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Manipur Earthquake: मणिपुर में सुबह-सुबह 5.2 की तीव्रता हिली धरती, कामजोंग रहा भूकंप का केंद्र


Manipur Earthquake: मणिपुर में सुबह-सुबह 5.2 की तीव्रता हिली धरती, कामजोंग रहा भूकंप का केंद्र | Manipur Earthquake Today 5.2 Magnitude Quake Strikes Kamjong 21 April 2026 Latest News – Hindi Oneindia



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Trump: ‘टिम कुक एक अद्भुत लीडर और मैनेजर हैं’, एपल के नए सीईओ के एलान पर डोनाल्ड ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया


अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल के वर्तमान सीईओ टिम कुक के करियर को अतुलनीय बताते हुए उन्हें एक अद्भुत मैनेजर और लीडर करार दिया है। ट्रंप की यह अहम टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनी एपल ने एक बड़े रणनीतिक नेतृत्व परिवर्तन का एलान किया है। टिम कुक जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं और 1 सितंबर 2026 से कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख जॉन टर्नस एप्पल के नए सीईओ के रूप में कमान संभालेंगे। 

ट्रंप और टिम कुक के बीच एक खास व्यावसायिक समीकरण

डोनाल्ड ट्रंप ने टिम कुक की नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ करते हुए अपने राष्ट्रपति कार्यकाल का एक विशेष अनुभव साझा किया। ट्रंप के अनुसार, कुक ने एक बड़ी कॉरपोरेट समस्या के त्वरित समाधान के लिए सीधे उनसे संपर्क किया था, जिस काम के लिए कोई भी सलाहकार लाखों डॉलर की भारी-भरकम फीस वसूलता। ट्रंप ने कुक के काम करने के तरीके की सराहना करते हुए कहा, “यह व्यक्ति एक अद्भुत प्रबंधक और नेता है। उसने मुझसे मदद मांगी और काम को तेजी से पूरा किया”। ट्रंप ने कुक को उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें एक विश्वसनीय व्यक्ति बताया।

एपल का नया अध्याय: कौन हैं जॉन टर्नस?

टिम कुक के बाद अब एप्पल का भविष्य 50 वर्षीय जॉन टर्नस के हाथों में होगा। टर्नस बिल्कुल उसी उम्र में कंपनी की कमान संभालने जा रहे हैं, जिस उम्र में 2011 में कुक ने यह जिम्मेदारी ली थी। टिम कुक के अब एप्पल के बोर्ड चेयरमैन बनने की प्रबल संभावना है। नए सीईओ टर्नस के प्रोफाइल से जुड़ी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:


  • बैकग्राउंड: पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट टर्नस ने अपने करियर की शुरुआत एक वर्चुअल रियलिटी स्टार्टअप से की थी और 2001 में एप्पल जॉइन किया था।

  • इनोवेशन: उन्होंने 2020 में इंटेल चिप्स को हटाकर एप्पल की अपनी खुद की चिप्स का सफलतापूर्वक इस्तेमाल सुनिश्चित किया और ‘आईफोन एयर’ के विकास का नेतृत्व किया।

  • मुनाफे पर पैनी नजर: टर्नस कंपनी के मुनाफे (बॉटम लाइन) को सुरक्षित रखने के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने महंगे लेजर कैमरा कंपोनेंट को केवल ‘प्रो’ मॉडल्स तक सीमित रखने का फैसला किया, ताकि कंपनी का मुनाफा किसी भी तरह प्रभावित न हो।

  • कार्यशैली: एप्पल के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, उनकी कार्यशैली टिम कुक के ‘स्थिर और प्रबंधकीय’ दृष्टिकोण से अधिक मेल खाती है। प्रमोशन के बावजूद अलग केबिन लेने से इनकार कर ओपन ऑफिस में टीम के साथ बैठना उन्हें एक ‘जमीन से जुड़ा नेता’ बनाता है।

भविष्य की राह और चुनौतियां

भले ही टर्नस को हार्डवेयर क्षेत्र का तीन दशकों का अनुभव है, लेकिन नए सीईओ के तौर पर उन्हें कई मोर्चों पर कड़े इम्तिहान से गुजरना होगा:


  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की रेस: वैश्विक टेक जगत में एआई पर हो रहे अरबों डॉलर के निवेश की रेस में एप्पल फिलहाल अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों से पीछे चल रहा है, जिसकी भरपाई टर्नस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

  • भू-राजनीतिक तनाव: दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रंप ने निवर्तमान सीईओ टिम कुक की तारीफ की है, भविष्य में उन्हीं की बदलती टैरिफ नीतियां और विनिर्माण के लिए चीन पर एप्पल की अत्यधिक निर्भरता का प्रबंधन, टर्नस के लिए एक बड़ी व्यापारिक चुनौती साबित होगा। 



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Weather: दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी के बीच IMD का अलर्ट, कब और कहां होगी बारिश? चेक करें अपने इलाके का मौसम


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LPG Price Delhi: दिल्ली में LPG की कीमतों ने पकड़ी रफ्तार, कितना है कमर्शियल गैस के दाम?


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Aaj Ka Mausam: यूपी-राजस्थान में बढ़ेगी सूरज की तपिश, 8 राज्यों में भारी बारिश की आशंका, क्या है IMD का अपडेट?


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13 साल से अधूरा सपना,रिफाइनरी में आग से उठे सवाल: बेस्ट टेक्नोलॉजी और इंजीनियर्स के बावजूद हादसा, एक्सपट्‌र्स ने बताया कितना बड़ा नुकसान – Rajasthan News


राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा (पचपदरा) में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में 20 अप्रैल दोपहर 2 बजे आग लग गई। आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। रिफाइनरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (आज) उद

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इस हादसे ने न सिर्फ सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजस्थान की इकोनॉमी को बड़ा घाव भी दिया है। साल 2013 से लेकर अब तक 13 सालों में पहले ही रिफाइनरी की लागत 37 हजार 230 करोड़ से बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

भास्कर ने एक्सपट्‌र्स से बात कर जाना कि शिलान्यास से उद्घाटन तक कौन सी चुनौतियां आईं, जिसके कारण बार-बार रिफाइनरी का काम रुका। साथ ही अब इस हादसे से कितना बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।

रिफाइनरी की CDU और VDU यूनिट में लगी भीषण आग।

बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के सपने के पीछे की असल कहानी की शुरुआत साल 2004 में बाड़मेर के मंगला ऑयल फील्ड की खोज से शुरू हुई। साल 2009 में यहां से प्रोडक्शन शुरू हुआ। इसी के साथ ही राजस्थान में लोकल रिफाइनिंग की जरूरत महसूस की गई।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया। उस समय अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे।

रिफाइनरी प्रोजेक्ट के मॉडल में हिंदुस्तान पेट्रोलियम काॅरपोरेशन लिमिटेड को 74 फीसदी और राजस्थान सरकार को 26 फीसदी का हिस्सेदार बनाते हुए जॉइंट वेंचर में रखा गया था। तब इसकी अनुमानित लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए थी। साल 2017–18 तक रिफाइनरी चालू करने का टारगेट रखा गया था।

शिलान्यास और घोषणा की टाइमिंग चुनाव से ऐन पहले थी। ऐसे में शिलान्यास के साथ ही राजनीति भी शुरू हो गई। प्रोजेक्ट में ठोस टेंडरिंग व कंस्ट्रक्शन स्टार्ट होता इससे पहले ही राजस्थान में आदर्श आचार संहिता लग गई। चुनाव के बाद सरकार बदली और रिफाइनरी प्रोजेक्ट री-एसेसमेंट, लागत बढ़ोतरी और नई शर्तों में उलझता चला गया।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास किया था।

प्रोजेक्ट को री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाला वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार आने के बाद प्रोजेक्ट में दी जा रही ज्यादा सब्सिडी, टैक्स बेनिफिट और कम रिटर्न की आशंका के चलते इसे री-नेगोशिएशन और रिव्यू में डाल दिया गया। इसके बाद अगले पांच साल तक ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। कांग्रेस का आरोप था कि बीजेपी ने इसे जानबूझकर रोक दिया। बीजेपी का पक्ष था कि रिव्यू के बिना ये प्रोजेक्ट घाटे का सौदा था।

करीब 5 साल की देरी और विवादों के बीच आखिरकार पचपदरा रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट को लेकर फिर से उम्मीद जगी। रिफाइनरी की शर्तों में बदलाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से इसके कार्य का शुभारंभ किया। इस समय इसकी लागत बढ़कर 43 हजार 129 करोड़ रुपए हो गई थी। इसका काम 31 अक्टूबर 2022 तक पूरा किया जाना था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को फिर से बालोतरा के पचपदरा में रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ किया था।

कोविड के दौरान ठप हो गया काम इसके बाद फिर राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो गया। अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस सरकार बन गई। हालांकि इसके बाद भी पचपदरा रिफाइनरी का प्रोजेक्ट चलता रहा, लेकिन स्पीड भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, रीडिजाइन, टेक्निकल बदलावों और लागत बढ़ोतरी के चलते धीमी ही रही। कोविड के दौरान साल 2020 और 2021 में तो काम पूरा ठप ही हो गया था।

2023 में फिर राजस्थान में भजनलाल सरकार बनी। रिफाइनरी के लागत मूल्य में दूसरा संशोधन प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत करने के बाद इसकी लागत बढ़कर 79 हजार 459 करोड़ रुपए हो गई थी। इसे 8 अप्रैल 2026 को मंजूर कर दिया गया और एक जुलाई 2026 से कमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट तय किया गया।

