फरवरी में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार और मजबूत हुई है। एचएसबीसी के सर्वे के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जनवरी के 55.4 से बढ़कर चार महीने के उच्च स्तर 56.9 पर पहुंच गया। यह स्तर सेक्टर की सेहत में स्पष्ट सुधार और निरंतर विस्तार का संकेत देता है।
घरेलू मांग से कैसे पड़ा असर?
सर्वे में बताया गया कि घरेलू मांग में मजबूत बढ़त ने नए ऑर्डरों को बढ़ावा दिया, जिससे उत्पादन में चार महीने की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई।
मांग में मजबूती, मार्केटिंग पहलों और ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों के चलते नए कारोबार में लगातार इजाफा हुआ।
नए ऑर्डरों की वृद्धि दर ऐतिहासिक रूप से ऊंची बताई गई और यह पिछले साल अक्तूबर के बाद सबसे मजबूत रही।
चार महीने की हुई सबसे तेज गति
उत्पादन भी चार महीने की सबसे तेज गति से बढ़ा और दीर्घकालिक औसत से ऊपर रहा। पैनल सदस्यों के मुताबिक दक्षता में सुधार, मजबूत मांग, नए काम के बढ़ते ऑर्डर और तकनीकी निवेश ने उत्पादन वॉल्यूम को सहारा दिया। बढ़ते कार्यभार के बीच कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद बढ़ाई, इन्वेंट्री में इजाफा किया और अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की, जो मांग की निरंतरता को लेकर भरोसा दर्शाता है।
बाहरी मांग को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?
हालांकि, निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि में नरमी देखी गई। फरवरी में बाहरी मांग में विस्तार 17 महीनों के सबसे धीमे स्तर पर रहा, जो दीर्घकालिक औसत के करीब रहा। जहां निर्यात बिक्री बढ़ी, वहां कंपनियों ने एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका से मांग का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार एक क्षेत्र जहां वृद्धि में कमी आई, वह नए निर्यात ऑर्डर रहे, जिनमें फरवरी में बढ़ोतरी 17 महीनों की सबसे धीमी रही।
क्या है उद्योग जगत का अनुमान?
इसके बावजूद समग्र परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। आने वाले एक साल के लिए उत्पादन को लेकर कंपनियां आशावादी दिखीं, जहां 16 प्रतिशत कंपनियों ने वृद्धि का अनुमान जताया, जबकि 1 प्रतिशत से भी कम ने गिरावट की आशंका जताई। कुल मिलाकर, फरवरी के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि मजबूत घरेलू मांग विनिर्माण गतिविधियों को सहारा दे रही है, भले ही निर्यात वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी हो।
Khamenei Hajj: ईरान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव रहा है। यह तनाव सिर्फ धार्मिक (शिया बनाम सुन्नी) नहीं था, बल्कि इसका रणनीतिक असर भी था। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सऊदी से दुश्मनी की वजह से कभी हज यात्रा पर नहीं जा पाए थे। सोशल मीडिया पर कई बार यह दावा किया गया कि सऊदी से दुश्मनी की वजह से उन्होंने मक्का-मदीना की यात्रा नहीं की। हालांकि ऐतिहासिक तथ्य इस दावे से अलग तस्वीर पेश करते हैं।
जानकारी के मुताबिक, अली खामेनेई ने ईरान के सुप्रीम लीडर बनने से पहले हज किया था। धार्मिक शिक्षा और इस्लामी परंपराओं से गहरे जुड़े खामेनेई के लिए हज सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव भी था। सुप्रीम लीडर बनने (1989) से पहले उन्होंने मक्का से मदीना की यात्रा पूरी की थी। इसलिए यह कहना कि उनका हज का सपना अधूरा रह गया, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
Khamenei Hajj: सुरक्षा कारणों से ईरान के बाहर नहीं जाते थे खामेनेई
