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SIR विवाद पर 2000 नागरिकों का CJI को लेटर: स्वत: संज्ञान लेने की मांग की; चुनाव आयोग अब तक 9 नियम बदल चुका


6 मिनट पहले

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देश के 2 हजार से ज्यादा नागरिकों ने भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत को लेटर लिखकर SIR पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही निर्वाचन आयोग की भूमिका पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करने की अपील की है।

लेटर में कहा गया है- SIR की वैधता, प्रक्रिया की समीक्षा होने तक इसे रोकें। वोटर रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित अनधिकृत बदलावों की कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई और ईसीआईनेट का सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से सिक्योरिटी और लीगल ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

लेटर पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व आईएएस अधिकारी अदिति मेहता, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज सहित शिक्षाविद, वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक दिन पहले 9 फैसले लिए

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चुनाव आयोग ने शनिवार की बैठक में अपने कामकाज और चुनावी व्यवस्था से जुड़े 9 फैसले लिए। आयोग ने कहा कि बैठकों से पहले एजेंडा साझा किया जाएगा और बाद में फैसलों का रिकॉर्ड तैयार होगा। नए IT मॉड्यूल और पोर्टल को लागू करने से पहले उनकी समीक्षा भी की जाएगी।

आयोग की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। अंदरूनी मतभेद के दावों के बीच आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले सर्वसम्मत से हुए थे।

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। आयोग ने बैठक के बाद इन दावों पर भी अपनी बात रखी।

आयोग का दावा- संधू-जोशी ने प्रतिनियुक्त अधिकारी के आदेश पर आपत्ति जताई थी

आयोग ने शनिवार को प्रेस रीलिज जारी कर बताया कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी से जुड़े थे। इंडियन एक्सप्रेस का दावा था कि संधू और जोशी ने उस आदेश पर आपत्ति जताई थी, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की शक्ति केंद्रीय स्तर पर सिमटने की आशंका थी।

आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-पुनर्वितरण आदेश कभी लागू ही नहीं हुए। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का सावधानी से पालन होगा। ईसीआईनेट की जांच के लिए एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जिसमें आईआईटी/आईआईआईटी का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होगा।

फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग ने दी सफाई

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SIR में नाम नहीं आया तो आवेदन कर सकेंगे

आयोग के मुताबिक, SIR में जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे लगातार वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग भी शामिल हैं। आयोग ने CEO, DEO और ERO को ऐसे लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

SIR के दौरान अब तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक देश में कुल 96.88 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं, यानी करीब 14.1% वोटर्स के नाम SIR में काटे गए।

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इन सवालों पर अभी स्थिति साफ नहीं

नए फैसलों के बावजूद ऑनलाइन फॉर्म-6 में माता-पिता से जुड़ा सवाल क्यों जोड़ा गया, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। यह भी नहीं बताया गया कि इसे किसने जोड़ा और क्या अब इसे हटाया गया है।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े करीब 16 लाख नामों के खिलाफ अपील किसके आदेश पर दाखिल हुई, इस सवाल का भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

इसके अलावा, गोवा में मतदाता का नाम बहाल करने वाला सॉफ्टवेयर फीचर क्यों शुरू नहीं हुआ और IT विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी नए फैसलों में नहीं है।

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रिपोर्ट- SIR पर 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई:आयोग बोला- यह सामान्य प्रक्रिया; राहुल ने कहा- वोट चोरी में शामिल, तो नहीं बख्शेंगे

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चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का विवाद 23 सितंबर को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आरोप लगाया कि कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। दोनों ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। इनमें 16 अप्रैल को चार आपत्तियां शामिल थीं। इनकी प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित काम की निगरानी करने वाले कुछ उप चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गई थीं। पूरी खबर पढ़ें…



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