Homeव्यवसायएक्सप्लेनर: हूती ने अरामको को क्यों बनाया निशाना, सऊदी अरब की इस...

एक्सप्लेनर: हूती ने अरामको को क्यों बनाया निशाना, सऊदी अरब की इस कंपनी क्या इतिहास और कितना बड़ा कारोबार?


अरामको इतनी अहम क्यों है?

तेल उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी

अरामको ने 2025 में रोजाना औसतन 1.29 करोड़ बैरल तेल के बराबर हाइड्रोकार्बन का उत्पादन किया। इसमें तरल हाइड्रोकार्बन का उत्पादन रोजाना 1.07 करोड़ बैरल था। इससे कंपनी के उत्पादन का पैमाना समझा जा सकता है।

कई देशों को तेल की आपूर्ति

अरामको एशिया समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति करती है। इसी तेल से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। अगर कंपनी के उत्पादन या आपूर्ति में बड़ी रुकावट आती है, तो इसका असर उन बाजारों पर पड़ सकता है जो इस आपूर्ति पर निर्भर हैं।

वैश्विक तेल बाजार में सऊदी अरब की भूमिका

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में सऊदी अरब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक देश था। वैश्विक कच्चे तेल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 11.3 फीसदी थी। ऐसे में सऊदी अरब में तेल उत्पादन या उसकी आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

गैस और पेट्रोकेमिकल कारोबार

अरामको ने 2025 में रोजाना औसतन 11.4 अरब मानक घन फीट प्राकृतिक गैस का उत्पादन किया। कंपनी पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी बनाती है, जिनका इस्तेमाल प्लास्टिक, पैकेजिंग और औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में होता है।

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में योगदान

अरामको सऊदी अरब की प्रमुख सरकारी कंपनियों में शामिल है। इसके मुनाफे, निवेश और सरकार को मिलने वाले राजस्व का देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। यही वजह है कि कंपनी के उत्पादन और कारोबार में किसी बड़े बदलाव पर सऊदी अरब की आर्थिक स्थिति के लिहाज से भी नजर रखी जाती है।

अरामको के बड़े प्रोजेक्ट कौन-कौन से हैं?

अरामको ने तेल और गैस के उत्पादन के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट विकसित किए हैं। इनमें तेल क्षेत्र, गैस संयंत्र और पेट्रोकेमिकल परिसर शामिल हैं।

शायबाह तेल क्षेत्र: यह सऊदी अरब के रुब अल-खाली रेगिस्तान में स्थित है। इसकी खोज 1968 में हुई थी। 2016 तक इसकी उत्पादन क्षमता रोजाना 10 लाख बैरल हो गई थी।

मनीफा तेल क्षेत्र: इसकी खोज 1957 में हुई थी। यह समुद्र में स्थित तेल क्षेत्र है, जहां उत्पादन के लिए 27 कृत्रिम द्वीप बनाए गए। यहां 2013 में उत्पादन शुरू हुआ और 2017 तक इसकी क्षमता रोजाना नौ लाख बैरल हो गई।

सदारा पेट्रोकेमिकल परिसर: यह अरामको और अमेरिकी कंपनी डॉव का संयुक्त प्रोजेक्ट है। इसका निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। इसमें करीब 20 अरब डॉलर के निवेश की योजना थी। परिसर में प्लास्टिक और विशेष रसायन बनाने के लिए 26 औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं।

फाधिली गैस संयंत्र: इस संयंत्र की डिजाइन क्षमता रोजाना 2.5 अरब घन फीट गैस संसाधित करने की है। कंपनी के मुताबिक, 2021 में इसने अपनी निर्धारित क्षमता हासिल कर ली थी।

वसीत गैस संयंत्र: इस संयंत्र में अक्तूबर 2015 में उत्पादन शुरू हुआ। 2016 में यह अपनी पूरी क्षमता पर पहुंच गया। यह कंपनी के गैस कारोबार का प्रमुख हिस्सा है।

इन परियोजनाओं से पता चलता है कि अरामको का कारोबार केवल कच्चे तेल के उत्पादन तक सीमित नहीं है। कंपनी प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों में भी निवेश करती है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments