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Weather Delhi NCR: दिल्ली में मौसम का डबल अटैक! अगले 72 घंटों में आने वाला है नया संकट, IMD का अलर्ट


Delhi

oi-Sohit Kumar

Weather Forecast Delhi NCR: दिल्ली और आसपास के इलाकों में मार्च के महीने में ही तपिश का अहसास होने लगा है। आसमान से बरसती आग और ऊपर से जहरीली हवा ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले दिनों में पारा और अधिक चढ़ने की संभावना है, जिससे गर्मी और भी विकराल रूप धारण कर सकती है। वर्तमान में तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण दिन के तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो सामान्य से कई डिग्री ऊपर बना हुआ है।

राजधानी दिल्ली में आज सूरज के तेवर बेहद तीखे रहने वाले हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि “RealFeel” यानी महसूस होने वाली गर्मी 35 डिग्री सेल्सियस से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगी। आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा।

Weather Forecast Delhi NCR


हालांकि कुछ समय के लिए आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन इससे गर्मी से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हवा की गति उत्तर-पश्चिम दिशा से लगभग 9 किमी/घंटा रहने वाली है, जो अपने साथ धूल और गर्मी लेकर आएगी।

Weather Forecast in Delhi Districts: दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के मौसम का हाल

  • Weather In North Delhi: उत्तर दिल्ली: आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना।
  • Weather In North East Delhi: उत्तर-पूर्व दिल्ली: मौसम शुष्क रहेगा और हल्के बादल दिख सकते हैं।
  • Weather In North-West Delhi: उत्तर-पश्चिम दिल्ली: तेज धूप के साथ आंशिक बादल छाए रहने का अनुमान।
  • Weather In West Delhi: पश्चिम दिल्ली: गर्मी का प्रभाव बना रहेगा, आसमान में बादल आ-जा सकते हैं।
  • Weather In South Delhi: दक्षिण दिल्ली: तापमान में वृद्धि जारी रहेगी और आसमान आंशिक रूप से साफ रहेगा।
  • Weather In South-West Delhi: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली: इस क्षेत्र में भी गर्मी का प्रकोप रहेगा और बादल छाए रहने की संभावना है।
  • Weather In South-East Delhi: दक्षिण-पूर्व दिल्ली: उमस और गर्मी के साथ आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे।
  • Weather In New Delhi: नई दिल्ली: लुटियंस दिल्ली में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
  • Weather In Central Delhi: मध्य दिल्ली: दोपहर के समय लू जैसे हालात बन सकते हैं, आसमान में हल्के बादल रहेंगे।
  • Weather In East Delhi: पूर्वी दिल्ली: प्रदूषण और गर्मी का असर ज्यादा दिखेगा, बादल छाए रहने की संभावना है ।
  • Weather In Shahdara: शाहदरा: मौसम शुष्क रहेगा और बादल छाए रहने का अनुमान है।

Weather in Delhi NCR tomorrow? दिल्ली एनसीआर में कल कैसा रहेगा मौसम

कल यानी 11 मार्च को दिल्ली-एनसीआर के मौसम में कोई विशेष राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कल भी आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। हालांकि, बादलों की मौजूदगी के बावजूद तापमान में गिरावट के संकेत नहीं हैं और सूरज की तपिश बरकरार रहेगी। दिल्ली के सभी प्रमुख जिलों जैसे उत्तर दिल्ली, नई दिल्ली और शाहदरा में मौसम की स्थिति आज जैसी ही ‘Likely’ (संभावित) श्रेणी में बनी रहने की उम्मीद है।

Heatwave Alert In Delhi: 72 घंटे में लू चलने की संभावना

अगले 72 घंटों के दौरान दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के इलाकों में गर्मी का प्रकोप और अधिक बढ़ने वाला है। मौसम के बदलते मिजाज और लगातार बढ़ते पारे को देखते हुए अगले तीन दिनों में लू (Heatwave) चलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। 12 और 13 मार्च को भी आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है, लेकिन गर्म पछुआ हवाएं चलने के कारण तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा महसूस होगा।

Pollution Level In Delhi: दिल्ली में आज कितना है प्रदूषण

दिल्ली की हवा आज सांस लेने के लिहाज से बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 318 दर्ज किया गया है, जो ‘Hazardous’ (खतरनाक) श्रेणी में आता है। हवा में PM2.5 का स्तर 233 µg/m³ और PM10 का स्तर 292 µg/m³ तक पहुंच गया है। वर्तमान में दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में सातवें स्थान पर है। धुंध और प्रदूषण के कारण दृश्यता (Visibility) पर भी असर पड़ रहा है, जिससे लोगों को गले में खराश और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।



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सुप्रीम कोर्ट बोला-सरकार कोविड वैक्सीन से नुकसान का मुआवजा दे: एरर-फ्री पॉलिसी बनाए; साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं


नई दिल्ली25 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स का मुआवजा दे। इसके लिए वह नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी बनाए।

नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन से नुकसान हो जाए, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, भले ही इसमें किसी की गलती साबित न हुई हो।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा। इसके लिए अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन की 2021 में दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 3 बड़ी बातें…

  • वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से जुड़े आंकड़े समय-समय पर पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा।
  • इस फैसले का मतलब यह नहीं होगा कि व्यक्ति दूसरे कानूनी उपायों का सहारा नहीं ले सकता।
  • मुआवजा नीति का यह मतलब नहीं होगा कि सरकार या किसी दूसरी अथॉरिटी ने अपनी गलती मान ली है।
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नंवबर 2025 में फैसला सुरक्षित रखा था

पिछले साल 13 नवंबर को इन याचिकाओं पर लंबी बहस हुई थी। इसके बाद जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा था कि कोर्ट के साथ-साथ दूसरे मुद्दों पर भी फैसला करेगा। जस्टिस नाथ ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था-“हम तय करेंगे कि समिति का गठन किया जाना है या नहीं, क्या निर्देश जारी किए जाने हैं। हम हर चीज की बारीकी से जांच करेंगे।”

इससे पहले सरकार ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें सईदा के.ए.की याचिका पर मुआवजे की नीति तैयार करने का आदेश दिया गया था।

2022 में सरकार ने जवाबी हलफनामे में तर्क दिया था कि वह मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि वैक्सीन अपनी मर्जी से लगवाई जाती है। यह लोगों का जोखिम जानने के बावजूद लिया गया फैसला होता है।

मई 2024 में वैक्सीन से मौत के दो दावे सामने आए

परिवार का दावा- कोवीशील्ड लगवाने के 7 दिन बाद बेटी की मौत

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

वेणुगोपाल गोविंदन का कहना था कि उनकी बेटी करुण्या की जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लेने के महीने भर बाद मौत हो गई थी। सीरम इंस्टीट्यूट ने ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के बनाए फॉर्मूले पर कोवीशील्ड बनाई है और एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। करुण्या की मौत मामले में परिवार की शिकायत पर सरकार ने राष्ट्रीय समिति का गठन किया था। बाद में समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि करुण्या की मौत का कारण वैक्सीन है इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।

दूसरा परिवार बोला- बेटी को कोविड डोज के बाद TTS हुआ, फिर मौत

8 साल की श्री ओमत्री की मई 2021 में मौत हो गई थी। परिवार के मुताबिक, रितिका ने मई में कोवीशील्ड की पहली डोज लगवाई थी। इसके 7 दिनों के अंदर रितिका को तेज बुखार और वॉमिट की शिकायत हुई। MRI में सामने आया कि रितिका को ब्रेन में ब्लड क्लोटिंग हुई और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया था। दो हफ्ते बाद ही बेटी की मौत हो गई थी।

परिवार ने आगे बताया था कि हमें बेटी की मौत का सही कारण जानने के लिए दिसंबर 2021 में RTI के जरिए पता चला कि बेटी को थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम हुआ था। जो भी वैक्सीन के सामना करना पड़ा था और ‘वैक्सीन उत्पाद संबंधी प्रतिक्रिया’ के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।

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PM ने कोवैक्सिन के 2 डोज लगवाए थे

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

जुलाई 2025: कोविड के बाद अचानक मौतों पर स्टडी: ICMR का दावा- वैक्सीन से इसका संबंध नहीं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया कि देश में हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

यह स्टडी 18 से 45 साल के लोगों की अचानक मौत पर आधारित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टडी में कहा गया है कि भारत की कोविड वैक्सीन सेफ और इफेक्टिव है। इससे होने वाले गंभीर साइडइफेक्ट के मामले रेयर हैं।

स्टडी में बताया गया है कि अचानक हुई मौतों की अन्य वजहें हो सकती हैं। इनमें जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारी और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

भारत में दो कोविड वैक्सीन विकसित हुई थीं। भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन का निर्माण किया था। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड बनाई थी।पूरी खबर पढ़ें…

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सुप्रीम कोर्ट का कोविड-वैक्सीनेशन पर मुआवजा पॉलिशी बनाने का निर्देश: केंद्र से कहा- समय-समय पर साइड इफेक्ट्स के आंकड़े जारी करे;एक्सपर्ट पैनल बनाने से इनकार


नई दिल्ली8 मिनट पहले

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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले में सुनवाई की।

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कोविड-19 वैक्सीनेशन के बाद के साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल के गठन से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन लोगों के लिए नो-फॉल्ट मुआवजा नीति तैयार करे, जिन्हें कोविड-19 टीकाकरण के बाद गंभीर प्रतिकूल घटनाओं का सामना करना पड़ा है। कोर्ट ने साइड इफेक्ट्स से जुड़े आंकड़े समय-समय पर सार्वजनिक करने को भी कहा है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उस आज याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मांग है कि वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। आरोप है कि 2021 में कोविशील्ड की पहली खुराक लेने के बाद 2 महिलाओं की मौत हो गई थी।

कोर्ट की 3 अहम टिप्पणी

  • मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए कोर्ट की तरफ से अलग समिति बनाने की जरूरत नहीं है।
  • कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कानून का सहारा नहीं ले सकता है।
  • कोर्ट ने कहा कि मुआवजा नीति बनाने का मतलब यह नहीं माना जाएगा कि भारत सरकार या किसी अन्य अथॉरिटी ने अपनी गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है।
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PM ने कोवैक्सिन के 2 डोज लगवाए थे

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

जुलाई 2025: कोविड के बाद अचानक मौतों पर स्टडी: ICMR का दावा- वैक्सीन से इसका संबंध नहीं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया कि देश में हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

