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देशभर में LPG की किल्लत, एजेंसी के बाहर लंबी लाइनें: UP-बिहार में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बंट रहे, राजस्थान में कालाबाजारी


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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं।

दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना नहीं बन पा रहा है।

मध्य प्रदेश: कैटरर्स बोले- ये इमरजेंसी जैसी स्थिति

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से सबसे ज्यादा संकट होटल-रेस्टॉरेंट पर है। वहीं घरेलू रसोई गैस लेने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लगी है।

जिन घरों में शादी है, वे टेंशन में हैं। अकेले भोपाल में ही 20 दिन में एक हजार से ज्यादा शादियां हैं। कैटरर्स का कहना है कि ये इमरजेंसी जैसी स्थिति है। पूरी खबर पढ़ें

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उत्तर प्रदेश: पुलिस सुरक्षा में बंट रहे सिलेंडर

उत्तर प्रदेश में बुकिंग के 4 से 5 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें लगने लगी हैं। गोरखपुर-सिद्धार्थनगर में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।

एजेंसियों पर तड़के 3 बजे से ही लोग लाइन लगाने पहुंच रहे हैं। घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। वजह- सिलेंडर कम हैं और लेने वालों की संख्या ज्यादा। पूरी खबर पढ़ें

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बिहार: लोग सुबह से ही गैस एजेंसी पहुंच रहे

यहां भी 2 दिन से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग बंद है। इस वजह से होटल,रेस्टॉरेंट पर असर पड़ा है। घरेलू गैस को लेकर भी राज्य के कई जिलों में लोगों की लंबी कतार दिखी।

गोपालगंज, खगड़िया, औरंगाबाद, पटना समेत कई जिलों में लोग सुबह से ही गैस एजेंसी पहुंचने लगे। कई एजेंसियों में ताला लटका है। कोई कर्मचारी भी यहां मौजूद नहीं हैं। पूरी खबर पढ़ें

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राजस्थान: 1900 रुपए का सिलेंडर 2500 रुपए में बेचा जा रहा

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बिल्कुल बंद हो गई है। ऐसे में अलग-अलग एजेंसी तय दाम से ज्यादा में सिलेंडर की कालाबाजारी कर रही है। भास्कर स्टिंग में खुलासा हुआ कि जयपुर में 1911 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर 2500 रुपए तक में बेचा जा रहा है। भास्कर ने जयपुर के एक होटल में आए गैस सप्लायर (इंडेन) का स्टिंग किया।

अलवर में एक गैस एजेंसी पर जमकर हंगामा हुआ। यहां ग्राहकों ने एजेंसी पर कालाबाजारी के आरोप लगाए।

अलवर में एक गैस एजेंसी पर जमकर हंगामा हुआ। यहां ग्राहकों ने एजेंसी पर कालाबाजारी के आरोप लगाए।

पंजाब: घरेलू सिलेंडरों की भी बुकिंग बंद लुधियाना और फरीदकोट में सर्वर डाउन होने के कारण घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग भी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा फरीदकोट, होशियारपुर और पटियाला समेत कई जिलों में सोमवार से कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बंद है।

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संकट से निपटने सरकार ने 5 जरूरी कदम उठाए

1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।

2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है।

3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक होगा।

4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं।

5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है कि अब उत्पादन 10% बढ़ गया है।

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तेल कंपनियां रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने रेस्टोरेंट एसोसिएशनों की शिकायतें सुनने के लिए 3 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इसमें IOC, HPCL और BPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शामिल हैं।

यह कमेटी एसोसिएशन की कॉमर्शियल गैस सप्लाई से जुड़ी जायज जरूरतों को पूरा करेगी। जरूरत के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता भी भी फिर से तय करेगी।

सप्लाई संकट की 2 वजह

1. होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

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2. प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका

पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।

कब तक सुधरेंगे हालात?

इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर का कहना है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।

सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए

सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।

वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1 मार्च को 115 रुपए बढ़ाए गए थे। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है।

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Natural Gas MCX: कमोडिटी बाजार में नेचुरल गैस में तेजी, महंगी होगी CNG? आम आदमी की जेब पर कितना होगा असर?


