शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए लाई गई केंद्र सरकार की परिवर्तन योजना को लेकर एक बड़ा अपडेट है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस योजना में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), सीएनजी और बीएस वाहनों के साथ-साथ अब एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) वाहनों को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा हुआ तो एलएनजी वाहन मालिकों के साथ-साथ निर्माताओं को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इस योजना का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले पुराने कमर्शियल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह स्वच्छ और आधुनिक वाहन लाना है। इस योजना के तहत यह प्रावधान है कि बस और ट्रक ईवी, सीएनजी या बीएस-6 मानक वाले होने चाहिए, और सरकार पुराने वाहनों को बदलने के लिए वाहन मालिकों को प्रोत्साहित कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, जून 2026 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक दिल्ली-एनसीआर में 14,000 से अधिक बस और ट्रकों का पंजीकरण हो चुका है, जबकि अगले महीने यानी अक्तूबर के अंत तक 25,000 पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है।
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लंबी दूरी के भारी वाहनों के लिए खास है एलएनजी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड ने एलएनजी को खासकर लंबी दूरी के भारी ट्रकों और बसों के लिए एक बेहतरीन वैकल्पिक ईंधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया है। बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2030 तक 30,000 एलएनजी वाहन होने का अनुमान है, जबकि 2040 तक इनकी संख्या बढ़कर 2 लाख से 5 लाख तक पहुंच सकती है।



