Home Blog Page 438

LPG Gas Price Today: आज आपके शहर में कितने बढ़े रसोई गैस के दाम? सिलेंडर बुक करने से पहले चेक करें कीमत


Business

oi-Sohit Kumar

LPG Gas Price Today: भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों को लेकर मचे हाहाकार के बीच आज 11 मार्च को नए रेट जारी हो गए हैं। पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के संकट ने भारत की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सप्लाई चेन टूटने और आयात में आ रही दिक्कतों की वजह से न केवल दाम बढ़े हैं, बल्कि महानगरों में गैस की किल्लत की खबरें भी सामने आ रही हैं।

आइए जानते हैं आज आपके शहर में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की ताजा कीमतें क्या हैं?

lpg gas cylinder price today


भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी (LPG) और आधा से ज्यादा एलएनजी (LNG) विदेशों से आयात करता है। इसमें से 80-90% हिस्सा कतर (Qatar), यूएई (UAE), सऊदी अरब (Saudi Arabia) और कुवैत (Kuwait) जैसे देशों से आता है। ओमान और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण जहाजों का आवागमन बाधित हुआ है, जिससे इंश्योरेंस प्रीमियम और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ गई है। यही कारण है कि भारतीय तेल कंपनियों को कीमतों में इजाफा करना पड़ा है।

LPG Gas Price in UP, Bihar, Karnataka: 11 मार्च 2026: प्रमुख शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 KG) के दाम

LPG Gas Price in Bihar: पटना में आज कितने है एलपीजी के दाम?

  • बिहार की राजधानी पटना में LPG की कीमतें ₹1,002.50 पर पहुंच चुकी हैं, जो आम आदमी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

LPG Gas Price in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में आज कितनी है LPG गैस की कीमत?

  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज का भाव ₹915 के करीब है, वहीं नोएडा में यह ₹910.50 पर बना हुआ है।

LPG Gas Price in Rajasthan: राजस्थान में आज LPG गैस की कीमत?

  • राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज का रेट ₹916.50 है।

LPG Gas Price in Haryana: हरियाणा में आज LPG गैस सिलेंडर की कीमत?

  • हरियाणा के गुरुग्राम में भी LPG के दाम बढ़े हैं। यहां रसोई गेस की कीमत ₹921.50 है।

LPG Gas Price in Karnataka: बेंगलुरु में LPG गैस सिलेंडर की कीमत?

  • कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आज एलपीजी के दाम ₹915.50 दर्ज किए गए हैं।

LPG Gas Price in Mumbai & Delhi: दिल्ली- मुंबई में एलपीजी के रेट

देश की राजधानी दिल्ली में आज सिलेंडर ₹913 में मिल रहा है, जबकि मुंबई में यह ₹912.50 पर स्थिर है। महानगरों में कमर्शियल सप्लाई पर दबाव ज्यादा होने के कारण घरों तक डिलीवरी में देरी की खबरें भी आ रही हैं।

LPG Gas Price in Kolkata & Chennai: कोलकाता-चेन्नई में एलपीजी की कीमतें

कोलकाता में आज की कीमत ₹939 है और चेन्नई में लोग ₹928.50 प्रति सिलेंडर चुका रहे हैं। हैदराबाद में यह आंकड़ा ₹965 तक पहुँच गया है, जो पोर्ट से दूरी और स्थानीय टैक्स का नतीजा है।

Commercial Cylinder Price: कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी लगी आग

7 मार्च को हुई बढ़ोतरी के बाद 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹114 से ₹115 तक का उछाल आया है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर ₹1,883 के पार पहुँच गया है। इसका सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट के खाने पर पड़ रहा है। बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में तो कई जगह एलपीजी की शॉर्टेज (किल्लत) की खबरें भी मिल रही हैं, जिससे आम जनता और व्यापारी दोनों परेशान हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? 3 मुख्य कारण