यह स्टडी 18 से 45 साल के लोगों की अचानक मौत पर आधारित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टडी में कहा गया है कि भारत की कोविड वैक्सीन सेफ और इफेक्टिव है। इससे होने वाले गंभीर साइडइफेक्ट के मामले रेयर हैं।

स्टडी में बताया गया है कि अचानक हुई मौतों की अन्य वजहें हो सकती हैं। इनमें जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारी और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

भारत में दो कोविड वैक्सीन विकसित हुई थीं। भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन का निर्माण किया था। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड बनाई थी।

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मुख्य चुनाव आयुक्त बोले- पात्र वोटर का नाम नहीं कटेगा: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना प्राथमिकता, CEC के लौटते ही CM ममता ने धरना खत्म किया


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कोलकाता7 घंटे पहलेलेखक: एजेंसी इनपुट्स के साथ में शुभम बोस

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कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को कहा कि किसी भी पात्र वोटर का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिकता है।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का मकसद है कि सभी सही वोटर को वोट देने का अधिकार मिले और कोई अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो।

आयोग का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पश्चिम बंगाल के सभी मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में हिंसा और डर के माहौल से मुक्त होकर मतदान कर सकें।

कोलकाता में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए दो दिन तक हुई बैठकों के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बिना किसी पक्षपात और दबाव के कानून का सख्ती से पालन कराएं। इसके बाद वे दिल्ली रवाना हो गए। मुख्य चुनाव आयुक्त के लौटते ही पांच दिन से धरने पर बैठीं CM ममता बनर्जी ने धरना खत्म कर दिया।

कुमार बोले- “चुनाओ पर्वो, पश्चिमबंगेर गर्वो”

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां मतदान प्रतिशत हमेशा काफी अधिक रहता है। राज्य के मतदाता संविधान का सम्मान करते हैं और शांतिपूर्ण चुनाव में विश्वास रखते हैं।

इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग का एक नारा भी बताया- “चुनाओ पर्वो, पश्चिमबंगेर गर्वो (यानी चुनाव का पर्व पश्चिम बंगाल का गर्व है)।

इसके पहले ज्ञानेश कुमार को सुबह फिर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। ज्ञानेश कुमार दक्षिणेश्वर काली मंदिर गए थे, जहां लोगों की भीड़ ने गो बैक नारे लगाए और काले झंडे दिखाए।

यह लगातार तीसरे दिन CEC को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले कालीघाट मंदिर में दर्शन करने और रविवार रात कोलकाता पहुंचने पर भी एयरपोर्ट के बाहर लोगों ने काले झंडे दिखाए थे। चुनाव आयुक्त के विजिट की तस्वीरें…

चुनाव आयुक्त मंगलवार को सबसे पहले दक्षिणेश्वर काली मंदिर गए।

चुनाव आयुक्त मंगलवार को सबसे पहले दक्षिणेश्वर काली मंदिर गए।

CEC ज्ञानेश कुमार ने बेलूर मठ का भी दौरा किया।

CEC ज्ञानेश कुमार ने बेलूर मठ का भी दौरा किया।

विरोध कर रहे लोगों ने गो बैक ज्ञानेश कुमार और लोकतंत्र के हत्यारे के पोस्टर दिखाए।

विरोध कर रहे लोगों ने गो बैक ज्ञानेश कुमार और लोकतंत्र के हत्यारे के पोस्टर दिखाए।

SIR पर कहा- प्रक्रिया नियमों के अनुसार

कुमार ने बताया कि (SIR) की प्रक्रिया पूरे देश में संवैधानिक नियमों के अनुसार चल रही है।

इस प्रक्रिया में पाया गया कि:

  • लगभग 4–5% मतदाता 2002 की वोटर लिस्ट से खुद को जोड़ नहीं पाए।
  • करीब 7–8% मतदाताओं ने गलती से या जानबूझकर गलत तरीके से अपने नाम जोड़े।
  • जिन लोगों के नाम हट गए हैं वे फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
  • जिन नामों की अभी जांच चल रही है, उनकी जांच हाईकोर्ट के नियुक्त किए गए न्यायिक अधिकारियों के जरिए की जा रही है।

विरोध के बावजूद CEC की मीटिंग

CEC कुमार ने विरोध के बावजूद, कुमार राज्य में अपने तय प्रोग्राम में शामिल होते रहे। इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ, राज्य में चुनाव से जुड़े इंतजामों का आकलन करने के लिए पश्चिम बंगाल की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) पीयूष पांडे और दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ मीटिंग की।

चुनाव आयुक्त ने हावड़ा जिले के बेलूर मठ का भी दौरा किया और कहा कि पोल पैनल पश्चिम बंगाल में हिंसा-मुक्त चुनाव के लिए कमिटेड है।

उन्होंने कहा कि आयोग यह पक्का करने की कोशिश करेगा कि वोटर त्योहार के माहौल में अपने वोट का इस्तेमाल कर सकें। चुनाव बिना हिंसा या डर-धमकी के हों।

विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार को हटाने की तैयारी में

विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। यदि संसद में यह लाया जाता है, तो किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ पहला प्रस्ताव होगा।

नोटिस का मसौदा इसी हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने बताया कि कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के अन्य दल नोटिस का समर्थन करेंगे। प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर के मुद्दे पर वोटर्स के नाम काटे जाने के मुद्दे पर ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाने की बात कही थी।

