Homeटेक्नोलॉजीUPSC के 100 साल पूरे: PM मोदी ने बुक, सिक्का और...

UPSC के 100 साल पूरे: PM मोदी ने बुक, सिक्का और डाक टिकट जारी की; एजेंसी के कराए एग्जाम में 12 लाख स्टूडेंट्स हिस्सा लेते हैं


नई दिल्ली2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

PM मोदी ने UPSC के 100 साल पूरे होने पर लगाई गई प्रदर्शनी देखी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 साल पूरे होने के कार्यक्रम में पहुंचे। मोदी ने सबसे पहले फ्लाईदुबई की फ्लाइट को क्रैश से बचाने वाले पायलट स्मित मच्छर का जिक्र किया।

कल एक हिंदुस्तानी पायलट ने स्मित ने 9-11 होने से बचा लिया। आज मेरी उनके माता-पिता से बात हुई। आज पूरी दुनिया उन पर गर्व कर रही है। देशवासियों से प्रार्थना करता हूं कि स्मित की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करें।

पीएम मोदी ने लोक सेवा आयोगों से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित किताब का लोकार्पण किया। साथ ही शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी की।

कार्यक्रम से जुड़ी 3 तस्वीरें…

मोदी ने बुक, सिक्का और डाक टिकट जारी की।

पीएम मोदी का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिह्न दिया गया।

पीएम मोदी का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिह्न दिया गया।

मोदी ने UPSC के 100 साल के अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी देखी।

मोदी ने UPSC के 100 साल के अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी देखी।

मोदी के भाषण की खास बातें

1. सुभाष चंद्र बोस ने संस्कृत में पेपर लिखा था

UPSC के 100 साल एक उत्सव है। इसे लाखों लाख स्टूडेंट्स जीते हैं। हर भारतवासी को इस संस्था पर विश्वास है। 100 साल की यात्रा में पीढ़ियां, सरकार, टेक्नोलॉजी, सिलेबस बदले, लेकिन UPSC पर भरोसा आज भी उतना ही अटूट है।

मैं एक गैलरी को देख रहा था। 1920 में सुभाष चंद्र बोस जब इस प्रक्रिया यानी आईसीएस से गुजरे तो उसकी पूरी जानकारी इस गैलरी में है। उस समय अंग्रेजों की हुकूमत थी, लेकिन तब संस्कृत का पेपर होता था और सुभाष जी ने संस्कृत में पेपर लिखा था।

30 सितंबर से शुरू हुआ दो दिवसीय आयोजन

UPSC का शताब्दी समारोह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित हो रहा है। पहले दिन भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह- मंथन’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें कई विषयों पर चर्चा और पैनल आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC के अधिकारी शामिल हुए।

UPSC परीक्षा प्रक्रिया के बारे में जानें…

UPSC एक संवैधानिक संस्था है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 315 में है। परीक्षा में प्रश्न कई विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए जाते हैं।

उत्तर पुस्तिकाओं में कोडिंग की व्यवस्था होती है, जिससे जांच के दौरान परीक्षक को उम्मीदवार का नाम और रोल नंबर पता नहीं चलता। इंटरव्यू में भी उम्मीदवार की व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखी जाती है।

5a7be839 507d 437c b32f 18358e6824bd 1790785940033

इसके बावजूद UPSC पर तीन बड़े सवाल उठे हैं…

फर्जी सर्टिफिकेट विवाद: पूजा खेडकर मामले के बाद खुलासा हुआ कि उम्मीदवारों ने फर्जी दिव्यांगता (PwBD) और नॉन-क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट लगाकर आरक्षण लिया। आयोग पर समय रहते दस्तावेजों की जमीनी जांच न करने के आरोप लगे।

सीसैट और भाषा भेदभाव: 2011 में लागू सीसैट पेपर में अंग्रेजी और मैथ्स के ऊंचे स्तर के चलते हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों ने भेदभाव का आरोप लगाया। साथ ही, सवालों के खराब हिंदी अनुवाद पर भी लगातार विवाद रहा।

पारदर्शिता और लेटरल एंट्री: प्रीलिम्स की आंसर-की और कट-ऑफ पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद जारी करने पर छात्रों ने आपत्ति जताई। वहीं, बिना यूपीएससी परीक्षा के बड़े पदों पर सीधे निजी क्षेत्र से अफसरों की भर्ती (लेटरल एंट्री) से मेरिट और आरक्षण प्रणाली कमजोर होने के सवाल उठे।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments