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Valley of Flowers Open: अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं और मानसून के मौसम में किसी जादुई जगह की तलाश कर रहे हैं, तो यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित उत्तराखंड की घाटी हर साल जून से अक्टूबर के बीच पर्यटकों के लिए खोली जाती है. यहां हजारों रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं…
Valley of Flowers Open: अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं और मॉनसून के मौसम में किसी जादुई जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड की ‘वैली ऑफ़ फ्लावर्स’ आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. UNESCO द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित यह घाटी, हर साल जून से अक्टूबर के बीच पर्यटकों के लिए खुली रहती है. बारिश के मौसम में यहां हज़ारों रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं, जिससे पूरी घाटी किसी स्वर्ग जैसी नज़र आती है. आइए जानते हैं दिल्ली से यहां पहुंचने का पूरा ट्रिप प्लान.

यह इतना खास क्यों है?: चमोली ज़िले में स्थित, ‘वैली ऑफ़ फ्लावर्स’ लगभग 87 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. 500 से भी ज़्यादा दुर्लभ और हिमालयी फूलों की प्रजातियों का घर होने के साथ-साथ, बर्फ़ से ढके पहाड़ों, हरे-भरे घास के मैदानों और झरनों से इस क्षेत्र की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है.

दिल्ली से ऋषिकेश/हरिद्वार: दिल्ली से हरिद्वार या ऋषिकेश ट्रेन, बस या निजी कार द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है. दिल्ली से हरिद्वार की दूरी लगभग 220 किलोमीटर है, जिसे 5–6 घंटों में तय किया जा सकता है. ऋषिकेश से जोशीमठ : ऋषिकेश से जोशीमठ तक का सफ़र लगभग 250 किलोमीटर के पहाड़ी रास्ते से होकर गुज़रता है. बस या टैक्सी से वहां पहुंचने में 9 से 10 घंटे लग सकते हैं. रास्ते में देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे खूबसूरत पड़ाव भी आते हैं. गोविंदघाट से घांघरिया तक का ट्रेक: जोशीमठ से गोविंदघाट पहुँचने के बाद, लगभग 13 किलोमीटर का ट्रेक करके कोई भी घांघरिया पहुंच सकता है. यहां रात बिताने के लिए होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं.
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फूलों की घाटी : घांघरिया से फूलों की घाटी तक की ट्रेक लगभग 4 किलोमीटर की दूरी तय करती है. यह रास्ता फोटोग्राफी के लिए बेहद खूबसूरत और शानदार माना जाता है.

अनुमानित यात्रा खर्च: दिल्ली से हरिद्वार तक यात्रा: ₹500–₹2,000 | होटल और भोजन (2–3 दिन): ₹3,000–₹6,000 | प्रवेश टिकट और अन्य खर्च: ₹500–₹1,500.

यात्रा से पहले ध्यान रखने योग्य बातें: मॉनसून के मौसम में यहां का मौसम तेज़ी से बदल सकता है. इसलिए अपने साथ रेनकोट, ट्रेकिंग शूज़, गर्म कपड़े और ज़रूरी दवाएं ज़रूर रखें. इसके अलावा, पर्यावरण को साफ़ रखने में मदद करने के लिए, प्लास्टिक का कचरा कहीं भी फेंकने से पूरी तरह परहेज़ करें.



