बढ़ेगा तापमान

अलवर, सीकर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, बाड़मेर में तापमान 35-40 डिग्री तक जा सकता है इसके लिए orange alert जारी है।



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Gold Silver Rate Today: ईरान जंग का असर! चांदी ₹13,000 महंगी, सोना भी उछला, अब क्या है गोल्ड-सिल्वर की कीमत?


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oi-Pallavi Kumari

Gold Silver Rate Today: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय बाजार में दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं। इसी वजह से सोना और चांदी दोनों की कीमतों में जोरदार उछाल आया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी जहां एक झटके में करीब 10 हजार रुपये तक महंगी हो गई, वहीं सोने के भाव में भी करीब 2 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़त देखने को मिली।

Gold Silver Rate Today

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,700 रुपये बढ़कर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई है। इससे पहले यह करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थी। वहीं चांदी की कीमत में और भी तेज उछाल देखने को मिला। एक किलो चांदी करीब 13 हजार रुपये महंगी होकर 2.73 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे पहले इसका भाव करीब 2.60 लाख रुपये प्रति किलो था।

Gold Rate In India: देश के 20 बड़े शहरों में सोने के भाव (Gold Rate 11 March 2026)

शहर 24K गोल्ड 22K गोल्ड 18K गोल्ड
दिल्ली ₹1,60,400 ₹1,47,000 ₹1,20,300
मुंबई ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
कोलकाता ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
चेन्नई ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
बेंगलुरु ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
हैदराबाद ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
पुणे ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
अहमदाबाद ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
जयपुर ₹1,60,400 ₹1,47,000 ₹1,20,300
लखनऊ ₹1,60,400 ₹1,47,000 ₹1,20,300
पटना ₹1,60,400 ₹1,47,000 ₹1,20,300
चंडीगढ़ ₹1,60,400 ₹1,47,000 ₹1,20,300
सूरत ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
भुवनेश्वर ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
नागपुर ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
कोयंबटूर ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
मदुरै ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
विशाखापत्तनम ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
नासिक ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100
मैसूर ₹1,60,250 ₹1,46,850 ₹1,20,100

Silver Rate Today: OMG चांदी हुई महंगी, 2.90 हजार रुपये किलो, 10 ग्राम का हुआ अब इतना रेट, आज का ताजा भाव

Silver Rate In India: देश के बड़े शहरों में चांदी का भाव (Silver Price Today)

शहर चांदी का भाव
दिल्ली ₹2,90,000
मुंबई ₹2,90,000
कोलकाता ₹2,90,000
बेंगलुरु ₹2,90,000
हैदराबाद ₹2,90,000
पुणे ₹2,90,000
अहमदाबाद ₹2,90,000
जयपुर ₹2,90,000
लखनऊ ₹2,90,000
पटना ₹2,90,000
चंडीगढ़ ₹2,90,000
सूरत ₹2,90,000
भुवनेश्वर ₹2,90,000
नागपुर ₹2,90,000
कोयंबटूर ₹3,00,000
मदुरै ₹3,00,000
विशाखापत्तनम ₹2,90,000
नासिक ₹2,90,000
मैसूर ₹2,90,000
मेंगलुरु ₹3,00,000

इस साल कितना महंगा हुआ सोना-चांदी (Gold Silver Price 2026)

2026 की शुरुआत से ही सोना और चांदी दोनों में बड़ी तेजी देखने को मिली है। साल की शुरुआत में सोना करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर लगभग 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गया है। यानी इस साल अब तक सोना करीब 27 हजार रुपये महंगा हो चुका है। वहीं चांदी की कीमत में भी जोरदार तेजी आई है और यह साल की शुरुआत के मुकाबले करीब 24 हजार रुपये तक महंगी हो चुकी है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि IBJA की वेबसाइट पर दिखाए गए ये रेट जीएसटी और मेकिंग चार्ज के बिना होते हैं। ज्वेलरी खरीदते समय इन चार्ज के जुड़ने से कीमत और बढ़ जाती है।



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Parliament Today: संसद में विपक्ष का सरकार पर LPG-CNG प्रहार, आज सदन में किन-किन मुद्दों पर होगी गहमागहमी


India

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Parliament Today Budget Session: बजट सत्र के दूसरे चरण के तीसरे दिन, यानी 11 मार्च 2026 को संसद के दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामे के आसार हैं। विपक्षी दल ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Block) ने सरकार को घेरने के लिए ‘तेल और गैस संकट’ को अपना मुख्य हथियार बनाया है।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर अपनी मंशा साफ कर दी है।

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LPG shortage India: गैस और ईंधन की किल्लत पर विपक्ष फोड़ेगा महंगाई बम

विपक्ष ईरान-इजरायल युद्ध और खाड़ी देशों में तेल के संकट पर संसद में हंगामा कर सकता है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्ष आज कई मुद्दों पर जवाब मांगेगा। हाल ही में घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए 25 दिन का गैप रखने के नियम पर विपक्ष सरकार को घेरेगा।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे कुप्रबंधन करार दिया है। मुंबई और अन्य बड़े शहरों में कमर्शियल गैस संकट होने पर 20% से अधिक होटलों के बंद होने और पुणे में गैस आधारित शमशान घरों के बंद होने पर विपक्ष ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। रांची और अन्य शहरों में पेट्रोल पंपों पर लग रही भीड़ और स्टॉक की कमी को लेकर विपक्ष ‘व्हाइट पेपर’ की मांग कर सकता है।

सरकार का बचाव – ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट’ और सप्लाई रणनीति

विपक्ष के हमलों के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे। सरकार ने ECA 1955 लागू कर दिया है। इसके तहत रिफाइनरियों को सख्त आदेश दिया है कि वे अन्य औद्योगिक रसायनों के बजाय केवल प्रोपेन और ब्यूटेन से घरेलू LPG का उत्पादन करें।

प्राकृतिक गैस के वितरण में अब घरेलू पाइप गैस (PNG) और वाहनों की CNG को 100% प्राथमिकता दी जा रही है। खाद और बिजली क्षेत्र के कोटे में कटौती कर आम जनता को राहत देने की कोशिश की जा रही है। सरकार रूस और अमेरिका के ‘गल्फ कोस्ट’ से अतिरिक्त तेल-गैस मंगाने के समझौतों का ब्यौरा पेश करेगी ताकि ‘हॉर्मुज जलमार्ग’ की निर्भरता कम हो सके।

ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध पर भारत का स्टैंड

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले ही स्पष्ट किया है कि भारत की प्राथमिकता शांति, संवाद और कूटनीति है। हालांकि, विपक्ष आज सरकार से कुछ कड़े सवाल पूछ सकता है। हॉर्मुज संकट पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। भारत की 50% गैस सप्लाई इसी रास्ते से आती है।

विपक्ष जानना चाहता है कि सरकार ने इस रास्ते के असुरक्षित होने का पूर्वानुमान क्यों नहीं लगाया? खाड़ी देशों में फंसे करीब एक करोड़ भारतीयों और मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकार की Evacuation Plan क्या है? कतर के गैस प्लांट पर हमलों के बाद भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

संसद में हंगामे के आसार

विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर खाड़ी जल रही है, तेल का शौक, मोदी जी चुप क्यों? जैसे बैनरों के साथ प्रदर्शन किया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद भी इस मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) लाने की तैयारी में हैं।

सदन में जैसे ही प्रश्नकाल शुरू होगा, विपक्ष की ओर से ऊर्जा संकट पर चर्चा की मांग को लेकर भारी नारेबाजी हो सकती है। क्या सरकार विपक्ष को विस्तृत बहस के लिए समय देगी या सदन एक बार फिर स्थगन की भेंट चढ़ेगा?



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ढाई दिन में मिलेगा सिलेंडर: सरकार का दावा- LPG की सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में, नहीं होगी कोई किल्लत


भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू गैस आपूर्ति की स्थिति पर अहम आधिकारिक जानकारी साझा की है। मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में कच्चे तेल  की आपूर्ति बिना किसी बाधा के पूरी तरह से सुरक्षित रूप से जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद ढाई दिनों सिलिंडर की ढाई दिनों की डिलिवरी साइकिल जारी है। मंत्रालय ने देशवासियों से अपील की है कि वे एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की किसी भी प्रकार की आशंका के चलते ‘पैनिक बुकिंग’ बिल्कुल न करें। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक ब्रीफिंग में पत्रकारों को बताया कि भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है।

