घरेलू शेयर बाजार में आज कमजोरी का रुख देखने को मिला है, जहां शुरुआती कारोबार में ही भारी मुनाफावसूली हावी रही और बाजार सतर्कतापूर्ण रुख का संकेत दे रहा है। इक्विटी बाजार में इस भारी गिरावट के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी निराशाजनक स्थिति बनी हुई है, जहां भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है।
बाजार और सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
शुरुआती कारोबार में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 361.62 अंक गिरकर 76,907.78 के स्तर पर आ गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 134.90 अंकों की गिरावट के साथ 23,980.60 पर पहुंच गया। सेक्टोरल स्तर पर बाजार की स्थिति कमजोर दिखी, जिसमें बैंकिंग, वित्तीय, रियल एस्टेट और धातु (मेटल) क्षेत्रों में भारी गिरावट दर्ज की गई तथा अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसके विपरीत, आईटी और मीडिया जैसे सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूती देखी गई, जबकि एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर सुस्त रहे। कुल मिलाकर बाजार में खरीदारी की इच्छा सीमित थी और केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही मजबूती नजर आई।
मुद्रा बाजार और वैश्विक बाजारों पर दबाव
शेयर बाजार की गिरावट के बीच भारतीय रुपये ने भी चिंता बढ़ाई है। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे गिरकर 95.40 के अब तक के सबसे निचले (सर्वकालिक) स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक और एशियाई बाजारों की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है। टोक्यो के समयानुसार सुबह 10:45 बजे तक एसएंडपी 500 (S&P 500) फ्यूचर्स में मामूली बदलाव हुआ था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 (S&P/ASX 200) सूचकांक 0.8% गिर गया। इसके अलावा, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 1.4% टूट गया और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी 0.4% की गिरावट दर्ज की गई।
प्रतिकूल संकेत और एक्सपर्ट एनालिसिस
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का मानना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी जीत से बाजार को मिला भावनात्मक उछाल ज्यादा देर तक नहीं टिकेगा। उन्होंने बाजार की इस गिरावट और भविष्य के दबाव के लिए निम्नलिखित मुख्य कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:
- कच्चे तेल में उबाल: होर्मुज क्षेत्र में फिर से शुरू हुई हिंसा के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो बाजार के लिए एक बड़ा प्रतिकूल संकेत है।
- विदेशी निवेशकों के लिए नकारात्मक माहौल: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 4.44% पर पहुंचना और रुपये का टूटकर नीचे आना विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईपी) के नजरिए से बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
- एफआईआई की सीमित भूमिका: हालांकि कल एफआईआई द्वारा कैश मार्केट में खरीदारी की गई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसी नए सकारात्मक रुझान की शुरुआत होने की संभावना नहीं है।
मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच बाजार का रुख सतर्कता भरा रहेगा। निकट भविष्य में, शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों की चौथी तिमाही के नतीजों और प्रबंधन की टिप्पणियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को अगली रणनीतियों के लिए इन्ही नतीजों पर अपनी नजर बनाए रखनी होगी।