प्रक्रिया: लोस में 100, रास में 50 सांसद का साथ जरूरी है

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जज को हटाने जैसी है। बस, आयुक्त का गलत व्यवहार या अयोग्यता साबि​त होनी चाहिए।

प्रस्ताव किसी भी सदन में लाया जा सकता है। नोटिस पर लोकसभा में 100, राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

समिति नोटिस की जांच करती है। ​प्रस्ताव बहुमत से पारित होना चाहिए। सदन में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव का समर्थन करना जरूरी होता है।

ममता ने धरना खत्म किया पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहा अपना धरना पांचवें दिन अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों की सुनवाई के लिए एक अपीलीय व्यवस्था बनाने का आदेश दिया है। ———————-

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बंगाल पहुंचे चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, कालीघाट में पूजा की:लोगों ने गो-बैक के पोस्टर, काले झंडे दिखाए; BJP की मांग- 3 फेज में ही कराएं चुनाव

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार सुबह कालीघाट में पूजा करने पहुंचे, जहां लोगों ने उनका विरोध किया।

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार सुबह कालीघाट में पूजा करने पहुंचे, जहां लोगों ने उनका विरोध किया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार रविवार शाम को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों का रिव्यू करने कोलकाता पहुंचे। 3 दिन चलने वाली चुनाव आयोग की फुल बेंच मीटिंग के बीच सोमवार को ज्ञानेश कुमार कालीघाट में पूजा करने पहुंचे। पढ़ें पूरी खबर…

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जेब ढीली किए बिना घूमें हैदराबाद, अप्रैल की गर्मी में सुकून देंगी ये 5 जगहें


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Hyderabad Free Tourist Places: अगर आप कम बजट में हैदराबाद घूमने की योजना बना रहे हैं तो शहर में कई ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां बिना किसी एंट्री फीस के घूम सकते हैं. हुसैन सागर झील, दुर्गम चेरुवु, केबीआर नेशनल पार्क, नेकलेस रोड और उस्मान सागर झील जैसी जगहें प्राकृतिक सुंदरता और सुकून भरा माहौल देती हैं. खासकर अप्रैल की गर्मी में यहां सुबह या शाम के समय घूमना बेहद सुखद होता है. यहां परिवार या दोस्तों के साथ बिना ज्यादा खर्च किए अच्छा समय बिताया जा सकता है.

निजामों का शहर हैदराबाद अपनी ऐतिहासिक भव्यता और आधुनिकता के अद्भुत संगम के लिए जाना जाता है. अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी में भी यहाँ बिड़ला मंदिर, हुसैन सागर झील और मौला अली दरगाह जैसे कई स्थान हैं जहाँ आप बिना किसी एंट्री फीस के सुकून भरे पल बिता सकते हैं. शाम के वक्त इन ठंडी और शांत जगहों की सैर न केवल आपकी जेब पर हल्की पड़ती है बल्कि शहर की असली रूह से भी वाकिफ कराती है.

रामकृष्ण मठ लोअर टैंक बंड के पास स्थित यह मठ अपनी आध्यात्मिकता और हरियाली के लिए जाना जाता है। अप्रैल की गर्मी से बचने के लिए यहाँ का शांत वातावरण और लाइब्रेरी बहुत अच्छे विकल्प हैं। यहां एंट्री फ्री है और  यहाँ शाम की आरती और ध्यान केंद्र का अनुभव बहुत ही सुखद होता है।

रामकृष्ण मठ: लोअर टैंक बंड के पास स्थित यह मठ अपनी आध्यात्मिकता और हरियाली के लिए जाना जाता है. अप्रैल की गर्मी से बचने के लिए यहाँ का शांत वातावरण और लाइब्रेरी बहुत अच्छे विकल्प हैं. यहां एंट्री फ्री है और यहाँ शाम की आरती और ध्यान केंद्र का अनुभव बहुत ही सुखद होता है.

लाड बाज़ार और चारमीनार के आसपास अगर आपको फोटोग्राफी या स्ट्रीट लाइफ पसंद है तो चारमीनार के पास स्थित लाड बाज़ार एक बेहतरीन जगह है। चारमीनार के अंदर जाने की छोटी सी फीस है, लेकिन बाहर से इसकी भव्यता देखना और बाज़ार की रौनक का अनुभव करना मुफ्त है। बाज़ार घूमना फ्री और यहाँ की मशहूर ईरानी चाय ज़रूर ट्राई करें।

लाड बाज़ार और चारमीनार के आसपास: अगर आपको फोटोग्राफी या स्ट्रीट लाइफ पसंद है तो चारमीनार के पास स्थित लाड बाज़ार एक बेहतरीन जगह है. चारमीनार के अंदर जाने की छोटी सी फीस है, लेकिन बाहर से इसकी भव्यता देखना और बाज़ार की रौनक का अनुभव करना मुफ्त है. बाज़ार घूमना फ्री और यहाँ की मशहूर ईरानी चाय ज़रूर ट्राई करें.

