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डिपोर्ट होने के बाद दोबारा भारत में कैसे घुसे ये दो बांग्लादेशी, दिल्ली में जिस्मफरोशी के धंधे का हुआ बड़ा खुलासा!


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डिपोर्ट होने के बाद दोबारा भारत में कैसे घुसे ये दो बांग्लादेशी, खुला बड़ा राज

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दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास से दो बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है. ये दोनों पहले भी भारत से डिपोर्ट किए जा चुके थे, लेकिन फिर से अवैध रूप से घुस आए. दोनों दिल्ली में जिस्मफरोशी और मानव तस्करी का रैकेट चला रहे थे. इनके पास से प्रतिबंधित ऐप और बांग्लादेशी आईडी मिले हैं.

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दिल्ली पुलिस ने दो बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है.

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस के नॉर्थ वेस्ट जिले की फॉरेनर सेल ने दो ऐसे बांग्लादेशी नागरिक को पकड़ा है, जिसको पहले भी बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया था. दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास से दो बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा है, जो न केवल अवैध रूप से भारत में रह रहे थे, बल्कि एक बड़े जिस्मफरोशी और मानव तस्करी के रैकेट का संचालन भी कर रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों पहले भी भारत से निकाले जा चुके थे, लेकिन वे फिर से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर दिल्ली पहुंच गए.

इस बड़े ऑपरेशन की नींव 25 फरवरी 2026 को पड़ी थी, जब फॉरेनर सेल ने मानव तस्करी में शामिल तीन महिला बांग्लादेशी प्रवासियों को डिपोर्ट किया था. उन महिलाओं से जब गहन पूछताछ की गई, तो उन्होंने विकास नाम के एक शख्स का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि विकास ही वह व्यक्ति है जिसने उन्हें अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराई और दिल्ली में उनके लिए क्लाइंट्स ढूंढने और पैसे वसूलने का काम करता था. इस दौरान यह भी पता चला कि विकास की पत्नी होने का दावा करने वाली एक महिला भी इस अवैध धंधे में उसकी बराबर की भागीदार है.

दिल्ली पुलिस का स्टिंग ऑपरेशन

डीसीपी नॉर्थ-वेस्ट आकांक्षा यादव के आदेश पर और एसीपी राजीव कुमार की देखरेख में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने संदिग्धों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर रखनी शुरू की. तकनीकी सर्विलांस के जरिए पुलिस को सूचना मिली कि विकास और उसकी कथित पत्नी जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के पास आने वाले हैं. 9 मार्च 2026 की सुबह, पुलिस ने जाल बिछाया. आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन का सहारा लिया. सादी वर्दी में तैनात पुरुष पुलिसकर्मियों ने संदिग्धों के पास जाकर उनसे संपर्क किया और अवैध गतिविधियों के बदले पैसों का सौदा किया. जैसे ही आरोपियों ने सहमति दी, पुलिस की महिला विंग और अन्य सदस्यों ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा.

दिल्ली में क्या करते थे?

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीप्तो कुमार पाल उर्फ विकास निवासी ढाका, बांग्लादेश और 27 साल की रूमा बेगम निवासी ढाका, बांग्लादेश की है. पूछताछ के दौरान शुरुआत में दोनों ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन जब उनके दस्तावेजों की जांच की गई और उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले गए, तो उनकी सच्चाई सामने आ गई. जांच में पता चला कि पिछले साल ही इन्हें उत्तराखंड से अवैध निवास के आरोप में बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया था. लेकिन चंद महीनों के भीतर ही ये फिर से भारत में घुस आए.

पुलिस ने आरोपियों के पास से दो स्मार्ट फोन बरामद किए हैं. इन फोन में प्रतिबंधित एप्लीकेशन इंस्टॉल थी, जिसका इस्तेमाल अक्सर सीमा पार संचार के लिए किया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके. इसके अलावा, फोन की गैलरी से 6 बांग्लादेशी नेशनल आईडी कार्ड भी मिले हैं, जो उनकी नागरिकता का पुख्ता सबूत हैं. पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. पकड़े गए दोनों बांग्लादेशी नागरिकों को एफआरआरओ के समक्ष पेश किया गया है. पुलिस ने उनके खिलाफ फिर से निर्वासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साथ ही, जांच की जा रही है कि वे सीमा के किस हिस्से से भारत में दाखिल हुए और इस रैकेट में उनके साथ और कौन-कौन से स्थानीय लोग शामिल हैं.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें



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Khamenei Death: ‘मेरा बेटा लीडर बनने लायक नहीं, ईरान बर्बाद हो जाएगा’, खामेनेई की ‘सीक्रेट वसीयत लीक


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oi-Sumit Jha

Iran New Supreme Leader: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का सत्ता के शिखर पर पहुँचना वैश्विक राजनीति में एक अप्रत्याशित मोड़ ले आया है। विडंबना यह है कि जिस उत्तराधिकार को लेकर आज दुनिया दंग है, उसके खिलाफ खुद अली खामेनेई ने मोर्चा खोल रखा था।

कथित तौर पर अपनी गुप्त वसीयत में खामेनेई ने मोजतबा की धार्मिक और राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाते हुए उन्हें इस पद के अयोग्य माना था। उन्हें डर था कि ‘वंशवाद’ का यह ठप्पा न केवल उनकी विरासत को कलंकित करेगा, बल्कि दशकों से सुलग रहे जन-आक्रोश को एक नई चिंगारी भी दे सकता है। आज पिता की उसी आशंका और मोजतबा के राज्याभिषेक के बीच, ईरान एक अनिश्चित भविष्य की दहलीज पर खड़ा है।

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Mojtaba Khamenei Iran Supreme Leader: अनुभव और राजनीतिक कद की कमी

अली खामेनेई का मानना था कि उनके बेटे मोजतबा के पास देश चलाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव नहीं है। मोजतबा ने कभी भी किसी आधिकारिक सरकारी पद या कैबिनेट में काम नहीं किया था। उनका पूरा प्रभाव केवल अपने पिता के कार्यालय तक सीमित था। विशेषज्ञों के अनुसार, खामेनेई चाहते थे कि ईरान का नेतृत्व कोई ऐसा व्यक्ति करे जिसने सार्वजनिक जीवन में अपनी योग्यता साबित की हो, न कि केवल ‘वंशवाद’ के आधार पर सत्ता हासिल की हो।

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Khamenei Death: धार्मिक योग्यता पर संदेह

ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर बनने के लिए एक उच्च स्तरीय धार्मिक विद्वान (मुजतहिद) होना अनिवार्य है। मोजतबा को एक ‘युवा धर्मगुरु’ माना जाता है, जिनके पास वरिष्ठ आयतुल्लाहों जैसा धार्मिक सम्मान और ज्ञान नहीं है। अली खामेनेई को संदेह था कि ईरान की शक्तिशाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ और वरिष्ठ मौलवी मोजतबा को अपना नेता स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे देश के धार्मिक ढांचे में दरार पड़ सकती है और उनकी स्वीकार्यता पर सवाल उठेंगे।

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वंशवाद के आरोपों का डर

1979 की इस्लामी क्रांति का एक मुख्य उद्देश्य राजशाही और वंशवाद (Dynasty) को खत्म करना था। अली खामेनेई को डर था कि यदि उनका बेटा ही उनका उत्तराधिकारी बनता है, तो यह क्रांति के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। इससे जनता के बीच यह संदेश जाता कि ईरान फिर से एक ‘राजशाही’ की ओर बढ़ रहा है। वे नहीं चाहते थे कि उनके परिवार पर सत्ता पर कब्जा करने के आरोप लगें, जिससे उनके शासनकाल की छवि धूमिल हो।

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World News Hindi: ‘कठपुतली’ बनने की आशंका

रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई यह भांप चुके थे कि शक्तिशाली सैन्य संस्था IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) मोजतबा का समर्थन इसलिए कर रही है क्योंकि उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अली खामेनेई चाहते थे कि सुप्रीम लीडर एक स्वतंत्र और शक्तिशाली निर्णय लेने वाला व्यक्ति हो। उन्हें डर था कि मोजतबा के नेतृत्व में असली ताकत सेना के हाथ में चली जाएगी और उनका बेटा महज एक ‘कठपुतली’ बनकर रह जाएगा।



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BAN vs PAK: कौन हैं नाहिद राणा? बांग्लादेश का 23 वर्षीय बारूद, अकेले दम पर किया पाकिस्तानी टीम को आउट


Cricket

oi-Naveen Sharma

PAK vs BAN: बांग्लादेशी क्रिकेट के नए स्पीड गन नाहिद राणा (Nahid Rana) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वो गदर मचाया है कि पूरी दुनिया दंग रह गई है। पाकिस्तान के खिलाफ पहले एकदिवसीय मुकाबले में नाहिद ने न सिर्फ अपनी रफ्तार से आग उगली, बल्कि अपने एटीट्यूड से पाकिस्तानी बल्लेबाजों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम भी किया।

मैदान पर जब नाहिद राणा गेंदबाजी के लिए आए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वो पाकिस्तान की मजबूत बैटिंग लाइनअप को ताश के पत्तों की तरह बिखेर देंगे। रफ्तार के साथ नाहिद ने पाक ओपनर्स को संभलने का मौका भी नहीं दिया। गेंद पिच पर टप्पा खाकर इतनी तेजी से अंदर और बाहर निकल रही थी कि पाकिस्तानी खिलाड़ी सिर्फ पवेलियन का रास्ता देखते रह गए।

nahid rana

PAK vs BAN: 7 ओवर में मचा दिया गदर

नाहिद ने सिर्फ 7 ओवर के स्पेल में ही अपने 5 विकेट हासिल कर डाले, इस दौरान उन्होंने 24 रन खर्च किये। उन्होंने अपने लंबे कद का पूरा फायदा उठाते हुए तहलका मचा दिया। बांग्लादेशी टीम में सबसे लंबे खिलाड़ी वही हैं। उनकी हाइट 6 फीट और 3 इंच है, आम तौर पर बांग्लादेश में इतनी लंबाई का प्लेयर कम ही आता है, उनकी उम्र महज 23 साल है। आने वाले समय में बांग्लादेश क्रिकेट के लिए वह और बड़ा काम कर सकते हैं।

चर्चा सिर्फ उनकी गेंदबाजी की नहीं, बल्कि उनके एटीट्यूड की भी हो रही है। जब भी नाहिद किसी बल्लेबाज का विकेट ले रहे थे, उनके चेहरे पर एक बेबाक मुस्कान थी, जो पाकिस्तानी खेमे को चिढ़ाने के लिए काफी थी। सोशल मीडिया पर फैंस इसे खामोश वार कह रहे हैं।

PAK vs BAN: पाक टीम ऑल आउट

पाकिस्तान की बल्लेबाज़ी पूरी तरह फ्लॉप रही और पूरी टीम 30.4 ओवर में 114 रन पर ऑलआउट हो गई। पाकिस्तानी बल्लेबाज़ बांग्लादेशी गेंदबाज़ों के सामने टिक नहीं सके। पाकिस्तान की ओर से सबसे ज्यादा 37 रन फ़हीम अशरफ़ ने बनाए। उन्होंने 47 गेंदों पर 6 चौके और 1 छक्का लगाया। वहीं साहिबज़ादा फरहान ने 38 गेंदों में 27 रन की पारी खेली। इसके अलावा मआज़ सादाकत ने 18 रन और विकेटकीपर मोहम्मद रिज़वान ने 10 रन का योगदान दिया।



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Trump statue National Mall: टाइटैनिक के पोज में ट्रंप-एपस्टीन! मूर्ति ने अमेरिका में मचाया तहलका


International

oi-Sumit Jha

Donald Trump statue National Mall: वॉशिंगटन के नेशनल मॉल में मंगलवार को लगी एक अजीबोगरीब मूर्ति ने अमेरिकी राजनीति में ‘टाइटैनिक’ जैसा तूफान ला दिया है। ‘द सीक्रेट हैंडशेक’ नामक ग्रुप ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जेफरी एपस्टीन को जैक और रोज के फिल्मी अंदाज में दिखाकर सबको हैरान कर दिया।

यह मूर्ति महज एक कलाकृति नहीं, बल्कि ट्रंप और एपस्टीन के पुराने रिश्तों पर किया गया एक तीखा प्रहार है। ‘किंग ऑफ द वर्ल्ड’ लिखे इस स्टैच्यू ने पुरानी फाइलों और विवादों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिससे व्हाइट हाउस और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

Trump epstein statue National Mall

फिल्मी पोज और तीखा प्रहार

इस मूर्ति में डोनाल्ड ट्रंप और जेफरी एपस्टीन को टाइटैनिक जहाज के अगले हिस्से पर बाहें फैलाए खड़ा दिखाया गया है। मूर्ति के नीचे लगी पट्टी पर उनकी दोस्ती की तुलना “शानदार पार्टियों और गुप्त यात्राओं” से की गई है। यह नजारा इतना चौंकाने वाला है कि इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कुछ लोग इसे गहरा तंज कह रहे हैं, तो कुछ इसे राष्ट्रपति की छवि बिगाड़ने की साजिश।

