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आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा प्लान कर रहे हैं? निकलने से पहले जानें परमिट से सेफ्टी तक डिटेल


Adi Kailash Yatra 2026: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा अब पहले के मुकाबले काफी सुलभ हो गई है, लेकिन हिमालय का यह क्षेत्र आज भी अपनी दुर्गमता के लिए जाना जाता है. इस साल यह यात्रा 8 मई को शुरू हो रही है. यह सफर सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि एक कड़ी परीक्षा भी है. यहां की खूबसूरती जितनी मनमोहक है, यहां के पहाड़ उतने ही सख्त हैं. अगर आप भी इस अद्भुत यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आपके सफर को सुरक्षित और यादगार बना देगा.

इनर लाइन परमिट है सबसे जरूरी
आदि कैलाश और ओम पर्वत भारत-चीन सीमा के करीब स्थित हैं, इसलिए यहां जाने के लिए इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है. यह परमिट धारचूला स्थित एसडीएम (SDM) कार्यालय से बनता है. इसके लिए आपको अपने पहचान पत्र (आधार कार्ड), फोटो और पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत होती है. कोशिश करें कि धारचूला पहुंचते ही सबसे पहले इस प्रक्रिया को पूरा करें, क्योंकि बिना सरकारी अनुमति के गुंजी और उससे आगे के क्षेत्रों में प्रवेश वर्जित है.

रास्तों की चुनौती और गाड़ियों का चयन
टूरिस्ट गाइड राकेश थलाल ने बताया कि धारचूला से आगे का रास्ता काफी ऊबड़-खाबड़ और कच्चा है. यहां कई जगहों पर लैंडस्लाइड का खतरा बना रहता है और संकरे रास्तों पर गाड़ी चलाना हर किसी के बस की बात नहीं है. इस यात्रा के लिए साधारण कम ग्राउंड क्लीयरेंस वाली गाड़ियां ले जाने की गलती न करें. हमेशा 4×4 या ऊंचे बेस वाली मजबूत गाड़ियां ही चुनें. साथ ही, ड्राइवर ऐसा होना चाहिए जिसे पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाने का लंबा अनुभव हो.

फ्यूल और कैश का बैकअप रखें
पहाड़ों में संसाधनों की कमी हमेशा रहती है. धारचूला छोड़ने के बाद आपको आगे कहीं भी पेट्रोल पंप नहीं मिलेगा. इसलिए अपनी गाड़ी की टंकी फुल रखें और एक्स्ट्रा कैन में भी फ्यूल साथ लेकर चलें. यही बात कैश पर भी लागू होती है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नेटवर्क न होने के कारण ऑनलाइन पेमेंट या एटीएम काम नहीं करते, इसलिए पर्याप्त नकद पैसा अपने पास जरूर रखें.

सेहत का ख्याल भी रखें
14,000 फीट की ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द या जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसे एल्टीट्यूड सिकनेस कहा जाता है. इससे बचने के लिए शरीर को धीरे-धीरे ऊंचाई के अनुकूल ढालें. अपने साथ जरूरी दवाइयां रखें और खूब पानी पिएं.

यात्रा के दौरान अपने साथ रखें ये जरूरी सामान
हिमालय में मौसम पलक झपकते ही बदल जाता है, इसलिए आपके बैग में सही सामान का होना जरूरी है. कपड़ों में थर्मल इनर, भारी जैकेट, दस्ताने और ऊनी जुराबों के साथ-साथ एक अच्छी क्वालिटी का रेनकोट और वॉटरप्रूफ ट्रैकिंग जूते जरूर रखें क्योंकि बारिश कभी भी हो सकती है. इसके अलावा अपनी मेडिकल किट में फर्स्ट एड के साथ दर्द निवारक गोलियां, ओआरएस के पैकेट, सनस्क्रीन और लिपबाम जरूर रखें ताकि तेज धूप और ठंडी हवाओं से बचा जा सके. ऊर्जा बनाए रखने के लिए डार्क चॉकलेट, सूखे मेवे, एनर्जी बार और एक पावर बैंक भी साथ रखें क्योंकि यहां बिजली की किल्लत रहती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने साथ एक छोटी ऑक्सीजन केन और पानी की अच्छी बोतल रखें ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके.

लोकल गाइड की भूमिका
टूरिस्ट गाइड राकेश थलाल बताते हैं कि पहली बार आने वाले यात्रियों के लिए लोकल गाइड साथ रखना बहुत फायदेमंद होता है. वे न केवल रास्तों और स्थानीय संस्कृति से वाकिफ होते हैं, बल्कि आपातकालीन स्थिति में उनकी सूझबूझ बहुत काम आती है.



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