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मौला अली दरगाह यह एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 500 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। अप्रैल की शाम को यहाँ से पूरे हैदराबाद का 360-डिग्री व्यू दिखता है जो किसी भी महंगे रूफटॉप कैफे से बेहतर है यह एंट्री फ्री है शाम के वक्त जाना सबसे अच्छा है ताकि आप शहर की रोशनी देख सकें चूंकि अप्रैल में तापमान 40°C तक जा सकता है इसलिए अपनी यात्रा दोपहर 4:30 बजे के बाद ही शुरू करें।

मौला अली दरगाह: यह एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 500 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं. अप्रैल की शाम को यहाँ से पूरे हैदराबाद का 360-डिग्री व्यू दिखता है, जो किसी भी महंगे रूफटॉप कैफे से बेहतर है. यह एंट्री फ्री है शाम के वक्त जाना सबसे अच्छा है ताकि आप शहर की रोशनी देख सकें चूंकि अप्रैल में तापमान 40°C तक जा सकता है इसलिए अपनी यात्रा दोपहर 4:30 बजे के बाद ही शुरू करें.

पैगा पैलेस अगर आपको पुरानी वास्तुकला और शांति पसंद है तो बेगमपेट स्थित यह पैलेस एक छिपा हुआ खजाना है। यहाँ की इंडो-यूरोपीय शैली की बनावट देखने लायक है। यहाँ भीड़ कम होती है और आप सुकून से समय बिता सकते हैं यहां एंट्री फ्री है यहां शादी की बुकिंग महंगी होती है

पैगा पैलेस; अगर आपको पुरानी वास्तुकला और शांति पसंद है तो बेगमपेट स्थित यह पैलेस एक छिपा हुआ खजाना है. यहाँ की इंडो-यूरोपीय शैली की बनावट देखने लायक है. यहाँ भीड़ कम होती है और आप सुकून से समय बिता सकते हैं. यहां एंट्री फ्री है यहां शादी की बुकिंग महंगी होती है.

शमीरपेट झील अगर आप शहर के शोर-शराबे से दूर जाना चाहते हैं, तो यह झील एक बेहतरीन वीकेंड गेटवे है। अप्रैल की शाम को यहाँ सूर्यास्त देखना बहुत सुकून भरा होता है यहां एंट्री फ्री है यहाँ से पास ही डीयर पार्क भी है जहाँ आप हिरण देख सकते हैं।

शमीरपेट झील: अगर आप शहर के शोर-शराबे से दूर जाना चाहते हैं, तो यह झील एक बेहतरीन वीकेंड गेटवे है. अप्रैल की शाम को यहाँ सूर्यास्त देखना बहुत सुकून भरा होता है. यहां एंट्री फ्री है यहाँ से पास ही डीयर पार्क भी है जहाँ आप हिरण देख सकते हैं.



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भारत के किस राज्य को झीलों की घाटी के नाम से जाना जाता है? जानिए यहां…


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Which Valley is known as the Valley of Lakes : भारत के किस राज्य की घाटी को झीलों की घाटी के नाम से जाना जाता है? इस आर्टिकल में जानें कि कश्मीर घाटी को यह टाइटल क्यों मिला, इसकी मीठे पानी की झीलें, इसकी ज्योग्राफिकल लोकेशन, इकोलॉजिकल फीचर्स और दिलचस्प फैक्ट्स.

एक साफ़ सुबह कश्मीर घाटी में कदम रखें, और यह समझना आसान हो जाएगा कि इसे झीलों की घाटी क्यों कहा जाता है. पानी हर जगह है सिर्फ़ पहाड़ों से बहने वाली नदियां ही नहीं, बल्कि अनगिनत झीलें भी हैं, जिनमें से हर एक की अपनी अलग सुंदरता है. शानदार और मशहूर झीलों से लेकर छिपी हुई और एकांत झीलों तक, कुछ को शिकारे से देखा जा सकता है, जबकि दूसरों तक पहुंचने के लिए ऊंची घास के मैदानों से तीन दिन का ट्रेक करना पड़ता है. उत्तरी हिमालय में स्थित, कश्मीर घाटी को झीलों की घाटी के नाम से जाना जाता है. यह नाम घाटी में फैली कई ताज़े पानी की झीलों को दिखाता है, जो ग्लेशियर की गतिविधि, प्राकृतिक झरनों और पहाड़ों की हाइड्रोलॉजी से बनी हैं. 

 The valley’s distinctive geography explains the abundance of lakes in Kashmir. Kashmir Valley is a vast mountainous basin, encircled by towering Himalayan ranges. This natural enclosure allows snowmelt, glacial runoff, and rainfall to accumulate rather than drain away quickly, sustaining a rich network of freshwater ecosystems at varying altitudes.

कश्मीर घाटी की अनोखी भौगोलिक स्थिति कश्मीर में झीलों की बहुतायत का कारण है. कश्मीर घाटी एक विशाल पहाड़ी बेसिन है, जो शक्तिशाली हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं से घिरी हुई है. यह प्राकृतिक ढलान पिघलती बर्फ़, ग्लेशियर के बहाव और बारिश के पानी को तेज़ी से बहने के बजाय जमा होने देता है, जिससे अलग-अलग ऊंचाइयों पर ताज़े पानी के इकोसिस्टम का एक समृद्ध नेटवर्क बना रहता है.

Some lakes lie around 1,500 metres above sea level, nestled on the valley floor and surrounded by gardens and houseboats. Others are perched above 12,000 feet, cradled in glacial cirques between snow-covered ridges, reachable only by trekkers brave enough to navigate high mountain passes.

कुछ झीलें समुद्र तल से लगभग 1,500 मीटर की ऊंचाई पर हैं, जो घाटी के तल पर बसी हैं और झाड़ियों और हाउसबोट से घिरी हुई हैं. दूसरी झीलें, 12,000 फीट से ज़्यादा ऊंचाई पर, बर्फ से ढकी चोटियों के बीच ग्लेशियर वाली घाटियों में बसी हैं, जहाँ सिर्फ़ वही पर्वतारोही जा सकते हैं जो पहाड़ी दर्रों को पार करने की हिम्मत रखते हैं. इस वजह से, कश्मीर का नज़ारा पानी से बहुत ज़्यादा प्रभावित है. पारंपरिक गांव, तैरते हुए बगीचे, शिकारा की सवारी, और हज़ारों कश्मीरी परिवारों की रोज़ी-रोटी इन्हीं झीलों के आस-पास घूमती है। यहां कश्मीर की कुछ ऐसी झीलें हैं जहां ज़रूर जाना चाहिए.

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 Dal Lake (Srinagar): The "Jewel in the crown of Kashmir," Dal Lake is the heart of Srinagar. It’s not just a body of water; it’s a floating ecosystem. Staying in a Shikara or a luxury houseboat. The floating vegetable market at dawn and the lotus gardens.

डल झील (श्रीनगर): कश्मीर की शान कही जाने वाली डल झील, श्रीनगर का दिल है. यह सिर्फ़ पानी का एक बड़ा हिस्सा नहीं है, बल्कि एक तैरती हुई नदी का सिस्टम है। शिकारा या शानदार हाउसबोट में रहकर, सुबह-सुबह खुलने वाला तैरता हुआ सब्ज़ी बाज़ार, और कमल के बगीचे बहुत खूबसूरत नज़ारे दिखाते हैं.

 Nigeen Lake (Srinagar): Often considered the "quiet sibling" of Dal Lake, Nigeen is perfect if you want a more peaceful experience. It is surrounded by majestic chinar trees and offers a clearer view of the Hari Parbat fort. It’s much cleaner and less crowded than Dal Lake.

निगीन झील (श्रीनगर): डल झील की “शांत बहन” मानी जाने वाली निगीन झील उन लोगों के लिए एकदम सही जगह है जो आराम का अनुभव चाहते हैं. यह शानदार चिनार की पहाड़ियों से घिरी हुई है और यहां से हरि पर्वत किले का साफ़ नज़ारा दिखता है. यह डल झील की तुलना में ज़्यादा साफ़ और कम भीड़ वाली है.

 Wular Lake (Bandipora): One of the largest freshwater lakes in Asia, Wular acts as a natural flood reservoir for the Jhelum River. The lake is so large that its waters can become quite turbulent, creating mini-waves.

वुलर झील (बांदीपोरा): एशिया की सबसे बड़ी ताज़े पानी की झीलों में से एक, वुलर झील झेलम नदी के लिए एक कुदरती बाढ़ के मैदान का काम करती है. झील का बड़ा पानी काफ़ी उथल-पुथल वाला हो सकता है, जिससे छोटी-छोटी लहरें उठती हैं.



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Biz Updates: देश में बढ़ी बिजली की खपत, फरवरी में 2% बढ़कर 133 अरब यूनिट; पढ़ें कारोबार जगत की अहम खबरें


देश में बिजली की मांग फरवरी में लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 133 अरब यूनिट (BU) पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी महीने के 131 अरब यूनिट की तुलना में अधिक है। यह फरवरी महीने के लिए कम से कम 2010 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, कई हिस्सों में सामान्य से अधिक न्यूनतम और अधिकतम तापमान दर्ज होने के कारण कूलिंग की जरूरत बढ़ी, जिससे बिजली की खपत में इजाफा हुआ।

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रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में देश की बिजली मांग सालाना आधार पर 1 से 1.5 प्रतिशत बढ़कर 1,705 से 1,715 अरब यूनिट के बीच रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी सर्दी, वित्त वर्ष के अंत में सामान्य से अधिक तापमान की शुरुआत और स्थिर आर्थिक वृद्धि बिजली मांग को बढ़ावा दे सकती है, हालांकि लंबे मॉनसून के कारण इस वृद्धि पर कुछ असर पड़ सकता है।



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Silver Rate Today: OMG चांदी हुई महंगी, 2.90 हजार रुपये किलो, 10 ग्राम का हुआ अब इतना रेट, आज का ताजा भाव


Business

oi-Pallavi Kumari

Silver Rate Today 10 March 2026: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी है। इसी बीच चांदी के दाम में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वायदा बाजार में जहां कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ, वहीं घरेलू सर्राफा बाजार में कई जगहों पर गिरावट भी देखने को मिली। ऐसे में निवेशकों और गहने खरीदने वालों के लिए चांदी के ताजा रेट जानना बेहद जरूरी हो गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार (10 मार्च) को बाजार खुलते ही चांदी के वायदा भाव में तेज उछाल आया। चांदी करीब 3.51 प्रतिशत यानी लगभग ₹19,367 चढ़कर ₹2,76,527 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,68,285 प्रति किलोग्राम था।

