ईरान युद्ध जब चरम पर था, तब क्रूड ने इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाई थी। अब जब बातचीत की कोशिशें दिख रही हैं और युद्ध की रफ्तार धीमी हुई है, तब ब्रेंट क्रूड उछलकर चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह विरोधाभास नहीं है। तेल बाजार युद्ध की आवाज नहीं, आपूर्ति की सांस सुनता है।
दरअसल, एक्सिओस की एक रिपोर्ट आने के बाद बृहस्पतिवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 126.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो 9 मार्च, 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बृहस्पतिवार को ईरान पर सैन्य हमलों की एक शृंखला की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी है। ऐसा इस उम्मीद में किया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए वापस लौट आएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के इस रुख से संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे क्रूड आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है।
बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्रेंट क्रूड में गिरावट आई और कीमतें 3.5 फीसदी गिरकर 113.89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। तेल ब्रोकर पीवीएम के तमास वर्गा ने कहा, क्रूड में यह गिरावट किसी खास घटना से जुड़ी नहीं लगती, बल्कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बाजार में बढ़ी अस्थिरता को दर्शाती है। यह बस ट्रंप की दुनिया में ट्रेडिंग के अप्रत्याशित स्वभाव को संक्षेप में बताती है।
डर ही नहीं बैरल भी कम
बाजार में सिर्फ डर नहीं, असल में बैरल भी कम हैं। आईईए के आंकड़े बताते हैं, मार्च में वैश्विक तेल भंडार 8.5 करोड़ बैरल घटा है। खाड़ी के बाहर भंडार में 20.5 करोड़ बैरल की गिरावट आई। समुद्र में चल रहा तेल भी घटा है। ऑयल ऑन वाटर 10.7 करोड़ बैरल कम हुआ, क्योंकि होर्मुज के बंद होने से ट्रांजिट में मौजूद तेल 18.1 करोड़ बैरल घट गया।
उबाल की असली वजह होर्मुज
तेल में उबाल की असल वजह है होर्मुज। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, युद्ध से पहले होर्मुज से रोज 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइंड उत्पाद निकलते थे। अप्रैल के शुरू में यह घटकर सिर्फ 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वैकल्पिक रास्तों से निर्यात जरूर बढ़कर 72 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा, लेकिन कुल निर्यात नुकसान अब भी 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन से ज्यादा है।
केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया कहते हैं, यही वह आंकड़ा है, जिसने बाजार को बेचैन किया है। युद्ध रुक भी जाए, तो जहाज तुरंत नहीं चलेंगे। बीमा, रूट, बंदरगाह, लोडिंग और रिफाइनरी आपूर्ति को सामान्य होने में समय लगेगा। यही बात तेल के बाजार को परेशान कर रही है।
आपूर्ति का प्रभावित होना भी बड़ी वजह
अर्थवृक्ष फाइनेंशियल सर्विसेज के संस्थापक रविंद्र राव ने बताया, आपूर्ति प्रभावित होने से भी क्रूड में मजबूती दिख रही है। उनका कहना है कि ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौता नहीं करता, जब तक उस पर नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
जब बाजार को पता है कि तेल अभी नहीं मिल रहा, तो जो कॉन्ट्रैक्ट आज डिलीवरी का है, वो सबसे ज्यादा महंगा हो जाता है। रिफाइनरी और ट्रेडर्स किसी भी दाम पर खरीदने को तैयार हो जाते हैं।
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