Business

oi-Kumari Sunidhi Raj

Natural Gas MCX: कमोडिटी बाजार में आज नेचुरल गैस (Natural Gas) की कीमतों में तेजी का दौर देखने को मिला है। 11 मार्च 2026 को दोपहर 12 बज नेचुरल गैस का मार्च कॉन्ट्रैक्ट मजबूती के साथ ट्रेड करता नजर आया। बाजार में बढ़ती खरीदारी के कारण इसकी कीमतों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई है।

26 मार्च 2026 को एक्सपायर होने वाले इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 281.80 रुपये प्रति mmBtu पर पहुंच गई, जिसमें करीब 2.06 प्रतिशत यानी 5.70 रुपये की वृद्धि हुई। दिन के कारोबार में इसका भाव 278.70 रुपये से 282.30 रुपये के दायरे में रहा। पिछला बंद भाव 276.10 रुपये था और आज का औसत ट्रेडिंग प्राइस 280.47 रुपये दर्ज किया गया, जो बाजार में मजबूत खरीदारी के संकेत हैं।

Natural Gas MCX: कमोडिटी बाजार में नेचुरल गैस में तेजी, महंगी होगी CNG? आम आदमी की जेब पर कितना होगा असर?

ट्रेडिंग वॉल्यूम और आंकड़ों पर नजर

कमोडिटी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, आज नेचुरल गैस में 7,377 लॉट का कारोबार हुआ, जबकि इसकी ट्रेडिंग यूनिट 1250 mmBtu तय है। ओपन इंटरेस्ट 19,811 लॉट तक पहुंच गया है, जिसमें 67 लॉट की बढ़ोतरी देखी गई है। अगर पिछले आंकड़ों को देखें, तो इस कॉन्ट्रैक्ट का न्यूनतम भाव 241.10 रुपये और अधिकतम भाव 392.80 रुपये प्रति mmBtu रहा है, जो इसकी कीमतों में रहने वाले उतार-चढ़ाव को दिखाता है।

Natural Gas में तेजी का CNG पर असर

नेचुरल गैस की कीमतों में जारी इस तेजी का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। CNG का उत्पादन नेचुरल गैस से ही किया जाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में नेचुरल गैस महंगी होने पर इसकी उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भविष्य में गैस कंपनियां CNG की कीमतों में इजाफा (CNG Price Rise) कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में CNG से चलने वाले ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों के मालिकों के लिए परिचालन खर्च में बढ़ोतरी होना तय है, जिसका सीधा असर आम आदमी के बजट पर पड़ेगा।

प्रमुख शहरों में CNG की वर्तमान कीमतें (11 मार्च 2026) (CNG Price)

नेचुरल गैस खबर लिखे जाने तक हाई पर ट्रेड कर रहा है। इसी बीच लोगों के मन में CNG की कीमतों को लेकर भी सवाल हैं। ईरान-इजराइल जंग के बीच जानिए आपके शहर में ताजा CNG का रेट-



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देशभर में LPG की किल्लत, एजेंसी के बाहर लंबी लाइनें: UP-बिहार में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बंट रहे, राजस्थान में कालाबाजारी


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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों पर 2-2 किलोमीटर की लम्बी लाइनें लग गई हैं।

दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना नहीं बन पा रहा है।

मध्य प्रदेश: कैटरर्स बोले- ये इमरजेंसी जैसी स्थिति

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से सबसे ज्यादा संकट होटल-रेस्टॉरेंट पर है। वहीं घरेलू रसोई गैस लेने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लगी है।

जिन घरों में शादी है, वे टेंशन में हैं। अकेले भोपाल में ही 20 दिन में एक हजार से ज्यादा शादियां हैं। कैटरर्स का कहना है कि ये इमरजेंसी जैसी स्थिति है। पूरी खबर पढ़ें

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उत्तर प्रदेश: पुलिस सुरक्षा में बंट रहे सिलेंडर

उत्तर प्रदेश में बुकिंग के 4 से 5 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें लगने लगी हैं। गोरखपुर- सिद्धार्थनगर में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बांटे जा रहे हैं।

एजेंसियों पर तड़के 3 बजे से ही लोग लाइन लगाने पहुंच रहे हैं। घंटों इंतजार कर रहे, लेकिन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। वजह- सिलेंडर कम हैं और लेने वालों की संख्या ज्यादा। पूरी खबर पढ़ें

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बिहार: लोग सुबह से ही गैस एजेंसी पहुंच रहे

यहां भी 2 दिन से कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग बंद है। इस वजह से होटल,रेस्टॉरेंट पर असर पड़ा है। घरेलू गैस को लेकर भी राज्य के कई जिलों में लोगों की लंबी कतार दिखी।

गोपालगंज, खगड़िया, औरंगाबाद, पटना समेत कई जिलों में लोग सुबह से ही गैस एजेंसी पहुंचने लगे। कई एजेंसियों में ताला लटका है। कोई कर्मचारी भी यहां मौजूद नहीं हैं। पूरी खबर पढ़ें

