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The Bonus Market Update: शेयर बाजार में बिकवाली; सेंसेक्स 281 अंक टूटा, निवेशकों के 79000 करोड़ रुपये स्वाहा


भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार पांचवें सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। दोनों प्रमुख मानक सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा-जनित दबाव निकट अवधि में बाजार को प्रभावित करता रहेगा।

निफ्टी 50 सूचकांक 78.35 अंक या 0.32 फीसदी गिरकर 24,287.65 पर बंद हुआ, वहीं बीएसई सेंसेक्स 281.09 अंक या 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 77,728.16 पर समाप्त हुआ। जियोजित इन्वेस्टमेंट के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि ऊर्जा से प्रेरित इनपुट लागत का दबाव बाजार को प्रभावित कर रहा है। पहली तिमाही (वित्त वर्ष 2027) में उम्मीद से बेहतर आय दर्ज की गई। इससे आने वाली तिमाहियों में आय उन्नयन को समर्थन मिलने की संभावना है। कम लागत वाले स्टॉक के लाभ ने लाभप्रदता में मदद की, पर इसकी स्थिरता निगरानी योग्य है। उच्च लागत वाले पुनर्भरण से दूसरी तिमाही (वित्त वर्ष 2027) में लाभ मार्जिन विस्तार बाधित हो सकता है।

क्षेत्रीय सूचकांकों का प्रदर्शन कैसा रहा?

एनएसई पर क्षेत्रीय सूचकांकों में मिश्रित रुझान देखने को मिला। निफ्टी आईटी सूचकांक में 1.84 फीसदी की बड़ी गिरावट आई। निफ्टी फार्मा 0.31 फीसदी और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.12 फीसदी नीचे आए। इसके विपरीत, निफ्टी ऑटो 0.23 फीसदी, निफ्टी मीडिया 0.42 फीसदी और निफ्टी मेटल 1.39 फीसदी ऊपर चढ़े। निफ्टी प्राइवेट बैंक ने भी 0.69 फीसदी की बढ़त हासिल की। निफ्टी 50 के बढ़त वाले शेयरों में हिंडाल्को, टाटा स्टील, एचडीएफसी लाइफ, ओएनजीसी, एक्सिस बैंक और एलएंडटी शामिल थे। एचसीएल टेक, इंफोसिस, सन फार्मा, टीसीएस और नेस्ले इंडिया प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे।

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बनी हुई हैं चिंता का विषय?

एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसिल्वन राधाकृष्णन ने बताया कि दिन के निचले स्तर से उबरने के बावजूद बाजार दबाव में रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार पांचवें सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निवेशकों की धारणा पर लगातार भारी पड़ रही हैं। राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि व्यापक बाजार का मिजाज सतर्क बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें भारतीय इक्विटी के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई हैं। नरम अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा कम प्रतिबंधात्मक नीति की उम्मीदों को मजबूत किया है। हालांकि, खाड़ी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती भारतीय इक्विटी के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है।

भारत पर ऊर्जा कीमतों का क्या असर होगा?

राधाकृष्णन ने आगे कहा कि भारत एक प्रमुख तेल आयातक देश है। इस कारण यह ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि के प्रति विशेष रूप से कमजोर बना हुआ है। यह स्थिति निवेशकों को सतर्क रख रही है। मानक सूचकांक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के करीब पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट दाखिल करते समय ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1.01 फीसदी बढ़कर 89.42 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर थीं। सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में भी तेजी आई। 24 कैरेट सोने का भाव 0.41 फीसदी बढ़कर 1,55,139 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। चांदी की कीमतें 0.56 फीसदी बढ़कर 2,37,254 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं। अन्य एशियाई बाजार भी ज्यादातर बढ़त के साथ बंद हुए। जापान का निक्केई 225 0.72 फीसदी बढ़कर 69,211 पर बंद हुआ। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.43 फीसदी बढ़कर 5,768 पर पहुंचा। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 1.37 फीसदी बढ़कर 25,465 पर समाप्त हुआ। ताइवान का भारित सूचकांक 0.10 फीसदी बढ़कर 45,857 पर बंद हुआ।



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