भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84% गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 190.25 अंक यानी 0.84% की गिरावट के साथ 22,590.00 अंक पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 0.84% की गिरावट से शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव साफ नजर आया।
एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा नीचे खींचा। विश्लेषकों ने बताया कि 22,600 से नीचे की निर्णायक गिरावट बिकवाली के दबाव को और बढ़ा सकती है। इससे सूचकांक 22,400 की ओर बढ़ सकता है। यह स्तर पिछले दो वर्षों की प्रमुख निचले प्रवृत्ति रेखा और 200-सप्ताह के ईएमए से जुड़ा है, जो महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करता है।
भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट का कारण क्या है?
भारतीय शेयर बाजार में आई इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक तनाव और आर्थिक दबाव हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 106-107 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुँच गई हैं, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता की बात है। इसके साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भारी उछाल और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) कीओर से भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाले जाने की वजह से घरेलू बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है।
निफ्टी के लिए फिलहाल सपोर्ट कहां है?
तकनीकी दृष्टिकोण से, निफ्टी को 22,650-22,700 के क्षेत्र में तत्काल समर्थन प्राप्त है। एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि इस सीमा से नीचे की निर्णायक गिरावट अल्पकालिक सुधार को गहरा कर सकती है। यह निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में सतर्कता बरतना महत्वपूर्ण होगा।
वैश्विक बाजारों का क्या हाल रहा?
भारतीय बाजारों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। टोक्यो समय अनुसार सुबह 11:51 बजे एसएंडपी 500 वायदा 0.2 फीसदी गिर गया। निक्केई 225 वायदा (ओएसई) में 0.4 फीसदी की गिरावट आई। जापान का टॉपिक्स 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.1 फीसदी गिरा। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 0.1 फीसदी और यूरो स्टॉक्स 50 वायदा 0.4 फीसदी ऊपर रहा।



