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कर्नाटक विधायक की भतीजी को बिना काम ₹70 हजार सैलरी: 6 महीने से सरकारी क्लीनिक नहीं गईं; नौकरी के साथ PG करने का आरोप




कर्नाटक के बागलकोट में नम्मा क्लीनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर नौकरी के साथ निजी मेडिकल कॉलेज से फुल टाइम पोस्टग्रेजुएशन (PG) करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें हर महीने 70 हजार रुपए से ज्यादा सैलरी मिलती थी। डॉ. अंकिता बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं। उनके पिता राजकुमार यरगल बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) हैं। मामले में जिला स्तर पर विभागीय जांच चल रही है। मार्च से सितंबर तक क्लीनिक से गैरहाजिर रहने का आरोप अधिकारियों के मुताबिक, डॉ. अंकिता बागलकोट शहर की वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात थीं। वह अप्रैल 2025 से कॉन्ट्रैक्ट/आउटसोर्स आधार पर यहां काम कर रही थीं। आरोप है कि 3 मार्च से सितंबर तक वह क्लीनिक में ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं। इस दौरान क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर नहीं होने से मरीजों और स्थानीय लोगों को परेशानी हुई। जिला पंचायत CEO गजानन बाले की ओर से जारी नोटिस में इसी गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया गया है। नौकरी के साथ निजी कॉलेज में PG में दाखिला मामले का मुख्य विवाद डॉ. अंकिता के निजी मेडिकल कॉलेज में PG कोर्स में दाखिले को लेकर है। अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने मार्च में निजी मेडिकल कॉलेज में फुल टाइम मेडिकल PG कोर्स शुरू किया, लेकिन नम्मा क्लीनिक की नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। यानी एक तरफ वह निजी कॉलेज में PG की पढ़ाई कर रही थीं और दूसरी तरफ सरकारी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर बनी रहीं। अधिकारियों के अनुसार, एक ही समय में दोनों जिम्मेदारियां निभाना नियमों के खिलाफ हो सकता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ अनधिकृत दोहरी व्यस्तता और ड्यूटी में लापरवाही के आरोपों की जांच की जा रही है। कॉलेज प्रिंसिपल ने दी थी PG की अनुमति जिला पंचायत CEO के नोटिस में कहा गया है कि SN मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ. अंकिता को PG की पढ़ाई के लिए अनुमति दी थी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज की ओर से पढ़ाई की अनुमति मिलने से नम्मा क्लीनिक की ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का मामला खत्म नहीं हो जाता। सरकारी स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े नियमों के तहत उनकी अनुपस्थिति और दोहरी व्यस्तता की अलग से जांच की जा रही है। 15 सितंबर की जांच में नहीं पहुंचीं मामले की जांच के लिए जिला पंचायत CEO गजानन बाले ने 15 सितंबर को सुनवाई रखी थी, लेकिन डॉ. अंकिता इसमें उपस्थित नहीं हुईं। इसके बाद उन्हें नया नोटिस जारी किया गया है। अब उन्हें 18 सितंबर को सुबह 10 बजे बागलकोट जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में उपस्थित होने को कहा गया है। CEO ने चेतावनी दी है कि यदि वह अगली सुनवाई में भी उपस्थित नहीं होती हैं तो उनके खिलाफ एकतरफा फैसला लिया जा सकता है। नौकरी से हटाने के निर्देश मामला सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी राजकुमार यरगल ने डॉ. अंकिता को ड्यूटी से हटाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आदेश के आधार पर उन्हें वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक की सेवा से रिलीव कर दिया गया है। जिला पंचायत CEO की शुरुआती रिपोर्ट में भी उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की गई थी। वेतन वापस लेने की कार्रवाई भी संभव जांच में अगर यह साबित होता है कि डॉ. अंकिता ने सरकारी नौकरी के दौरान नियमों के खिलाफ PG की पढ़ाई की और इस अवधि में सरकारी वेतन या मानदेय लिया, तो उनसे यह राशि वापस लेने की कार्रवाई हो सकती है। नोटिस में कहा गया है कि कथित अनधिकृत दोहरी व्यस्तता की अवधि में भुगतान की गई पूरी राशि नियमों के अनुसार रिकवर की जा सकती है। KMC और NMC तक पहुंच सकता है मामला अधिकारियों ने मामले को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स से जुड़े नियमों का संभावित उल्लंघन बताया है। नोटिस में डॉक्टरों के पेशेवर आचार नियमों के कथित उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। जांच के बाद जरूरत पड़ने पर मामला कर्नाटक मेडिकल काउंसिल (KMC) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में डॉ. अंकिता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के अलावा पेशेवर स्तर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पिता बोले- मेरी नियुक्ति से पहले हुई थी बेटी की नियुक्ति जिला स्वास्थ्य अधिकारी राजकुमार यरगल ने 15 सितंबर को मीडिया से कहा कि उनकी बेटी डॉ. अंकिता की नियुक्ति उनके DHO का पद संभालने से पहले तत्कालीन DHO मंजूनाथ डोड्डेरी ने की थी। उन्होंने दावा किया कि DHO का पद संभालने के बाद उन्होंने अपनी बेटी का वेतन जारी नहीं किया था। उनके अनुसार, उन्होंने तालुक स्वास्थ्य अधिकारी को डॉ. अंकिता को ड्यूटी से हटाने के निर्देश भी दिए थे। वहीं, स्थानीय कार्यकर्ता राजू नाइक ने आरोप लगाया था कि डॉ. अंकिता ने मार्च में पैथोलॉजी में PG शुरू किया, लेकिन सरकारी क्लीनिक की नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया।



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