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एक्सप्लेनर: टाटा के तीन नामों में क्या अंतर, भारत में कंपनियों के कितने प्रकार और कैसे होती है उनकी पहचान?


टाटा समूह में चल रह विवाद के बीच जो तीन शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिल रहे हैं, वो हैं टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस और टाटा ग्रुप। ये तीनों ही नाम एक ही कारोबारी विरासत से जुड़े हैं, लेकिन इनकी भूमिका और पहचान अलग-अलग है। आखिर टाटा ट्रस्ट्स क्या है, टाटा संस की इसमें क्या भूमिका है और टाटा समूह किस तरह काम करता है? ऐसे में ये भी सवाल उठता है कि भारत का कॉरपोरेट ढांचा किस तरह बंटा है? ये सभी एक-दूसरे से कैसे अलग हैं और उनकी परिभाषा क्या है? आइये समझते हैं…


टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस और टाटा ग्रुप में क्या अंतर है?

टाटा ट्रस्ट्स


  • टाटा ट्रस्ट्स कई ट्रस्टों का समूह है। इसके दो प्रमुख ट्रस्ट सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट हैं। 

  • टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका काम मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए सहयोग और फंडिंग देना है।



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