  • 1. सप्लाई चेन में रुकावट: खाड़ी देशों से आने वाले शिपमेंट सुरक्षित रास्तों की तलाश में लंबा चक्कर लगा रहे हैं, जिससे समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
  • 2. लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस: युद्ध की स्थिति के कारण समुद्री रास्तों पर ‘वार-रिस्क इंश्योरेंस’ बढ़ गया है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर आ रहा है।
  • 3. डॉलर के मुकाबले रुपया: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता का असर घरेलू बाजार पर साफ दिख रहा है।



Source link

AI: पेंटागन के खिलाफ एंथ्रोपिक के समर्थन में उतरा माइक्रोसॉफ्ट, ट्रंप प्रशासन के फैसले को कोर्ट में दी चुनौती


सैन फ्रांसिस्को में एक बड़ा कानूनी और कॉरपोरेट मामला सामने आया है। दिग्गज तकनीकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट अब सीधे तौर पर एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। ट्रंप प्रशासन की ओर से एंथ्रोपिक को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ घोषित किए जाने की कार्रवाई को रोकने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने एक संघीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

विवाद का मूल कारण और पेंटागन की कार्रवाई

यह पूरा विवाद एंथ्रोपिक के प्रमुख एआई मॉडल ‘क्लॉड’ के सैन्य उपयोग से उपजा है। दरअसल, एंथ्रोपिक ने अपने एआई मॉडल ‘क्लॉड’ के असीमित सैन्य उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के बाद, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पिछले सप्ताह एंथ्रोपिक को सैन्य कार्यों से बाहर करने का आदेश जारी किया और इसके एआई उत्पादों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ करार दे दिया। इसके साथ ही, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सभी संघीय एजेंसियों को ‘क्लॉड’ का उपयोग बंद करने का कड़ा निर्देश दिया है। 

माइक्रोसॉफ्ट की कानूनी दलील और आर्थिक प्रभाव

एंथ्रोपिक ने सोमवार को सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत में ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा दायर किया था। इसके तुरंत बाद, एक प्रमुख सरकारी ठेकेदार होने के नाते मंगलवार को माइक्रोसॉफ्ट ने भी इसी अदालत में अपनी कानूनी फाइलिंग जमा कर दी। माइक्रोसॉफ्ट ने अदालत में चेतावनी दी है कि इस विवाद का अमेरिकी व्यापार पर गहरा असर हो सकता है। कंपनी ने अपनी फाइलिंग में कहा, “एक अनुबंध विवाद को सुलझाने के लिए ‘सप्लाई चेन रिस्क’ पदनाम का उपयोग करने से गंभीर आर्थिक प्रभाव पड़ सकते हैं, जो कि जनहित में नहीं हैं”। 

सरकारी ठेकेदारों और टेक सेक्टर पर प्रभाव

पेंटागन का यह कदम पूरे तकनीकी क्षेत्र और सरकारी ठेकेदारों के बीच चिंता बढ़ा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट के कानूनी दस्तावेज के अनुसार, रक्षा विभाग की यह कार्रवाई “सरकारी ठेकेदारों को ऐसे स्पष्टहीन और अपरिभाषित निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करती है, जिनका इस्तेमाल पहले कभी किसी अमेरिकी कंपनी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है”।

एआई नैतिकता पर माइक्रोसॉफ्ट का स्पष्ट रुख

माइक्रोसॉफ्ट ने जज से इस ‘सप्लाई चेन रिस्क’ पदनाम को अस्थायी रूप से हटाने की मांग की है ताकि इस संवेदनशील मुद्दे पर “तर्कसंगत चर्चा” हो सके। अनुबंध वार्ता में मुख्य बाधा बनी एंथ्रोपिक की दो नैतिक ‘रेड लाइन्स’ का भी माइक्रोसॉफ्ट ने दृढ़ता से समर्थन किया है:


  • अमेरिकी एआई का उपयोग घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर निगरानी करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

  • मानव नियंत्रणके बिना एआई का उपयोग कोई युद्ध शुरू करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

  • कंपनी ने स्पष्ट किया, “यह रुख कानून के अनुरूप है और अमेरिकी समाज द्वारा व्यापक रूप से समर्थित है, जैसा कि सरकार भी स्वीकार करती है”।

दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस मामले में चल रही मुकदमेबाजी का हवाला देते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। यह विवाद स्पष्ट करता है कि एआई के सैन्य उपयोग और कॉर्पोरेट नैतिकता के बीच का टकराव अब सीधे तौर पर रक्षा विभाग की आपूर्ति श्रृंखलाओं और टेक कंपनियों के अनुबंधों को प्रभावित कर रहा है। अदालत का यह फैसला भविष्य के सरकारी अनुबंधों और एआई बिजनेस नीतियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।





Source link

Petrol Diesel Rates: दिल्ली से असम तक, क्या आज सस्ते हुए तेल के दाम? चेक करें 11 मार्च की लेटेस्ट रेट लिस्ट


India

oi-Puja Yadav

Petrol Diesel Rates Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार 11 मार्च 2026 को एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) से रिकॉर्ड मात्रा में तेल जारी करने के प्रस्ताव के बाद वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फिसलकर $88 प्रति बैरल के नीचे आ गया है।

हाल ही में $120 के स्तर को छूने वाले तेल की कीमतों में यह राहत ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि IEA अब तक का सबसे बड़ा तेल रिलीज (182 मिलियन बैरल से अधिक) करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण ‘हॉर्मुज जलमार्ग’ से बाधित हुई सप्लाई चेन को संतुलित करना है।

petrol-diesel-rates-11-march

Petrol Diesel Price Delhi Mumbai: भारत के महानगरों में आज के फ्यूल का रेट 11 मार्च 2026

कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद, भारत में सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) ने आज भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी आने वाले दिनों में राहत का संकेत दे सकती है।

  • नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर
  • मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर
  • कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 और डीजल ₹92.02 प्रति लीटर
  • नोएडा: पेट्रोल ₹94.90 और डीजल ₹88.01 प्रति लीटर
  • गुवाहाटी (असम): पेट्रोल ₹98.24 और डीजल ₹90.19 प्रति लीटर

IEA Strategic Petroleum Reserve Release: IEA का प्रस्ताव पर भारत का रुख

IEA के प्रस्ताव के अनुसार, सदस्य देश अपने भंडार से लाखों बैरल तेल बाजार में उतारेंगे ताकि कीमतों में आई भारी तेजी को थामा जा सके। यह 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय किए गए रिलीज से भी बड़ा होने की उम्मीद है। भारत ने IEA के इस साझा रिलीज प्रस्ताव में शामिल होने से फिलहाल इनकार कर दिया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अपने 5.33 मिलियन टन के रणनीतिक भंडार को केवल वास्तविक आपूर्ति संकट के समय के लिए सुरक्षित रखना चाहता है, न कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए। भारत का मानना है कि वर्तमान संकट उसकी देन नहीं है, इसलिए जिम्मेदारी उन देशों की है जिन्होंने इसे पैदा किया है।

आम आदमी को कब मिलेगी राहत ?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक $90 के नीचे बना रहता है, तो भारतीय तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 3 रुपये की कटौती पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की ऐतिहासिक गिरावट (₹92.14) और खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों के डर से कंपनियां फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की स्थिति में हैं।

रिफाइनरी स्तर पर LPG उत्पादन को प्राथमिकता देने के सरकार के फैसले के बाद, ध्यान अब इस बात पर है कि क्या कच्चे तेल की ये गिरावट घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कुछ राहत लाएगी, जिनमें हाल ही में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। रिफाइनरी स्तर पर LPG उत्पादन को प्राथमिकता देने के सरकार के फैसले के बाद, सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या कच्चे तेल की ये गिरावट घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी कुछ राहत लाएगी।



Source link

The Bonus Market Update: घरेलू शेयर बाजार की सपाट शुरुआत; उठापटक के बाद हरे निशान पर लौटे सेंसेक्स-निफ्टी


भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लाल निशान पर खुला। हालांकि बाद में बाजार हरे निशान पर लौट आया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 51.62 अंक या 0.07% गिरकर 78,154.36 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 14.25 अंक या 0.06% गिरकर 24,247.35 अंक पर आ गया।

Trending Videos

(यह खबर अपडेट की जा रही है)



Source link

‘4 बच्चों के लिए सही पति की मार, जबरन मुस्लिम बनाया’, कौन हैं Sayali Surve, जिनकी हुई हिंदू धर्म में वापसी?