Jeffrey Epstein File: फर्जी चिट्ठी और अरबों का केस

इस विवाद के साथ ही 2003 की एक कथित चिट्ठी की चर्चा भी गर्म है। दावा है कि ट्रंप ने एपस्टीन के 50वें जन्मदिन पर उसे एक खास संदेश भेजा था। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पत्र को पूरी तरह से ‘फेक’ और जाली बताया है। उन्होंने इसे छापने वाले अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ पर 10 अरब डॉलर का भारी-भरकम मानहानि का केस कर दिया है, जिससे यह कानूनी लड़ाई और गंभीर हो गई है।

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पुरानी फाइलों से निकला नया तूफान

यह मूर्ति ऐसे समय में आई है जब न्याय विभाग द्वारा जारी ‘एपस्टीन फाइल्स’ के नए सेट ने हड़कंप मचा रखा है। इन दस्तावेजों में एक महिला ने ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और बिना किसी सबूत वाला बताया है। लेकिन नेशनल मॉल में लगी इस मूर्ति ने उन कड़वे विवादों को जनता की यादों में फिर से ताजा कर दिया है।

शरारती ग्रुप का पुराना इतिहास

इस मूर्ति को लगाने वाले ‘द सीक्रेट हैंडशेक’ ग्रुप का रिकॉर्ड काफी पुराना है। ये लोग पहले भी ट्रंप और एपस्टीन की विवादित मूर्तियां लगाकर चर्चा बटोर चुके हैं। यह समूह अक्सर 6 जनवरी के दंगाइयों की आलोचना और एपस्टीन की डायरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कला के जरिए कटाक्ष करने के लिए जाना जाता है। इनका नारा “मेक अमेरिका सेफ अगेन” सीधे तौर पर ट्रंप के चुनावी अभियान पर एक मजेदार हमला है।

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Delhi Blast Case: दिल्ली ब्लास्ट मामले में दो संदिग्धों की NIA कस्टडी बढ़ी, खुलेगी साजिश की हर परत?



Delhi blast case: दिल्ली ब्लास्ट केस में एनआई की स्पेशल कोर्ट ने दो आरोपियों की कस्टडी 5 दिन के लिए बढ़ा दी है। पटियाला हाउस की स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों से पूछताछ के लिए कस्टडी बढ़ाने का आदेश दिया है।



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LPG Price Hike: गैस सिलेंडर हुआ महंगा, Mumbai के लोगों ने अपनाए ये नायाब जुगाड़, आप भी ट्राई करें


LPG ग्राहकों के लिए अलर्ट! तुरंत कराएं e-KYC, नहीं तो कट जाएगा गैस कनेक्शन, जानें स्टेप बॉय स्टेप प्रॉसेस



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Rabi Lamichhane Caste: ब्राह्मण या क्षत्रिय? किस जाति से हैं नेपाल के भावी डिप्टी PM रवि लामिछाने


International

oi-Sumit Jha

Rabi Lamichhane Caste: नेपाल में 5 मार्च 2026 को हुए ऐतिहासिक आम चुनावों के परिणाम एक बड़े राजनीतिक उलटफेर की गवाही दे रहे हैं। पूर्व टेलीविजन पत्रकार रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली ‘राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) ने दशकों पुराने राजनीतिक किलों को ढहाते हुए प्रचंड जीत हासिल की है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, RSP प्रत्यक्ष (FPTP) और समानुपातिक (PR) दोनों मतों में भारी बढ़त बनाए हुए है, जिससे पार्टी 275 सीटों वाली संसद में ‘दो-तिहाई’ बहुमत (184 सीट) के बेहद करीब पहुंच गई है।

इस जीत के साथ ही बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने की नई सरकार में उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में वापसी की चर्चाओं ने उनकी ‘जाति’ और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर एक बार फिर जनता के बीच उत्सुकता पैदा कर दी है।

