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मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. ‘देशभक्ति-जनसेवा’ के नारे के बीच एक दलित महिला के साथ कथित तौर पर हुई अभद्रता ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है. विंध्यनगर थाना क्षेत्र की रहने वाली कविता भारती जब मारपीट की शिकायत लेकर सीएसपी उमेश प्रजापति के पास पहुंचीं, तो उन्हें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन आरोप है कि उन्हें मदद के बजाय अपमान का सामना करना पड़ा.
न्याय मांगने गई महिला से CSP उमेश प्रजापति
सिंगरौली. मध्य प्रदेश पुलिस के ‘देशभक्ति-जनसेवा’ के नारे को जिले के एक जिम्मेदार अधिकारी ने तार-तार कर दिया है. विंध्यनगर थाना क्षेत्र के ग्राम ढोटी की रहने वाली एक दलित महिला, कविता भारती, जब मारपीट की शिकायत लेकर सीएसपी उमेश प्रजापति के समक्ष उपस्थित हुई, तो मदद के बजाय उन्हें मानसिक तौर पर अपमानित होना पड़ा.
पीड़िता का गंभीर आरोप है कि जब उसने अपनी अंदरूनी चोटों का हवाला दिया, तो सीएसपी उमेश प्रजापति ने मर्यादा और महिला की गरिमा को ताक पर रखते हुए कथित तौर पर कहा, ‘सिर्फ कहने से नहीं होगा, कपड़े उतारकर अपनी चोट दिखाओ.’ एक पुरुष अधिकारी द्वारा सरेआम इस तरह की मांग करना न केवल पीड़िता की निजता (Privacy) का हनन है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के उन स्पष्ट दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है जो महिला की गरिमा बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं.
अधिकारी ने आरोपो का किया खंडन
इस संबंध में जब सीएसपी उमेश प्रजापति से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे गलत बताया. अधिकारी का कहना है कि उस दिन कार्यालय में अत्यधिक भीड़ होने और किसी अन्य व्यस्तता के चलते वे त्वरित कार्रवाई नहीं कर सके थे, किंतु ‘कपड़े उतारने’ जैसी टिप्पणी की बात सरासर निराधार है. अब सवाल यह उठता है कि यदि खाकी वर्दी में बैठे अधिकारी ही फरियादियों के साथ ऐसा अमर्यादित आचरण करेंगे, तो पीड़ित न्याय की उम्मीद किससे करेंगे?
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