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राजस्थान: 1900 रुपए का सिलेंडर 2500 रुपए में बेचा जा रहा

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई बिल्कुल बंद हो गई है। ऐसे में अलग-अलग एजेंसी तय दाम से ज्यादा में सिलेंडर की कालाबाजारी कर रही है। भास्कर स्टिंग में खुलासा हुआ कि जयपुर में 1911 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर 2500 रुपए तक में बेचा जा रहा है। भास्कर ने जयपुर के एक होटल में आए गैस सप्लायर (इंडेन) का स्टिंग किया।

संकट से निपटने सरकार ने 5 जरूरी कदम उठाए

1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।

2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है।

3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक होगा।

4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं।

5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है कि अब उत्पादन 10% बढ़ गया है।

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तेल कंपनियां रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने रेस्टोरेंट एसोसिएशनों की शिकायतें सुनने के लिए 3 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इसमें IOC, HPCL और BPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शामिल हैं।

यह कमेटी एसोसिएशन की कॉमर्शियल गैस सप्लाई से जुड़ी जायज जरूरतों को पूरा करेगी। जरूरत के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता भी भी फिर से तय करेगी।

सप्लाई संकट की 2 वजह

1. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

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2. प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका

पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।

कब तक सुधरेंगे हालात?

इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर का कहना है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।

सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए

सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रही है। पहले यह 853 रुपए की थी। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।

वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1 मार्च को 115 रुपए बढ़ाए गए थे। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है।

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Balen Shah Caste: पिता मधेशी और मां पहाड़ी, आखिर किस जाति से हैं बालेन शाह, इंटरनेट पर क्यों हो रहा विवाद?


International

oi-Sumit Jha

Balen Shah Caste: काठमांडू के मेयर से नेपाल के प्रधानमंत्री पद तक का बालेन शाह का सफर ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है। महज 35 वर्ष की उम्र में देश की कमान संभालने जा रहे बालेन शाह ने 2008 से चले आ रहे गठबंधन सरकारों के दौर को खत्म कर दिया है। उनकी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) 275 में से 180 से ज्यादा सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है, जबकि सरकार बनाने के लिए केवल 138 सीटों की जरूरत होती है।

इस ऐतिहासिक जीत के बीच, लोगों में बालेन शाह की जाति और मूल स्थान को लेकर भारी उत्सुकता है, जो मिथिला क्षेत्र और मधेश की राजनीति से जुड़ा हुआ है।

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Balen Shah Family: मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं बालेंद्र शाह

बालेन शाह (पूरा नाम बालेंद्र शाह) का जन्म काठमांडू में हुआ था, लेकिन उनका परिवार मूल रूप से मधेश प्रदेश के महोत्तरी जिले से है। उनके पिता, डॉ. राम नारायण शाह, एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं, जिनकी काठमांडू में पोस्टिंग के बाद परिवार वहां बस गया। बालेन का परिवार मिथिला क्षेत्र से गहरा संबंध रखता है, जो नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में संस्कृति, भाषा और परंपरा का एक साझा हिस्सा है।

ये भी पढे़ं: Balen Shah Rap Song: वो गाना जिसने बालेन शाह को पहुंचा दिया PM की कुर्सी तक! आखिर क्या था उस संगीत में?

Balen Shah Teli Community Nepal: किस जाति से आते हैं बालेन शाह?

बालेन शाह हिंदू समुदाय की तेली (तैलिक साहू) जाति से आते हैं। यह एक प्रमुख वैश्य जाति है, जिसे मुख्य रूप से व्यापार और कृषि से जुड़ा माना जाता है। तैलिक साहू समुदाय में कई प्रमुख उपनाम प्रचलित हैं, जिनमें साहू, साह, गुप्ता, मोदी, राठौर आदि शामिल हैं। बालेन शाह के पिता का उपनाम ‘शाह’ है, जो इस समुदाय में आम है। यह समुदाय ऐतिहासिक रूप से व्यापारिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है, लेकिन अब शिक्षा, राजनीति और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है, जैसा कि बालेन के परिवार में देखा जा सकता है।

ये भी पढे़ं: Balen Shah Nepal New PM: नेपाल का बदलेगा संविधान! बालेन शाह की पार्टी दो-तिहाई बहुमत के करीब, कितनी सीटें?

