Homeट्रैवलकोयल नदी में फिर शुरू होगी बोटिंग, भीम चूल्हे के नजारे के...

कोयल नदी में फिर शुरू होगी बोटिंग, भीम चूल्हे के नजारे के साथ बढ़ेगा रोमांच


Last Updated:

पलामू के भीम चूल्हा में पर्यटकों के लिए कोयल नदी में बोटिंग फिर से शुरू हो रही है. यहां 170 टन वजनी ऐतिहासिक भीम चूल्हा स्थित है. सर्दियों में पिकनिक मनाने के लिए यह एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है. जहां लोग प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं.

ख़बरें फटाफट

पलामूः ठंड का मौसम शुरू होते ही लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और पिकनिक मनाने के लिए खूबसूरत पर्यटन स्थलों की तलाश करने लगते हैं. ऐसे में पलामू जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड स्थित भीम चूल्हा पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है. यहां 170 टन वजनी विशालकाय ऐतिहासिक भीम चूल्हा देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं. अब सर्दियों के मौसम में पर्यटकों का रोमांच दोगुना होने वाला है, क्योंकि कोयल नदी में एक बार फिर नौका विहार की सुविधा शुरू हो रही है. इससे पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहर का दीदार करने के साथ नदी की लहरों के बीच बोटिंग का आनंद भी ले सकेंगे.

ऐतिहासिक मान्यता से जुड़ा है भीम चूल्हा
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित भीम चूल्हा प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव माता कुंती के साथ इस क्षेत्र में रुके थे. कहा जाता है कि इसी दौरान भीम ने तीन विशाल पत्थरों को जोड़कर चूल्हे का निर्माण किया था. आज यह विशाल चूल्हा करीब 170 टन वजनी होने के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. इसे देखने के लिए झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं.

पांडवों की मूर्तियां और हथिया बाबा भी आकर्षण
भीम चूल्हा परिसर में पांचों पांडवों और माता कुंती की मूर्तियां स्थापित हैं. यहां एक विशाल पत्थर को हथिया बाबा के नाम से भी जाना जाता है. स्थानीय मान्यता है कि पांडवों के साथ आया हाथी युग परिवर्तन के बाद पत्थर में बदल गया था. मंदिर के नीचे एक गुफा होने की भी चर्चा है. इसे लेकर लोगों के बीच मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव और माता कुंती इसी क्षेत्र में रहा करते थे.

वॉच टावर से दिखता है खूबसूरत नजारा
भीम चूल्हा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए यहां पार्क, वॉच टावर और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं. चूल्हे के ऊपर विशालकाय कराह भी बनाया गया है, जो इस स्थान की ऐतिहासिक मान्यताओं को और खास बनाता है. वॉच टावर से आसपास के जंगल, पहाड़ियां, कोयल नदी और भीम बराज का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है. सर्दियों में यहां का प्राकृतिक वातावरण पिकनिक मनाने वालों को खासा आकर्षित करता है.

कोयल नदी में फिर शुरू होगा नौका विहार
इस पर्यटन स्थल का सबसे बड़ा आकर्षण कोयल नदी और भीम बराज हैं. नदी के किनारे बैठकर पर्यटक घंटों प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेते हैं. अब सर्दियों के मौसम में यहां नौका विहार फिर से शुरू होने जा रहा है. पर्यटक राहुल कुमार के अनुसार, पहले यहां 6 सीटर बोट उपलब्ध थी, लेकिन अब 8 सीटर बोट आने के बाद कुल तीन मोटर बोट हो गई हैं. इससे एक साथ अधिक पर्यटक नौका विहार का आनंद उठा सकेंगे. खास बात यह है कि पर्यटक बोटिंग के दौरान नदी, पहाड़ियों और आसपास के प्राकृतिक नजारों को करीब से देख सकेंगे.

कैसे पहुंचें भीम चूल्हा
भीम चूल्हा पहुंचना भी काफी आसान है. इसका सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मोहम्मदगंज है, जो पर्यटन स्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर है. वहीं, सड़क मार्ग से मेदिनीनगर से इसकी दूरी लगभग 70 किलोमीटर है. ऐसे में अगर आप इस सर्दी परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने की योजना बना रहे हैं, तो भीम चूल्हा एक अच्छा विकल्प हो सकता है. यहां 170 टन के विशाल ऐतिहासिक चूल्हे का दीदार, धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी विरासत, कोयल नदी की खूबसूरती और फिर से शुरू हो रहा नौका विहार आपकी यात्रा को यादगार बना सकता है.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

और पढ़ें



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments