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Policy: कंपनियों में अब 25% तक हो सकेंगे प्रशिक्षु, सस्ते श्रम का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार ने रखीं शर्तें


कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि सरकार प्रतिष्ठानों को कुल कर्मचारियों के 25 फीसदी तक प्रशिक्षु को रखने की अनुमति दे सकती है। यह अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जाएगी ताकि उनका सस्ते श्रम के रूप में उपयोग न हो। केंद्र सरकार मूल्यांकन प्रणालियों को मजबूत करने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षार्थी वास्तविक कौशल सीखें।

उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में यह बात कही। कई बड़े उद्योगों ने सरकार से 25 फीसदी शिक्षार्थियों को रखने की अनुमति मांगी है। वर्तमान में यह सीमा 2.5 से 15 फीसदी के बीच है। अभी देश में 30 लाख प्रशिक्षु इस प्रणाली का हिस्सा हैं।

शिक्षार्थियों को रखने की शर्तें

मुखर्जी ने बताया कि 25 फीसदी शिक्षार्थियों को रखने के लिए तीन शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली शर्त यह है कि प्रतिष्ठान पिछले तीन वर्षों में 15 फीसदी की सीमा तक पहुंच चुके हों। दूसरी शर्त के अनुसार, उन्हें अनिवार्य न्यूनतम दर से कम से कम 30 फीसदी अधिक भुगतान करना होगा। तीसरी शर्त यह है कि वे लिए गए शिक्षार्थियों में से कम से कम 35 फीसदी या उससे अधिक को नौकरी दें। यह सुनिश्चित करेगा कि शिक्षार्थियों का उपयोग केवल सस्ते श्रम के रूप में न हो।

मूल्यांकन और एमएसएमई क्षेत्र की चुनौतियां

सचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि प्रशिक्षु को अक्सर ठीक से सिखाया नहीं जाता। सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों में भी शिक्षार्थियों को एक विशेष क्षेत्र के लिए लिया जाता है, फिर उन्हें मानव संसाधन भूमिकाओं में डाल दिया जाता है। सरकार ऐसी प्रथाओं को रोकना चाहती है और मूल्यांकन प्रणालियों को मजबूत कर रही है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में प्रशिक्षु कार्यक्रमों में प्रगति न होने की चुनौती भी बताई। उन्होंने क्लस्टर मॉडल अपनाने का सुझाव दिया, जहां एमएसएमई संघ सैद्धांतिक और मूल्यांकन भाग संभाल सकते हैं।

शिक्षा का व्यवसायीकरण

देबाश्री मुखर्जी ने यह भी बताया कि सरकार स्कूल हब बनाने पर विचार कर रही है। यह उद्योग के साथ साझेदारी में हो सकता है। इसका उद्देश्य 9वीं से 12वीं कक्षा तक की शिक्षा का प्रभावी व्यवसायीकरण करना है। इसके बाद छात्र आसानी से आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) पारिस्थितिकी तंत्र में प्रवेश कर सकेंगे। यह कदम युवाओं को कौशल विकास के बेहतर अवसर प्रदान करेगा।



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