उन्होंने कहा, “फीडबैक से पता चलता है कि गलत जानकारी के कारण कुछ लोग घबराकर सिलिंडर बुक करा रहे हैं और जमाखोरी कर रहे हैं। मैं साफ करना चाहती हूं कि घरेलू एलपीजी की हमारी सामान्य डिलीवरी साइकिल लगभग ढाई दिन की है, इसलिए मैं अनुरोध करती हूं… ग्राहकों को सिलेंडर बुक कराने के लिए जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है… घबराकर बुकिंग कराने की कोई जरूरत नहीं है।”

पेट्रोलियम मंत्रालय की अधिकारी ने बताया कि दो एलएनजी कार्गो भारत की ओर चल पड़े हैं। कुछ ही दिनों में देश पहुंच जाएंगे। हमारी रिफाइनरी अधिकतम क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। कुछ रिफाइनरी 100% से अधिक क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है, लेकिन अफवाहों के चलते हो रही ‘पैनिक बुकिंग’ को रोकने के लिए सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 

मंत्रालय ने साफ किया है कि घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पूरी तरह से सामान्य और सुचारू तरीके से काम कर रहे हैं। वर्तमान में घरेलू परिवारों के लिए एलपीजी सिलेंडर का सामान्य डिलीवरी चक्र मात्र ढाई दिन पर स्थिर बना हुआ है। उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद अधिकतम ढाई दिन में सिलिंडर मिल जा रहा है।

इसके साथ ही, सरकारी नीतिगत उपायों के सकारात्मक परिणामस्वरूप तरलीकृत पेट्रोलियम गैस के उत्पादन में 25% वृद्धि दर्ज की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आम उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि गैस आपूर्ति की कोई कमी नहीं है, इसलिए बाजार में किसी भी प्रकार की घबराहट या पैनिक बुकिंग  करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

शर्मा ने बताया कि मांग को मैनेज करने के लिए अस्थायी तौर पर दो एलपीजी बुकिंग के बीच के न्यूनतम अंतर को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर गैस की हेराफेरी रोकने के लिए ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (डीएसी) सिस्टम लागू किया गया है। 

जानिए पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से और क्या-क्या बताया गया?

एलपीजी पर


  • घरेलू उत्पादन बढ़ा: हालांकि भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60% आयात करता है (जिसका 90% होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है), लेकिन मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए घरेलू LPG उत्पादन में 25% की वृद्धि की गई है और यह पूरा हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।

  • कीमतों पर नियंत्रण: दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की मौजूदा कीमत 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 913 रुपये है। शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG के दाम 41% बढ़े हैं, लेकिन सरकारी मदद के कारण उज्ज्वला (पीएमयूवाई) लाभार्थियों के लिए कीमतें 32% कम हुई हैं। तेल कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी गई है।

कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) पर


  • भारत में कच्चे तेल की रोजमर्रा की खपत करीब 55 लाख बैरल है। 

  • शर्मा ने बताया कि सरकार ने आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। उन्होंने कहा, “अब हमारे क्रूड आयात का लगभग 70% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के रास्तों से आ रहा है, जो पहले लगभग 55% था”। 

  • देश की रिफाइनरियां अपनी 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे सप्लाई मजबूत बनी हुई है। 

प्राकृतिक गैस पर


  • भारत में प्रतिदिन लगभग 189 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCMD) नेचुरल गैस की खपत होती है, जिसमें 97.5 MMSCMD घरेलू स्तर पर पैदा होती है। 

  • आयात की जाने वाली करीब 47.44 MMSCMD गैस की सप्लाई बाहरी कारणों से प्रभावित हुई है। 

  • कंट्रोल ऑर्डर लागू: इससे निपटने के लिए सरकार ने 9 तारीख को ‘नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर’ जारी किया है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को बचाने के लिए रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स की गैस सप्लाई में 35% की कटौती की जाएगी। वैकल्पिक रास्तों से गैस मंगवाई जा रही है और 2 LNG कार्गो भारत के रास्ते में हैं।

कच्चे तेल की आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा है कि देश की ऊर्जा और ईंधन जरूरतों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए मंत्रालय द्वारा आपूर्ति शृंखला को निरंतर और स्थिर बनाए रखा जा रहा है। 




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Delhi SIR: ‘डबल ड्यूटी’ पर विवाद! SIR में लगे 7500 टीचरों को जनगणना से छूट दिलाने की मांग, क्या है विवाद


Delhi

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Delhi SIR: दिल्ली में चुनावी तैयारियों के बीच एक अहम प्रशासनिक मुद्दा सामने आया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर ने डिविजनल कमिश्नर से अनुरोध किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम में लगे करीब 7,500 शिक्षकों को जनगणना से जुड़े कार्यों से फिलहाल छूट दी जाए। अधिकारियों का कहना है कि अगर इन शिक्षकों को एक साथ दोनों जिम्मेदारियां दे दी गईं तो चुनाव से जुड़ा अहम काम प्रभावित हो सकता है।

निर्वाचन आयोग ने हाल ही में संकेत दिया है कि अप्रैल 2026 से SIR शुरू होने की संभावना है। इससे पहले कई जरूरी तैयारियां पूरी करनी हैं। फिलहाल 2025 की मतदाता सूची में दर्ज नामों का मिलान वर्ष 2002 के वोटर डेटा से किया जा रहा है। यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके आधार पर मतदाता सूची को अपडेट किया जाएगा।

Delhi SIR controversy

इस काम के लिए बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO को रोजाना अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटानी पड़ रही है। उन्हें 2002 से जुड़े मतदाता रिकॉर्ड की पुष्टि करनी होती है और उसे 2025 की मतदाता सूची से जोड़ना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि यह समयबद्ध और मेहनत वाला काम है, इसलिए इसमें किसी तरह की देरी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

जनगणना की तैयारी भी तेज

इसी बीच दिल्ली में Census 2027 की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक अगले महीने से हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग फेज शुरू होने वाला है। इसके लिए करीब 40,000 कर्मचारियों को फील्डवर्क की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह चरण 15 अप्रैल से शुरू होकर जून तक पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को कवर करने वाला है।

क्यों जरूरी है शिक्षकों को छूट देना

दिल्ली में इस समय कुल 13,033 पोलिंग स्टेशन हैं और चुनावी कामकाज के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की मदद ली जाती है। दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) के स्कूलों के लगभग 7,500 शिक्षक BLO और BLO सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे हैं।

CEO कार्यालय का मानना है कि यदि इन्हीं शिक्षकों को जनगणना के काम में भी लगा दिया गया तो SIR की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से डिविजनल कमिश्नर से अनुरोध किया गया है कि उन्हें फिलहाल Census ड्यूटी से मुक्त रखा जाए।

जनगणना के लिए कौन है जिम्मेदार

दिल्ली सरकार में राजस्व सचिव-cum-डिविजनल कमिश्नर को जनगणना 2027 के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में अब फैसला उन्हीं को करना है कि चुनावी प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से छूट दी जाए या नहीं। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनावी तैयारी और जनगणना जैसे दो बड़े सरकारी अभियानों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।



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राजस्थान में तापमान 40°C से ज्यादा, MP में 39°C पहुंचा: बिहार में बारिश का यलो अलर्ट; जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड में बारिश-बर्फबारी की संभावना


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नई दिल्ली/श्रीनगर/देहरादून/पटना/जयपुर/भोपाल4 मिनट पहले

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मार्च में ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा समेत अन्य राज्यों में दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजस्थान में तापमान 40°C से ज्यादा रहा, सबसे ज्यादा बाढ़मेर में 40.6°C रहा। तेज गर्मी के साथ-साथ 2 जिलों में हीटवेव और 19 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट है।

मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते से ही तेज गर्मी होने लगी है। ग्वालियर-चंबल में तापमान सामान्य से 6°C से ज्यादा रहा। मौसम विभाग के मुताबिक 15 मार्च के बाद गर्मी और बढ़ेगी। मंगलवार को धार में पारा सबसे ज्यादा 39°C तापमान रहा। बाकी शहरों में 34°C से अधिक रहा।

बिहार में आज 8 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट है। इनमें गोपालगंज, बेगूसराय और नालंदा शामिल हैं। मंगलवार को सबसे ज्यादा तापमान सुपौल का रहा, जो 32.1°C था। पटना का भी 32°C रहा।

पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का अलर्ट है। उत्तराखंड के देहरादून में दिन का तापमान 31°C रहा। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में दिन का तापमान 35°C तक जा सकता है।

मौसम की 2 तस्वीरें…

उत्तराखंड के बागेश्वर में सुबह धुंध छाई रही।

उत्तराखंड के बागेश्वर में सुबह धुंध छाई रही।

राजस्थान के नागौर में तेज धूप छाने से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

राजस्थान के नागौर में तेज धूप छाने से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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गर्मी क्यों- फरवरी में बारिश कम, एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार असामान्य गर्मी के पीछे कई कारण हैं। फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में पश्चिमी विक्षोभ कम रहे। इस कारण बादल-बारिश कम हुई। सूर्य की गर्मी सीधे जमीन तक पहुंचने से सतह तेजी से गर्म हो रही है।

पश्चिम और मध्य भारत के ऊपर एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना है। इसमें हवा नीचे दबती है, जिससे बादल कम बनते हैं और गर्म हवाएं बनी रहती हैं। ये परिस्थितियां तापमान बढ़ाने के लिए अनुकूल रहती हैं।

कब मानी जाती है हीटवेव

मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40°C या उससे ज्यादा पहुंच जाए। अगर सामान्य तापमान से 4°C से 6°C ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों की सेहत पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।

जून में अलनीनो संभव, गर्मी बढ़ेगी, मानसून भी बिगड़ सकता है

ला-नीना कमजोर हो रहा है। अगले 3 महीने एनसो न्यूट्रल की स्थिति रहेगी, यानी ला-नीना और अलनीनो दोनों ही एक्टिव नहीं रहेंगे। अमेरिकन मौसम एजेंसी नोआ के अनुसार, जून के शुरू में अलनीनो दस्तक दे सकता है। इसी दौरान देश में मानसून आता है।

अलनीनो न सिर्फ मानसून बिगाड़ेगा, बल्कि गर्मी का दौर भी लंबा करेगा। ला-नीना में सामान्य, या फिर सामान्य से ज्यादा बारिश होती है। तापमान सामान्य से कम रहता है। अलनीनो में पारा चढ़ता है और बारिश कम होती है।

अगले 2 दिन मौसम का हाल…

  • 12 मार्च- हिमाचल और जम्मू-कश्मीर बारिश का अनुमान, पूर्वोत्तर में कुछ स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश या बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है।
  • 13 मार्च- केरल और आंध्र प्रदेश (विशेषकर तटीय क्षेत्रों) में मुख्यतः शुष्क मौसम रहेगा, लेकिन कुछ स्थानों पर हल्की गरज के साथ छिटपुट बारिश की संभावना बनी हुई है।

राज्यों के मौसम का हाल…

मध्य प्रदेश: ग्वालियर-चंबल संभाग में टेम्परेचर सामान्य से 6°C ज्यादा, 15 मार्च से और बढ़ेगा तापमान

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मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे हफ्ते से ही तेज गर्मी होने लगी है। ग्वालियर-चंबल में तापमान सामान्य से 6°C से ज्यादा रहा। मौसम विभाग के मुताबिक 15 मार्च के बाद गर्मी और बढ़ेगी। मंगलवार को धार में पारा सबसे ज्यादा 39°C तापमान रहा। बाकी शहरों में 34°C से अधिक रहा। पूरी खबर पढ़ें…

राजस्थान: राज्य के 19 जिलों में गिर सकते हैं ओले, दिन का तापमान 40°C पार, आज हीटवेव का अलर्ट

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राजस्थान के 2 जिलों में आज हीटवेव का अलर्ट है। मंगलवार को बाड़मेर में दिन का तापमान 40.6°C रहा, जो राज्य में सबसे ज्यादा था। झुंझुनूं में अधिकतम तापमान 39.2°C, चित्तौड़गढ़ में 39°C, चूरू में 38.7°C, जोधपुर में 38.6°C और जैसलमेर में 38.5°C दर्ज हुआ। पूरी खबर पढ़ें…