– हालांकि, 1989 में सर्वोच्च पद संभालने के बाद क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा कारणों से उनकी व्यक्तिगत यात्राएं सीमित रहीं।
– ईरान-सऊदी संबंधों में उतार-चढ़ाव, खासकर 2015 की भगदड़ और क्राउन प्रिंस के अमेरिका के ओर झुकाव जैसी घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए थे। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की सऊदी यात्रा की संभावना और भी कम हो गई।
– ईरान का सुप्रीम लीडर बनने से पहले उन्होंने कई देशों की यात्रा की थी। अपने जीवनकाल में उन्होंने हज भी किया था और इसे इस्लाम का जरूरी फर्ज मानते थे। इसके अलावा, अपने जीवन में सभी इस्लामिक उसूलों को मानते थे।
Khamenei Hajj Yatra: हज के लिए हर साल जारी करते थे संदेश
इसके बावजूद, खामेनेई हर साल हज सीजन शुरू होने से पहले दुनिया भर के मुसलमानों के नाम संदेश जारी करते थे। इन संदेशों में वे हज को इस्लामी एकता, आत्मशुद्धि और वैश्विक मुस्लिम एकजुटता का प्रतीक बताते थे। उनके संदेशों में अक्सर यह अपील होती थी कि हज को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखकर देखा जाए। खामेनेई के लिए हज एक आध्यात्मिक और वैचारिक मंच था, जहां से वे मुस्लिम जगत को संबोधित करते थे। इसके अलावा, खास मौके पर वह सार्वजनिक तौर पर नमाज अदा करने भी आते थे और अजान भी देते थे।
भले ही सुप्रीम लीडर बनने के बाद उन्होंने दोबारा हज न किया हो, लेकिन इस धार्मिक परंपरा से उनका वैचारिक और आध्यात्मिक संबंध लगातार बना रहा। सऊदी से दुश्मनी के कारण उनका हज का सपना अधूरा रह गया, पूरी तरह सही नहीं है। उन्होंने हज किया था और जीवनभर इस यात्रा के महत्व पर जोर देते रहे।
नई दिल्ली: देश की राजधानी के बाहरी उत्तरी जिले समयपुर बादली इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. एक शख्स, जो कर्ज के बोझ तले दबा था और जुए की लत का शिकार था, उसने अपनी ही पत्नी और तीन मासूम बेटियों की गला रेतकर हत्या कर दी. इस हत्याकांड के पीछे की वजह महज एक फोन कॉल बताई जा रही है, जिसने आरोपी मुनचुन केवट के भीतर के इंसान को हैवान बना दिया. पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी सभ्य समाज के लिए एक चेतावनी की तरह हैं.
एक फोन कॉल और मौत का सामान
पुलिस के अनुसार, इस खौफनाक मंजर की पटकथा 23 फरवरी को ही लिखी जा चुकी थी. 42 वर्षीय मुनचुन केवट को उस दिन एक लेनदार, मिथिलेश का फोन आया था. मुनचुन क्रिकेट सट्टेबाजी और ताश के पत्तों के खेल का आदी था, जिसके चलते उस पर लाखों का कर्ज हो गया था. फोन पर हुई बातचीत के दौरान मिथिलेश और मुनचुन के बीच तीखी बहस हुई. आरोप है कि मिथिलेश ने पैसों की वसूली के लिए मुनचुन की पत्नी अनिता और बच्चों को बंधक बनाने या उनसे काम करवाने की धमकी दी. इस अपमान और डर ने मुनचुन को इस कदर पागल कर दिया कि उसने उसी दिन दोपहर 1 बजे मंडी से 90 रुपये का एक बड़ा चाकू खरीदा, जो आमतौर पर कटहल काटने के काम आता है.
साजिश और कत्ल की रात
हैरानी की बात यह है कि मुनचुन ने इस वारदात को तुरंत अंजाम नहीं दिया. वह चाकू को बैग के नीचे छिपाकर घर ले आया. 24 फरवरी को वह सामान्य रूप से काम पर गया और मंगलवार होने के कारण उसने व्रत भी रखा. शाम को वह अपने परिवार को होली की खरीदारी कराने बाजार भी ले गया, ताकि किसी को शक न हो. लेकिन रात 11:30 बजे जब पत्नी अनिता ने फिर से कर्ज और लेनदार के फोन का जिक्र किया, तो विवाद बढ़ गया. मुनचुन रात भर जागता रहा. तड़के 4 बजे जब अनिता की नींद खुली और उसने मुनचुन से जागने का कारण पूछा, तो उसने बिना सोचे-समझे चाकू से उसका गला रेत दिया. शोर सुनकर बड़ी बेटी जाग गई और रोने लगी, जिसके बाद मुनचुन ने एक-एक करके अपनी तीनों बेटियों को भी मौत के घाट उतार दिया. तीनों बच्चों की उम्र 3 से 5 साल के बीच थी.
