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Global Manufacturing: सीआईआई ने कहा- भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए औद्योगिक भूमि सुधार जरूरी
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को एक रिपोर्ट में कहा कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए किफायती और पारदर्शी तरीके से उद्योगों की औद्योगिकी भूमि तक पहुंच जरूरी है। इंडस्ट्री बॉडी ने अपनी रिपोर्ट ‘सीआईआई लैंड मिशन: फ्रेमवर्क टू रिफॉर्म इंडस्ट्रियल लैंड मैनेजमेंट इन इंडिया’ में औद्योगिक भूमि पारिस्थितिकी तंत्र में संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
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सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारों, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के तहत भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की महत्वाकांक्षाओं को तब तक साकार नहीं किया जा सकता जब तक कि औद्योगिक भूमि पूर्वानुमानित, पारदर्शी और निवेश के लिए तैयार न हो जाए।’ उन्होंने कहा, ‘सीआईआई लैंड मिशन एक व्यावहारिक, कार्यान्वयन केंद्रीय ढांचा प्रदान करता है जो सामाजिक सुरक्षा उपायों का सम्मान करते हुए भूमि मूल्य श्रृंखला में समय दक्षता, पूर्वानुमान और समन्वय को बढ़ाता है।’
औद्योगिक भूमि विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद के लिए एक मूलभूत संसाधन बनी हुई है। हालांकि, विभिन्न राज्यों में वर्तमान परिदृश्य खंडित प्रक्रियाओं, जटिल नियामक व्यवस्था, अस्पष्ट भूमि स्वामित्व, विलंबित कब्जे और आवंटित भूखंडों के अल्पउपयोग से ग्रस्त है। रिपोर्ट में बताया गया कि ये चुनौतियां पूंजी की लागत को काफी बढ़ा देती हैं, परियोजनाओं के चालू होने में देरी करती हैं और निवेशकों के विश्वास को कम करती हैं।
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यह रिपोर्ट औद्योगिक भूमि के संपूर्ण जीवनचक्र का विस्तृत मूल्यांकन करती है, जिसमें भूमि खोज और पहचान, आवेदन, आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू), स्वामित्व और उचित जांच-पड़ताल सत्यापन, अधिग्रहण, भौतिक कब्जा, आवंटन के बाद का उपयोग और संस्थागत क्षमता शामिल हैं। रिपोर्ट की एक प्रमुख सिफारिश एकीकृत, जीआईएस-सक्षम राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक की स्थापना है, जो भूमि की उपलब्धता, जोनिंग स्थिति, उपयोगिताओं, पर्यावरणीय बाधाओं, भार और स्वामित्व की स्पष्टता पर वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करे।
ऐसा प्लेटफॉर्म पारदर्शिता को काफी हद तक बढ़ाएगा और सूचित, त्वरित निवेश निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा। साथ ही, इस रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि आवेदनों के लिए एक पूर्णतः एकीकृत डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली की भी वकालत की गई है।
-इनपुट आईएएनएस
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रिपोर्ट: भारत का बैंकिंग सेक्टर मजबूत, कर्ज की मांग बढ़ी; एसेट क्वालिटी और क्रेडिट मांग से मिल रहा सपोर्ट
भारत का बैंकिंग सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, बैंकों की हालत बेहतर हो रही है और आगे भी इसमें सुधार जारी रहने की उम्मीद है। इस मजबूती की वजह अच्छी एसेट क्वालिटी (कम खराब लोन), मजबूत पूंजी, और रिटेल व छोटे कारोबार (एसएमई) में बढ़ती कर्ज की मांग है। यह सर्वे फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन ने मिलकर किया है। इसमें बताया गया कि आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की ग्रोथ को लेकर माहौल सकारात्मक है। इसकी वजह मजबूत बैलेंस शीट और अर्थव्यवस्था में स्थिर गतिविधियां हैं।
सर्वे में यह भी कहा गया है कि मौजूदा मौद्रिक नीति (ब्याज दर से जुड़ी नीति) फिलहाल संतुलित है और इसमें बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है। हालांकि कुछ सहकारी बैंकों ने ब्याज दर में हल्की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई है। बैंकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कर्ज की मांग बढ़ती रहेगी, खासकर रिटेल और छोटे-मध्यम उद्योगों (MSME) से। सरकारी बैंक (PSB) भविष्य को लेकर ज्यादा भरोसेमंद नजर आ रहे हैं, क्योंकि उनकी एसेट क्वालिटी सुधरी है और कॉरपोरेट लोन में रुचि बढ़ रही है।
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किस बैंक की क्या स्थिति है?
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि निजी बैंक थोड़ा सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट सेक्टर में निवेश को लेकर संतुलित रुख अपना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सेवा क्षेत्र जैसे रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन में बढ़ती गतिविधियों के कारण लोन की मांग मजबूत बनी रहेगी। करीब 46% लोगों का मानना है कि नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11% से 13% के बीच रह सकती है।
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बैंकों से सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
रिटेल लोन भी बैंकिंग सेक्टर के लिए एक मजबूत सहारा बना रहेगा। वहीं छोटे और मझोले उद्योगों (SME) के लिए लोन की मांग भी तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि इस सेक्टर में व्यापार बढ़ रहा है और सरकार भी इसे समर्थन दे रही है। हालांकि, बैंकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती साइबर सुरक्षा को लेकर है। ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे बैंकों को सावधान रहने की जरूरत है। यह सर्वे जनवरी से फरवरी 2026 के बीच किया गया, जिसमें कुल 24 बैंकों ने हिस्सा लिया, जिनमें सरकारी, निजी, विदेशी, छोटे वित्त और सहकारी बैंक शामिल थे।
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मणिपुर में उग्रवादियों ने दो लोगों की हत्या की: चलती गाड़ी पर फायरिंग; NIA को जांच सौंपी; सर्च ऑपरेशन जारी
11 घंटे पहले
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मणिपुर के उखरुल जिले में शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे एक रिटायर्ड आर्मी जवान समेत दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। एसडब्ल्यू चिनाओशांग (46 वर्ष) और यरुइंगम वाशुम (42 वर्ष) इंफाल से उखरुल जा रहे थे, तभी उग्रवादियों ने अचानक उनकी गाड़ी पर फायरिंग शुरू कर दी।
इस घटना से एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने उखरुल का दौरा किया था और कूकी तथा नागा समुदायों से शांति और संवाद बनाए रखने की अपील की थी।
मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। सुरक्षा बलों ने हमलावरों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। साथ ही सभी समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे में न आने की अपील की गई है।
कूकी काउंसिल ने घटना की निंदा की
कूकी जो काउंसिल ने इस घटना में समुदाय की किसी भी भूमिका से इनकार किया है। वहीं, तंगखुल नागा लॉन्ग (TNL) की वर्किंग कमेटी ने घटना की निंदा की और आरोप लगाया कि हमला कूकी समुदाय ने किया है। कमेटी ने इलाके में तुरंत सर्च ऑपरेशन चलाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
6 अप्रैल बम हमले में 2 बच्चों की मौत