Nepal New PM: मधेशी पिता और पहाड़ी नेवार मां

बालेन शाह की जातीय पहचान और भी दिलचस्प हो जाती है क्योंकि वे एक मिश्रित सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। जहां उनके पिता मधेशी समुदाय से हैं, वहीं उनकी मां, ध्रुवदेवी शाह, पहाड़ी मूल के नेवार समुदाय से हैं। काठमांडू में नेवार समुदाय की सांस्कृतिक जड़ें बहुत गहरी हैं। यह जातीय और सांस्कृतिक संगम बालेन शाह को नेपाल के पहाड़ी और मधेशी, दोनों समुदायों के बीच एक “पुल” के रूप में स्थापित करता है।

ये भी पढे़ं: Nepal Election Result 2026: नेपाल में ‘Gen-Z’ की जीत! RSP को मिला प्रचंड बहुमत, रैपर बालेन शाह बनेंगे नए पीएम?

Nepal Election Results: मेयर से प्रधानमंत्री तक

यद्यपि बालेन शाह की जाति और मधेशी मूल को लेकर उत्सुकता है, लेकिन उनकी सफलता का मुख्य कारण उनकी जाति-मुक्त, विकास-उन्मुख’ राजनीति है। मेयर के रूप में उन्होंने काठमांडू में सफाई, कचरा प्रबंधन और अतिक्रमण हटाने जैसे ठोस काम किए, जिसने उन्हें युवाओं और हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया। उनकी जीत ने साबित कर दिया है कि नेपाल के लोग अब पारंपरिक पहचान की राजनीति से ऊपर उठकर काम और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।



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Biz Updates: भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी पर चर्चा, केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने विशेषज्ञों से की मुलाकात


केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव और रजत वर्मा से मुलाकात कर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में उभरती तकनीकों और टिकाऊ समाधान पर चर्चा की।

मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि बैठक में 2D मैटेरियल्स के निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उनके उपयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही स्थायी मैग्नेट और बैटरियों जैसे महत्वपूर्ण घटकों के रीसाइक्लिंग के तरीकों पर भी चर्चा हुई।

चर्चा के दौरान आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में 2D मैटेरियल्स की बढ़ती भूमिका पर खास जोर दिया गया। ये सामग्री कुछ ही परमाणुओं की मोटाई वाली होती हैं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की क्षमता, दक्षता और प्रदर्शन को बेहतर बनाने की बड़ी संभावना रखती हैं।



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Harish Rana Case में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, भारत में इच्छामृत्यु पर क्या कहता है संविधान?


India

oi-Puja Yadav

SC Verdict Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 11 मार्च को एक ऐसा फैसला सुनाया, जो भारतीय कानून व्यवस्था में ‘जीवन के अधिकार’ (Right to Life) और ‘मृत्यु के अधिकार’ (Right to Die) के बीच की धुंधली रेखा को स्पष्ट करता है। इस फैसले ने देश में ‘जीवन के अधिकार’ और ‘सम्मानजनक मृत्यु’ के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है।

दरअसल, कोर्ट का यह निर्णय हरीश राणा के परिवार द्वारा दायर याचिका पर आया है। हरीश पिछले 13 सालों से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (PVS) में हैं और पूरी तरह से बिस्तर पर निर्भर हैं।

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कोर्ट ने परिवार की याचिका को स्वीकार करते हुए उनके लाइफ-सस्टेनिंग ट्रीटमेंट (जीवन रक्षक प्रणाली) को वापस लेने की अनुमति दे दी है। SC ने परिवार, मेडिकल बोर्ड और केंद्र सरकार की राय लेने के बाद जनवरी 2026 में फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।

Harish Rana Case Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में सुनाया फैसला?

पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हरीश राणा साल 2013 में अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उन्हें 100% क्वाड्रीप्लेजिक डिसेबिलिटी हो गई। डॉक्टरों की टीम और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने परिवार वालों से कहा कि हरीश के ठीक होने की अब कोई वैज्ञानिक उम्मीद नहीं बची है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में हरीश के परिवार की जमकर तारीफ की। बेंच ने कहा कि इतने लंबे और कठिन समय के बावजूद परिवार ने अटूट समर्पण के साथ हरीश की सेवा की, जो मानवीय संवेदनाओं की एक मिसाल है।

Right to Life vs Right to Die: ‘इच्छामृत्यु’ और ‘जीने के अधिकार’ के बीच क्या कहता है भारत का संविधान?