पुलिस की मुस्तैदी और गिरफ्तारी
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी खुदकुशी करना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा सका. वह बिना टिकट ट्रेन पकड़कर अजमेर भाग गया, जहां उसने पहले काम किया था. दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 विशेष टीमें बनाईं. स्पेशल सीपी रविंद्र और डीसीपी हरेश्वर स्वामी के नेतृत्व में पुलिस ने 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद ली. मुनचुन के पुराने ठिकानों, जैसे तमिलनाडु और राजस्थान में छापेमारी की गई. तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे अजमेर के पास किशनगढ़ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया.
जुए की लत ने छीना सब कुछ
जांच में पता चला कि मुनचुन ने पिछले महीने ही अपने ससुराल वालों से 2 लाख रुपये उधार लिए थे. इसमें से उसने 60,000 रुपये मिथिलेश को और 40,000 रुपये एक अन्य सप्लायर को दिए थे, लेकिन बाकी बचे 1 लाख रुपये उसने फिर से सट्टेबाजी में गंवा दिए. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुनचुन पहले भी चोरी के मामलों में शामिल रहा है और सोशल मीडिया पर हथियार लहराते हुए उसकी तस्वीरें भी मिली हैं. फिलहाल पुलिस मिथिलेश की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसकी धमकी ने मुनचुन को इस आत्मघाती कदम के लिए उकसाया. यह घटना दर्शाती है कि कैसे कर्ज और जुआ एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं.
एम्स और पीपुल्स यूनिवर्सिटी को ऐहतियातन खाली कराया गया था।
भोपाल स्थित एम्स और पीपुल्स यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। धमकी भरा ई-मेल सोमवार तड़के करीब 3 बजे दोनों संस्थानों को अलग-अलग भेजा गया। इसमें लिखा था- आपके कॉलेज में सायनाइड पॉइजन वाले बम रखे गए हैं, जो दोपहर 12:15 बजे ब्लास्ट करेंगे। सुबह 11 बजे तक डॉक्टरों और स्टूडेंट्स को निकाल लें। अल्लाह हू अकबर।
सूचना मिलते ही संबंधित थानों की पुलिस, बम और डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंची और सर्चिंग शुरू की। एम्स में बागसेवनिया थाने के टीआई अमित सोनी और उनकी टीम ने तलाशी अभियान चलाया। वहीं, पीपुल्स यूनिवर्सिटी में निशातपुरा टीआई मनोज पटवा सहित थाना स्टाफ ने सर्च ऑपरेशन किया।
बम डिस्पोजल और डॉग स्क्वॉड भी मौके पर पहुंचे। लेकिन कहीं कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
ई-मेल के मद्देनजर स्टूडेंट्स को कैंपस से बाहर निकाल दिया गया था।
साइबर सेल ई-मेल भेजने वाले की तलाश में जुटी
पुलिस ने ई-मेल आईडी और आईपी एड्रेस के आधार पर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल को भी मामले में शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही धमकी देने वाले की पहचान कर ली जाएगी।
19 फरवरी को भी मिली थी विस्फोट की धमकी
इससे पहले 19 फरवरी को भी पीपुल्स मेडिकल कॉलेज को ई-मेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। उस समय भी पुलिस और बम स्क्वॉड ने जांच अभियान चलाया था। हालांकि, परिसर में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था।
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भोपाल में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी
भोपाल के दो स्कूलों और एक राष्ट्रीय लैब को 10 मार्च को धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। बड़वई स्थित पोदार वर्ल्ड स्कूल और टीटी नगर स्थित सेंट मेरी स्कूल को धमकी दी गई कि उन्हें बम से उड़ा दिया जाएगा। वहीं, खजूरी क्षेत्र में नेशनल फोरेंसिक लैब के बाहर विस्फोटक सामग्री पड़े होने की सूचना मिली। हालांकि, जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं पाई गई। पढ़ें पूरी खबर…
Iran Israel War 2026: मध्य पूर्व के रणक्षेत्र में ईरान अब अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है। अमेरिका और इजरायल के घातक हमलों के बाद, ईरान का ‘प्रतिरोध का अक्ष’ (Axis of Resistance) बिखरता दिख रहा है। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान जारी कर न केवल ईरान के पलटवार की निंदा की, बल्कि उसकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को ‘स्रोत’ (Source) पर ही नष्ट करने के लिए सैन्य कार्रवाई का ऐलान कर दिया।
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की यह एकजुटता ईरान को यूरोप से पूरी तरह काट चुकी है। खाड़ी देशों के साथ पश्चिमी ताकतों का यह अभूतपूर्व समन्वय संकेत दे रहा है कि दशकों पुराना ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ शासन अब टूटने के कगार पर है।
UK France Germany Joint Statement: तीन यूरोपीय देशों का कड़ा रुख
ईरान के खिलाफ अब केवल इजरायल और अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप की तीन सबसे बड़ी सैन्य शक्तियां भी मैदान में हैं।
ब्रिटेन (UK): प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ईरान के मिसाइल ठिकानों को नष्ट करने के लिए ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।
जर्मनी: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने स्पष्ट कहा है कि वे ईरानी शासन के अंत को लेकर अमेरिका और इजरायल के साथ हैं, क्योंकि कूटनीति अब विफल हो चुकी है।
