International
oi-Siddharth Purohit
Trump Speech: अमेरिका-ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश और दुनिया को संबोधित किया। इस स्पीच में उन्होंने युद्ध से जुड़ी कई बड़ी बातें सार्वजनिक तौर पर साझा कीं। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत NASA के मून मिशन की टीम को बधाई देकर की और इसके बाद सीधे मिडिल ईस्ट की स्थिति पर आ गए।
फौज को लेकर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने इस युद्ध में शानदार प्रदर्शन किया है। उनके मुताबिक, ईरान की नेवी, एयरफोर्स और वहां की मौजूदा सरकार (रिजीम) लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचा है और उनके हथियारों का जखीरा तबाह कर दिया गया है।

होर्मूज पर लड़े या अमेरिका से तेल खरीदें- ट्रंप
ट्रंप अपनी स्पीच में एक और अजीब बात कही कि जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर फंसे हैं वे या तो अमेरिका के साथ मिलकर लड़ें या फिर अमेरिका से तेल खरीदने के लिए तैयार रहें। ट्रंप का ये बयान तब आया है जब पूरी दुनिया गैस-तेल के संकट से जूझ रही है।
“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्यों था जरूरी?”
ट्रंप ने कहा कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी था। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 सालों से “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इजरायल” जैसे नारे देता आया है, जिससे उसकी मंशा साफ होती है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे देश के पास न्यूक्लियर हथियार आ गए तो यह मिडिल ईस्ट, दुनिया और अमेरिका सभी के लिए बेहद खतरनाक होगा और वह ऐसा कभी नहीं होने देंगे।
कासिम सुलेमानी का जिक्र और ओबामा पर हमला
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल की बात करते हुए कहा कि उन्होंने कासिम सुलेमानी को मारने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही उन्होंने बराक ओबामा की ईरान न्यूक्लियर डील को “डिजास्टर” बताया और कहा कि ओबामा ने ईरान को 1.7 मिलियन डॉलर दिए थे। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ऐसी गलत डील्स को खत्म किया और पूर्व के राष्ट्रपतियों द्वारा की गई गलतियों को भी सुधारा। ट्रंप ने इतने दिनों से ईरान के साथ डील करने की बात कर रहे हैं लेकिन इस बार ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से कोई डील ही नहीं करेंगे
“न्यूक्लियर प्रोग्राम को करारी चोट”
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने पिछले साल “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के जरिए ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को बड़ा झटका दिया था। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में B-2 Stealth बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया गया था। वहीं इस साल अमेरिकी हमलों की वजह से ईरान के न्यूक्लयर प्रोग्राम को और तगड़ी चोट मिली है। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका उसे सफल नहीं होने दिया और न कभी होने देगा।
“ईरान अब खतरा नहीं रहा”
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल प्रोग्राम को इस हद तक कमजोर कर दिया है कि अब वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को न्यूक्लियर शक्ति बनने से रोक दिया है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और तेल की कीमतों पर बयान ट्रंप ने कहा कि जैसे ही यह युद्ध खत्म होगा, Strait of Hormuz अपने आप खुल जाएगा। उन्होंने माना कि अभी युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, लेकिन जंग खत्म होते ही ये कीमतें फिर नीचे आ जाएंगी।
‘रिजीम चेंज नहीं था टारगेट’, मारी पलटी
ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से पलटी मार दी है। पहले के बयानों में ट्रंप ने रिजीम चेंज की बात कही थी, लेकिन इस स्पीच में उन्होंने कहा कि उनका टारगेट “रिजीम चेंज” नहीं था, बल्कि मौजूदा नेतृत्व को हटाना था। उन्होंने कहा कि अभी तक ईरान के साथ कोई डील नहीं हुई है और अगर जल्द समझौता नहीं होता, तो अमेरिका फिर से उनके बिजली और तेल प्लांट्स पर हमला करेगा।
अमेरिका की ताकत और पिछले युद्धों का जिक्र
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध, वियतनाम और इराक जैसे लंबे युद्ध लड़े हैं और हर बार अपनी ताकत साबित की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के खिलाफ भी अमेरिका मजबूती से लड़ रहा है और पूरी निगरानी सैटेलाइट के जरिए की जा रही है। इसके नतीजे भी अमेरिका के पक्ष में ही होंगे।
युद्ध खत्म करने के नहीं दिए संकेत
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने कहा कि आज हर अमेरिकी बिना डर के अपनी जिंदगी जी सकता है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार ने देश की सुरक्षा को मजबूत किया है और भविष्य के खतरों को कम कर दिया है। ट्रंप ने इस जंग को जल्द ही खत्म करने की बात कही है लेकिन वे ऐसा जंग की शुरुआत से ही कह रहे हैं। दुनियाभर के नेताओं को उम्मीद थी कि शायद वह आज जंग खत्म करने का ऐलान कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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