टाटा समूह की परोपकारी इकाई टाटा ट्रस्ट्स में इस समय एक बड़ी हलचल मची हुई है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी और ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि उनका कार्यकाल समाप्त होने में महज तीन दिन बचे थे, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ने का फैसला कर लिया। इस इस्तीफे को टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहे बड़े संगठनात्मक बदलावों और मतभेदों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिर क्यों सुर्खियों में है टाटा ट्रस्ट और क्या हुआ है?
टाटा ट्रस्ट्स के अहम अंग ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट’ के ट्रस्टी विजय सिंह का मौजूदा कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त होने वाला था। लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने का भी इंतजार नहीं किया और उससे पहले ही अपना इस्तीफा बोर्ड को सौंप दिया। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
विजय सिंह ने कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले इस्तीफा क्यों दिया?
विजय सिंह का यह फैसला कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे हाल के महीनों में हुई कई घटनाएं और अंदरूनी मतभेद जिम्मेदार हैं:
- ट्रस्ट डीड की शर्तें और पुराना इस्तीफा: इसी साल मई में विजय सिंह और साथी वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) से भी इस्तीफा दे दिया था। उनका तर्क था कि वे 1923 के ट्रस्ट डीड की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं, जिसके अनुसार ट्रस्टी का पारसी ज़ोरोस्ट्रियन होना और मुंबई का स्थायी निवासी होना जरूरी है।
- टाटा संस की लिस्टिंग पर बयान: सूत्रों का कहना है कि विजय सिंह के लिए सर रतन टाटा ट्रस्ट में अगले कार्यकाल के लिए साथी ट्रस्टियों से सर्वसम्मति से समर्थन पाना बहुत मुश्किल था। ऐसा इसलिए था क्योंकि उन्होंने पहले सार्वजनिक रूप से टाटा संस की संभावित लिस्टिंग के पक्ष में बयान दिए थे, जिससे ट्रस्ट के अन्य सदस्य सहमत नहीं थे।
चैरिटी कमिश्नर की रोक से क्या नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं?
इस इस्तीफे के बीच सर रतन टाटा ट्रस्ट एक और बड़ी कानूनी उलझन में फंसा हुआ है:
- बैठकों पर प्रतिबंध: महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर (CC) ने नवाजबाई के शेयरों के कथित ट्रांसफर और परपेचुअल (हमेशा के लिए) ट्रस्टी की नियुक्ति से जुड़ी एक शिकायत पर फैसला आने तक ट्रस्ट की बैठकों पर रोक लगा दी है।
- ₹400 करोड़ का खर्च अधर में: इस रोक के कारण ट्रस्ट का लगभग ₹400 करोड़ का चैरिटेबल खर्चऔर शेयरधारकों से जुड़े आने वाले महत्वपूर्ण फैसले अभी खतरे में हैं। ट्रस्ट ने इन अहम फैसलों को लेने के लिए चैरिटी कमिश्नर से बैठकों की विशेष अनुमति मांगी है।
सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड में कौन-कौन शामिल है?
वर्तमान में सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के बोर्ड में देश की कई बड़ी हस्तियां शामिल हैं। इस बोर्ड का नेतृत्व चेयरमैन नोएल एन. टाटा कर रहे हैं और उनके साथ बोर्ड में वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह (इस्तीफे से पहले तक), जिमी एन. टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा शामिल हैं।



