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The Bonus Market Update: शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन हरियाली; सेंसेक्स 300 अंक चढ़ा, निफ्टी 23900 के पार


मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर निवेशकों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। ईरान-अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों के चलते बाजार में लगातार तीसरे दिन तेजी का दौर जारी है।

1. शेयर बाजार में आज कितनी तेजी दर्ज की गई है?


मंगलवार की सुबह शेयर बाजार हरे निशान में खुला। बीएसई सेंसेक्स  300.03 अंक (0.39%) की मजबूत बढ़त के साथ 76,564.36 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी  भी 75.15 अंक (0.32%) चढ़कर 23,929.05 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

2. बाजार की इस तूफानी तेजी के पीछे मुख्य कारण क्या है?


इस लगातार शानदार उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक मोर्चे से आ रही एक सकारात्मक खबर है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के फ्रेमवर्क को लेकर बन रही उम्मीदों ने बाजार के सेंटीमेंट को मजबूत किया है। इसी आशावाद के चलते पिछले दो कारोबारी सत्रों में बेंचमार्क इंडेक्स पहले ही 3 फीसदी तक की बड़ी छलांग लगा चुके हैं।

3. आज किन शेयरों ने निवेशकों को सबसे ज्यादा मुनाफा कराया?


बाजार की इस तेजी को लीड करने में मुख्य रूप से आईटी और फाइनेंस सेक्टर का हाथ रहा। शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में शानदार खरीदारी देखने को मिली और दोनों कंपनियों के शेयर 2-2 फीसदी तक उछल गए।

4. वेदांता ग्रुप के डिमर्जर (पुनर्गठन) का निवेशकों पर क्या असर हुआ?


कॉर्पोरेट मोर्चे पर वेदांता ग्रुप ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अपने कारोबार को अलग-अलग कंपनियों में बांटने  के बाद, वेदांता ग्रुप ने अपनी 5 लिस्टेड संस्थाओं के जरिए निवेशकों के लिए लगभग 20 फीसदी की नई वैल्यू अनलॉक की है। यह बड़ा वैल्यू क्रिएशन साफ तौर पर दिखाता है कि बाजार और निवेशक कंपनी के इस पुनर्गठन को लेकर कितने आशान्वित  हैं।

5. क्या वेदांता की नई कंपनियों के शेयर पहले दिन मुनाफे में बंद हुए?


यहीं पर बाजार का असली उतार-चढ़ाव देखने को मिला। डिमर्जर के बाद शेयर बाजार में नई लिस्ट होने वाली वेदांता की 4 कंपनियों के शेयरों ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी। अपने डेब्यू (पहले) दिन की भारी उठापटक के बीच ये नए शेयर लाल निशान में बंद हुए। हालांकि, इसके बावजूद ग्रुप के ओवरऑल 20% वैल्यू अनलॉक ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है।

ईरान-अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदों ने ग्लोबल और भारतीय बाजारों में नई जान फूंक दी है। इसके साथ ही, वेदांता के उदाहरण से यह साबित होता है कि जब कोई बड़ी कंपनी सही रणनीति के साथ अपना पुनर्गठन करती है, तो शुरुआती उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए लंबी अवधि में अच्छी वैल्यू क्रिएट हो सकती है।



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