दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेलों में शामिल पाम ऑयल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़े उत्पादक इंडोनेशिया की बायोडीजल नीति और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे मौसम व उत्पादन को लेकर बढ़ती आशंकाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतें करीब 20 महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक बाजार में तेजी का माहौल बन गया है। इसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ सकता है।
आयात में पाम तेल की हिस्सेदारी कितनी?
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 58-60 प्रतिशत आयात के जरिये पूरा करता है। आंकड़ों के अनुसार, तेल वर्ष 2024-25 में देश ने करीब 1.63 करोड़ टन खाद्य तेल का आयात किया, जिसमें पाम तेल की हिस्सेदारी लगभग 90 लाख टन रही। इंडोनेशिया और मलयेशिया भारत के लिए पाम तेल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं।
पाम तेल केवल रसोई तक सीमित नहीं
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का करीब 60% हिस्सा विदेशों से मंगाता है। जुलाई 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात 10 महीने के उच्च स्तर 14.8 लाख टन पर पहुंच गया, जिसमें अकेले पाम तेल का आयात करीब 7.31 लाख टन रहा। उत्पादन घटने या कीमतें बढ़ने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ना तय है। पाम तेल केवल रसोई तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग बिस्कुट, नमकीन, बेकरी उत्पादों, रेस्तरां उद्योग, साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू, कॉस्मेटिक्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
देश में खाद्य तेल और खाने की चीजों से लेकर साबुन-शैम्पू के बढ़ सकते हैं दाम
| 14 फीसदी से अधिक महंगाई | |||
|---|---|---|---|
| तेल | 21 अगस्त के दाम | एक साल पहले कितनी कीमत | वृद्धि |
| पाम तेल | 150.10 | 131.54 | +14.11% |
| सूरजमुखी तेल | 191.84 | 161.51 | +18.78% |
| सोया तेल | 164.87 | 147.70 | +11.62% |
| वनस्पति | 166.96 | 156.56 | +6.64% |
| सरसों तेल | 199.47 | 188.17 | +6.01% |
| मूंगफली तेल | 208.90 | 188.59 | +10.77% |
कीमतों में उछाल का असर कहां पड़ेगा?
- सीधा और तुरंत असर रिफाइंड पाम तेल पर पड़ेगा। पाम तेल महंगा होने पर आम उपभोक्ता और होटल उद्योग अन्य तेलों की तरफ रुख करते हैं।
- मांग बढ़ने से सोयाबीन तेल, सरसों तेल और सूरजमुखी तेल के दाम भी बाजार में बढ़ सकते हैं। वनस्पति घी जो पाम तेल और उसके घटकों से बनता है, इसमें भी तुरंत उछाल आ सकती है।
होटलों और ढाबों में खाना होगा महंगा
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में पाम तेल का उपयोग लंबे शेल्फ-लाइफ और कम लागत के कारण सबसे अधिक होता है। इसके महंगे होने से कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी या पैकेट का वजन घटाना पड़ेगा। साबुन बनाने के लिए मुख्य कच्चा माल पाम फैटी एसिड होता है। इससे डिटर्जेंट और वॉशिंग पाउडर, शैम्पू, कंडीशनर और बॉडी लोशन के साथ लिपस्टिक और स्किन क्रीम के भी दाम बढ़ेंगे। ढाबों, रेस्टोरेंट और हलवाइयों के यहां डीप-फ्राइंग के लिए सबसे ज्यादा पाम तेल और वनस्पति का इस्तेमाल होता है।



