टाटा समूह से जुड़े ट्रस्ट्स में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। आने वाली अहम बैठक से पहले माहौल गरमा गया है। इस बीच पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति का विरोध क्यों किया।
मिस्त्री ने कहा कि उन्होंने यह फैसला मजबूरी में लिया और उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने अपने जवाब में यह भी कहा कि उनका पूरा पक्ष पहले ही हलफनामे में दर्ज है, जो उन्होंने सायर दोराबजी टाटा ट्रस्ट से जुड़े मामले में दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रक्रियागत खामियों और प्रशासनिक मुद्दों के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। मिस्त्री ने यह भी सवाल उठाया कि अन्य ट्रस्टियों ने किस तरह वोटिंग की, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। अपने पत्र में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि ‘मैं इस फैसले पर दुखी हूं, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था।’ हालांकि, उन्होंने अपने निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि वे अपने रुख पर कायम हैं।
यह पूरा विवाद ऐसे समय पर सामने आया है जब टाटा संस की बोर्ड बैठक 8 मई को होने वाली है। इस बैठक में ट्रस्टी प्रतिनिधित्व और कंपनी के संभावित पब्लिक लिस्टिंग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहा मतभेद भी अब खुलकर सामने आ गया है। मेहली मिस्त्री पहले भी ट्रस्ट में प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने कई बार आपत्ति दर्ज कराई है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के भीतर यह विवाद पिछले कुछ समय से चल रहा है और अब यह आने वाली बैठक में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। अब सभी की नजरें 8 मई की अहम बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस की आगे की दिशा क्या होगी और क्या इस विवाद का कोई समाधान निकल पाएगा या नहीं।