Sayali Surve: साल 2019 की ‘मिस इंडिया अर्थ’ की प्रतियोगी रहीं सायली सुर्वे एक बार फिर चर्चा में हैं, इस बार वजह है घरेलू हिंसा , दरअसल उन्होंने अपने पति पर धर्मांतरण और हिंसा का आरोप लगाया है, फिलहाल उनकी हिंदू धर्में में वापसी हो गई है।



Source link

Iran US War: अमेरिका ने तबाह किए ईरान के 16 युद्धपोत, ट्रंप की धमकी- तेहरान को बूंद-बूंद तेल के लिए तरसाएंगे


International

oi-Puja Yadav

US Destroys 16 Iranian Minelayers: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ी सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरान के 16 माइन-लेइंग (समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने वाले) जहाजों को नष्ट कर दिया है।

यह कार्रवाई तब हुई जब ईरान ने दुनिया को चेतावनी दी थी कि वह इस क्षेत्र से अपने दुश्मनों को एक लीटर तेल भी बाहर नहीं ले जाने देगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार (10 मार्च 2026) को इस ऑपरेशन का वीडियो जारी किया, जिसमें ईरानी जहाजों को मिसाइलों से उड़ते हुए देखा जा सकता है।

us-destroys-16-iranian-minelayers

Operation Epic Fury: डोनाल्ड ट्रंप की ‘फायर एंड फ्यूरी’ चेतावनी

युद्ध के 11वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा अगर ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाई हैं, तो उन्हें तुरंत हटा लिया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान को ऐसे सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ेगा जो उसने पहले कभी नहीं देखे होंगे।

हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक ऐसी कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है कि ईरान ने वास्तव में सुरंगें बिछा दी हैं, लेकिन अमेरिका ने एहतियात के तौर पर उन जहाजों को निशाना बनाया है जो ऐसा करने की क्षमता रखते थे।

ईरान का पलटवार: हम तय करेंगे युद्ध का अंत

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ट्रंप के दावों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि युद्ध का अंत अमेरिका नहीं, बल्कि ईरान तय करेगा। ईरानी नेताओं ने कसम खाई है कि जब तक अमेरिका और इजरायल की बमबारी नहीं रुकती, तब तक खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह ठप रहेगा। तेहरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने ट्रंप को सीधी धमकी देते हुए कहा, सावधान रहें कि कहीं आप खुद ही खत्म न हो जाएं।” ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अब वॉशिंगटन के साथ किसी भी तरह की बातचीत के पक्ष में नहीं है।

युद्ध का भयावह असर दिखा- तेहरान और लेबनान में तबाही

तेहरान में बमबारी: ईरानी राजधानी के निवासियों ने बताया कि उन्होंने युद्ध की अब तक की सबसे भारी बमबारी झेली है। कई आवासीय इमारतों के जमींदोज होने की खबरें हैं, और हजारों लोग शहरों को छोड़कर गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं।

लेबनान में मौत का तांडव जारी है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में बुधवार सुबह तक 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में रेड क्रॉस का एक सदस्य और हिजबुल्ला से जुड़ा एक पैरामेडिक (स्वास्थ्य कर्मी) भी शामिल है। पेंटागन ने पहली बार स्वीकार किया है कि इस युद्ध में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक भी घायल हुए हैं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हमले और भी तीव्र होंगे।

क्यों अहम है हॉर्मुज जलमार्ग?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोक पॉइंट’ है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। भारत अपनी जरूरत की 50% से अधिक गैस और तेल इसी मार्ग से मंगाता है, जिससे यहां भी ईंधन का संकट गहरा गया है।



Source link

पश्चिम एशिया तनाव: आईईए का ऐतिहासिक फैसला, बाजार में उतारेगा 40 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल; जानें भारत पर असर


