भारत का रक्षा उद्योग अगले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में 1.78 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2029 तक बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके लिए करीब 19 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) का अनुमान लगाया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत जैसी नीतियां, रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी, घरेलू उत्पादन पर जोर और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं।
स्वदेशी उत्पादन से मजबूत होगा रक्षा उद्योग
केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर प्रीतेश राठी का कहना है कि भारत का रक्षा क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। घरेलू खरीद को प्राथमिकता, उत्पादन क्षमता में विस्तार और लगातार नीतिगत समर्थन से भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
आयात पर निर्भरता घटी, नई तकनीक पर बढ़ा फोकस
रक्षा विशेषज्ञ एडमिरल संतोष गंगावत के मुताबिक, सरकार द्वारा रक्षा बजट बढ़ाने और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के बाद भारत ने घरेलू रक्षा विनिर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है। इससे हथियारों और रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम हुई है।
हालांकि अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और तकनीक के लिए भारत अभी भी कुछ देशों से आयात करता है। रूस पर निर्भरता पहले की तुलना में घटी है, जबकि फ्रांस और इस्राइल जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा है। इन देशों से मिलने वाली आधुनिक तकनीक का उपयोग भारत अपने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने में कर रहा है।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक
रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2012 से 2025 के दौरान वैश्विक हथियार आयात का करीब 8.2 प्रतिशत हिस्सा रखते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हुई है।
2016-20 की तुलना में 2021-25 के दौरान रक्षा आयात में लगभग चार प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वहीं भारत के रक्षा आयात में रूस की हिस्सेदारी 2011-15 के लगभग 70 प्रतिशत से घटकर 2021-25 में करीब 40 प्रतिशत रह गई। इसकी प्रमुख वजह फ्रांस और अन्य देशों के साथ रक्षा खरीद का बढ़ता विविधीकरण है।
रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत का रक्षा निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। वित्त वर्ष 2026 में रक्षा निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। इसमें रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) की हिस्सेदारी 54.84 प्रतिशत और निजी क्षेत्र की 45.16 प्रतिशत रही। रक्षा निर्यातकों की संख्या भी 128 से बढ़कर 145 हो गई है। भारतीय रक्षा उपकरण अब 80 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं, जिनमें म्यांमार, फिलीपींस और आर्मेनिया प्रमुख हैं।
2047 तक बड़ा वैश्विक रक्षा निर्यातक बनने का लक्ष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबार सुगमता, उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीतियां और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश भारत के रक्षा उद्योग को नई मजबूती देंगे। केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर पुलकित अग्रवाल के अनुसार, भारतीय रक्षा उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। बेहतर नीतिगत समर्थन, बदलते भू-राजनीतिक हालात और नई तकनीकों में निवेश की बदौलत भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा और मजबूत करेगा।
सरकार का लक्ष्य विकसित भारत विजन के तहत वित्त वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये और वर्ष 2047 तक 2.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है, ताकि भारत दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल हो सके।