Rabi Lamichhane Caste

ब्राह्मण या क्षत्रिय? किस जाति से हैं रवि लामिछाने

रवि लामिछाने का जन्म नेपाल के पहाड़ी ब्राह्मण (बाहुन) समुदाय में हुआ है। नेपाल की सामाजिक संरचना में ‘लामिछाने’ एक प्रतिष्ठित उपनाम है, जो मुख्य रूप से हिंदू धर्म के ब्राह्मण और कुछ समुदायों में क्षत्रिय वर्ग से जुड़ा होता है। रवि का जन्म 13 सितंबर 1975 को भक्तपुर के नगरकोट में हुआ था। उनकी यह धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि उन्हें नेपाल के पारंपरिक मतदाताओं से जोड़ती है, जबकि उनका आधुनिक दृष्टिकोण युवाओं को आकर्षित करता है।

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Rabi Lamichhane Profile: पत्रकारिता से ‘जनता का नायक’ बनने तक

रवि लामिछाने ने राजनीति में आने से पहले टीवी पत्रकारिता में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी थी। उनके लोकप्रिय शो ‘सीधी बात जनता के साथ’ ने उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले एक योद्धा के रूप में स्थापित किया। उन्होंने आम जनता की समस्याओं को सीधे मंत्रियों और अधिकारियों के सामने रखा, जिससे उन्हें ‘वॉयस ऑफ द वॉइसलेस’ (बेजुबानों की आवाज) कहा जाने लगा। इसी जनसमर्थन ने उन्हें राजनीति में कदम रखने और अपनी पार्टी बनाने का साहस दिया।

Rashtriya Swatantra Party (RSP) का उदय

रवि लामिछाने ने साल 2022 में राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की थी। महज 4 साल के भीतर उन्होंने पारंपरिक पार्टियों (नेपाली कांग्रेस और एमाले) के वर्चस्व को चुनौती दी। उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘घंटी’ आज नेपाल में सुशासन और बदलाव का प्रतीक बन चुका है। 2026 के चुनावों में उनकी पार्टी की जीत ने यह साबित कर दिया है कि नेपाल के लोग अब जाति या पुराने विचारधारा के बजाय ‘काम और जवाबदेही’ को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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Balen Shah PM Nepal: उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में अनुभव

रवि लामिछाने पहले भी नेपाल के उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री रह चुके हैं। दिसंबर 2022 और फिर मार्च 2024 में उन्होंने गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। हालांकि नागरिकता विवाद के कारण उन्हें कुछ समय के लिए पद छोड़ना पड़ा था, लेकिन उनकी कार्यशैली ने प्रशासनिक ढांचे में हलचल पैदा कर दी थी। अब बालेन शाह के नेतृत्व वाली संभावित सरकार में वे फिर से गृह मंत्री बनकर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं।

Nepal Politics Hindi: बालेन और रवि, एक नया राजनीतिक समीकरण

नेपाल की राजनीति में बालेन शाह (मधेशी-नेवार पृष्ठभूमि) और रवि लामिछाने (ब्राह्मण पृष्ठभूमि) का साथ आना एक अभूतपूर्व सामाजिक मेल है। जहां बालेन शाह ने काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी योग्यता साबित की, वहीं रवि ने एक संगठित राजनीतिक शक्ति खड़ी की। इन दोनों नेताओं का गठबंधन नेपाल की विविधता को एक सूत्र में पिरोता है, जिससे तराई (मधेश) से लेकर पहाड़ों तक के मतदाताओं में एक सकारात्मक संदेश गया है।



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रूप दुर्गापाल ओटीटी सीरीज ‘संकल्प’ से कर रही हैं डेब्यू, बताया प्रकाश झा के साथ काम करने का एक्सपीरिएंस


Entertainment

oi-Shashank Mani Pandey

एक्ट्रेस रूप दुर्गापाल ने टीवी इंडस्ट्री में खूब काम किया है। कई यादगार सीरियल में उन्हें देखा गया है। अब वो अपना ओटीटी डेब्यू कर रही हैं। रूप प्रकाश झा की ‘संकल्प’ से वेब स्पेस में डेब्यू करने जा रही हैं। इस सीरीज़ में नाना पाटेकर, संजय कपूर, मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब, क्रांति प्रकाश झा और मेघना मलिक जैसे कुछ बेहतरीन नाम हैं।