पश्चिम एशिया में गहराते संकट और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के बीच, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। आपूर्ति बाधित होने की बढ़ती आशंकाओं के मद्देनजर, आईईए के सभी 32 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से अपने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। 

अब तक का सबसे बड़ा ‘ऑयल रिलीज’

यह ऐतिहासिक फैसला आईईए के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा कदम है। इससे पहले 2022 में, जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण स्तर का आक्रमण किया था, तब एजेंसी के सदस्य देशों ने बाजार में 18.2 करोड़ बैरल तेल उतारा था। वर्तमान फैसला पिछले रिकॉर्ड के दोगुने से भी अधिक है। इस अभूतपूर्व कदम पर आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा, “तेल बाजार जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, वे अभूतपूर्व स्तर की हैं, इसलिए मुझे खुशी है कि आईईए के सदस्य देशों ने इतने बड़े पैमाने पर सामूहिक आपातकालीन कार्रवाई की है”।

होर्मुज जलडमरूमध्य और आपूर्ति का डर

यह रणनीतिक निर्णय ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़ा संघर्ष मध्य पूर्व से तेल की सुरक्षित आवाजाही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहा है। मध्य पूर्व विश्व के कच्चे तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा कवर करता है। वैश्विक बाजार की नजरें विशेष रूप से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर टिकी हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट चोकप्वाइंट्स में से एक है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हर दिन इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यहां टैंकरों के आवागमन में कोई भी बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी अस्थिरता ला सकती है।

आईईए के नियम और पिछला इतिहास

पेरिस स्थित आईईए वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान अपने सदस्य देशों के बीच आपातकालीन तेल स्टॉक जारी करने का प्रबंधन करता है। नियमों के अनुसार, अचानक होने वाली आपूर्ति बाधाओं से बचने के लिए सदस्य देशों को अपने शुद्ध तेल आयात के कम से कम 90 दिनों के बराबर आपातकालीन तेल भंडार बनाए रखना अनिवार्य है। अतीत में भी, 2011 के लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान एजेंसी ने लगभग 6 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारा था। इस तरह के आपातकालीन स्टॉक रिलीज का मुख्य उद्देश्य आपूर्ति की कमी को रोकना और अत्यधिक मूल्य अस्थिरता को कम करना है।

भारत के लिए इसके मायने और आर्थिक प्रभाव

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक देश के रूप में, भारत अपनी घरेलू ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए इन वैश्विक घटनाक्रमों पर भारत में करीब से नजर रखी जा रही है। इस भू-राजनीतिक संकट के कारण भारत पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकते हैं:


  • आयात बिल और मुद्रास्फीति: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती हैं, जिससे घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति पर दबाव बनेगा।

  • रुपये पर दबाव: आयात लागत बढ़ने से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है।

  • भारत की रणनीतिक तैयारी: वैश्विक आपूर्ति में किसी भी अचानक रुकावट के दौरान बफर प्रदान करने के लिए, भारत ने विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर में अपनी खुद की भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण सुविधाएं स्थापित की हैं।

ईरान संघर्ष के कारण आपूर्ति  शृंखलाओं और उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन कर रहे ट्रेडर्स के बीच हाल के हफ्तों में तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि आईईए का यह कदम इस बात का साफ संकेत है कि वैश्विक सरकारें संभावित ‘सप्लाई शॉक’ से अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए आपातकालीन योजनाओं पर तेजी से काम कर रही हैं।





Source link

Gold-Silver Price: आज सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी; जानें सोने-चांदी का ताजा अपडेट


पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिकी अधिकारियों के हालिया बयानों के बाद बुधवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट के साथ कारोबार शुरू हुआ। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता का असर कीमती धातुओं पर भी दिखाई दे रहा है।

राजधानी दिल्ली में आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम ₹10 महंगा हो गया है, जबकि 22 कैरेट सोना भी प्रति 10 ग्राम ₹10 बढ़ा है।