अब 20 अप्रैल को हुए अग्निकांड के बाद न सिर्फ रिफाइनरी का उद्घाटन बल्कि इसका कमर्शियल ऑपरेशन का टारगेट भी आगे बढ़ना तय हो गया है। एक दिन पहले की स्टेटस रिपोर्ट की मानें तो रिफाइनरी का 92 फीसदी काम पूरा हो चुका था। ऐसे में जहां तेल शोधन (ऑयल रिफाइनिंग) का बड़ा काम होना था, ठीक उसी यूनिट में आग लगने से राजस्थान में रिफाइनरी के सपनों को झटका लगा है। अब ये जख्म कब तक भरेगा, इसका फिलहाल अंदाजा लगना मुश्किल है।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही थी।

20 अप्रैल की दोपहर बालोतरा के पचपदरा स्थित रिफाइनरी में आग लग गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम घंटों मशक्कत करती रही थी।

रिपेयरिंग और डैमेज असेसमेंट में लग सकता है समय रिफाइनरी मामलों के जानकार सोर्सेज ने बताया कि इस रिफाइनरी को लेकर दावा किया जा रहा था कि इसमें दुनिया की बेस्ट टेक्नोलॉजी, बेस्ट इक्यूप्मेंट्स और बेस्ट इंजीनियर्स का इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में उद्घाटन से पहले ये हादसा बड़े सवाल खड़े करता है।

एक्सपट्‌र्स ने बताया कि फिलहाल इतनी बड़ी घटना को लेकर कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी ही होगी। इसके लिए सबसे पहले ये देखना होगा कि ये यूनिट किस कंपनी की थी? सप्लाई किसने किया था? क्या ये कंपनी इंजीनियर के चार्ज में थी या इसे रिफाइनरी के इंजीनियर्स ने चार्ज में ले लिया था? टेक्निकल ऑडिट किसने किया था? और उन एक्सपट्‌र्स की क्या रिपोर्ट थी। इन सभी सवालों के जवाब आने के बाद ही इस हादसे को लेकर कुछ ठोस कहा जा सकता है।

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एक्सपट्‌र्स का मानना है कि रिफाइनरी के दिल में ही आग लगी है तो नुकसान तो बड़ा ही हुआ है। रिफाइनरी की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं कमर्शियल रन समय पर स्टार्ट नहीं होने से होने वाला नुकसान अलग है। हालांकि इतनी बड़ी रिफाइनरी में सभी यूनिट और इक्यूप्मेंट्स डबल इन्स्योर्ड होते हैं। ग्लोबल सप्लायर कंपनीज की गारंटी में भी होते हैं, लेकिन रिप्लेसमेंट और दुबारा फेब्रिकेशन व इंस्टॉलेशन में लगने वाला टाइम प्रोडक्शन को बड़ा इकोनॉमिक लॉस देता है।

CDU-VDU यूनिट से क्रूड ऑयल की डिस्टिलेशन शुरू होती है। साधारण शब्दों में कहें तो यहीं क्रूड से पेट्रोल, डीजल, और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ निकलते हैं। इस आग के बाद इसकी रिपेयरिंग और इसके डैमेज असेसमेंट में 1 से 6 महीने लग सकते हैं। अगर जुलाई 2026 से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होता, तो 9 MMTPA क्षमता के हिसाब से मंथली रेवेन्यू 50 हजार से 80 करोड़ के आसपास होने वाला था। अब हर महीने की देरी से यह संभावित रेवेन्यू लॉस होना तय है।

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1- राजस्थान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग:कई घंटे बाद काबू पाया गया; कल प्रधानमंत्री उद्घाटन करने वाले थे, घटना के बाद कार्यक्रम स्थगित

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राजस्थान में बाड़मेर के नजदीक बालोतरा में हिंदुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी में सोमवार दोपहर 2 बजे भीषण आग लग गई। जानकारी के मुताबिक आग रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ करने वाली दो यूनिट में लगी। पढ़ें पूरी खबर…

2- रिफाइनरी सही होने में लगेंगे 4 महीने:क्रूड ऑयल की प्रोसेसिंग रुकी, रिफाइनरी में आग की लपटें देख भागा सिक्योरिटी स्टाफ, जानें कैसे लगी आग

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राजस्थान के बालोतरा में पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार को सिस्टम फेलियर की वजह से आग लगी थी। प्रत्यक्षदर्शी इंजीनियर का कहना है- रिफाइनरी की 2 महत्वपूर्ण यूनिट में मशीनों के बीच फ्रिक्शन(घर्षण) हुआ। इससे चिंगारी निकली। पढ़ें पूरी खबर…



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Aaj Ka Panchang: आज का पंचांग, 21 अप्रैल 2026, मंगलवार