Prakash Jha

सीरीज़ और अपने रोल के बारे में और बताते हुए रूप कहती हैं, “शानदार कास्ट एक अहम वजह है कि मैं शो में शामिल होने के लिए उत्साहित थी। जब सभी के पास शानदार काम होता है, तो आप जानते हैं कि सेट पर और सेट के बाहर भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। नाना पाटेकर सर, प्रकाश सर के आस-पास रहना मुझे एक्टिंग, मेकिंग और यहाँ तक कि पूरी ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं के बारे में सिखाने जैसा था। मेघना मलिक मैम से भी सीखने के लिए बहुत कुछ था, हम लंच और डिनर के दौरान भी बॉन्ड बनाते थे। वह बहुत शानदार एक्टर और बेहतरीन इंसान हैं।”

रूप इस सीरीज़ में माधुरी का किरदार निभा रही हैं – मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब की पत्नी। उनके बारे में और बताते हुए रूप कहती हैं, “ज़ीशान एक शानदार को-एक्टर हैं, NSD से आने और फिल्मों और वेब स्पेस में इतना काम करने के बाद, उनसे सीखने के लिए बहुत कुछ था। सीन्स के प्रति उनका नपा-तुला नज़रिया, भाषा पर उनकी पकड़ और ज़बरदस्त एनर्जी हमारे साथ के सीन्स के दौरान बहुत मददगार रही। मैं हर दिन सेट का इंतज़ार करती थी।”

दिलचस्प बात यह है कि रूप का OTT पर डेब्यू उनके करियर में काफी देर से हुआ। इस बारे में वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि 2019 तक, मैंने टीवी से आगे जाने के बारे में नहीं सोचा था, जब कोविड आया और हमारी ज़िंदगी बदल गई, लोगों को गुज़रते देखा, तब मुझे एहसास हुआ कि ज़िंदगी छोटी है, कुछ कहा नहीं जा सकता। मुझे एक्सपेरिमेंट करने और ऐसी चीज़ें करने का मन हुआ जिनसे मुझे डर लगता था।

थिएटर उनमें से एक था। बिना कट, बिना रीटेक, महीने भर की रिहर्सल का आइडिया मेरे लिए अजीब और डरावना भी था। लेकिन ज़िंदगी की अनिश्चितता के एहसास ने मुझे हिम्मत दी और आगे बढ़ने की हिम्मत दी। मैंने थिएटर किया, स्टेज पर होना और बिना किसी परेशानी के यह एक बहुत ही संतोषजनक सफ़र था। इसने मुझे टीवी से आगे बढ़कर वेबस्पेस में जाने की हिम्मत दी। मुझे लगता है कि हर चीज़ अपने समय पर होती है और हर किसी का सफ़र अलग होता है। मेरा सफ़र ऐसे ही होना था, मैं बहुत खुश हूँ कि यह अपने आप हुआ। सालों की संख्या मायने नहीं रखती।”रूप बताती हैं कि प्रकाश झा की कप्तानी में, काम करना किसी इंस्टीट्यूशन में सीखने जैसा लगता था और फिर भी एक्टिंग के साथ मज़ा आता था और यादगार यादें बनती थीं।



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NCERT का विवादित चैप्टर बनाने वाली टीम के खिलाफ निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रो. मिशेल को बैन करे केंद्र, ‘करप्शन इन ज्यूडिशियरी’ लिखा था


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51 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट NCERT के कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब में ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ नाम का सब-चैप्टर तैयार करने वाली टीम को हटाने की तैयारी में है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन्स को निर्देश दिया है कि NCERT के सोशल साइंस करिकुलम के चेयरपर्सन प्रोफेसर मिशेल डेनिनो को पाठ्यक्रम से अलग करें।

साथ ही, उनके दो अन्य सहयोगी सदस्यों दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भी किसी भी तरह से पाठ्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। इसके अलावा, तीनों को नेक्स्ट जनरेशन टेक्स्टबुक्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया से भी अलग किया जाए।

प्रोफेसर मिशेल डेनिनो ने अपने 2 सहयोगियों- दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के साथ मिलकर कक्षा 8 की NCERT सोशल साइंस की किताब के पार्ट-2 में सब-चैप्टर ‘करप्शन इन ज्यूडिशियरी’ तैयार किया था।

प्रोफेसर मिशेल डेनिनो ने अपने 2 सहयोगियों- दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के साथ मिलकर कक्षा 8 की NCERT सोशल साइंस की किताब के पार्ट-2 में सब-चैप्टर ‘करप्शन इन ज्यूडिशियरी’ तैयार किया था।

पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोका

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने प्रो. मिशेल डेनिनो और उनकी टीम को इस चैप्टर की तैयारी और उसे करिकुलम में शामिल करने की प्रक्रिया से अलग किए जाने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें ऐसे किसी भी पब्लिक फंडेड इंस्टीट्यूशन में सेवा देने से भी रोकने का निर्देश दिया है।