पिछले दो दिनों के रुझान पर नजर डालें तो सोने में तेज उछाल देखने को मिला है। 24 कैरेट सोना दो दिनों में कुल ₹710 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है, वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत में भी दो दिनों में ₹660 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

चांदी की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। राजधानी में एक किलो चांदी लगातार दूसरे दिन महंगी हुई है। एक दिन की गिरावट के बाद पिछले दो दिनों में चांदी की कीमत ₹10,100 प्रति किलो तक बढ़ गई है, जिससे बाजार में फिर से मजबूती का संकेत मिल रहा है।

एशियाई ट्रेडिंग घंटों के दौरान स्पॉट गोल्ड की कीमत हल्की गिरावट के साथ 0.34% नीचे आकर 5224 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, हालांकि यह अब भी 5200 डॉलर के स्तर से ऊपर बनी हुई है। वहीं स्पॉट सिल्वर की कीमत भी 0.32% गिरकर 89.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे किसी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया था। यह बयान उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आया जिसे बाद में हटा दिया गया था। इस स्पष्टीकरण के बाद तेल की कीमतों में मंगलवार की तेज गिरावट के बाद फिर से उछाल देखने को मिला।

इस बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब 12वें दिन में पहुंच गया है और इसका असर क्षेत्र में कच्चे तेल के उत्पादन और रिफाइनिंग गतिविधियों पर पड़ रहा है।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे तीव्र हमले किए हैं और तब तक कार्रवाई जारी रहेगी जब तक ईरान को पराजित नहीं किया जाता। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन हालिया बयान अधिक आक्रामक रुख को दर्शाते हैं।



Source link

Iran War: ‘पश्चिम एशिया युद्ध से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भारी दबाव’; जानें पीएचडी चेंबर की क्या है चिंता


पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को बुरी तरह बाधित कर दिया है, जिसका सीधा असर भारत के कई प्रमुख सेक्टर्स, खासकर गैस पर निर्भर उद्योगों और बंदरगाह आधारित व्यापार पर पड़ रहा है।  पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के सीईओ और महासचिव रंजीत मेहता ने इस संकट पर चिंता जताते हुए साफ किया है कि यह युद्ध भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। मेहता के मुताबिक, ‘बंदरगाहों पर अफरा-तफरी का माहौल है और गैस सप्लाई पर निर्भर कई व्यवसायों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है’।

नए बाजारों से गैस की खरीद, लेकिन बढ़ेगा ‘आयात बिल’

पश्चिम एशिया के संकट से पैदा हुई इस अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने सक्रिय कदम उठाते हुए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और मोजाम्बिक जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से प्राकृतिक गैस की खरीद शुरू कर दी है। मेहता ने अनुमान जताया कि नए विकल्पों से आपूर्ति शुरू होने और स्थिति को स्थिर होने में लगभग दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका या अन्य स्रोतों से आयातित गैस की प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन मीट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट) कीमत मध्य पूर्व की तुलना में निश्चित रूप से अधिक होगी। इसके परिणामस्वरूप भारत के इंपोर्ट बिल (आयात बिल) में सीधा इजाफा होगा, लेकिन देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत में उछाल

इस भू-राजनीतिक संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के बाजार में भारी उछाल आया है। मेहता ने बताया कि जो कीमतें पहले $60-$65 के स्तर पर थीं, वे अब 90 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर चुकी हैं और एक समय तो यह 117 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। उन्होंने चेतावनी दी कि क्रूड का 90 डॉलर से ऊपर जाना भारत ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण सीधे तौर पर उत्पादन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है। इसका असर फार्मास्युटिकल व्यापार सहित व्यापक आयात-निर्यात गतिविधियों पर पड़ रहा है, जिससे शिपिंग महंगी हो रही है और अंततः अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बन रहा है।

खरीफ सीजन से पहले उर्वरक सेक्टर की चिंताएं

गैस आपूर्ति में हो रही इस रुकावट ने उर्वरक उद्योग के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है, क्योंकि प्राकृतिक गैस इस सेक्टर का प्रमुख कच्चा माल है। मेहता ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए फर्टिलाइजर के उत्पादन और उपलब्धता पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है, हालांकि उन्हें भरोसा है कि सरकार इस स्थिति को सफलतापूर्वक प्रबंधित कर लेगी। 

नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रुख

वर्तमान की इन अल्पकालिक चुनौतियों के बीच, यह संकट आयातित जीवाश्म ईंधन  पर भारत की निर्भरता कम करने की आवश्यकता को मजबूती से रेखांकित करता है। मेहता ने जोर देकर कहा कि दीर्घकालिक तौर पर पूरी तरह से ऊर्जा सुरक्षित बनने के लिए भारत को रिन्यूएबल (अक्षय) ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ना होगा। सरकार ने पहले ही 2030 तक लगभग 500 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता हासिल करने का रोडमैप तैयार कर लिया है, जो भविष्य में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के साथ मिलकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य बनाने में मदद करेगा।





Source link

50 हजार शादियों में खाने पर संकट: कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं, भट्‌टी जलाने पर 10 हजार रुपए जुर्माना; हजारों होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर – Madhya Pradesh News




अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इसका असर अब मध्यप्रदेश के सभी शहरों पर पड़ने लगा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित सभी शहरों में कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर व्यवसाय वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। होटल और रेस्टोरेंट चलाने वालों के साथ ठेले पर खाने-पीने की चीजें बनाने वाले छोटे रोजगार से जुड़े लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता शादी के सीजन के कारण उन लोगों की है जिन्होंने शादी समारोह के कार्ड बांट दिए हैं। सीजन में करीब 50 हजार शादियों का अनुमान है। इन आयोजनों में मेहमाननवाजी के लिए दावतें फीकी हो सकती हैं, क्योंकि कॉमर्शियल सिलेंडर मिलना बंद हो गए है और खुले में भट्‌टी जलाई तो 10 हजार रुपए तक जुर्माना लग सकता है। आइए बताते हैं कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत से क्या हालात हैं? कैटरिंग के काम पर असर, इवेंट कैंसिल होने का खतरा 12-15 सालों से कैटरिंग का काम करने वाले भोपाल के जितेंद्र ने बताया अभी तो रोज इवेंट है। कल भी दो-तीन हैं। परसों भी हैं। 14 तारीख तक खरमास चल रहा है। उससे पहले भी इवेंट है। टेंट, कैटरिंग, घर के सामान आदि का काम लेते हैं। कमर्शियल सिलेंडर बंद होने से धंधे पर बहुत असर पड़ेगा। अभी एक दो दिन तो निकाल लेंगे। घर के सिलेंडर से कुछ काम निकाल लिया। यहां- वहां से लेकर कुछ काम चला लिया, लेकिन आगे बड़ी परेशानी आनी है। जिन लोगों के इवेंट हैं उनके फोन आने शुरू हो गए हैं। इवेंट कैंसिल हुए तो भारी नुकसान होगा। जो सिलेंडर इधर-उधर से मिल रहा है वो भी 2200 रुपए तक मिल रहा है। वो भी एक-दो दिन में नहीं मिलेगा। कोई ऑप्शन भी नहीं है। डीजल चूल्हा या इलेक्ट्रिक चूल्हा हमारे काम के लिए सही नहीं है। ऐसे में अब क्या करेंगे कुछ समझ नहीं आ रहा। भट्‌टी जलाने पर कम से कम 5 हजार रुपए और अधिकतम ढाई लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन सामान्यत: ऐसे मामलों में अफसर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना करते हैं। गैस संकट से रेस्टोरेंट पर असर, ऑर्डर कैंसिल होने की नौबत भोपाल राजहंस रेस्टोरेंट के संचालक दीपक सिंह चौहान कहते हैं, हमारे यहां तो पांच से छह सिलेंडर प्रतिदिन लगते हैं। लगभग 800 से 1000 लोग रोजाना खाना खाते हैं। कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से बिजनेस पर असर पड़ेगा। खाना बनाना जरूरी है। अगर नहीं बनाएंगे तो लोग घर पर ही बनाएंगे और जो घर पर बनाएंगे वहां भी गैस लगनी ही है। या फिर हमें फैसिलिटी दी जाए कि हम भी घरेलू गैस इस्तेमाल कर सकें। हमारे पास कुछ इंडक्शन वगैरह भी हैं। जैसे कि तंदूर वगैरह के लिए