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Trump: ‘टिम कुक एक अद्भुत लीडर और मैनेजर हैं’, एपल के नए सीईओ के एलान पर डोनाल्ड ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल के वर्तमान सीईओ टिम कुक के करियर को अतुलनीय बताते हुए उन्हें एक अद्भुत मैनेजर और लीडर करार दिया है। ट्रंप की यह अहम टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनी एपल ने एक बड़े रणनीतिक नेतृत्व परिवर्तन का एलान किया है। टिम कुक जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं और 1 सितंबर 2026 से कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख जॉन टर्नस एप्पल के नए सीईओ के रूप में कमान संभालेंगे।
ट्रंप और टिम कुक के बीच एक खास व्यावसायिक समीकरण
डोनाल्ड ट्रंप ने टिम कुक की नेतृत्व क्षमता की जमकर तारीफ करते हुए अपने राष्ट्रपति कार्यकाल का एक विशेष अनुभव साझा किया। ट्रंप के अनुसार, कुक ने एक बड़ी कॉरपोरेट समस्या के त्वरित समाधान के लिए सीधे उनसे संपर्क किया था, जिस काम के लिए कोई भी सलाहकार लाखों डॉलर की भारी-भरकम फीस वसूलता। ट्रंप ने कुक के काम करने के तरीके की सराहना करते हुए कहा, “यह व्यक्ति एक अद्भुत प्रबंधक और नेता है। उसने मुझसे मदद मांगी और काम को तेजी से पूरा किया”। ट्रंप ने कुक को उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें एक विश्वसनीय व्यक्ति बताया।
एपल का नया अध्याय: कौन हैं जॉन टर्नस?
टिम कुक के बाद अब एप्पल का भविष्य 50 वर्षीय जॉन टर्नस के हाथों में होगा। टर्नस बिल्कुल उसी उम्र में कंपनी की कमान संभालने जा रहे हैं, जिस उम्र में 2011 में कुक ने यह जिम्मेदारी ली थी। टिम कुक के अब एप्पल के बोर्ड चेयरमैन बनने की प्रबल संभावना है। नए सीईओ टर्नस के प्रोफाइल से जुड़ी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
- बैकग्राउंड: पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट टर्नस ने अपने करियर की शुरुआत एक वर्चुअल रियलिटी स्टार्टअप से की थी और 2001 में एप्पल जॉइन किया था।
- इनोवेशन: उन्होंने 2020 में इंटेल चिप्स को हटाकर एप्पल की अपनी खुद की चिप्स का सफलतापूर्वक इस्तेमाल सुनिश्चित किया और ‘आईफोन एयर’ के विकास का नेतृत्व किया।
- मुनाफे पर पैनी नजर: टर्नस कंपनी के मुनाफे (बॉटम लाइन) को सुरक्षित रखने के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने महंगे लेजर कैमरा कंपोनेंट को केवल ‘प्रो’ मॉडल्स तक सीमित रखने का फैसला किया, ताकि कंपनी का मुनाफा किसी भी तरह प्रभावित न हो।
- कार्यशैली: एप्पल के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, उनकी कार्यशैली टिम कुक के ‘स्थिर और प्रबंधकीय’ दृष्टिकोण से अधिक मेल खाती है। प्रमोशन के बावजूद अलग केबिन लेने से इनकार कर ओपन ऑफिस में टीम के साथ बैठना उन्हें एक ‘जमीन से जुड़ा नेता’ बनाता है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
भले ही टर्नस को हार्डवेयर क्षेत्र का तीन दशकों का अनुभव है, लेकिन नए सीईओ के तौर पर उन्हें कई मोर्चों पर कड़े इम्तिहान से गुजरना होगा:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की रेस: वैश्विक टेक जगत में एआई पर हो रहे अरबों डॉलर के निवेश की रेस में एप्पल फिलहाल अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों से पीछे चल रहा है, जिसकी भरपाई टर्नस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
- भू-राजनीतिक तनाव: दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रंप ने निवर्तमान सीईओ टिम कुक की तारीफ की है, भविष्य में उन्हीं की बदलती टैरिफ नीतियां और विनिर्माण के लिए चीन पर एप्पल की अत्यधिक निर्भरता का प्रबंधन, टर्नस के लिए एक बड़ी व्यापारिक चुनौती साबित होगा।
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LPG: ‘क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति सामान’, सरकार ने बताया
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को बताया कि जनवरी में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत करीब 63 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। अप्रैल में इसका औसत मूल्य लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया है।
हालांकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने कहा कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पड़ोसी देशों की तुलना में अब भी सबसे कम स्तरों में शामिल हैं।