फ्रांस: राष्ट्रपति मैक्रों ने अपनी नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा है और संयुक्त कार्रवाई के लिए सहमति जताई है।
Middle East Crisis: खाड़ी देशों की घेराबंदी और ‘अरब ब्लॉक’
सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर जैसे खाड़ी देशों का अमेरिका के साथ खड़ा होना ईरान के ‘क्षेत्रीय दबदबे’ के अंत का संकेत है। इन देशों ने ईरान के मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे ‘लापरवाह और विनाशकारी’ बताया है। अरब जगत का यह एकजुट विरोध ईरान के उस नैरेटिव को ध्वस्त करता है, जिसमें वह खुद को मुस्लिम हितों का रक्षक बताता था। अब ईरान अपने ही पड़ोसियों के बीच घिरा हुआ है।
Russia China Iran Support: केवल शब्दों की हमदर्दी?
ईरान के सबसे बड़े सहयोगियों, रूस और चीन ने हालांकि सर्वोच्च नेता खामेनेई पर हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है, लेकिन उनकी मदद केवल बयानों तक सीमित दिख रही है। व्लादीमिर पुतिन और शी जिनपिंग ने सैन्य भागीदारी के बजाय ‘कूटनीतिक निंदा’ का रास्ता चुना है। बिना सक्रिय सैन्य सहायता के ईरान के लिए अमेरिका, इजरायल और यूरोप के संयुक्त आधुनिक हथियारों और तकनीक का मुकाबला करना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।
Iran Isolation: ईरान के ‘प्रॉक्सिस’ की गिरती दीवार
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके सहयोगी संगठन जैसे हिजबुल्लाह और हूती माने जाते थे, जो इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। लेकिन पश्चिमी देशों के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और सटीक हमलों ने इन संगठनों को काफी कमजोर कर दिया है। तकनीकी और सैन्य संसाधनों के मामले में ये संगठन अब बेअसर साबित हो रहे हैं। सहयोगियों के कमजोर पड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले होने से ईरान के टूटने का खतरा बढ़ गया है।
English summary
iran israel war 2026 uk france germany support us israel iran isolation World News hindi
Jaipur Silver Rate Today: राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। स्थानीय सराफा बाजार में आज चांदी के भाव में 35,000 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। आज जयपुर में चांदी का भाव 3,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। वहीं, फुटकर बिक्री में चांदी 330 रुपये प्रति ग्राम की दर से बिक रही है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक मांग में अचानक तेजी के कारण कीमती धातुओं में यह अप्रत्याशित उछाल आया है। इस भारी बढ़त ने न केवल निवेशकों को चौंकाया है, बल्कि आगामी शादी सीजन के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। शहर के सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
Jaipur Silver Price: जयपुर में बीते 10 दिनों में चांदी की कीमत
जयपुर सर्राफा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का विवरण नीचे दिया गया है:
Delhi Flights cancelled: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के संकट और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग का सीधा असर अब भारत की राजधानी पर दिखने लगा है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा।
हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद होने के कारण दिल्ली से उड़ने वाली और यहां आने वाली करीब 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे हजारों यात्री बीच मझधार में फंस गए हैं।
आईजीआई एयरपोर्ट, जो रोजाना करीब 1,520 उड़ानों का संचालन करता है, वहां 1 मार्च को लगातार दूसरे दिन ‘वेस्ट-बाउंड’ (पश्चिम की ओर जाने वाली) उड़ानें पूरी तरह ठप रहीं। हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार, देर शाम तक 62 प्रस्थान (Departures) और 42 आगमन (Arrivals) रद्द किए जा चुके थे।
Delhi Airport Flight Status Today: आज भी हालात नहीं रहेंगे सामान्य, टर्मिनल-3 पर यात्रियों की भीड़
दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। सैकड़ों यात्री टिकट काउंटरों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। इनमें से कई ऐसे थे जिनकी कनेक्टिंग फ्लाइट्स रद्द हो गई थीं और उन्हें इसकी जानकारी दिल्ली उतरने के बाद मिली।
हवाई अड्डे के फर्श पर अपने सामान के साथ बैठे यात्री बेहद थके हुए दिखे। कई यात्री तो रात के कपड़ों (पायजामे) में ही नजर आए, जो पिछले 24 घंटों से वैकल्पिक रूट के इंतजार में वहीं डटे हुए हैं। एयरलाइन कर्मचारी कतारों में खड़े लोगों को खाने के पैकेट और पानी बांटते देखे गए।
FlightRadar24 Delhi Airport Delays: फ्लाइट रडार का डेटा: 400 से ज्यादा उड़ानें लेट
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightRadar24 के मुताबिक, रविवार रात 9 बजे तक दिल्ली एयरपोर्ट पर 400 से ज्यादा उड़ानें देरी से चल रही थीं। इसमें 300 से अधिक आने वाली (Arrivals) उड़ानें शामिल हैं। औसतन देरी का समय 19 मिनट बताया गया, लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 5 से 6 घंटे तक की देरी का सामना कर रही हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रियों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरलाइंस के बीच तालमेल की कमी पर भारी नाराजगी जताई।