भारत में इच्छामृत्यु (Euthanasia) का मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है, जो हर नागरिक को जीवन का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर अनुच्छेद 21 की व्याख्या की है। कोर्ट का मानना है कि ‘गरिमा के साथ जीने के अधिकार’ में ‘गरिमा के साथ मरने का अधिकार’ (Right To Die With Dignity) भी शामिल है। यह अधिकार केवल उन परिस्थितियों में लागू होता है जहां मरीज लाइलाज बीमारी से जूझ रहा हो और सुधार की कोई संभावना न हो।

कोर्ट ने अपने फैसले में ‘एक्टिव’ बनाम ‘पैसिव’ इच्छामृत्यु के बीच का स्पष्ट अंतर बताया। एक्टिव इच्छामृत्यु (Active Euthanasia) में जानबूझकर जहरीला इंजेक्शन या कोई पदार्थ देकर मरीज की जान ली जाती है। भारत में यह पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं पैसिव इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) में मरीज को जीवित रखने वाले उपचार जिसमें पेसेंट को वेंटिलेटर या फीडिंग ट्यूब को हटा लिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में इसी की अनुमति दी है।

Common Cause vs Union of India: 2018 का ‘कॉमन कॉज’ फैसला क्या है?

इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का सबसे अहम फैसला 2018 में ‘कॉमन कॉज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में आया था। इस ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लाइलाज बीमारी या कोमा में पड़े मरीजों को पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति दी जा सकती है।

मरीज ‘लिविंग विल’ (Living Will) के जरिए पहले से यह तय कर सकता है कि अगर वह गंभीर बीमारी में चला जाए तो उसे किस तरह का इलाज दिया जाए। इलाज रोकने का फैसला मेडिकल बोर्ड और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लिया जा सकता है।

हरीश राणा का मामला भी 2018 के कॉमन कॉज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक कॉमन कॉज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले का जिक्र करते हुए माना कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में है जहां वह मशीनों के बिना सांस भी नहीं ले सकता और उसके बचने की कोई गुंजाइश नहीं है, तो उसे जबरन जीवित रखना उसकी गरिमा का अपमान है।

भारत में किसे मिलता है इच्छामृत्यु का अधिकार?

भारत में इच्छामृत्यु का अधिकार हर किसी को नहीं मिलता। इसके लिए कुछ कड़ी शर्तें और प्रक्रियाएं हैं। लाइलाज बीमारी के मामले में जब मरीज ऐसी स्थिति में हो जहां आधुनिक चिकित्सा उसे ठीक नहीं कर सकती है वहां इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी जाती है।

जैसे- वेजिटेटिव स्टेट/ब्रेन डेड मरीज जो कोमा में हो या उसका मस्तिष्क काम करना बंद कर चुका हो। लिविंग विल व्यक्ति ने स्वस्थ रहते हुए लिखित में इच्छा जताई हो कि ऐसी स्थिति में उसे मशीन पर न रखा जाए वहां इच्छामृत्यु का अधिकार मिलता है। हालांकि, यदि लिविंग विल नहीं है, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक मेडिकल बोर्ड इसकी सिफारिश करता है, जिसे कोर्ट की मंजूरी मिलनी आवश्यक है।

SC के फैसले के बाद नैतिक और सामाजिक बहस को मिला बल

इच्छामृत्यु पर समाज में दो विचारधाराएं हैं। समर्थकों का कहना है कि लाइलाज मरीज को मशीन के सहारे तड़पाना अमानवीय है और यह देखभाल करने वालों पर भी भारी फाइनेंसियल और इमोशनल बोझ डालता है। वहीं, विरोधियों का तर्क है कि इसका गलत इस्तेमाल संपत्ति या अन्य स्वार्थों के लिए हो सकता है और यह राज्य के ‘जीवन बचाने’ के कर्तव्य के विरुद्ध है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के जरिए संतुलन बनाने की कोशिश की है जहां जीवन बचाने की उम्मीद न हो, वहाँ मृत्यु को गरिमापूर्ण बनाना ही न्याय है।

हरीश राणा केस क्यों अहम है?

हरीश राणा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत में ‘गरिमा के साथ मृत्यु’ और पैसिव इच्छामृत्यु के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह फैसला दिखाता है कि अदालत ऐसे मामलों में मरीज के अधिकार, परिवार की स्थिति और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश करती है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में भी ऐसे मामलों में अदालत के लिए यह फैसला एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।



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सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत दी: 13 साल से कोमा में है बेटा, माता-पिता ने लगाई थी गुहार


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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा 13 साल से कोमा में हैं। वे पंजाब यू्निवर्सिटी के हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छामृत्यु मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 13 साल से कोमा में रह रहे 31 साल के युवक हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की मंजूरी दे दी। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं।

देश में इस तरह का यह पहला मामला है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने एम्स (AIIMS) को निर्देश दिया कि हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए। यह प्रोसेस इस तरह से की जानी चाहिए कि मरीज की गरिमा बनी रहे।