हरियाणा: राज्य के 3 शहरों में तापमान 35°C, दिन का पारा 7°C तक बढ़ा, सोनीपत-फरीदाबाद में धुंध छाई

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हरियाणा में गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश में अधिकतम तापमान 35°C के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 3 शहरों में तापमान 35°C या उससे ज्यादा रहा, जिनमें हिसार सबसे गर्म रहा, जहां 35.5°C रहा। पूरी खबर पढ़ें…

बिहार: राज्य के 8 जिलों में बारिश-बिजली का अलर्ट, 11 मार्च के बाद बदलेगा मौसम

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बिहार में मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के 8 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 40 kmph की स्पीड से हवा चलने की संभावना है। गोपालगंज, बेगूसराय और नालंदा में बादल छाए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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पीएम मोदी आज केरल और तमिलनाडु जाएंगे: दोनों राज्यों में कुल 16,450 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे; रैली को भी संबोधित करेंगे


चेन्नई/तिरुवनंतपुरम1 घंटे पहले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केरल और तमिलनाडु के दौरे पर रहेंगे। पीएम केरल के एर्नाकुलम में करीब 10,800 करोड़ और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में करीब 5,650 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

पीएम केरल पहुंचने पर अखिल केरल धीवर सभा के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे। उसके बाद, दोपबर 1:30 बजे एक और प्रोग्राम में, अलग-अलग डेवलपमेंट जनता को सौपेंगे। ये प्रोजेक्ट्स एनर्जी, हाईवे, रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे और दूसरे सेक्टर से जुड़े हैं। इसके बाद, दोपहर करीब 2:15 बजे, मोदी केरल के एर्नाकुलम में होने वाली NDA की रैली को एड्रेस करेंगे।

इसके बाद पीएम तमिलनाडु जाएंगे। यहां शाम लगभग 5:45 बजे, प्रधानमंत्री तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में लगभग 5,650 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलानयास करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

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पीएम बोले- NDA केरल के युवाओं की उम्मीदों को पूरा करेगा

प्रधानमंत्री ने अपने दौरे से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि मछुआरों की भलाई के लिए इस बॉडी ने जो काम किया है, वह काबिले-तारीफ है।

उन्होंने लिखा कि NDA का गुड गवर्नेंस एजेंडा LDF और UDF दोनों की लूट और कुशासन के मुकाबले सबसे ऊंचा है। NDA डेवलपमेंट वाली पॉलिटिक्स पर फोकस करेगा और केरल के युवाओं की उम्मीदों को पूरा करेगा।

मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल स्टेटस देने की मंजूरी

पीएम को दौरे से पहले मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट घोषित करने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह अपग्रेड इस क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों को दिखाता है और इससे मदुरै के विकास की संभावनाओं में काफी बदलाव आएगा।

वैष्णव ने कहा कि तमिलनाडु के तीन सबसे बड़े शहर चेन्नई, कोयंबटूर और मदुरै हैं। लोग यहां एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट चाहते हैं। यह फैसला मदुरै और तमिलनाडु के पूरे विकास में एक बड़ा बदलाव होगा।

मोदी बोले- NDA की लोकप्रियता से DMK डर गई है

पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि DMK राज्य भर में NDA की बढ़ती लोकप्रियता से साफ तौर पर परेशान है। उन्होंने लिखा कि तमिलनाडु के लोगों ने DMK के कुशासन और अधूरे वादों को देख लिया है। इसीलिए वे NDA के उम्मीद और तरक्की के एजेंडे से जुड़ रहे हैं।

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PM ने तमिलनाडु-पुडुचेरी में 7,100 करोड़ के प्रोजेक्ट्स शुरू किए:मदुरै में बोले-विकसित भारत में तमिलनाडु का अहम योगदान

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PM नरेंद्र मोदी 1 मार्च को भी पुडुचेरी और तमिलनाडु पहुंचे थे। पुडुचेरी में उन्होंने 2700 करोड़ और तमिलनाडु में 4,400 करोड़ रुपए से ज्यादा के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया था। साथ ही तमिलनाडु में ही आठ नए बने अमृत भारत रेलवे स्टेशनों, तीन नए आकाशवाणी FM रिले ट्रांसमीटर का उद्घाटन किया था। मोदी ने कहा था कि तमिलनाडु राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

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