सरकार के आदेश हैं कि लकड़ी का कोयला न जलाएं। अब उसमें भी गैस ही लग रही है। उसमें भी समस्या आएगी। पार्टी के ऑर्डर लेते हैं। आगे ऐसे काफी ऑर्डर हैं। अब दिक्कत तो आएगी। यही हाल रहे तो कैंसिल ही करना पड़ेगा। रिसॉर्ट-होटलों के सामने खाना बनाने का संकट इंदौर के भंडारी रिसॉर्ट के जनरल मैनेजर मुकेश लाड ने बताया, कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने से हमारे काम पर बहुत असर पड़ेगा। अभी खाना बनाने के लिए कोई ऑप्शन भी नहीं है। केरोसिन आसानी मिलता नहीं है। लकड़ियों पर भी खाना नहीं बना सकते, ना ही भट्टियों की उपलब्धता है। मान लीजिए आज मुझे 100 सिलेंडर लगते हैं और यदि उपलब्धता 20-25 की होगी तो मैं कैसे पूर्ति कर पाऊंगा? होटल इंडस्ट्री इमरजेंसी सर्विस, सीएम से मिलेंगे मध्य प्रदेश होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया कि फिलहाल होटलों में इस तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में परेशानी हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश स्तर पर होटल संचालकों की बैठक रखी गई है, वहीं इंदौर में भी एक बैठक बुलाई गई है। होटल इंडस्ट्री भी इमरजेंसी सर्विस में आती है। कोरोना काल में भी इसे इमरजेंसी सर्विस में रखा गया था, ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा- अपनी मांगों को लेकर संगठन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात भी करेंगे। हजारों स्टूडेंट के भोजन पर संकट, बंद हो सकते हैं टिफिन सेंटर भोपाल के उन्नति भोजनालय के संचालक रजनीश ने बताया कि उनकी कैंटीन में हर पांचवें दिन गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। आपूर्ति प्रभावित हुई तो काम पर बड़ा असर पड़ेगा। उनके यहां रोज करीब 60-70 छात्र खाना खाते हैं और टिफिन भी भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे पिछले 7-8 साल से यह काम कर रहे हैं। लकड़ी या अन्य विकल्पों पर खाना बनाना आसान नहीं है। इलाके में करीब 70-80 टिफिन सेंटर हैं और लगभग 20-25 हजार छात्र इन्हीं पर निर्भर हैं। सिलेंडर की कमी लंबी चली तो कई सेंटर बंद होने की नौबत आ सकती है।
फूड डिलीवरी वालों को रोजगार की चिंता फूड डिलीवरी का काम करने वाले सुकेश बताते हैं, मैं रोज 15 से 20 ऑर्डर डिलीवर करता हूं। किसी दिन 800 तो किसी दिन 1200 रुपए तक कमा लेता हूं। आज पता चला कि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद हो गई है। इसका असर रेस्टोरेंट्स पर तो पड़ेगा ही, साथ ही फूड डिलीवरी पर भी पड़ेगा। अगर रेस्टोरेंट खाना नहीं बना पाएंगे तो ऑर्डर कैसे मिलेंगे? ऐसे में हमारा काम भी ठप हो जाएगा। भोपाल में 7,000 से ज्यादा लोग नियमित रूप से फूड डिलीवरी का काम करते हैं। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने पर इनकी रोजी-रोटी पर भी असर पड़ने की आशंका है। प्रदेश सरकार का दावा- सप्लाई सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता की निगरानी के निर्देश दिए। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक है और घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने और अधिकृत जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है। कालाबाजारी राेकने सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया इधर, केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा…. पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई): इसमें घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी। दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है। तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी। चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल): शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी।



Source link