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नैनीताल में ढूंढ रहे हैं सुकून? सिर्फ 50 रुपये में घूमें पहाड़ों के बीच बसा खूबसूरत राजभवन


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Nainital Raj Bhavan Tourist Spot: नैनीताल की ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो नैनी झील और मॉल रोड के अलावा राजभवन को भी अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें. पहाड़ों के बीच 220 एकड़ में फैला राजभवन अपनी शानदार ब्रिटिश वास्तुकला, हरे-भरे देवदार और चीड़ के जंगल और शांत माहौल के लिए खास है. यहां घूमते हुए आपको पुरानी पत्थर की इमारत, ऊंची मीनारें और खूबसूरत झरोखे देखने को मिलेंगे, वहीं परिसर में बना 18 होल का गोल्फ कोर्स भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. खास बात यह है कि पर्यटक निर्धारित व्यवस्था के तहत राजभवन को अंदर से भी देख सकते हैं और गाइड के साथ इसकी कहानी और इतिहास जान सकते हैं. अगर आप नैनीताल में भीड़भाड़ से हटकर कोई खूबसूरत और ऐतिहासिक टूरिस्ट स्पॉट देखना चाहते हैं, तो राजभवन आपके लिए बढ़िया जगह हो सकती है.

सरोवर नगरी नैनीताल की पहचान सिर्फ नैनी झील और खूबसूरत पहाड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में राजभवन का खास स्थान है. ब्रिटिश दौर की गौथिक वास्तुकला, हरियाली और शांत वातावरण इसे पर्यटकों के लिए खास बनाते हैं. यहां पहुंचकर इतिहास, प्रकृति और वास्तुकला को एक साथ करीब से महसूस किया जा सकता है. नैनीताल घूमने आने वालों लोगों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है, लोग राजभवन की खूबसूरती के साथ ही यहां जमकर फोटोग्राफी करते हैं.

नैनीताल का राजभवन ब्रिटिश शासनकाल की महत्वपूर्ण इमारतों में शामिल है. इसका निर्माण 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में शुरू हुआ और मार्च 1900 में भवन बनकर तैयार हुआ. ब्रिटिश काल में यह गवर्नरों का ग्रीष्मकालीन निवास हुआ करता था. आज यह उत्तराखंड के राज्यपाल का आधिकारिक आवास है. पत्थरों से बनी दीवारें, नुकीली मीनारें, झरोखे और विशाल परिसर इसकी ऐतिहासिक भव्यता को दर्शाते हैं.

राजभवन की वास्तुकला इसे बेहद खास बनाती है. बताया जाता है कि भवन का डिजाइन अंग्रेजी के अक्षर ‘E’ के आकार में तैयार किया गया है. इसकी नींव 27 अप्रैल 1897 को रखी गई थी. भवन की डिजाइनिंग फ्रेडरिक विलियम स्टीवन ने की थी, जिन्हें मुंबई के प्रसिद्ध विक्टोरिया टर्मिनल यानी वर्तमान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के डिजाइन से भी जोड़ा जाता है.

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राजभवन का पूरा परिसर करीब 220 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. चारों ओर देवदार और चीड़ के पेड़ों की हरियाली इस जगह की खूबसूरती बढ़ाती है. विशाल परिसर में बने भवन और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को अलग अनुभव देते हैं. यहां का शांत माहौल नैनीताल की भीड़भाड़ से कुछ समय दूर सुकून के पल बिताने का मौका देता है. पहाड़ी प्राकृतिक नजारों के बीच यह जगह आपको सुकून देती है.

राजभवन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके परिसर में बने भवनों में कुल 113 कमरे बताए जाते हैं. इसकी ऊंची छतें, पत्थर की दीवारें, झरोखे और नुकीली मीनारें ब्रिटिश कालीन वास्तुकला की झलक दिखाती हैं. भवन के दोनों प्रमुख ब्लॉक इसकी ऐतिहासिक संरचना को और खास बनाते हैं. यहां घूमते हुए पर्यटकों को ब्रिटिश दौर की निर्माण शैली को करीब से देखने का मौका मिलता है.

राजभवन परिसर की सबसे खास विशेषताओं में इसका 18 होल वाला गोल्फ कोर्स भी शामिल है. करीब 45 एकड़ में फैला यह गोल्फ कोर्स देश के पुराने और खूबसूरत गोल्फ मैदानों में गिना जाता है. हर साल यहां गवर्नर्स गोल्फ कप प्रतियोगिता आयोजित की जाती है. वर्ष 2015 से विद्यार्थियों के लिए भी गोल्फ टूर्नामेंट शुरू किया गया, जिससे यह परिसर खेल प्रेमियों के बीच भी खास पहचान रखता है.

इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत के अनुसार नैनीताल में सबसे पहले वर्ष 1864 में स्टोनले परिसर में किराए पर राजभवन आवास लिया गया था. इसके बाद 1865 में सर जॉर्ज कूपर ने सेंट लू क्षेत्र के पास मालडन हाउस में राजभवन बनवाया. वर्ष 1880 के विनाशकारी भूस्खलन में यह भवन क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद ब्रिटिश शासकों ने सुरक्षित स्थान की तलाश की और वर्तमान राजभवन के लिए जगह चुनी.

वर्तमान राजभवन के निर्माण के लिए जिस स्थान का चयन किया गया, वहां उस समय शेरवुड कॉलेज स्थित था. बाद में स्कूल को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया. इसके पीछे का क्षेत्र ग्वालीखेत के नाम से जाना जाता था, जहां चरवाहे अपने पशुओं को चराने आते थे. राजभवन के निर्माण के लिए आसपास के कुछ संस्थानों और भूमि का भी अधिग्रहण किया गया था. यह इतिहास नैनीताल के बदलते स्वरूप की कहानी भी बताता है.

राजभवन को पर्यटक भी निर्धारित व्यवस्था के तहत देख सकते हैं. यहां घूमने के लिए मात्र 50 रुपये का टिकट लगता है. परिसर में पर्यटकों को गाइड के साथ भ्रमण कराया जाता है. गाइड राजभवन की वास्तुकला, इतिहास और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी देते हैं. हालांकि यात्रा से पहले प्रवेश, टिकट और भ्रमण के समय की वर्तमान व्यवस्था की पुष्टि करना बेहतर रहेगा.

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