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गेहूं के दाम ने तोड़ा रिकॉर्ड: सरकारी बिक्री के बावजूद भाव ₹3100 प्रति क्विंटल के पार, क्यों नहीं थम रही तेजी?



गेहूं की कीमतों में इजाफा।
– फोटो : amarujala.com

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गेहूं की कीमतें दिल्ली के बाजार में उछलकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई हैं। यह इस सीजन का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। खास बात यह है कि सरकार की ओर से खुला बाजार बिक्री योजना  (ओएमएसएस) के तहत दूसरी बिक्री निविदा जारी किए जाने के बावजूद बाजार में कीमतों की तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है।


जिस दिन सरकार ने ओएमएसएस निविदा की घोषणा की थी, उस दिन भाव 2,970 रुपये प्रति क्विंटल था। तब से लेकर अब तक कीमतों में 130 रुपये प्रति क्विंटल (लगभग 4.4 फीसदी) की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। आइग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि ओएमएसएस की दूसरी बिक्री निविदा के बावजूद कीमतों में लगातार तेजी यह साफ दर्शाती है कि बाजार में गेहूं की मांग मजबूत है और इसके मुकाबले उपलब्धता सीमित है। 

तेजी की वजह

ओएमएसएस की बिक्री में देरी के कारण निजी व्यापारियों और स्टॉकिस्टों के पास मौजूद गेहूं की मात्रा धीरे-धीरे कम होती चली गई। पिछले साल निजी क्षेत्र में गेहूं की उपलब्धता अच्छी थी, लेकिन बीते सीजन में सरकारी खरीद अधिक होने के कारण अब खुले बाजार यानी निजी क्षेत्र में उपलब्धता घट गई है।


  • भले ही पिछले तीन वर्षों से सरकार का केंद्रीय भंडार आरामदायक स्तर पर बना हुआ है, लेकिन वर्तमान में बाजार में खुले तौर पर कीमतों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है।

  • त्योहारी सीजन (दशहरा से दिवाली) तक घरेलू बाजार में गेहूं की मांग बहुत अच्छी बनी रहने की उम्मीद है। नवंबर-दिसंबर में पूरी मार्केट ओएमएसएस पर निर्भर करती है।

  • बांग्लादेश से निर्यात मांग भी आ रही है। काला सागर क्षेत्र में चल रही स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर गेहूं की सही सप्लाई नहीं मिल रही है, और घरेलू गेहूं के अंतरराष्ट्रीय दाम ज्यादा होने के कारण केवल बांग्लादेश ही भारत से गेहूं उठा रहा है।

  • सरकार के पास केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक बहुत अच्छा और आरामदायक स्थिति में है। अक्तूबर के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय पूल में करीब 460 लाख टन गेहूं का स्टॉक है, जो पिछले साल (अक्तूबर 2024 में 333 लाख टन) के मुकाबले काफी अधिक है। पिछले 3-4 वर्षों से देश में स्टॉक लगातार बढ़ रहा है।

  • आपूर्ति में रुकावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के दाम ऊंचे स्तर पर हैं। भारत में हर साल एमएसपी बढ़ने (इस बार 5 फीसदी की बढ़ोतरी) के कारण घरेलू गेहूं अंतरराष्ट्रीय बाजार से मुकाबला करने की स्थिति से बाहर हो चुका है।



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