हालांकि, इस नए शुल्क को निर्धारित करने का सटीक आधार अभी स्पष्ट नहीं है। यह फीस ऑर्डर की कुल कीमत, ग्राहक की लोकेशन, ट्रांजैक्शन की वैल्यू या किसी अन्य पैरामीटर के आधार पर तय की जा रही है या नहीं, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी है। जोमैटो की ओर से भी इस नए चार्ज को लेकर अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में फिलहाल यह साफ नहीं है कि कंपनी इसे सभी ग्राहकों के लिए लागू करेगी या चुनिंदा यूजर्स और परिस्थितियों में ही यह शुल्क लिया जाएगा।
जोमैटो के इस कदम की तुलना उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी से भी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्विगी फिलहाल कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर पर अलग से कोई COD फीस नहीं ले रही है। ऐसे समय में जब फूड डिलीवरी कंपनियां अपनी कमाई बढ़ाने के लिए अलग-अलग फीस और मॉनेटाइजेशन मॉडल आजमा रही हैं, जोमैटो का यह नया चार्ज ग्राहकों के लिए अतिरिक्त लागत का कारण बन सकता है।
दरअसल, जोमैटो पर ग्राहकों को पहले से ही कई तरह के शुल्क का सामना करना पड़ता है। इनमें प्लेटफॉर्म फीस के अलावा ऑर्डर के हिसाब से डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस और अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं। अब यदि ग्राहक कैश में भुगतान करता है और उसके ऑर्डर पर अलग से “Pay on Delivery Fee” भी जुड़ती है, तो ऑनलाइन खाना मंगाने की कुल लागत और बढ़ सकती है।
इस बदलाव का असर खास तौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो ऑनलाइन भुगतान की बजाय डिलीवरी के समय नकद भुगतान करना पसंद करते हैं। हालांकि, फीस की राशि और इसे लागू करने के नियम अलग-अलग ऑर्डर में बदल सकते हैं, इसलिए किसी एक निश्चित शुल्क को सभी ग्राहकों पर लागू मानना अभी सही नहीं होगा। जोमैटो की ओर से आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस शुल्क का उद्देश्य क्या है, इसे किन ग्राहकों पर लागू किया जाएगा और इसकी गणना किस आधार पर होगी।



