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The Bonus Market Updates: रिकवरी की कोशिशों के बाद भी लाल निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 304 अंक टूटा


बुधवार को शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली इसका मुख्य कारण रही। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने भी बाजार को प्रभावित किया।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 303.67 अंक या 0.41 फीसदी गिरकर 74,346.17 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,157.24 अंक या 1.55 फीसदी तक गिरकर 73,492.60 पर पहुंच गया था। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 77.95 अंक या 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 23,405.60 पर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार को बाजार में चार दिन की गिरावट का सिलसिला टूटा था। उस दिन सेंसेक्स 382.50 अंक और निफ्टी 100.95 अंक की बढ़त के साथ बंद हुए थे।

सेंसेक्स की तीस कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज 8.43 फीसदी गिरी। टेक महिंद्रा 6.23 फीसदी, एचसीएल टेक 5.25 फीसदी और इंफोसिस 3.82 फीसदी नीचे आए। आईटीसी, एटर्नल, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फाइनेंस भी नुकसान में रहे। इंटरग्लोब एविएशन, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ट्रेंट लाभ में रहे।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेश

वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड तीन फीसदी उछल गया। यह 98.92 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 8,362.92 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह जानकारी एक्सचेंज के आंकड़ों से मिली है। हरिप्रसाद के, रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक, लाइवलांग वेल्थ ने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजार में अस्थिरता रही। भू-राजनीतिक चिंताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार पर दबाव डाला।

आईटी शेयरों में तेज गिरावट

हरिप्रसाद के ने बताया कि दिन की मुख्य खबर आईटी शेयरों में तेज गिरावट थी। तीन दिन की मजबूत रैली के बाद इस क्षेत्र में मुनाफावसूली देखी गई। निवेशकों ने वैश्विक प्रौद्योगिकी वृद्धि की उम्मीदों का पुनर्मूल्यांकन किया। इससे आईटी शेयरों में भारी बिकवाली हुई। यह बिकवाली बाजार की गिरावट का एक बड़ा कारण बनी। कई प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर काफी नीचे आ गए।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का प्रस्ताव

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 54 देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। इनमें भारत भी शामिल है, जिन पर 12.5 फीसदी शुल्क लगेगा। यह प्रस्ताव जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने में विफलता के कारण है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 60 देशों के खिलाफ जांच शुरू की थी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।



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