Silver Rate Today 10 March 2026

हालांकि घरेलू सर्राफा बाजार की तस्वीर थोड़ी अलग रही। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चांदी लगातार तीसरे दिन सस्ती हुई और करीब ₹3,400 टूटकर ₹2,68,300 प्रति किलोग्राम पर आ गई। दूसरी ओर बाजार विश्लेषण वेबसाइट गुडरिटर्न्स के अनुसार चांदी की कीमत लगभग ₹5,000 गिरकर ₹2,80,000 प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है।

वहीं इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार सुबह तक चांदी की कीमत और गिरकर करीब ₹2,60,056 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कीमतों में यह अंतर टैक्स, डिलीवरी चार्ज और स्थानीय बाजार के मार्जिन के कारण देखने को मिलता है।

Silver Rate In India: 10 मार्च 2026: भारत के प्रमुख शहरों में चांदी का भाव

शहर 10 ग्राम 100 ग्राम 1 किलो
दिल्ली ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
मुंबई ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
कोलकाता ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
चेन्नई ₹2,900 ₹29,000 ₹2,90,000
पटना ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
लखनऊ ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
मेरठ ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
कानपुर ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
गाजियाबाद ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
नोएडा ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
गुरुग्राम ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
अयोध्या ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
चंडीगढ़ ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
जयपुर ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
लुधियाना ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
गुवाहाटी ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
इंदौर ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
अहमदाबाद ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
वडोदरा ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
सूरत ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
नागपुर ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
पुणे ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
नासिक ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
बैंगलोर ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
भुवनेश्वर ₹2,900 ₹29,000 ₹2,90,000
कटक ₹2,900 ₹29,000 ₹2,90,000
केरल ₹2,900 ₹29,000 ₹2,90,000
रायपुर ₹2,800 ₹28,000 ₹2,80,000
हैदराबाद ₹2,900 ₹29,000 ₹2,90,000

Gold Silver Rate: सोना ₹8797 सस्ता, चांदी में बंपर गिरावट,₹29,729 सस्ती, आज कितने में मिला है रहा गोल्ड-सिल्वर

ऑल टाइम हाई से करीब 1.26 लाख रुपये सस्ती हुई चांदी

इस साल की शुरुआत से सोना और चांदी दोनों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया है। 29 जनवरी 2026 को चांदी ने करीब ₹3,86,000 प्रति किलो का ऑल टाइम हाई छुआ था। लेकिन उसके बाद बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण कीमतें तेजी से नीचे आईं।

31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो था, जो जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। लेकिन अब करीब 39 दिनों में चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग ₹1,25,877 तक सस्ती हो चुकी है।

सोने के दाम में भी इसी तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। पिछले साल के अंत में जहां सोना करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं जनवरी के अंत में यह ₹1.76 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। उसके बाद से इसमें भी करीब ₹17,447 की गिरावट आ चुकी है।

देश में सोना और चांदी के भाव कैसे तय होते हैं?

भारत में सोना और चांदी की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों पर निर्भर करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं की कीमत, डॉलर और रुपये का विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी और स्थानीय बाजार की मांग इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकतर सोना और चांदी आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में थोड़ी सी हलचल भी घरेलू कीमतों पर असर डाल देती है। इसके अलावा शादी-विवाह का सीजन, त्योहारों के दौरान मांग बढ़ना और निवेशकों की रणनीति भी कीमतों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह बनती है।



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Today Silver Rate Jaipur: पिंक सिटी में आसमान छू रहा चांदी का भाव! रातों-रात 10,000 रुपये बढ़ गए दाम


Business

oi-Kumari Sunidhi Raj

Today Silver Rate Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सराफ बाजार में आज चांदी की कीमतों में जोरदार बढ़त देखने को मिली है। मंगलवार को बाजार खुलते ही चांदी के भाव में आए इस बड़े उछाल ने खरीदारों और निवेशकों, दोनों को चौंका दिया है। वैश्विक बाजार में हो रही हलचल और स्थानीय मांग में आई तेजी के कारण चांदी की कीमतों ने एक नया रुख अख्तियार किया है।

पिछले कुछ दिनों की स्थिरता के बाद, आज की यह तेजी सराफा बाजार में चर्चा का विषय बनी हुई है। जो लोग अक्षय तृतीया या शादियों के सीजन के लिए खरीदारी की योजना बना रहे थे, उनकी नजरें अब पल-पल बदलते बाजार पर टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के बढ़ते रुझान के चलते कीमतों में यह उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है।

Today Silver Rate Jaipur: पिंक सिटी में आसमान छू रहा चांदी का भाव! रातों-रात 10,000 रुपये बढ़ गए दाम

जयपुर में आज चांदी का भाव (Silver Price Today in Jaipur)

जयपुर सर्राफा कमेटी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आज चांदी की कीमतों में प्रति ग्राम ₹10 की वृद्धि दर्ज की गई है। विस्तृत दरें नीचे दी गई हैं:

  • 1 ग्राम चांदी: ₹290 (₹10 की बढ़त)
  • 8 ग्राम चांदी: ₹2,320
  • 10 ग्राम चांदी: ₹2,900 (₹100 की बढ़त)
  • 100 ग्राम चांदी: ₹29,000
  • 1 किलोग्राम चांदी: ₹2,90,000 (₹10,000 की भारी बढ़त)

ये भी पढ़ें: Today Gold Rate Jaipur: पिंक सिटी में सोने की कीमतों में फिर आई तेजी, कितना हुआ 22K-24K गोल्ड का भाव?

