भारतीय शेयर बाजार में दिन भर के भारी उतार-चढ़ाव के बाद अंततः बड़ी गिरावट के साथ कारोबार का अंत हुआ है। बाजार में आई इस तेज बिकवाली के चलते निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और बेंचमार्क सूचकांक लाल निशान में बंद हुए हैं।
आंकड़ों की नजर में बाजार का हाल
शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों में आज तेज गिरावट दर्ज की गई:
- सेंसेक्स: बीएसई का सेंसेक्स 1,092.06 अंकों यानी 1.43 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,775.74 के स्तर पर बंद हुआ।
- निफ्टी: वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 359.41 अंक यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी ने 23,600 और 23,550 दोनों अहम स्तरों के नीचे अपनी क्लोजिंग दी है।
निवेशकों को पांच लाख करोड़ रुपये का नुकसान
बाजार की इस चौतरफा गिरावट का सीधा असर निवेशकों की पूंजी पर पड़ा है। इस तेज बिकवाली के कारण बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में से लगभग पांच लाख करोड़ रुपये साफ हो गए हैं। इस भारी नुकसान के बाद बीएसई का कुल मार्केट कैप घटकर 466 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया है।
पावर ग्रिड और इंडिगो में भारी गिरावट
इस गिरावट में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। पावर ग्रिड के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली और यह लगभग चार प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ एविएशन सेक्टर की प्रमुख कंपनी इंडिगो के शेयरों पर भी दबाव रहा और इसमें तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजार के लिए आज का कारोबारी सत्र भारी गिरावट वाला रहा। शुरुआती उतार-चढ़ाव पूरी तरह से तेज गिरावट में बदल गया, जिससे सूचकांक अपने अहम सपोर्ट लेवल से नीचे आ गए। बाजार में हुई यह पांच लाख करोड़ रुपये की वेल्थ डिस्ट्रक्शन इस बात का संकेत है कि ऊपरी स्तरों पर भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
बाजार में उतार-चढ़ाव के कारणों पर विशेषज्ञ क्या बोले?
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में प्रमुख रूप से गिरने वाले शेयरों में पावर ग्रिड, इंटरग्लोब एविएशन, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, लार्सन एंड टुब्रो और इंफोसिस लाभ में रहे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड अधिकारी अजीत मिश्रा ने बताया कि शुक्रवार को कारोबार के अंतिम घंटे में बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। संस्थागत बिकवाली के कारण बेंचमार्क सूचकांकों ने अपनी अधिकांश दिन की बढ़त गंवा दी। उन्होंने कहा कि यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से एमएस सीआई मई 2026 सूचकांक के पुनर्संतुलन के कारण था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि आईएमडी के मानसून पूर्वानुमान के बाद बाजार में व्यापक बिकवाली का दबाव देखा गया। इससे निवेशकों में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने की चिंता बढ़ गई है।
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मानसून की चिंता के बीच बाजार पर कैसा असर?
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे मौसम विभाग (आईएमडी) ने मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी किया। आईएमडी महानिदेशक के मुताबिक जून-सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य लंबी अवधि औसत का 90 फीसदी बारिश होने की उम्मीद है। आईएमडी ने बताया कि पूर्वोत्तर में सामान्य बारिश हो सकती है। हालांकि, देश के शेष हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
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मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक कारक
देश में कम बारिश की संभावना के साथ अल-नीनो मौसम पैटर्न की बढ़ती आशंका है। इस कारण आने वाले महीने में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने का डर पैदा हो गया है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और बॉन्ड यील्ड में कमी से जोखिम कुछ हद तक कम हुआ है। पीटीआई की रिपोर्ट में लाइवलांग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक हरिप्रसाद के हवाले से बताया गया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता भी निवेशकों के विश्वास पर भारी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम समझौते के संभावित विस्तार को लेकर शुरुआती कारोबार में निवेशकों के बीच आशावाद दिखा। हालांकि, वाशिंगटन से औपचारिक पुष्टि न होने के कारण वैश्विक संस्थागत निवेशक सतर्कता बरतते दिखे और जोखिम लेने से परहेज किया।



