गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में दिन भर भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण बाजार में निवेशकों ने किनारे पर रहना ही बेहतर समझा। बाजार में इस सतर्कता की एक बड़ी वजह शुक्रवार को आने वाला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति का फैसला भी है, जिसका निवेशक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
क्लोजिंग का हाल: दिन भर झूले सूचकांक
कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में काफी अस्थिरता रही। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स दिन के कारोबार में 74,544.24 के उच्च स्तर और 73,807.30 के निचले स्तर तक गया, यानी इसमें 736.94 अंकों का भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। अंततः सेंसेक्स मात्र 13.84 अंक या 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 74,360.01 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, 50 शेयरों वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 10.95 अंक या 0.05 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ 23,416.55 पर बंद होने में सफल रहा। इससे पिछले कारोबारी दिन यानी बुधवार को सेंसेक्स 303.67 अंक (0.41%) और निफ्टी 77.95 अंक (0.33%) गिरकर बंद हुए थे।
इन शेयरों ने दिखाया दम, इनमें रही सुस्ती
शेयर बाजार के इस उठापटक भरे दिन में कुछ प्रमुख शेयरों ने सूचकांकों को सहारा दिया, जबकि कुछ में बिकवाली हावी रही:
- मुनाफे वाले शेयर: सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से टाइटन, इटरनल, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।
- नुकसान वाले शेयर: दूसरी तरफ, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों ने बाजार को नीचे खींचने का काम किया और ये नुकसान में बंद हुए।
विदेशी फंड्स की निकासी और एक्सपर्ट्स की राय
बाजार की इस सुस्ती का एक प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 5,616.56 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी बेची है।
लिवलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और फाउंडर हरिप्रसाद के. के अनुसार, “भारतीय इक्विटी ने आज कमजोर शुरुआत से उबरते हुए एक अच्छी रिकवरी दिखाई”। उन्होंने बताया कि कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में तनाव के कारण बाजार दबाव में खुला था। हालांकि, अहम सपोर्ट लेवल के पास खरीदारों के वापस लौटने से बाजार ने अपनी इंट्राडे (दिन के कारोबार की) अधिकांश गिरावट की भरपाई कर ली। फिर भी कल आने वाले आरबीआई मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले धारणा सतर्क बनी हुई है।
ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल का रुख
वैश्विक मोर्चे पर भी दबाव का माहौल है। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, हालांकि यूरोपीय बाजारों में ज्यादातर तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। इस बीच, ऊर्जा बाजार में राहत देखने को मिली और वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.68 प्रतिशत गिरकर 96.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी पूंजी की निकासी के दोहरे झटके से जूझ रहा है। खरीदारों ने आज बाजार को निचले स्तर से उबारा जरूर है, लेकिन असली दिशा शुक्रवार को तय होगी। निवेशकों की नज़रें अब पूरी तरह से आरबीआई के नीतिगत रुख पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि बाजार अपनी यह रिकवरी बरकरार रख पाएगा या फिर नई गिरावट का शिकार होगा।