6 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में देर रात उग्रवादियों ने एक घर में बम फेंक दिया। जिसमें 5 साल के एक लड़के और छह महीने की बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ऑफिसर ने बताया कि जब घर में बम फटा, तब बच्चे अपनी मां के साथ बेडरूम में सो रहे थे।
इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर CRPF कैंप पर भी हमला कर दिया। जवाबी फायरिंग में 2 की मौत हो गई, पांच घायल हो गए। मणिपुर सरकार ने मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 3 दिनों के लिए बंद कर दिया था।

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1 मिनट पहले
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मृतकों की पहचान एसडब्ल्यू चिनाओशांग (46 वर्ष) और यरुइंगम वाशुम (42 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों इंफाल से उखरुल जा रहे थे, तभी उग्रवादियों ने अचानक उनकी गाड़ी पर फायरिंग शुरू कर दी।
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मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। सुरक्षा बलों ने हमलावरों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। साथ ही सभी समुदायों से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे में न आने की अपील की गई है।
कूकी काउंसिल ने घटना की निंदा की
कूकी जो काउंसिल ने इस घटना में समुदाय की किसी भी भूमिका से इनकार किया है। वहीं, तंगखुल नागा लॉन्ग (TNL) की वर्किंग कमेटी ने घटना की निंदा की और आरोप लगाया कि हमला कूकी समुदाय ने किया है। कमेटी ने इलाके में तुरंत सर्च ऑपरेशन चलाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
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इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर CRPF कैंप पर भी हमला कर दिया। जवाबी फायरिंग में 2 की मौत हो गई, पांच घायल हो गए। मणिपुर सरकार ने मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 3 दिनों के लिए बंद कर दिया था।

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