भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने भ्रामक विज्ञापनों और झूठे दावों पर बड़ा प्रहार किया है। खाद्य सामग्री बेचने वाली छह प्रमुख कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा था। नियामक की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद सभी छह कंपनियों ने सरेंडर कर दिया है। इन कंपनियों ने बाजार से अपने विवादित लेबल, झूठे दावे और भ्रामक ट्रेडमार्क वापस ले लिए हैं।
एफएसएसएआई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इस पूरी कार्रवाई की जानकारी साझा की है। नियामक ने कहा कि नोटिस मिलते ही संबंधित खाद्य कारोबारियों ने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए हैं। कंपनियों ने न केवल विवादित दावों को हटा लिया है, बल्कि वे अपनी पूरी पैकेजिंग को भी बदल रही हैं। उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ रोकने और खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए यह देशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है।
क्या थी लिवयोर वेंचर्स की चालाकी?
नियामक की जांच में ‘लवयोर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ का मामला सबसे प्रमुखता से सामने आया। यह कंपनी अपने उत्पाद लिवयोर रोस्टेड एडामामे बीन्स के पैकेट पर धड़ल्ले से ‘वीगन’ और ‘हेल्दी’ लिख कर बेच रही थी। जांच के दौरान जब इन दावों के प्रमाण मांगे गए, तो कंपनी कोई ठोस वैज्ञानिक आधार पेश नहीं कर सकी।
एफएसएसएआई का नोटिस मिलते ही कंपनी के होश उड़ गए। कंपनी ने नियामक को अपना लिखित जवाब सौंपा। अपने स्पष्टीकरण में कंपनी ने स्वीकार किया कि नियामक आवश्यकताओं की जानकारी न होने के कारण लेबल पर ये दावे अनजाने में छप गए थे। कंपनी ने इस गंभीर चूक के लिए नियामक से औपचारिक रूप से माफी मांगी है। साथ ही भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी। कंपनी ने बाजार में मौजूद पुरानी पैकेजिंग सामग्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि गैर-अनुपालन वाले रैपर का दोबारा इस्तेमाल न हो सके।
किन-किन कंपनियों ने बदले अपने भ्रामक दावे?
एफएसएसएआई की इस सख्त कार्रवाई की जद में कई अन्य नामी गिरामी कंपनियां भी आई हैं। नियामक के कड़े रुख को देखते हुए अन्य कंपनियों ने भी चुपचाप अपने स्तर पर सुधार करना शुरू कर दिया है:
ट्रेडमार्क में बड़ा बदलाव: ‘ऑनेस्ट इनोवेशन्स फॉर यू प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘हेलियोस्टोन स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड’ अपने ब्रांड नाम और ट्रेडमार्क के जरिए उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही थीं। नोटिस मिलते ही दोनों कंपनियों ने अपने विवादास्पद ट्रेडमार्क बदलने की घोषणा कर दी है।
भ्रामक दावों पर रोक: ‘राजस्थान एग्रो एंड जनरल इंडस्ट्रीज’ ने अपने खाद्य उत्पादों से जुड़े सभी बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों को तुरंत हटा दिया है। इसके अलावा कंपनी ने अपने प्रचार-प्रसार से ‘PPM’ शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया है।
अमानक पानी का उत्पादन बंद: ‘आयोटा नैनोटेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ पैकेज्ड वाटर के नाम पर भ्रामक दावे कर रही थी। एफएसएसएआई के निर्देश के बाद कंपनी ने लेबल से सभी झूठे दावे हटा दिए हैं। इसके साथ ही अमानक पानी के उत्पादन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
वेबसाइट से उत्पाद ही गायब: ‘पंचामृत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड’ अपने एक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक को लेकर कटघरे में थी। कार्रवाई के डर से कंपनी ने विवादित पेय पदार्थ को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और बिक्री मंचों से पूरी तरह से हटा लिया है।
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क्या निशाने पर ऊर्जा और शराब बनाने वाली कंपनियां?
खाद्य नियामक का यह रुख अचानक नहीं बदला है। पिछले कुछ महीनों के भीतर एफएसएसएआई ने कानून का उल्लंघन करने वाले दर्जनों खाद्य कारोबारियों पर शिकंजा कसा है। बाजार में सेहत के नाम पर बेचे जा रहे ‘ऊर्जा पेय’ और शराब निर्माताओं की कार्यप्रणाली की भी गहन जांच की जा रही है।
नियामक का मानना है कि कंपनियां अपने मुनाफे के लिए उपभोक्ताओं की सेहत और उनकी जेब दोनों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। खासकर युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित करने के लिए ‘ऑर्गेनिक’, ‘वीगन’, ‘नेचुरल’ और ‘हेल्दी’ जैसे शब्दों का अनियंत्रित इस्तेमाल किया जा रहा है। एफएसएसएआई ने साफ कर दिया है कि बिना किसी आधिकारिक मानक प्रमाण पत्र के ऐसे शब्दों का प्रयोग सीधे तौर पर कानूनी अपराध माना जाएगा।



