भारत ने विश्व व्यापार संगठन में चीन के एक महत्वपूर्ण अनुरोध को ब्लॉक कर दिया है। यह अनुरोध सौर सेल, मॉड्यूल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत के समर्थन उपायों के खिलाफ था। चीन ने इन उपायों को भेदभावपूर्ण बताते हुए विवाद के समाधान लिए पैनल स्थापित करने की मांग की थी।
चीन ने दिसंबर 2025 में भारत के खिलाफ यह विवाद दायर किया था। द्विपक्षीय बातचीत विफल होने के बाद चीन ने इस महीने की शुरुआत में पैनल के गठन का अनुरोध किया। जिनेवा में 22 मई 2026 को हुई विश्व व्यापार संगठन की विवाद निपटान निकाय की बैठक में भारत ने चीन के पहले अनुरोध को रोक दिया। चीन का आरोप है कि भारत के टैरिफ और घरेलू उत्पादों के उपयोग जैसे उपाय चीनी वस्तुओं के खिलाफ भेदभाव करते हैं। बीजिंग ने दावा किया कि ये उपाय विश्व व्यापार संगठन के कई व्यापार नियमों का उल्लंघन करते हैं।
भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके उपाय विश्व व्यापार संगठन के नियमों के पूरी तरह अनुरूप हैं। भारत ने यह भी कहा कि वैश्विक सौर मॉड्यूल मूल्य शृंखला के 80 फीसदी से अधिक को नियंत्रित करने वाले देश का अन्य देशों में उद्योग के विकास को बाधित करना विडंबनापूर्ण है। नियमों के अनुसार, चीन अगले विवाद निपटान निकाय की बैठक में अपना अनुरोध फिर से कर सकता है, जिसके बाद पैनल स्वतः स्थापित हो जाएगा।
भारत के घरेलू विनिर्माण उपाय
भारत ने सौर क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें आयातित सौर सेल और मॉड्यूल पर शुल्क लगाना शामिल है। कुछ सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय विनिर्मित सौर उपकरणों का उपयोग अनिवार्य किया गया है। घरेलू उत्पादकों से खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची भी पेश की गई है। इस क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना भी शुरू की गई है।
चीन के आरोप और भारत का रुख
चीन का आरोप है कि भारत के आयात शुल्क और प्रोत्साहन उपाय उसके निर्यात को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से उच्च-तकनीकी वस्तुओं और सौर ऊर्जा उत्पादों पर लगाए गए शुल्क। भारत का कहना है कि ये सभी उपाय उसके विश्व व्यापार संगठन की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं। चीन ने भारत के खिलाफ ऑटोमोटिव और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी एक अलग विवाद दायर किया है।



