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महाराष्ट्र के पुणे जिले के लोणावला में 33 वर्षीय अभय माणिक मराठे की गोली लगने से मौत का मामला अब हत्या की जांच में बदल गया है. शुरुआत में बताया गया था कि उनके 83 वर्षीय दादा मोतीराम मराठे की राइफल साफ करते समय अचानक गोली चल गई थी. हालांकि, पोस्टमार्टम ने इस पूरे केस को पलट दिया.
83 वर्षीय दादा पर अपने 33 साल के पोते की गोली मारकर हत्या करने का आरोप.
पुणे जिले के लोणावला में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर 83 वर्षीय दादा पर अपने 33 साल के पोते की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा है. शुरुआत में यह मामला रायफल साफ करते समय अचानक गोली चलने से हुई दुर्घटना माना गया था, लेकिन पुणे ग्रामीण पुलिस की अपराध शाखा और लोणावला सिटी पुलिस की जांच में यह साफ-साफ हत्या का मामला पाया गया है. मृतक की पहचान अभय माणिक मराठे के रूप में हुई है.
यह घटना लोणावला के भुशी गांव स्थित होटल ‘मोतीराम’ के परिसर में 5 अक्टूबर को हुई. अभय मराठे, लोणावला शहर के पूर्व नगरसेवक माणिक मराठे के बेटे थे. पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद बताया गया था कि दादा की रायफल साफ करते समय अचानक गोली चल गई, जिससे अभय गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इसके बाद लोणावला शहर पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया था.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटा खेल
हालांकि, शव के पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस को मामले पर संदेह हुआ. शरीर पर गोली लगने के निशान और चोट की प्रकृति को देखते हुए पुलिस ने घटना की दोबारा जांच शुरू की. होटल में मौजूद वेटर और अन्य लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस को यह मामला दुर्घटना के बजाय गोली मारकर हत्या का होने का संदेह मजबूत हुआ.
जांच में सामने आया कि 83 वर्षीय मोतीराम मराठे और उनके पोते अभय के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था. पुलिस के अनुसार, 5 अक्टूबर को भी किसी लेन-देन को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था. इसी दौरान गुस्से में आकर मोतीराम मराठे ने अपनी लाइसेंसी रायफल से अभय पर गोली चला दी. पुलिस के मुताबिक गोली अभय के सीने में लगी और उनकी मौत हो गई.
परिवार के पांच अन्य सदस्यों पर भी मामला दर्ज
पुलिस ने इस मामले में मराठे परिवार के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर सबूत मिटाने और मुख्य आरोपी को बचाने की कोशिश करने के आरोप हैं. जांच के दौरान परिवार के कुछ सदस्यों की भूमिका भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है.
दादा के पास थीं दो लाइसेंसी रायफल
पुलिस के अनुसार, मोतीराम मराठे के पास दो लाइसेंसी रायफल थीं. इनमें से एक 12-बोर रायफल उन्होंने 1970 में और दूसरी 1980 में खरीदी थी. पुलिस का कहना है कि मोतीराम को शिकार का शौक था और वह पहले इन रायफलों का इस्तेमाल शिकार के लिए कर चुके थे. जांच के मुताबिक, इन्हीं में से एक रायफल का इस्तेमाल अभय मराठे की हत्या में किया गया. पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने मामले की जांच और सामने आए तथ्यों की जानकारी दी है.
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साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
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