स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अच्छी प्रथाओं और नवाचारों पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन’ के दौरान ‘राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (RBSK) 2.0 की नई गाइडलाइंस पेश की हैं। इन्हें हाल ही में आयोजित ‘नेशनल समिट ऑन गुड प्रैक्टिसेज एंड इनोवेशंस इन पब्लिक हेल्थकेयर’ में लॉन्च किया गया। सरकार का कहना है कि ये अपडेट पिछले एक दशक के अनुभव पर आधारित हैं और बच्चों की बदलती स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
18 साल तक के बच्चों के लिए डिजिटल हेल्थ कार्ड
नई गाइडलाइंस में अब जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया गया है। इसके तहत बच्चों को बीमारी से बचाने, स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और इलाज की एक निरंतर प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप दिया जा रहा है। बच्चों के लिए डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाए जाएंगे और रियल-टाइम डेटाबेस तैयार किया जाएगा, ताकि बच्चों की हेल्थ मॉनिटरिंग आसान हो सके। इसके साथ ही एक बेहद मजबूत ‘रेफरल ट्रैकिंग सिस्टम’ लागू किया जाएगा। इससे सेवाएं ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनेंगी।
इसका सीधा फायदा यह होगा कि अगर जमीनी स्तर पर जांच के दौरान किसी बच्चे में कोई बीमारी पाई जाती है, तो बड़े अस्पताल में उसके इलाज से लेकर रिकवरी तक की पूरी ट्रैकिंग होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी बच्चा इलाज के बीच में न छूटे और उसे सही समय पर मेडिकल मदद मिल सके।
आंगनवाड़ी और स्कूलों में पहुंचेंगी मोबाइल हेल्थ टीमें
इस वृहद स्वास्थ्य योजना को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों को एक मंच पर लाया गया है, ताकि हर स्तर पर बेहतर तालमेल के साथ काम हो सके। बच्चों की शारीरिक और मानसिक जांच का यह काम पहले की तरह ही आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में मोबाइल हेल्थ टीमों के जरिए किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का लाभ हर तबके के बच्चों तक पहुंचे। स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और उनके इलाज पर नजर रखने के लिए मुख्य केंद्र के रूप में काम करेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय को उम्मीद है कि डिजिटल नवाचारों और इस नई रणनीति से योजना में अधिक पारदर्शिता और तेजी आएगी।
बदलेगा जांच का तरीका, पुरानी 4D अप्रोच का हुआ विस्तार
पुरानी व्यवस्था में मुख्य रूप से स्थापित ‘4D’ अप्रोच (जन्मजात दोष, बीमारियां, कमियां और विकास में देरी) पर ध्यान दिया जाता था। लेकिन अब नई गाइडलाइंस के तहत इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। अब बच्चों में गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह और उच्च रक्तचाप), मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों और व्यवहार संबंधी समस्याओं की भी जांच और इलाज किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य अब सिर्फ बच्चों को जीवित रखना नहीं है, बल्कि उनका समग्र विकास सुनिश्चित करना है।



