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रायपुर की एक विशेष अदालत ने 13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी युवक सोनू चेलक को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है.
सांकेतिक तस्वीर (AI Generated)
रायपुर. देश-दुनिया में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं. अक्सर उनसे जुड़ी दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आती हैं, जिसमें आरोपी उनके साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर देते हैं. लेकिन अदालत में उनके पापों की सजा मिल ही जाती है. शहर की एक विशेष अदालत ने 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी युवक को उम्रकैद जैसी सख्त सजा सुनाई है. अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए समाज और कानून में कोई जगह नहीं है. रायपुर की अदालत ने दोषी युवक को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए उसे सलाखों के पीछे भेज दिया है. इसके साथ ही, पीड़िता के भविष्य और मानसिक आघात को ध्यान में रखते हुए अदालत ने शासन की ओर से उसे 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता यानी मुआवजा प्रदान करने का महत्वपूर्ण आदेश भी जारी किया है. यह घटना दिसंबर 2024 की है, जिसने इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया था.
मिली जानकारी के अनुसार, 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची अपनी दादी के गांव गई हुई थी, जहां उसकी पहचान गांव के ही रहने वाले आरोपी सोनू चेलक से हुई. 14 दिसंबर की सुबह करीब 10 बजे जब वह मासूम बच्ची कुछ सामान लेने के लिए दुकान जाने हेतु घर से निकली थी, तभी आरोपी सोनू चेलक अपनी बाइक लेकर वहां पहुंच गया. उसने नाबालिग को जबरन अपने साथ चलने के लिए कहा. जब मासूम ने उसके साथ जाने से मना कर दिया, तो आरोपी ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उसे डराया और उसके पूरे परिवार को जान से खत्म कर देने की धमकी दी. परिवार की सुरक्षा के डर से सहमी हुई नाबालिग उसके साथ बाइक पर बैठने को मजबूर हो गई. आरोपी सोनू चेलक उस मासूम को डूमरतराई स्थित अपने एक दोस्त के कमरे में ले गया, जहां उसने बच्ची की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया.
इधर, जब नाबालिग काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो उसके पिता और परिजनों की चिंता बढ़ गई. काफी खोजबीन के बाद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो पिता ने तुरंत खरोरा थाने पहुंचकर अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल टीमें गठित कीं और तलाश शुरू कर दी. पुलिस के बढ़ते दबाव और पकड़े जाने के डर से आरोपी अगले दिन नाबालिग को गांव में ही छोड़कर फरार हो गया. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी सोनू चेलक को गिरफ्तार किया और मामले की पूरी छानबीन कर अदालत के समक्ष पुख्ता सबूत पेश किए. कोर्ट में चली लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी का दोष सिद्ध हुआ. अदालत ने आरोपी की इस करतूत को समाज के लिए बेहद घातक माना और उसे 20 साल की कड़ी सजा से दंडित किया. पुलिस और अभियोजन पक्ष की मुस्तैदी के कारण इस संवेदनशील मामले में त्वरित न्याय सुनिश्चित हो पाया है.
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