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LPG: ‘क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति सामान’, सरकार ने बताया


पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को बताया कि जनवरी में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 63 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। अप्रैल में इसका औसत मूल्य लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया है।

हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पड़ोसी देशों की तुलना में अब भी सबसे कम स्तरों में शामिल हैं।

एलपीजी आपूर्ति पर उन्होंने कहा कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सामान्य है और किसी भी वितरक के यहां कमी की शिकायत नहीं मिली है। वर्तमान में गैस सिलेंडर डिलीवरी दक्षता 93 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग में कुछ गिरावट आई है और यह फिलहाल 45 से 46 लाख प्रतिदिन के दायरे में है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बहाल हो चुकी है।

सरकार ने प्रवासी आबादी को राहत देने के लिए पांच किलो वाले छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई है। 3 अप्रैल से अब तक 7,400 जागरूकता शिविर लगाए गए हैं और 1.07 लाख से अधिक छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।

प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने स्थिति सामान्य बताई है। घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और सीएनजी परिवहन की आपूर्ति 100 प्रतिशत बनाए रखी गई है। अब तक 5.68 लाख नए उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 39,400 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर पीएनजी अपनाया है।

सरकार ने कहा कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर किसी भी उत्पाद की कमी नहीं है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। अनियमितताओं को रोकने के लिए सोमवार को 2,200 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी भी की गई।

सरकार ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट के असर पर लगातार नजर रखी जा रही है और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।



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Delhi Power Cut: 21 अप्रैल को हौज खास, पंजाबी बाग समेत इन इलाकों में बिजली कटौती, देखें शटडाउन का पूरा शेड्यूल


Delhi Power Cut: 21 अप्रैल को हौज खास, पंजाबी बाग समेत इन इलाकों में बिजली कटौती, देखें शटडाउन का पूरा शेड्यूल | Delhi Power Cut Schedule 21 April 2026 Hauz Khas, Punjabi Bagh Saket BSES Maintenance – Hindi Oneindia



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रिपोर्ट: तेल की कीमतों में नरमी से भारत को व्यापार घाटे में मिलेगी राहत, सोने-चांदी के आयात ने बढ़ाई चिंता


कई देशों के साथ व्यापार समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बाद आने वाली नरमी से भारत को रिकॉर्ड व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक रिपोर्ट में कहा, प्रमुख रूप से सोने और चांदी के आयात में वृद्धि से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। अगर भू-राजनीतिक मोर्चे पर हालात नियंत्रित रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत के व्यापार घाटे में कमी आने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद उपजे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के आर्थिक बुनियादी आधार स्थिर बने हुए हैं। भू-राजनीतिक बाधाएं जैसे-जैसे दूर होंगी और विभिन्न देशों से नए व्यापार समझौतों का समर्थन मिलेगा, भारत के बाहरी क्षेत्र के प्रदर्शन में काफी सुधार होने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ देश का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि कमोडिटी की कीमतों में नरमी से आयात बिल में कमी आएगी और व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलेगी। हालांकि, अगर ये बाधाएं बनी रहती हैं एवं कच्चे तेल समेत कमोडिटी की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो देश के चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.5 से 2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से 441.7 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया गया, जो सिर्फ 0.9 फीसदी की वृद्धि दिखाता है। 2024-25 में यह 0.2 फीसदी बढ़ा था। आयात भी 721 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 775 अरब डॉलर पहुंच गया। इस तरह, कुल व्यापार घाटा बढ़कर 333 अरब डॉलर के पार पहुंच गया।

सेवाओं का निर्यात बढ़ने से कुल व्यापार घाटा (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 119.3 अरब डॉलर रहा। 2024-25 में देश का कुल व्यापार घाटा 94.7 अरब डॉलर रहा था।

2025-26 के दौरान क्रूड का आयात 6.5 फीसदी कम हो गया, जबकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज मार्ग बंद होने से तेल की कीमतें 58 फीसदी बढ़ गई थीं। 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर एक फीसदी की गिरावट आई, जिससे क्रूड आयात बिल पर पड़ने वाले पूरे साल के नुकसान को सीमित करने में मदद मिली।

ये भी पढ़ें: एपल को मिला नया सीईओ: टिम कुक पद से देंगे इस्तीफा, कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे कमान

चीन से आयात 2024-25 के 11.5 फीसदी के मुकाबले 16 फीसदी बढ़ गया। अमेरिका से आयात भी 8.1 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी पहुंच गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में उछाल के कारण सोना और चांदी आयात बिल पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाले कारक बने रहे। सोने का आयात 2024-25 में 27 फीसदी बढ़ने के बाद 2025-26 में 26 फीसदी बढ़ गया। चांदी के आयात में बीते वित्त वर्ष के दौरान 151 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 2024-25 में 11.3 फीसदी की गिरावट आई थी।



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