कई यात्रियों की शिकायत थी कि उनकी उड़ानें रद्द होने के बाद उनका सामान (Luggage) नहीं मिल रहा है। हेल्प डेस्क पर सामान खोजने वालों की भारी भीड़ देखी गई। कई यात्रियों का कहना था कि उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई और एयरपोर्ट पहुंचने पर पता चला कि उनकी फ्लाइट अब नहीं उड़ेगी।
Air India और DIAL ने क्या कहा?
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर यात्रियों से धैर्य रखने की अपील की है पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव हो सकता है। हमारे ग्राउंड स्टाफ यात्रियों की मदद के लिए तैनात हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों के कारण कुछ प्रक्रियाओं में समय लग सकता है। वहीं, एयर इंडिया ने कहा है कि वे प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों में एडजस्ट करने और रिफंड की प्रक्रिया में पूरी मदद कर रहे हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क जरूर करें।
कब तक सुधरेंगे हालात?
जब तक ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम नहीं होता और खाड़ी देशों का एयरस्पेस दोबारा नहीं खुलता, तब तक दिल्ली से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर यह संकट बना रहेगा। फिलहाल एयरलाइंस लंबी दूरी के वैकल्पिक रूट (जैसे अफ्रीका के ऊपर से) तलाश रही हैं, जिससे सफर का समय और किराया दोनों बढ़ने की संभावना है।
Delhi Airport Flight Status Today: Severe crisis at Delhi Airport! 100 international flights cancelled due to Middle East conflict. Thousands of passengers stranded at Terminal 3. Air India and DIAL have issued urgent advisories.
प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की।
प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई PM मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- भारत और कनाडा के बीच निवेश-ट्रेड डील पर बातचीत हुई है। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में, हमने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है।
दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों के लिए एमओयू किया गया है। इससे दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, हम छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास पर सहयोग करेंगे। कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में मूल्यवर्धन करना भी हमारे लक्ष्यों में शामिल है।
पीएम ने पश्चिम एशिया में ईरान वार को लेकर कहा- पश्चिम एशिया में तनाव से भारत चिंतित है। भारत विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है। हर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए।
पीएम ने आगे कहा- हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता न केवल हमारे दोनों देशों बल्कि पूरी मानवता के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए इन खतरों से निपटने में हमारा घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है। विभिन्न मौजूदा मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट है।
भारत में भारत -कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और परिपक्व संबंधों का प्रतीक है। हम रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे। इसी उद्देश्य से हमने आज भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया है।
10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता PM कार्नी के इस दौरे का सबसे बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है। बताया जा रहा है कि यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है।
कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 में लागू हुआ था, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम सप्लाई शुरू की थी। भारत अपने तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए और अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है।
PM कार्नी के भारत दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें…
प्रधानमंत्री मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच सोमवार को हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की।
उद्योगपति मुकेश अंबानी के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी, उनकी पत्नी और बेटे नीता और अनंत ने रविवार को मुंबई स्थित अपने आवास पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और उनकी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी की मेजबानी की।
भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा
भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है।
भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं।
कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।
निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते खराब हुए
साल 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। कनाडा ने निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए गए थे।
कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया था।
भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था। भारत का कहना था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उन पर कार्रवाई नहीं करता।
इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कनाडा ने भी भारत से व्यापार मिशन रद्द कर दिए, और दोनों तरफ से यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और CEPA जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं ठप पड़ गईं।
जस्टिन ट्रूडो के पद से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की।
कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का
कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहां प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है।
भारतीय विदेश मंत्रायल के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।
पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में सोमवार को एक दिन में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जब केएसई-100 बेंचमार्क 16,089.17 अंक गिर गया। केएसई-100 सूचकांक 2.99 अंक गिरकर 151,972 पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 9.57 अंकों की गिरावट दर्शाता है। यह पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज के इतिहास में एक दिन में हुई सबसे बड़ी गिरावट है।
कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स के वित्तीय विश्लेषक कौकब फरशोरी ने कहा कि क्षेत्र में अनिश्चित भू-राजनीतिक स्थिति के कारण यह गिरावट आई। उन्होंने इसे कुछ फंडों और नए लीवरेज्ड खिलाड़ियों द्वारा की गई बिकवाली के कारण बाजार की “अतिप्रतिक्रिया” करार दिया।
रमजान के महीने के कारण, पीएसई आधे दिन के लिए संचालित होता है, लेकिन अंकों में अचानक गिरावट के कारण, दोपहर के आसपास व्यापार को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था।
कौकाब ने कहा कि जब पिछले सप्ताह बाजार बंद हुआ, तो क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण पहले से ही अस्थिरता का माहौल था। पाकिस्तानी सरकार ने शनिवार से शुरू होने वाले अगले 15 दिनों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि की है।
सोमवार को सुबह 10:30 बजे जब कारोबार शुरू हुआ, तो सूचकांक अपने पिछले बंद भाव 168,062.16 अंकों से 12,334,88 अंक गिर चुका था, जो 7.34 प्रतिशत की गिरावट का संकेत देता है। अन्य वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, सूचकांक में गिरावट के चलते कुछ निवेशकों ने स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की है, जिसके चलते कुछ शेयरों में भी गिरावट आई है।
Silver Rate Today 2 March 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव ने कमोडिटी बाजार में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया। इसका सीधा असर सोना ही नहीं, चांदी पर भी दिखा। 2 मार्च 2026, सोमवार को हफ्ते के पहले कारोबारी दिन चांदी ने रॉकेट जैसी छलांग लगाकर खरीदारों को चौंका दिया।
MCX पर रिकॉर्ड तोड़ तेजी
Multi Commodity Exchange पर चांदी का वायदा भाव सुबह खुलते ही 3.64 प्रतिशत यानी ₹10,002 की उछाल के साथ ₹2,85,000 प्रति किलो के पार पहुंच गया। कुछ समय बाद तेजी और बढ़ी और भाव 3.99 प्रतिशत चढ़कर ₹2,85,978 प्रति किलो तक दर्ज किया गया। पिछले सत्र में यह ₹2,74,389 प्रति किलो पर बंद हुई थी। याद दिला दें कि 29 जनवरी को चांदी ₹4,20,048 प्रति किलो का ऑल टाइम हाई छू चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 89.72 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है।
दिल्ली सर्राफा बाजार में अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक चांदी ₹2,68,000 प्रति किलो पर है, जबकि Indian Bullion and Jewellers Association के अनुसार भाव ₹2,66,700 प्रति किलो दर्ज किया गया। वहीं गुडरिटर्न्स के आंकड़ों में रिटेल बाजार में कीमत ₹2,95,000 प्रति किलो तक पहुंच गई है। शुक्रवार 27 फरवरी को चांदी ₹2,82,140 पर बंद हुई थी, जो सोमवार को बढ़कर ₹2,94,900 प्रति किलो तक चली गई।
Silver Price In India: 02 मार्च 2026: देश के 26 बड़े शहरों में चांदी का रेट
2026 में अब तक सोना करीब ₹25,902 और चांदी ₹36,280 महंगी हो चुकी है। 29 जनवरी को सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख के ऑल टाइम हाई तक पहुंची थी। भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की चाल और फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर अनिश्चितता ने कीमती धातुओं में लंबी तेजी बनाए रखी है।
भारत में सोना और चांदी के भाव कैसे तय होते हैं?
देश में कीमती धातुओं के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी और स्थानीय मांग-आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। MCX वायदा भाव और लंदन बुलियन मार्केट के संकेत सीधे घरेलू बाजार को प्रभावित करते हैं। जब वैश्विक स्तर पर युद्ध या आर्थिक संकट गहराता है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोना और चांदी खरीदते हैं, जिससे कीमतों में तेज उछाल आता है।