पैसिव यूथेनेशिया का मतलब होता है कि किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज को जिंदा रखने के लिए जो बाहरी लाइफ सपोर्ट या इलाज दिया जा रहा है, उसे रोक दिया जाए या हटा लिया जाए, ताकि मरीज की प्राकृतिक रूप से मौत हो सके।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हरीश की मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा की इच्छामृत्यु देने की अपील पर सुनाया।

हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती।

हरीश अपनी मां निर्मला राणा के साथ। परिवार ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए अपनी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन अब आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बेटे की तकलीफ भी नहीं देखी जाती।

फैसले पर पिता अशोक ने कहा-

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हम इसके लिए लंबे समय से लड़ रहे थे। कौन से माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा चाहेंगे। पिछले 3 साल से हम यह मामला लड़ रहे थे। अब उसे एम्स ले जाया जाएगा। वह पंजाब यूनिवर्सिटी में टॉपर हुआ करता था।

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हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरे थे, तब से बिस्तर पर

दिल्ली में जन्मे हरीश राणा चंडीगढ़ की पंजाब यू्निवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 2013 में वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए। इसकी वजह से उनके पूरे शरीर में लकवा मार गया और वह कोमा में चले गए। वह न कुछ बोल सकते हैं और न ही महसूस कर सकते हैं।

डॉक्टर्स ने हरीश को क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित करार दिया। इसमें मरीज पूरी तरह से फीडिंग ट्यूब यानी खाने-पीने की नली और वेंटिलेटर सपोर्ट पर निर्भर रहता है। इसमें रिकवरी की कोई गुंजाइश नहीं होती। 13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है।

यह स्थिति हरीश के लिए बहुत दर्दनाक है। परिवार के लिए उन्हें ऐसे देखना मानसिक रूप से बेहद कठिन हो गया है। वेंटिलेटर, दवाइयों, नर्सिंग और देखभाल पर कई साल से इतना खर्च हो चुका है कि परिवार आर्थिक रूप से टूट चुका है।

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सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में शेक्सपीयर का जिक्र किया

जस्टिस पारदीवाला ने फैसला सुनाते वक्त अमेरिकी धर्मगुरु हेनरी वार्ड बीचर के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, ‘ईश्वर मनुष्य से यह नहीं पूछते कि वह जीवन स्वीकार करता है या नहीं, उसे जीवन लेना ही पड़ता है।’

उन्होंने विलियम शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक हेलमेट की पंक्ति “To be or not to be” का भी जिक्र करते हुए कहा कि अदालतों को कई बार इसी तरह के प्रश्नों के संदर्भ में “मरने के अधिकार” पर विचार करना पड़ता है।

लाइफ सपोर्ट हटाने का निर्णय दो आधारों पर होना चाहिए:

  • यह हस्तक्षेप चिकित्सा उपचार की श्रेणी में आता हो।
  • यह मरीज के सर्वोत्तम हित में हो।

अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टर का कर्तव्य मरीज का इलाज करना है, लेकिन जब मरीज के ठीक होने की कोई संभावना न हो, तो यह कर्तव्य उसी रूप में कायम नहीं रहता।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कानून बनाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया पर कानून बनाने पर विचार करने का भी कहा। फिलहाल भारत में यह केवल सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के आधार पर ही संभव है, जिसमें मरीज की स्थिति पर दो मेडिकल बोर्ड की राय जरूरी होती है।

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इच्छामृत्यु के 2 तरीके होते हैं…

  • पैसिव यूथेनेशिया: इसमें मरीज का इलाज या लाइफ सपोर्ट जैसे वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब या दवाइयां रोक दी जाती हैं, ताकि उसकी मौत प्राकृतिक रूप से हो सके। इसमें डॉक्टर कोई नया काम नहीं करते, सिर्फ इलाज बंद कर देते हैं। मौत का कारण बीमारी ही रहती है।
  • एक्टिव यूथेनेशिया: इसमें मरीज को मौत देने के लिए डॉक्टर दवाई या इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। भारत में यह गैर-कानूनी है। अगर कोई जान-बूझकर किसी मरीज को दवाई देकर मारता है, तो इसे BNS की धारा के तहत हत्या या के तहत आत्महत्या में मदद माना जाता है।

भारत के संविधान में इच्छामृत्यु का क्या कानून है

2005 में कॉमन कॉज नाम की एक NGO ने पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु के अधिकार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर 9 मार्च 2018 को CJI दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच ने इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी।

तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था,

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अगर किसी मरीज को लाइलाज बीमारी हो या वेजिटेटिव स्टेट में यानी लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ही जिंदा हो, तो प्राकृतिक तरीके से मृत्यु के लिए उसका इलाज बंद किया जा सकता है। इसे इच्छामृत्यु नहीं, बल्कि सम्मान के साथ मृत्यु का अधिकार माना जाएगा।

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यह अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 का हिस्सा है, जिसमें सम्मान से जीने के साथ सम्मान से मरने का अधिकार है।

AI जनरेटेड इमेज।

AI जनरेटेड इमेज।

इच्छामृत्यु को लेकर क्या नियम है

2018 में पैसिव यूथेनेशिया को वैधता देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 2 तरह के नियम बनाए…

1. जब मरीज ने पहले ही ‘लिविंग विल’ लिख रखी हो: जब मरीज ने मेंटली फिट रहते हुए अपनी इच्छा से लिविंग विल लिखी हो। इस लिविंग विल में साफ तौर पर लिखा जाता है कि मरीज की बीमारी अगर लाइलाज हो जाए यानी अगर वह अब कभी ठीक होने लायक न बचे तो उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटा दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए भी कुछ नियम बनाए हैं…

18 साल से ज्यादा उम्र और स्वस्थ व्यक्ति ही लिविंग विल लिख सकता है। मरीज ने 2 गवाहों के सामने लिविंग विल साइन की हो। डॉक्यूमेंट्स को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने वेरिफाई किया हो।

इलाज करने वाले डॉक्टर, हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड और जिला स्तर के एक बाहरी मेडिकल बोर्ड की मंजूरी ली गई हो। दोनों बोर्डों की मंजूरी मिलने के बाद वेंटिलेटर जैसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम को बंद किया जा सकता हो।

इस पूरी प्रक्रिया के बारे में परिवार को जानकारी दी जाती है। किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।

2. जब कोई लिविंग विल न हो: जब मरीज अपने होश में रहते हुए लिविंग विल नहीं बनाता तो उसका परिवार या करीबी ये फैसला ले सकते हैं। हालांकि, ये इतना आसान नहीं है। इसके लिए 2018 में सुप्रीम कोर्ट के बनाए गए इन नियमों का पालन करना होता है…

अस्पताल के डॉक्टरों का एक बोर्ड मरीज की कंडीशन चेक कर रिपोर्ट बनाता है। कलेक्टर 3-5 एक्सपर्ट्स का दूसरा मेडिकल बोर्ड बनाते हैं, जो ये रिपोर्ट चेक करता है। दोनों बोर्ड के सहमत होने पर इस फैसले को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाता है। मजिस्ट्रेट मरीज से मिलकर आखिरी निर्णय लेते हैं। अगर इसमें किसी तरह की विवाद की स्थिति होती है, तो हाइकोर्ट में अपील की जा सकती है।

13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो

13 साल से बिस्तर पर पड़े होने की वजह से हरीश के शरीर पर बेडसोर्स यानी गहरे घाव बन गए हैं। -फाइल फोटो

क्या इससे पहले ऐसा किसी मामले में हुआ है हरीश राणा का मामला भारत में पैसिव यूथेनेशिया का ऐसा पहला मामला है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के बनाए नियम फॉलो हो रहे हैं। दरअसल, 2018 के कॉमन कॉज फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नियम बनाए थे, जो अब तक किसी मामले पर लागू नहीं हुए हैं। हरीश का केस पहला मामला है, जिसमें इन्हें लागू किया जा रहा है।

11 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली AIIMS को आदेश दिया है कि वो एक दूसरी मेडिकल बोर्ड बनाए जो हरीश राणा की कंडीशन की जांच करे। इस केस में प्राइमरी और सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में चल रही है।

हालांकि, 2011 के अरुणा शानबाग केस ने पैसिव यूथेनेशिया को पहली बार लीगल बनाया, जो 2018 के कॉमन कॉज केस का आधार बना।

अरुणा शानबाग केस: 1973 में मुंबई के KEM अस्पताल में 42 साल की नर्स अरुणा शानबाग पर एक वार्ड अटेंडेंट ने हमला किया और फिर रेप किया। हमले में लगी गंभीर दिमागी चोटों की वजह से अरूणा कोमा में चली गईं। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए साल 2009 में एक पत्रकार पिंकी विरानी ने अरुणा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में अरुणा की लाइफ सपोर्ट मशीनें हटाने की मांग की गई, ताकि उनकी प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो सके।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु को कानूनी अधिकार बताया था, लेकिन अरुणा को इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं दी। क्योंकि वह तब कुछ हद तक बिना मशीनों के सांस ले रही थीं। इसके बाद 2015 में अरुणा शानबाग की प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो गई।

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सुप्रीम कोर्ट ने हरिश राणा को दी इच्छामृत्यु की मंजूरी, 13 साल से कोमा में थे



सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से ज़्यादा समय से कोमा में पड़े 32 साल के आदमी को पैसिव यूथेनेशिया की इजाज़त दी है।



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होर्मुज में फंसे कई जहाज: भारतीय नौसेना चला सकती है विशेष अभियान, क्या युद्धपोत भेजने की तैयारी में है सरकार?