एलपीजी आपूर्ति पर उन्होंने कहा कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सामान्य है और किसी भी वितरक के यहां कमी की शिकायत नहीं मिली है। वर्तमान में गैस सिलेंडर डिलीवरी दक्षता 93 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग में कुछ गिरावट आई है और यह फिलहाल 45 से 46 लाख प्रतिदिन के दायरे में है, जबकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बहाल हो चुकी है।
सरकार ने प्रवासी आबादी को राहत देने के लिए पांच किलो वाले छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई है। 3 अप्रैल से अब तक 7,400 जागरूकता शिविर लगाए गए हैं और 1.07 लाख से अधिक छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने स्थिति सामान्य बताई है। घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और सीएनजी परिवहन की आपूर्ति 100 प्रतिशत बनाए रखी गई है। अब तक 5.68 लाख नए उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 39,400 से अधिक उपभोक्ताओं ने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर पीएनजी अपनाया है।
सरकार ने कहा कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर किसी भी उत्पाद की कमी नहीं है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। अनियमितताओं को रोकने के लिए सोमवार को 2,200 से अधिक औचक निरीक्षण और छापेमारी भी की गई।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट के असर पर लगातार नजर रखी जा रही है और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
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रिपोर्ट: तेल की कीमतों में नरमी से भारत को व्यापार घाटे में मिलेगी राहत, सोने-चांदी के आयात ने बढ़ाई चिंता
कई देशों के साथ व्यापार समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बाद आने वाली नरमी से भारत को रिकॉर्ड व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक रिपोर्ट में कहा, प्रमुख रूप से सोने और चांदी के आयात में वृद्धि से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। अगर भू-राजनीतिक मोर्चे पर हालात नियंत्रित रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत के व्यापार घाटे में कमी आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद उपजे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के आर्थिक बुनियादी आधार स्थिर बने हुए हैं। भू-राजनीतिक बाधाएं जैसे-जैसे दूर होंगी और विभिन्न देशों से नए व्यापार समझौतों का समर्थन मिलेगा, भारत के बाहरी क्षेत्र के प्रदर्शन में काफी सुधार होने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ देश का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि कमोडिटी की कीमतों में नरमी से आयात बिल में कमी आएगी और व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलेगी। हालांकि, अगर ये बाधाएं बनी रहती हैं एवं कच्चे तेल समेत कमोडिटी की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो देश के चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.5 से 2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से 441.7 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया गया, जो सिर्फ 0.9 फीसदी की वृद्धि दिखाता है। 2024-25 में यह 0.2 फीसदी बढ़ा था। आयात भी 721 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 775 अरब डॉलर पहुंच गया। इस तरह, कुल व्यापार घाटा बढ़कर 333 अरब डॉलर के पार पहुंच गया।
सेवाओं का निर्यात बढ़ने से कुल व्यापार घाटा (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 119.3 अरब डॉलर रहा। 2024-25 में देश का कुल व्यापार घाटा 94.7 अरब डॉलर रहा था।
2025-26 के दौरान क्रूड का आयात 6.5 फीसदी कम हो गया, जबकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज मार्ग बंद होने से तेल की कीमतें 58 फीसदी बढ़ गई थीं। 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर एक फीसदी की गिरावट आई, जिससे क्रूड आयात बिल पर पड़ने वाले पूरे साल के नुकसान को सीमित करने में मदद मिली।
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चीन से आयात 2024-25 के 11.5 फीसदी के मुकाबले 16 फीसदी बढ़ गया। अमेरिका से आयात भी 8.1 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी पहुंच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में उछाल के कारण सोना और चांदी आयात बिल पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाले कारक बने रहे। सोने का आयात 2024-25 में 27 फीसदी बढ़ने के बाद 2025-26 में 26 फीसदी बढ़ गया। चांदी के आयात में बीते वित्त वर्ष के दौरान 151 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 2024-25 में 11.3 फीसदी की गिरावट आई थी।