Silver Price Change in Jaipur: कल के मुकाबले कितनी आई तेजी?

सोमवार की तुलना में आज बाजार काफी तेज नजर आ रहा है। सोमवार को जयपुर में चांदी का भाव 280 रुपये प्रति ग्राम और 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम था। आज चांदी 2,90,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई है, जिसका सीधा मतलब है कि महज 24 घंटों के भीतर चांदी में 10,000 रुपये प्रति किलो की जबरदस्त तेजी आई है।

Silver Price: पिछले 10 दिनों में कितना बदला जयपुर में चांदी का भाव

मार्च के महीने में चांदी की चाल काफी अस्थिर रही है। महीने की शुरुआत ऊंचे दामों से हुई थी, जिसके बाद गिरावट देखी गई और अब फिर से भाव ऊपर चढ़ रहे हैं। देखें पिछले 10 दिनों का रुझान:

तारीख चांदी का भाव (प्रति किलोग्राम)
10 मार्च 2026 ₹2,90,000
09 मार्च 2026 ₹2,80,000
08 मार्च 2026 ₹2,85,000
07 मार्च 2026 ₹2,85,000
06 मार्च 2026 ₹2,85,000
05 मार्च 2026 ₹2,85,000
04 मार्च 2026 ₹2,85,000
03 मार्च 2026 ₹2,95,000
02 मार्च 2026 ₹3,15,000
01 मार्च 2026 ₹2,95,000

इन आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2 मार्च को चांदी अपने उच्चतम स्तर ₹3,15,000 पर थी, जिसके बाद इसमें गिरावट आई। अब एक बार फिर बाजार में सुधार (Recovery) के संकेत मिल रहे हैं।

With AI Inputs

ये भी पढ़ें: Gold Rate Today: जंग के बीच भारत में लगातार सस्ता हो रहा सोना, इतना गिरा भाव, अब क्या है 22k, 18K गोल्ड का रेट



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HRIDAY योजना का कमाल, 35 रुपए में ले सकेंगे भद्रकाली लेक व्यू और ओपन जिम का मजा


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HRIDAY Scheme Rajasthan: HRIDAY योजना के तहत भद्रकाली लेक क्षेत्र का विकास कर इसे पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया गया है. अब यहां आने वाले लोग केवल 35 रुपये में खूबसूरत लेक व्यू का आनंद ले सकेंगे और ओपन जिम की सुविधा का भी लाभ उठा सकेंगे. इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को बेहतर मनोरंजन व स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है. भद्रकाली लेक का नया रूप लोगों को काफी पसंद आ रहा है और यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.

ख़बरें फटाफट

हैदराबाद: ऐतिहासिक शहर वारंगल में प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक नया डिस्टेंशन उभर कर सामने आया है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी HRIDAY योजना के तहत विकसित भद्रकाली झील के तट को आम जनता के लिए खोल दिया गया है. करीब 1.1 किलोमीटर लंबा यह स्ट्रेच अब न केवल स्थानीय निवासियों के लिए सुकून का केंद्र बन गया है, बल्कि अपनी सुंदरता के कारण इसकी तुलना हैदराबाद के प्रसिद्ध टैंक बंड और नेकलेस रोड से की जा रही है.

काकतीय शहरी डेवलपमेंट अथॉरिटी KUDA द्वारा इम्पीमेंट इस परियोजना पर कुल 31 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. इसमें से 21 करोड़ रुपये हृदय योजना के तहत और शेष 10 करोड़ रुपये कुडा द्वारा वहन किए गए हैं. इस जियो डाइवर्सिटी कल्चर पार्क की कुछ प्रमुख विशेषताएं जिसमें  1.1 किमी लंबा पैदल ट्रैक जो एथिलीन प्रोपाइलीन डायीन मोनोमर (EPDM) से निर्मित है.
ओपन जिम, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, एकीकृत लैंडस्केप लाइटिंग और पर्याप्त पार्किंग. पार्क के डिजाइन में काकतीय वंश की वास्तुकला, भव्य प्रवेश द्वार और मूर्तिकला के माध्यम से ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का प्रयास किया गया है.

लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आएगा
पार्क के बेहतर रखरखाव के लिए प्रशासन ने मामूली प्रवेश शुल्क निर्धारित किया है. वर्तमान में बड़ों के लिए 35 रुपये और बच्चों के लिए 25 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है. इसके अतिरिक्त नियमित मॉर्निंग वॉकर्स के लिए मासिक 400 रुपये और वार्षिक 4,000 रुपये पास की सुविधा भी प्रस्तावित है. अधिकारियों का अनुमान है कि पार्क के मासिक रख रखाव पर लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आएगा.

एक अनमोल उपहार साबित हो रहा
वर्तमान में जहाँ 1.1 किमी के हिस्से का काम पूरा हो चुका है वहीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शेष 2.5 किमी लंबे तटवर्ती क्षेत्र का विकास ग्रेटर वारंगल नगर निगम द्वारा किया जा रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि इस कार्य में तेजी लाई जाए ताकि पूरी झील का कायाकल्प हो सके। यह प्रोजेक्ट न केवल वारंगल की सुंदरता में चार चांद लगा रहा है बल्कि आजादी का अमृत महोत्सव जैसे आयोजनों के बीच यह शहरवासियों के लिए एक अनमोल उपहार साबित हो रहा है।

About the Author

Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें



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