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। सूत्रों के अनुसार भारत सरकार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षा देने के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात करने पर विचार कर रही है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट अनुसार यह कदम भारतीय जहाज मालिकों के अनुरोध के बाद विचाराधीन है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग अब उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में बदल गया है।

जहाज मालिकों ने मांगी नौसेना सुरक्षा

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक भारत के समुद्री प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कैप्टन पी.सी. मीणा ने कहा कि भारतीय जहाज मालिकों ने अपने जहाजों के लिए नौसेना एस्कॉर्ट की मांग की है। इसी के बाद सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है कि जरूरत पड़ने पर भारतीय युद्धपोत भेजे जाएं, ताकि भारतीय व्यापारी जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकें।

दरअसल हाल के दिनों में ईरान, अमेरिका और इस्राइल से जुड़े हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री गतिविधियों में खतरा बढ़ गया है। इस कारण बड़ी संख्या में जहाज दोनों ओर फंसे होने की खबरें भी सामने आई हैं।

पाकिस्तान ने भी भेजे युद्धपोत

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान नौसेना ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत पश्चिम एशिया भेजने की घोषणा की है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी के दो जहाज पहले ही नौसेना की निगरानी में आ चुके हैं। हालांकि पाकिस्तान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसके टैंकर किस समुद्री मार्ग से वापस लाए जा रहे हैं।



पाकिस्तान अपनी अधिकांश प्राकृतिक गैस कतर से और कच्चा तेल सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात से आयात करता है, इसलिए उसके लिए भी यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है।

ऊर्जा आपूर्ति पर सरकार की नजर

इस बीच भारत में ईंधन आपूर्ति और कीमतों को लेकर भी सरकार सतर्क है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर देश की ऊर्जा स्थिति की समीक्षा की।



प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि पश्चिम एशिया संकट का असर भारतीय उपभोक्ताओं तक कम से कम पहुंचे और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।

अन्य देशों से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की तैयारी

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी कदम उठा रहा है। सूत्रों के मुताबिक देश अब अमेरिका, रूस, वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया और अन्य महासागरीय देशों से भी ऊर्जा संसाधनों की खरीद बढ़ाने पर काम कर रहा है।



साथ ही सरकार ने घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक गैस के उपयोग में प्राथमिकता तय करने का फैसला लिया है। इसके तहत घरेलू रसोई गैस और परिवहन क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

होटल-रेस्तरां उद्योग पर संकट

इधर एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर होटल और रेस्तरां उद्योग पर भी दिखने लगा है। नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष सागर दरयानी ने कहा कि कई शहरों में रेस्तरां के पास केवल एक-दो दिन का गैस स्टॉक बचा है।



उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई तो मुंबई, बंगलूरू और पुणे जैसे शहरों में कई होटल और रेस्तरां अगले दो दिनों में बंद करने की नौबत आ सकती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार दोनों पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में भारत अपने व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार रणनीतिक कदमों पर विचार कर रहा है।






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Parliament Session LIVE : राज्यसभा में कार्यवाही शुरू


Parliament Session LIVE : ‘महिला सशक्तिकरण मौजूदा सरकार की टॉप प्रायोरिटी में से एक है’

BJP MP दिनेश शर्मा कहते हैं, “महिला सशक्तिकरण मौजूदा सरकार की टॉप प्रायोरिटी में से एक है। जिस तरह से पार्लियामेंट्री सिस्टम में महिला रिजर्वेशन लागू किया गया है, उसका सीधा फायदा—चाहे राज्य विधानसभा हो या लोकसभा या कोई भी चुनाव—मिल सके, और महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश आगे बढ़ सके; सरकार का यही इरादा है…”

#WATCH | Delhi | BJP MP Dinesh Sharma says, “Women empowerment is one of the top priorities of the current government. The way women’s reservation has been implemented in parliamentary systems, its direct benefit—whether in the state assembly or the Lok Sabha or any election—can… pic.twitter.com/S6yeOVL6gj

— ANI (@ANI) March 11, 2026 “>





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