जानबूझकर ज्यूडिशियरी की नेगेटिव छवि बनाने की कोशिश

अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि प्रोफेसर मिशेल डेनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को भारतीय न्यायपालिका के बारे में जानकारी नहीं है। यह भी माना जा सकता है कि उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को इस तरह पेश किया, जिससे कक्षा 8 के छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि बने।

कोर्ट ने कहा कि कक्षा 8 के छात्र कम उम्र के होते हैं और उन पर ऐसी बातों का असर पड़ सकता है। इसलिए यह समझ से बाहर है कि ऐसे लोगों को करिकुलम बनाने या नेक्स्ट जनरेशन की किताबें तैयार करने में उन्हें क्यूं शामिल किया जाए।

NCERT ने बिना शर्त कोर्ट से माफी मांगी

इससे पहले मंगलवार, 10 मार्च को NCERT ने किताब के ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ चैप्टर को लेकर बिना शर्त माफी मांगी थी। इस चैप्टर को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। CJI सूर्यकांत ने कहा था कि न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद किताब की बिक्री पर रोक

25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ चैप्टर वाली NCERT किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। NCERT के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार, NCERT ने चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई। किताब को वेबसाइट से भी हटा लिया गया है।

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अब 8वीं के बच्चे पढ़ेंगे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या है: NCERT ने सोशल साइंस में जोड़ा नया सेक्शन; इसमें पेंडिंग केस, पूर्व CJI का भी जिक्र

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नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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LPG Shortage Hits Delhi High Court: वकीलों की थाली तक पहुंचा गैस का संकट, HC की कैंटीन ने जारी किया नोटिस


Delhi

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Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट की ‘लॉयर्स कैंटीन’ में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कमी के कारण मुख्य भोजन (मेन कोर्स) परोसना फिलहाल बंद कर दिया गया है। कैंटीन मैनेजमेंट ने 11 मार्च को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर वकीलों और कोर्ट स्टाफ को इस स्थिति की जानकारी दी।

मैनेजमेंट का कहना है कि गैस की अनुपलब्धता के कारण रसोई में खाना पकाना अब संभव नहीं रह गया है, जिससे कैंटीन की सामान्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

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कब तक मिलेगा कैंटीन में मेन कोर्स?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंटीन मैनेजमेंट द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, वर्तमान में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण मुख्य भोजन तैयार करने में असमर्थता जताई गई है। मैंनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक पका हुआ खाना नहीं मिल सकेगा। इस अचानक आए संकट से वकीलों और अदालत के कर्मचारियों को होने वाली असुविधा के लिए मैनेजमेंट ने खेद प्रकट किया है और सहयोग की अपील की है।

वैकल्पिक खान-पान की व्यवस्था

भले ही गैस की कमी से गरम खाना बंद हो गया हो, लेकिन कैंटीन ने कुछ वैकल्पिक व्यवस्थाएं जारी रखी हैं। नोटिस में बताया गया है कि जिन खाद्य पदार्थों को पकाने के लिए आग या गैस की जरूरत नहीं होती, वे पहले की तरह मिलते रहेंगे। फिलहाल वकीलों के लिए सैंडविच, सलाद, फ्रूट चाट और अन्य ठंडे रिफ्रेशमेंट्स उपलब्ध हैं, ताकि उन्हें पूरी तरह खाली हाथ न रहना पड़े।

सप्लाई चेन पर संकट का असर

गैस सिलेंडरों की इस कमी का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव से जोड़ा जा रहा है। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में चल रही नाकाबंदी की वजह से भारत के कुछ हिस्सों में ईंधन और गैस के लॉजिस्टिक्स पर बुरा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव अब राजधानी की महत्वपूर्ण संस्थाओं तक पहुँचने लगा है।

केंद्र सरकार का बड़ा कदम

पश्चिम एशिया के इस गंभीर संकट और ईंधन की कमी को देखते हुए, केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) को लागू कर दिया है ताकि प्राकृतिक गैस और अन्य जरूरी ईंधन की सप्लाई को नियंत्रित और सुव्यवस्थित किया जा सके। इस मेन पॉइंट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसे हालातों के बीच देश में जरूरी संसाधनों की कालाबाजारी न हो और आपूर्ति बनी रहे।



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