मुंबई16 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने चुनाव आयोग को लेटर लिखा है। इसमें वोटर लिस्ट से जुड़े ECINet सॉफ्टवेयर में 4 बदलाव की मांग की गई है। चोकलिंगम ने कहा है कि स्थानीय अधिकारियों को कानून के मुताबिक फैसला लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
उनका कहना है कि किसी वोटर के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर हर मामले में एक जैसी प्रक्रिया लागू नहीं होनी चाहिए। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि किस वोटर को सुनवाई के लिए बुलाना है, कौन से दस्तावेज लेने हैं और किन मामलों को अपने स्तर पर निपटाया जा सकता है।
चोकलिंगम ने यह लेटर 24 सितंबर को भेजा था, जिसकी जानकारी अब सामने आई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी ECINet में स्थानीय अधिकारियों के अधिकार सीमित करने पर आपत्ति जता चुके हैं।

मांग का मकसद: हर मामले में सुनवाई की जरूरत न पड़े
महाराष्ट्र CEO ने अपने लेटर में खासतौर पर उन मामलों का जिक्र किया, जिनमें रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद मतदाताओं को नोटिस दिया जाता है।
उनका कहना है कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और दूसरे कमजोर वर्गों के लोगों को हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सॉफ्टवेयर में ERO को मामले के हिसाब से फैसला लेने का विकल्प मिलना चाहिए।
आयोग के फैसलों पर सवाल वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई
इधर, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने की सहमति दी है। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।
मामला CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने रखा गया। सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले कानून के मुताबिक सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए।
23 सितंबर: EC के अंदर मतभेद की रिपोर्ट सामने आई
चोकलिंगम के लेटर से एक दिन पहले, 23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग के अंदर मतभेद से जुड़ी एक रिपोर्ट आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति जताई थी।
इन आपत्तियों में वोटर लिस्ट, SIR और ECINet से जुड़े फैसले शामिल थे। दोनों चुनाव आयुक्तों ने ECINet में फैसले लेने और सॉफ्टवेयर का कंट्रोल दिल्ली से होने पर सवाल उठाए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कहना था कि वोटर लिस्ट से जुड़े कानूनी अधिकार ERO, जिला निर्वाचन अधिकारी और CEO के पास हैं। इसलिए ECINet में भी इन अधिकारियों को अपने अधिकारों के मुताबिक काम करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

SIR में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी से जुड़ा है ERO का मामला
SIR में मौजूदा वोटर लिस्ट की जानकारी पुराने SIR रिकॉर्ड से मिलाई जा रही है। इस दौरान कुछ रिकॉर्ड में जानकारी का अंतर सामने आया है।
ECINet ऐसे मामलों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तौर पर दिखाता है। इसमें माता-पिता के नाम का मेल न होना, उम्र में असामान्य अंतर या पुराने और नए रिकॉर्ड में जानकारी का सही तरीके से मेल न खाना शामिल हो सकता है।
इन्हीं मामलों में ERO को तय करना होता है कि वोटर से दस्तावेज लेने हैं या उसे सुनवाई के लिए बुलाना है।
26 सितंबर: ECINet की समीक्षा के लिए समिति बनाने का ऐलान
विवाद के बीच 26 सितंबर को दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक हुई। इसमें ECINet की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला लिया।
समिति की अध्यक्षता सीनियर उप चुनाव आयुक्त करेंगे। इसमें IIT या IIIT के एक्सपर्ट को भी शामिल किया जाएगा। आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को और लचीलापन चाहिए तो सॉफ्टवेयर में उसकी व्यवस्था की जाएगी।
नोटिस वाले वोटरों की सुनवाई का तरीका भी बदला
26 सितंबर को आयोग ने SIR में नोटिस पाने वाले वोटरों के लिए प्रक्रिया में भी बदलाव किया। अब सामान्य मामलों में वोटर को ERO या AERO के दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी।
BLO घर जाकर दस्तावेज ले सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं। खास मामलों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत होगी।
महाराष्ट्र में SIR जारी, ड्राफ्ट लिस्ट में 21% मतदाताओं के नाम कटे
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 31 अगस्त को जारी हुई थी। ड्राफ्ट में राज्य के करीब 21.1% मतदाताओं की संख्या कम हुई थी। अंतिम वोटर लिस्ट 16 नवंबर को जारी होनी है।
फिलहाल ड्राफ्ट लिस्ट पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है। इसी दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी वाले मामलों की जांच और नोटिस की प्रक्रिया भी जारी है।
—————————
यह खबर भी पढ़ें…
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 9 नियम बदले:बैठकों का एजेंडा जारी होगा, IT सिस्टम की जांच होगी; कांग्रेस बोली- ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

चुनाव आयोग ने शनिवार की बैठक में अपने कामकाज और चुनावी व्यवस्था से जुड़े 9 फैसले लिए। आयोग ने कहा कि बैठकों से पहले एजेंडा साझा किया जाएगा और बाद में फैसलों का रिकॉर्ड तैयार होगा। नए IT मॉड्यूल और पोर्टल को लागू करने से पहले उनकी समीक्षा भी की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…




