पिछले दिन बुधवार 25 मार्च को शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ सेंसेक्स 1200 अंक चढ़ा, वहीं निफ्टी 23300 के पार पहुंच गया। बाजार में यह बढ़त अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत, कच्चे तेल कीमतों में गिरावट आई जो कि सकारात्मक वैश्विक संकेतों की वजह से देखने को मिली। लेकिन जानकारों का कहना है, कि बाजार में चिंता अभी भी बनी हुई है। रामनवमी के अवसर पर गुरुवार 26 मार्च को को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्स स्टॉक एक्सचेंज बंद है, लेकिन आज से कल तक वैश्विक घटनाक्रम में क्या बदलाव आते हैं उसको लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। निवेशक रिस्क लेने की मूड में नहीं हैं और सतर्क होकर निवेश कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार का हाल
लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद कहते हैं कि भारतीय इक्विटी बाजार में उछाल आया, बेंचमार्क इंडेक्स 1.5 प्रतिशत से अधिक चढ़े। अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक घटनाक्रम की खबरों ने बाजार में उत्साह का माहौल पैदा किया। इससे वैश्विक बाजार में रिस्क ऑन रिएक्शन देखने को मिला। हालांकि सतर्क रूख अभी भी अपनाया जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली थी थोड़ी राहत
प्रसाद कहते हैं, बाजार में बढ़त का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी रही, जिसमें कच्चे तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के निशान से नीचे आ गया। कच्चे तेल के प्रति भारत की मैक्रो सेंसिटिविटी को देखते हुए इससे महंगाई की उम्मीदें, करेंसी के दबाव और कॉर्पोरेट मार्जिन पर राहत मिली। लेकिन बाजार के रिएक्शन से पता चलता है कि घरेलू बाजार के सेंटिमेंट अभी भी वैश्विक एनर्जी डायनामिक्स से जुड़े हुए हैं। रैली के बाद भी वोलैटिलिटी बनी हुई है, भारत का वीआईएक्स 24 के निशान के ऊपर बना हुआ है। इससे पता चलता है कि अंदर की घबराहट अभी कम नहीं हुई है और मौजूदा तेजी में मजबूत इंस्टीट्यूशनल भरोसे की कमी है। हालांकि गुरुवार को कच्चे तेल के दाम में उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 1.3 प्रतिशत बढ़कर 98.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
अमेरिका-ईरान तनाव में कमी के संकेत का पड़ा असर
जियोजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर कहते हैं, वैश्विक रिस्क सेंटिमेंट में सुधार की वजह से शांति की उम्मीदों भी कुछ बढ़ी हैं। इसमें अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की संभावना, मिले-जुले भू-राजनीतिक घटनाक्रम की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के नीचे आ गईं है, जिसका बाजार ने स्वागत किया है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए समुद्री आवाजाही सामान्य होने के शुरुआती संकेतों से निवेशकों का भरोसा और बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। नायर कहते हैं, घरेलू रैली बड़े पैमाने पर थी, जिसमें सभी सेक्टर में वैल्यू ड्रिवन खरीदारी से सहारा मिला। भारत का वैल्यूएशन प्रीमिमय जो कुछ समय से ऊंचा बना हुआ था, अब कुछ हद तक स्तर पर आ गया है। इससे निवेशकों को मौजूदा मार्केट स्तर पर अधिक मदद मिली है। हालांकि तेल की कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई जब तेहरान ने बुधवार को अमेरिका द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम योजना को खारिज कर दिया।



